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ZEE जानकारी: मंदिर-मस्जिद पर राजनीति की दुकान बंद करने वाले फैसला का विश्लेषण

आज देश की सबसे बड़ी अदालत ने अयोध्या मामले पर अंतिम फैसला सुना दिया है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ ही अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का रास्ता भी साफ हो गया है. 

ZEE जानकारी: मंदिर-मस्जिद पर राजनीति की दुकान बंद करने वाले फैसला का विश्लेषण

आज DNA में हम सबसे पहले आज़ाद भारत के सबसे ऐतिहासिक फैसले का विश्लेषण करेंगे. कुछ लोगों के लिए इतिहास बेड़ियों की तरह होता है जिसमें वर्तमान को जकड़कर रखा जाता है तो कुछ लोगों के लिए इतिहास एक ऐसी मधुर कविता की तरह है जिसे समय की कलम से लिखा जाता है. लेकिन हमें लगता है कि इतिहास. उन घटनाओं और फैसलों का श्रंखलाबद्ध संकलन है जिनसें हमारा वर्तमान और भविष्य तय होता है और आज का दिन भी नए भारत यानी New India के वर्तमान और भविष्य को प्रभावित करने वाला दिन है.

आज देश की सबसे बड़ी अदालत ने अयोध्या मामले पर अंतिम फैसला सुना दिया है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ ही अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का रास्ता भी साफ हो गया है. आज सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ ने एकमत से अयोध्या की 2.77 एकड़ ज़मीन को राम लला विराजमान को सौंपने का फैसला सुनाया है.

इसके साथ ही इस ज़मीन पर मुस्लिम पक्ष के सभी दावे खारिज हो गए हैं. लेकिन आज का दिन किसी एक पक्ष की जीत या हार का दिन नहीं है बल्कि ये उस New India की जीत है जो शांति और सौहार्द के साथ आगे बढ़ना चाहता है. हम इस ऐतिहासिक फैसले का विश्लेषण करेंगे लेकिन उससे पहले ये जान लीजिए कि कैसे आज की तारीख इतिहास में सुखद संयोगों के लिए जानी जाएगी. इसके लिए आपको आज ही के दिन घटी तीन ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में जानना चाहिए.

पहली घटना आज की सबसे बड़ी खबर से जुड़ी है. और वो ये कि अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 491 साल पुराने विवाद का अंत हो गया है. अब अयोध्या की 2.77 एकड़ विवादित ज़मीन पर भव्य राम मंदिर का निर्माण होगा तो दूसरी तरफ मुस्लिम पक्ष को भी अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ ज़मीन दी जाएगी.

आज के दिन घटी दूसरी ऐतिहासिक घटना ये है कि आज से भारत और पाकिस्तान के बीच करतारपुर कॉरिडोर की शुरुआत हो गई है.यानी भारत में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच विवाद की सबसे बड़ी दीवार गिरने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सरहद के नाम पर खड़ी की गई की एक दीवार को भी गिरा दिया गया है और तीसरा सुखद संयोग ये है कि आज ही के दिन आज से 30 वर्ष पहले यानी 1989 में जर्मनी में बर्लिन की दीवार को गिरा दिया गया था और पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी एक हो गए थे.

इसलिए आप कागज़ और पेन लेकर आज की तारीख को नोट कर लीजिए..क्योंकि 9 नवंबर की ये तारीख देश और दुनिया के इतिहास में नफरत, भेदभाव और विवादों की दीवारें गिराने वाली तारीख के तौर पर जानी जाएगी. आज लोगों को बांटने वाली राजनीति का अंत हो गया है और लोगों को आपस में जोड़ने वाली New India की नई नीति की शुरुआत हो गई है.

अयोध्या पर एतिहासिक फैसला आने के बाद आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश को संबोधित किया और कहा कि आज की तारीख के बाद देश में नकारात्मकता और कटुता के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए. ये भी संयोग है कि आज शायर अल्लामा इकबाल का भी जन्मदिन है. हालांकि इकबाल को भारत और पाकिस्तान को बांटने वाली Two Nation Theory का सूत्रधार भी माना जाता है लेकिन 1908 में उन्होंने अपनी एक नज़्म 'राम' में कहा था-

है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़
अहल-ए-नज़र समझते हैं इस को इमाम-ए-हिंद

यानी इकबाल ने भी माना था कि पूरे भारत को भगवान राम पर नाज़ है और जो लोग दूर दृष्टि रखते हैं वो राम को इमाम-ए-हिंद यानी भारत का नेता मानते हैं . यानी इकबाल ने श्री राम को लेकर जो बात आज से 111 वर्ष पहले कही थी उसे आज पूरा भारत हर्षो उल्लास के साथ स्वीकार कर रहा है.

राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आज उन लोगों को भी जवाब मिल गया है. जो राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ना सिर्फ रामलला विराजमान को विवादित ज़मीन का असली हकदार माना है बल्कि भगवान राम को भी एक न्यायिक व्यक्ति यानी Jurisdictional Person कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 1 हज़ार 45 पन्नों के इस फैसले में करीब 500 वर्षों के लंबे इतिहास को समेटने की कोशिश की है. और हमें लगता है कि सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आदर्श दस्तावेज़ की तरह काम करेगा. जिसे पढ़कर कोई भी ये समझ सकता है दुनिया का सबसे बड़े लोकतंत्र कितना जीवंत और मजबूत है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देश को संबोधित करते हुए. प्रधानमंत्री मोदी ने ये भी कहा कि अब देश के हर नागरिक को सारे विवाद पीछे छोड़ते हुए राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना होगा.