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Zee Jaankari: शाकाहारी खाने का सेहत पर असर का विश्लेषण

अमेरिका की National Academy of Sciences की रिसर्च के मुताबिक अगर आप शुद्ध शाकाहारी हैं तो आप ज्यादा वक्त तक जीवन जीते हैं.

Zee Jaankari: शाकाहारी खाने का सेहत पर असर का विश्लेषण

आपने अक्सर अपने घर में बड़े बुजुर्गों को कहते सुना होगा- दाल रोटी खाओ, प्रभु के गुण गाओ. बुजुर्गों की नसीहतों पर अब जर्मनी की एक रिसर्च ने भी मोहर लगा दी है. अब खुद वैज्ञानिक कह रहे हैं "दाल चावल खाओ, स्वस्थ निरोगी काया पाओ". रिसर्च का सार ये है कि आप साधारण शाकाहारी खाना खाएं और जीवन भर स्वस्थ रहें. अगर आपको लगता है कि आप दाल चावल खाकर सिर्फ गुजारा कर रहे हैं तो वैज्ञानिक रिसर्च ये बता रही है कि आप सेहत के मामले में बेहद अमीर हैं.

जर्मनी की ल्यूबेक यूनिवर्सिटी की रिसर्च में पता चला है कि भारतीय आहार दाल चावल आनुवांशिक बीमारियों को भी मात दे सकता है. ये बहुत बड़ी बात है. रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों ने ये भी दावा किया है कि डाइट से जीन्स में बदलाव किए जा सकते हैं. आनुवांशिक यानी जेनेटिक बीमारियां हमारे माता पिता से हमें मिलती हैं. और ऐसा माना जाता है कि हम चाहे लाख बचाव कर लें, ये बीमारियां तो हमें होंगी ही. डायबिटीज़ और दिल की बीमारियां अगर माता पिता में से किसी एक को भी हो तो डॉक्टर आपको सावधान रहने की सलाह दे देते हैं. इस रिसर्च के हिसाब से अगर हम अपने खान-पान को नियंत्रित रखें तो ऐसी बीमारियों से बच सकते हैं.

मतलब ये कि दाल-चावल को दुनिया के वैज्ञानिकों ने अच्छा भोजन माना है और ये कई तरह के Genetic Disorder से लड़ने में मददगार साबित हो सकता है. अब हम आपको बताते हैं कि ये रिसर्च कैसे की गई.

जर्मनी की ल्यूबेक यूनिवर्सिटी के 6 वैज्ञानिकों ने एक टीम बनाई और उन्होंने भोजन से चूहों के शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों की जांच की. वैज्ञानिकों ने 1154 चूहों को 24 हफ्तों तक तीन तरह की डायट दी और ये रिसर्च 2 साल तक चली. इन चूहों को भी तीन ग्रुप में बांटा गया. एक ग्रुप को Western diet यानी पिज्जा, बर्गर जैसे फास्ट फूड दिए गए. दूसरे ग्रुप को कंट्रोल डायट दी गई, जिसमें दाल चावल और हरी सब्जियां शामिल थीं. तीसरी डायट में चूहों को Calorie Restricted खाना यानी जैसा खाना अस्पतालों में खिलाया जाता है, कुछ वैसा ही खाना खिलाया गया.

दूसरे यानी कंट्रोल ग्रुप वाले चूहों के जीन्स में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले. जबकि तीसरे ग्रुप वाले चूहों को कोई बीमारी नहीं हुई. जबकि फास्ट फूड वाले चूहों को रयूमेटाइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis) यानी गठिया हो गया और उन्हें ल्यूपस डिज़ीज़ (lupus disease) भी हुई. ल्यूपस एक Auto Immune बीमारी है. जिसमें शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत घट जाती है और ब्लड सेल्स नष्ट होने लगते हैं.

इस रिसर्च का नतीजा ये भी निकला कि फास्ट फूड जेनेटिक बीमारियों को बढ़ाता है. जबकि भारतीय आहार इंसान को स्वस्थ रख सकता है. साथ ही रोगों से लड़ने की ताकत भी बढ़ाता है. यही नहीं ये जेनेटिक बीमारियों को भी दूर रख सकता है. इसका सीधा सरल संदेश ये है कि अगर आप अपने खान पान को कंट्रोल करें, शाकाहारी खाना खाएं और एक्सरसाइज़ करते रहें तो आप बीमारियों को विरासत में पाने से बच सकते हैं.

ज़ार्ज बर्नाड शॉ ने कहा था There is no sincerer love than the love of food. यानी खाने से हमारा प्यार ही असल प्यार है। लेकिन क्या खाया जाए इस सवाल का जवाब दुनिया भर के शोधकर्ताओं को भारतीय खाने में ही मिला है. वैसे दाल और चावल के बेहतरीन मिक्स के तौर पर भारत में खिचड़ी भी खूब खाई जाती है. 1 साल का बच्चा हो, 60 साल का बुजुर्ग या कोई बीमार, दाल चावल या खिचड़ी को हर कोई आसानी से पचा सकता है. हमारे देश के पूर्वी और उत्तरी राज्यों में चावल जबकि मध्य और दक्षिणी राज्यों में दाल की उपज ज्यादा होती है. आप कह सकते हैं कि चावल और दाल हमारे खान-पान की अखिल भारतीय संस्कृति का संगम भी है.

दाल में प्रोटीन, फाइबर और good Cholesterol की काफी मात्रा होती है और चावल Carbohydrate से भरपूर होता है, ऐसे में ये एक हेल्दी डाइट है. दाल में कई ऐसे अमीनो एसिड्स (Amino acids) होते हैं जो चावल में नहीं होते. ऐसे में जब आप दाल और चावल साथ खाते हैं तो आपको कई पोषक तत्व एक साथ मिल जाते हैं. दाल और चावल दोनों में ही फाइबर की भरपूर मात्रा होती है. फाइबर की मौजूगी से पाचन क्रिया बेहतर बनती है. अगर आप सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस का इस्तेमाल करते हैं तो ये और भी फायदेमंद है. ब्राउन राइस में सेलेनियम, कॉपर, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम (Magnesium) जैसे minerals पाए जाते हैं.

ऐसे में हमारी एक सलाह है. अगर आप आज का डिनर कर चुके हैं तो कल के लिए नोट कर लीजिए कि 30 साल के युवा पुरुष को दिन भर में 2500 कैलोरी और महिला को 2000 कैलोरी की जरुरत होती है. 200 ग्राम की 1 कटोरी चावल में 114 कैलोरी और 1 कटोरी मसूर की दाल में 126 कैलोरी होती है. इस हिसाब से एक वक्त के दाल चावल से आपको लगभग 300 कैलोरी मिल सकती है. आप इसके साथ ही हरी सब्जियां और मोटे अनाज की रोटी भी खा सकते हैं.

अमेरिका की National Academy of Sciences की रिसर्च के मुताबिक अगर आप शुद्ध शाकाहारी हैं तो आप ज्यादा वक्त तक जीवन जीते हैं. अगर दुनिया के सभी लोग शुद्ध शाकाहारी हो जाएं तो हर वर्ष 50 लाख मौतों को टाला जा सकता है. ऐसे में अब वक्त आ गया है कि हम बुजुर्गों की नसीहत को गंभीरता से लें. अपने जीवन में, खानपान में सामान्य आहार के महत्व को समझें. दाल चावल को भोजन में शामिल करें. कहा जाता है कि दाल चावल सात्विक आहार के साथ साथ सात्विक सोच का भी प्रतीक है. ये हमारे शरीर के लिए लाभदायक है और हमारे विचारों पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.