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Zee Jaankari: विक्रम से संपर्क के प्रयासों का विश्लेषण

इंसानों की सेहत के बाद अब हम चंद्रयान-2 के Lander विक्रम की सेहत की बात करेंगे. विक्रम से संपर्क टूटे 14 दिन बीत चुके हैं. इन 14 दिनों में पूरा देश चंद्रयान-2 मिशन से जुड़े ऐतिहासिक पलों का गवाह बना. 

Zee Jaankari: विक्रम से संपर्क के प्रयासों का विश्लेषण

इंसानों की सेहत के बाद अब हम चंद्रयान-2 के Lander विक्रम की सेहत की बात करेंगे. विक्रम से संपर्क टूटे 14 दिन बीत चुके हैं. इन 14 दिनों में पूरा देश चंद्रयान-2 मिशन से जुड़े ऐतिहासिक पलों का गवाह बना. देश ने भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO के चेयरमैन K Sivan की आंखों में आंसू भी देखे. वैज्ञानिकों का फिर से चंद्रमा पर पहुंचने का संकल्प भी देखा. और 135 करोड़ भारतीयों का ISRO के वैज्ञानिकों के साथ खड़े होने वाला जज़्बा भी देखा. यानी विक्रम के साथ संपर्क टूटा. लेकिन देश का और देश के वैज्ञानिकों का संकल्प नहीं टूटा.

हिंदी भाषा में विक्रम का अर्थ होता है वीरता और वीरता दिखाने वाले विक्रम कभी मरा नहीं करते. बल्कि अमर हो जाते हैं. ISRO से Lander विक्रम का जब संपर्क टूटा तो वो अपने लक्ष्य से सिर्फ 2.1 किलोमीटर दूर था. यानी ये मिशन कामयाबी के पैमाने पर 99.9 प्रतिशत सफल रहा. कुछ लोग अब विक्रम के लिए RIP यानी Rest In Peace जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं. ये शब्द तब कहे जाते हैं, जब किसी की मृत्यु हो जाती है और लोग उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं.

विक्रम और उससे निकलने वाले Rover प्रज्ञान को 14 दिनों तक चंद्रमा की सतह का विश्लेषण करना था, और वैज्ञानिक जानकारियां जुटानी थी. चंद्रमा का एक दिन पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होता है. चंद्रमा पर Lunar Day यानी दिन की शुरुआत 7 सितंबर को हुई थी. इसी दिन विक्रम को चंद्रमा पर Land कराने की कोशिश की गई थी. लेकिन अब चंद्रमा पर रात हो चुकी है. इसलिए फिलहाल अगले 14 दिनों तक विक्रम से संपर्क करना लगभग असंभव है. 2 हफ्तों के बाद जब चंद्रमा पर एक बार फिर से दिन होगा. तब शायद विक्रम पर लगे Solar Pannel चार्ज हो जाएं और वैज्ञानिक इससे संपर्क कर पाएं.

लेकिन फिलहाल ये बहुत मुश्किल लग रहा है. हमारे वैज्ञानिक विक्रम से संपर्क करने में चाहे सफल न हो पाए हों, लेकिन आपको दिल छोटा करने की जरूरत नहीं है. क्योंकि विज्ञान का सफर सफलताओं से नहीं, बल्कि असफलताओं से ऊर्जा ग्रहण करता है. महान वैज्ञानिक Thomas Alva Edison बल्ब का आविष्कार करने से पहले अपने प्रयोगों मे करीब 1 हजार बार असफल हो गए थे. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और उनकी मेहनत का नतीजा पूरी दुनिया के सामने है.