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Zee Jaankari: हाफिज के 'गुजारे भत्ते' के लिए इमरान खान की 'पैरवी' का विश्लेषण

पाकिस्तान में लोकतांत्रिक सरकार नहीं है. बल्कि वहां पर आतंकवादी, सरकार चला रहे हैं, तो ग़लत नहीं होगा . समझने वाली दूसरी बात ये है कि शायद पाकिस्तान में आतंकवादियों के इतने बुरे दिन आ गए हैं कि वहां के आतंकवादी पैसे पैसे को मोहताज हो गए हैं. 

Zee Jaankari: हाफिज के 'गुजारे भत्ते' के लिए इमरान खान की 'पैरवी' का विश्लेषण

अंग्रेज़ी में एक कथन है. In Politics, A Lie Un-Answered Becomes Truth Within 24 Hours...अर्थात, राजनीति में अगर झूठ का जवाब 24 घंटे में ना दिया जाए तो वही झूठ सच बन जाता है . कश्मीर के संदर्भ में पाकिस्तान पिछले 72 वर्षों से हमेशा इसी झूठ का फायदा उठाता आया है. और कल यानी अब से लगभग 24 घंटों के बाद United Nations General Assembly के मंच से पाकिस्तान एक बार फिर यही हरकत करेगा. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान कश्मीर के नाम पर भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करेंगे. कश्मीर में कथित तौर पर हो रहे मानव अधिकार के उल्लंघन का एजेंडा चलाएंगे.

और पूरे भाषण के दौरान कश्मीर की बात करके, दुनिया की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश करेंगे. इसलिए, आज UNGA में इमरान ख़ान के भाषण से 24 घंटे पहले उनकी खोटी नियत और विकृत मानसिकता को Expose करना ज़रुरी है. और इसमें हमारी मदद करेगा चार पन्नों का ये Note...जो इस वक्त मेरे हाथ में है .

पाकिस्तान ने पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आतंकवादी हाफिज़ सईद और लश्कर ए तय्यबा के दो आतंकवादियों की तरफ से एक अपील की थी . और कहा था, कि United Nations Security Council की 1267 Sanctions Committee हाफिज़ सईद और अन्य दो पाकिस्तानी नागरिकों पर थोड़ा रहम करे. और उन्हें उनके परिवारों के Basic Expenses यानी बुनियादी खर्चों के लिए अपने बैंक Account से पैसे निकालने की इजाज़त दे . पाकिस्तान ने जो चिट्ठी लिखी थी, उसमें हाफिज़ सईद के हवाले से कहा गया था कि उसके परिवार में चार सदस्य हैं .

और वो अपने परिवार में कमाने वाला इकलौता सदस्य है . संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किए जाने की वजह से हाफिज़ सईद के Bank Accounts और Pension Account को Block कर दिया गया था. लेकिन UNGA में इमरान ख़ान के भाषण से ठीक पहले, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान की मांग स्वीकार कर ली है.

और हाफिज़ सईद को अपने बैंक खातों से प्रति महीने डेढ़ लाख पाकिस्तानी रुपये निकालने की इजाज़त दे दी है . और इसके पीछे सुरक्षा परिषद की ये दलील थी, कि 15 अगस्त 2019 को दोपहर 3 बजे तक, UNSC के 5 स्थाई सदस्य देशों और 10 अ-स्थाई सदस्य देशों में से किसी ने पाकिस्तान की अपील का विरोध नहीं किया.

इसलिए, पाकिस्तान की मांग स्वीकार की जाती है. इस वक्त मेरे हाथ में UNSC द्वारा जारी किया गया वही Note है. जिसके कुछ हिस्से मैं आपको पढ़कर सुनाना चाहता हूं. इस Note को पढ़ने के बाद दो बातें बहुत आसानी से समझी जा सकती है. पहली ये कि पाकिस्तान की सरकार पर आतंकवादियों का कितना दबाव है.

दूसरी भाषा में अगर ये कहा जाए, कि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक सरकार नहीं है. बल्कि वहां पर आतंकवादी, सरकार चला रहे हैं, तो ग़लत नहीं होगा . समझने वाली दूसरी बात ये है कि शायद पाकिस्तान में आतंकवादियों के इतने बुरे दिन आ गए हैं कि वहां के आतंकवादी पैसे पैसे को मोहताज हो गए हैं. और इसका श्रेय आपको भारत की अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति को भी देना होगा .

वैसे यहां पर सुरक्षा परिषद भी सवालों के घेरे में है . इस संस्था में शामिल सदस्य देशों को एक आतंकवादी के परिवार के मानव अधिकारों की तो फिक्र है. लेकिन, फिर इसी पैमाने पर सुरक्षा परिषद को मुंबई हमलों में मारे गए डेढ़ सौ से ज़्यादा लोगों के परिवारों के मानव अधिकारों की याद कभी नहीं आई. 26/11 का हमला हो या वर्ष 2006 में Mumbai की Local Trains में ब्लास्ट..

.इन दोनों ही हमलों का Mastermind हाफिज़ सईद था . विडंबना देखिए, इन 13 वर्षों में सुरक्षा परिषद अभी तक इतना दबाव भी नहीं बना पाई, कि वो पाकिस्तान को हाफिज़ सईद पर कार्रवाई के लिए मजबूर कर सके. अभी कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी ने Houston में पाकिस्तान के इसी चरित्र को Expose किया था. आज हमने राजनयिकों से बात-चीत के आधार पर सुरक्षा परिषद के फैसले को भी समझने की कोशिश की है.

Experts के मुताबिक, सुरक्ष परिषद में हाफिज़ सईद के परिवार के बहाने पाकिस्तान ने एक चाल चली है. वो दुनिया को ये दिखाना चाहता है, कि उसने एक Global Terrorist को दाने-दाने के लिए मोहताज कर दिया है. हाफिज़ की मज़बूरी दिखाकर पाकिस्तान ये साबित करना चाहता है, कि उसने संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादियों पर कड़ी कार्रवाई की है.

लेकिन वास्तविकता क्या है, ये पूरी दुनिया जानती है. इस बीच हमारे अपने ही देश में कुछ लोग ऐसे हैं, जो सुरक्षा परिषद के फैसले को भारत की कूटनीतिक विफलता कह रहे हैं. जबकि तकनीकी रुप से ऐसा बिल्कुल नहीं है. इसे समझने के लिए आपको भारत के पूर्व राजनयिक अशोक सज्जनहार की बातें सुननी चाहिए.

एक आतंकवादी के लिए पाकिस्तान सुरक्षा परिषद में चला गया. और कल इमरान ख़ान UNGA के मंच पर खड़े होकर, खुद को आतंकवाद से पीड़ित बताएंगे . और कश्मीर वाला एजेंडा चलाएंगे . लेकिन भारत ने भी अपनी तैयारी पूरी कर ली है.