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Zee Jaankari: कश्मीर पर इमरान के पत्रकारों वाली फिक्सिंग का विश्लेषण

सोमवार को Trump से मुलाकात के दौरान इमरान ख़ान अपने 'दरबारी पत्रकारों' की फौज लेकर गए थे.इन सभी पत्रकारों को 'कश्मीर' वाले सवाल की Practice कराई गई थी.Donald Trump से कश्मीर के मुद्दे पर कौन सा सवाल, किस वक्त और कैसे पूछना है, इसकी Training दी गई थी.

Zee Jaankari: कश्मीर पर इमरान के पत्रकारों वाली फिक्सिंग का विश्लेषण

इस वक्त की सबसे बड़ी ख़बर ये है, कि अब से थोड़ी देर बाद New York में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के बीच औपचारिक मुलाकात होगी .इस मुलाकात में दोनों नेता कई गंभीर विषयों पर बातचीत करेंगे.Zee News की टीम इस वक्त New York में मौजूद है.और हम इस मुलाकात का सीधा प्रसारण आपके लिए करेंगे. लेकिन उससे पहले हम आपको ये बताएंगे, कि कल Donald Trump ने कैसे सिर्फ 13 मिनट में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और वहां के मीडिया की पोल खोल दी.

सोमवार को Trump से मुलाकात के दौरान इमरान ख़ान अपने 'दरबारी पत्रकारों' की फौज लेकर गए थे.इन सभी पत्रकारों को 'कश्मीर' वाले सवाल की Practice कराई गई थी.Donald Trump से कश्मीर के मुद्दे पर कौन सा सवाल, किस वक्त और कैसे पूछना है, इसकी Training दी गई थी.बीच बीच में अमेरिका के राष्ट्रपति को मक्खन लगाने वाले प्रश्नों की Fixing भी की गई थी.

इसके लिए इमरान ख़ान के दरबारी पत्रकारों ने Trump की तारीफें कीं .उन्हें सबसे ईमानदार नेता बताया .उन्हें Nobel Peace Prize दिए जाने की वकालत की .और इस दौरान बीच-बीच में कश्मीर वाला सवाल डाल दिया गया.सबकुछ बिल्कुल वैसा ही हो रहा था, जैसा दो महीने पहले जुलाई में हुआ था.उस वक्त Donald Trump पाकिस्तान की चाल में फंस गए थे.

और कश्मीर के मुद्दे पर मध्यस्थता वाला विवादित बयान दे दिया था.लेकिन इस बार Trump ने अच्छी तैयारी की थी.क्योंकि, वो अब समझ चुके हैं, कि इमरान ख़ान और उनके पत्रकार मिले हुए हैं.उन्हें इस बात का भी अहसास हो चुका है, कि पाकिस्तान की फौज और वहां की सरकार अपने पत्रकारों की भी Fixing करती है.और उनके द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्न भी पहले से ही तय कर देती है .

Donald Trump भी ये बात समझ चुके थे कि पाकिस्तान के पत्रकारों को सवाल भी वहां की सेना लिखकर देती है. इसलिए आज आपको एक-एक करके वो सारे सवाल और उनके जवाब सुनने होंगे.जिसने कश्मीर वाले प्रश्न की भूमिका बांधी.इसकी शुरुआत खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने की.और बड़ी चालाकी से अफगानिस्तान और ईरान का ज़िक्र करते हुए, कश्मीर का मुद्दा उठा दिया.

इमरान ख़ान के Opening Remark के बाद, उनके दरबारी पत्रकारों की बारी आई.और पहले सवाल में ही Donald Trump को जुलाई 2019 की याद दिलाई गई.जब उन्होंने इमरान ख़ान से मुलाकात की थी.और कश्मीर के मुद्दे पर मध्यस्थता की बात कही थी. इमरान ख़ान के दरबारी पत्रकार, जिस प्रकार से प्रश्न पूछ रहे थे, उससे ऐसा बिल्कुल नहीं लग रहा था, कि वो पत्रकार हैं .

उनकी भाषा पाकिस्तान की सेना जैसी थी... और ऐसा लग रहा था जैसे वो Donald Trump का Interrogation कर रहे हों .यही वजह है कि ट्रंप ने पाकिस्तानी पत्रकार से कह दिया, कि वो वही बोल रहे हैं, जो उनकी सोच है .यानी ट्रंप ने ये कहने की कोशिश की...कि वो पत्रकार सवाल नहीं पूछ रहा है, बल्कि बयान दे रहा है .ऐसी स्थिति में Damage Control करने की ज़रुरत थी .

इसलिए पाकिस्तान सरकार के प्रायोजित पत्रकार ... Donald Trump की तारीफ करने लगे. अब तक 13 मिनट में से 10 मिनट का समय ख़त्म हो चुका था .अब Trump अच्छी तरह समझ गए थे... कि पाकिस्तानी पत्रकारों के पास कश्मीर के अलावा कोई और प्रश्न है ही नहीं .इसलिए उन्हें एक पत्रकार को बीच में ही टोकना पड़ा .और ये कहना पड़ा, Let The American Talk For A Change...

अमेरिका के राष्ट्रपति की फटकार के बाद, इमरान ख़ान के दरबारी पत्रकार भी समझ गए, कि अब उनसे सवाल पूछने का कोई मतलब नहीं है.इसलिए उन्होंने दूसरा तरीका अपनाया.और Trump के बगल में बैठे इमरान ख़ान को कश्मीर वाला सवाल पूछने का इशारा किया.क्योंकि Trump, पाकिस्तानी पत्रकारों को तो रोक सकते थे.लेकिन इमरान ख़ान को नहीं. हास्यास्पद बात ये है...

कि Donald Trump ने मज़ाक-मज़ाक में एक या दो बार नहीं... बल्कि कई बार पाकिस्तानी पत्रकारों पर कटाक्ष किया.लेकिन, उस कटाक्ष को इमरान ख़ान और उनके पत्रकार अपनी तारीफ समझ बैठे. हालांकि, पिछली बार ऐसा नहीं हुआ था .क्योंकि, जुलाई 2019 में पाकिस्तानी पत्रकारों ने प्रायोजित सवालों की मदद से Trump को फंसा दिया था.

लेकिन इस बार Trump नहीं फंसे .और उन्होंने पाकिस्तान के घिसे-पिटे फॉर्मूले को पकड़ लिया .आगे बढ़ने से पहले आपको दो महीने पहले क्या हुआ था, ये भी देखना चाहिए. पाकिस्तानी पत्रकारों ने कल बंद कमरे में Trump को परेशान किया.और आज जब वो United Nations General Assembly में अपना भाषण देने पहुंचे, तो इमरान ख़ान के चांद नवाबों ने यहां भी उनका पीछा नहीं छोड़ा. अच्छी बात ये है, कि जुलाई 2019 में ना सही, सितम्बर 2019 में Donald Trump ने पाकिस्तान में पत्रकारिता के चांद नवाबों की चोरी पकड़ ली.लेकिन, इन पत्रकारों और इमरान ख़ान को ऐसा लग रहा है, जैसे उन्हें कोई बहुत बड़ा सम्मान दिया गया है.

वो इसी बात से खुश हैं, कि Trump ने इमरान खान के दरबारी पत्रकारों को Fantastic कहा.उनके लिए I like This Reporter जैसे शब्दों का प्रयोग किया. लेकिन किसी ने दुबई से प्रकाशित होने वाले अखबार Gulf News की Headline नहीं पढ़ी.जिसमें लिखा है, US President Donald Trump Mocks Pakistani Reporters At Press Briefing With Imran Khan...

हिन्दी में Mock का अर्थ होता है, तिरस्कार करना या मज़ाक उड़ाना...वैसे पाकिस्तान में ऐसे दरबारी पत्रकारों की पूरी फौज है.जिनका मज़ाक उड़ाने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति की ज़रुरत नहीं पड़ती.वो खुद ही इसमें Expert हैं. ये इमरान खान के वो पत्रकार हैं जो पाकिस्तान की इंटरनेशनल बेइज्जती करवाते हैं .

और ये सब इसलिए भी होता है कि इमरान खान को पाकिस्तान और दुनिया के कई बड़े मुद्दों की समझ नहीं है .कई बार ये साबित भी हो चुका है कि....देश दुनिया के मुद्दे पर इमरान खान का ज्ञान औसत दर्जे से भी कम है .उन्हें ना तो एबटाबाद ऑपरेशन को लेकर पाकिस्तान में चल रही जांच के बारे में जानकारी है .और ना ही चीन में उइगर मुसलमानों पर हुई कार्रवाई का पता है.