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महात्मा गांधी के खाने का विश्लेषण: नपी-तुली डाइट रखती थी गांधी जी को फिट

गांधी जी शाकाहारी थे और अक्सर हरी पत्तेदार सब्जियां खाया करते थे. गांधी जब London में थे तो वो Vegetarian Society का हिस्सा बन गए थे. और बाद में वो Vegan बन गए यानी उन्होंने गाय का दूध और इससे बने बाकी चीजों को खाना भी छोड़ दिया.

महात्मा गांधी के खाने का विश्लेषण: नपी-तुली डाइट रखती थी गांधी जी को फिट
(फाइल फोटो)

महात्मा गांधी खाने-पीने के शौकीन थे. लेकिन वो जो भी खाते थे बहुत संयम के साथ और सीमित मात्रा में खाते थे. हमने आज गांधी जी की Diet का भी अध्ययन किया है. और ये समझने की कोशिश की है कि कैसे उन्होंने अपने आस-पास के सामाजिक और राजनीतिक माहौल के अनुसार अपना खान-पान बदला. इतिहासकार Nico Slate के मुताबिक वर्ष 1908 में महात्मा गांधी साउथ अफ्रिका में थे और उन्हें अंग्रेज़ों ने जेल में डाल दिया था. उस जेल में भारतीय कैदियों को खाने में घी नहीं दिया जाता था. महात्मा गांधी ने पहले इसका विरोध किया लेकिन फिर उन्हें लगा कि घी उनके लिए ज़रूरी नहीं है.

गांधी जी शाकाहारी थे और अक्सर हरी पत्तेदार सब्जियां खाया करते थे. गांधी जब London में थे तो वो Vegetarian Society का हिस्सा बन गए थे. और बाद में वो Vegan बन गए यानी उन्होंने गाय का दूध और इससे बने बाकी चीजों को खाना भी छोड़ दिया. वो अपने लिए खुद बादाम का दूध बनाया करते थे. आजकल यही दूध आधुनिक Diet का हिस्सा बन चुका है और Super Markets में Almond Milk के नाम से बिकता है. गांधी जी को मीठा भी बहुत पसंद था. वो जलेबी और हलवे के शौकीन थे. लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने मीठा खाना भी कम कर दिया. वो चीनी का इस्तेमाल भी नहीं करते थे. और नमक भी बहुत कम मात्रा में खाया करते थे. महात्मा गांधी आम खाने के भी बहुत शौकीन थे. लेकिन वो अक्सर इससे बचने की सलाह भी दिया करते थे.

महात्मा गांधी ने वनस्पती घी का भी विरोध किया था क्योंकि उनका मानना था कि इसे बनाने के लिए Chemicals का इस्तेमाल किया जाता है. महात्मा गांधी घी से लेकर 'आम' तक अपनी खाने-पीने की आदतों को बदलते रहे. कई बार उन्होंने ऐसा अपने स्वास्थ्य के लिए किया तो कई बार आसपास के राजनीतिक और सामाजिक माहौल के हिसाब उन्होंने अपनी Diet बदली. यानी आज जिस नपी-तुली और Organic Diet को हम आधुनिक Diet का नाम देते हैं उसे गांधी जी बहुत पहले से अपनाते रहे.