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गांधी जी की छवि एक गंभीर नेता की बनाई गई, लेकिन उनका Sense Of Humor शानदार था

हमारे देश में गांधी जी के नाम पर कसमें खाई जाती हैं. नेता उनके आदर्शों पर चलने का वादा करते हैं. उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर बड़े-बड़े सेमिनारों का आयोजन किया जाता है.

गांधी जी की छवि एक गंभीर नेता की बनाई गई, लेकिन उनका Sense Of Humor शानदार था
(फाइल फोटो)

महात्मा गांधी अहिंसा के पुजारी थे. वो छुआ-छूत की प्रथा के भी खिलाफ थे. वो साफ सफाई का भी बहुत ध्यान रखते थे और किसी काम को छोटा या बड़ा नहीं मानते थे. लेकिन आज हमारे समाज में हर जगह हिंसा का प्रवेश हो गया है. हमें गंदगी का अंबार लगाने में शर्म नहीं आती और आज भी हम हिंदू-मुस्लिम और ब्राह्मण-दलित वाली लड़ाइयों में उलझे हैं. आज हमने हिंसा और अपराध से जुड़े कुछ आंकड़ों के ज़रिए ये समझने की कोशिश की है कि क्या हम महात्मा गांधी के सपनों का देश बना पाए हैं?

National crime records bureau के मुताबिक वर्ष 2016 में भारत में 21 लाख आपराधिक घटनाएं हुईं थी. NCRB के आंकड़ों के मुताबिक 2016 में हत्या के 30 हज़ार 450 से मामले दर्ज किए गए थे. यानी भारत में हर दिन हत्या की करीब 83 घटनाएं सामने आती हैं. इसी तरह 2016 में दहेज हत्या के 7 हज़ार 621 मामले दर्ज हुए. जबकि 38 हज़ार से ज्यादा रेप के मामले दर्ज किए गए. अब आप सोचिए कि क्या बलात्कार, हत्या और हिंसा की घटनाओं के मामले में World Record बनाने वाले देश को बापू का देश कहा जा सकता है?

हत्याएं सिर्फ लोगों की नहीं हो रही है बल्कि हत्या गांधी जी के विचारों की और उनकी शिक्षाओं की भी हो रही है. हमारे देश में महात्मा गांधी के आदर्शों को हर रोज़ सड़कों पर घरों में, दफ्तरों में और राजनीति में मारा जा रहा है. सिर्फ हत्या और बलात्कार के ज़रिए ही नहीं बल्कि देश की जनता से झूठ बोलकर नकली सामान बेचकर और धर्म और जाति के आधार पर हिंसा करके गांधी जी की हत्या की जा रही है. आज हमने समाज में फैली नफरत और हिंसा पर गांधी जी के संबोधन को सुना महात्मा गांधी ने आज से 72 वर्ष पहले यानी 1947 में समाज की बुराइयों को लेकर क्या कहा था. ये आज आपको भी सुनना चाहिए.

हमारे देश में गांधी जी के नाम पर कसमें खाई जाती हैं. नेता उनके आदर्शों पर चलने का वादा करते हैं. उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर बड़े-बड़े सेमिनारों का आयोजन किया जाता है. गांधी अंग्रेज़ी बोलने वाली Celebreties, और बुद्धिजीवियों के प्रिय विषय बन गए हैं. लेकिन उनके विचारों को भाषणों की पर्ची पर लिखकर फाड़ दिया जाता है. उनके आदर्शों को हवा में उड़ा दिया जाता है. गांधीवाद को एक बोरिंग और गंभीर विषय में बदल दिया जाता है. ताकि देश की आम जनता गांधी को अपने जीवन में ना उतार पाए. क्योंकि अगर आम आदमी महात्मा गांधी को समझ लेगा तो फिर वो निरंकुश नेताओं से सवाल करने लगेगा? अपना हक मांगने लगेगा? सत्याग्रह का रास्ता अपना लेगा और तब नेताओं, अंग्रेज़ी बोलने वाली Celebreties, बुद्धिजीवियों और डिज़ाइनर पत्रकारों के लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी. लेकिन हम चाहते हैं कि आप गांधीवाद को एक आधुनिक Trend समझें. उसे अपने Swag यानी स्टाइल का हिस्सा बनाएं और गांधीगीरी करने में शर्म नहीं बल्कि गर्व का अनुभव करें.

ये भी विडंबना है कि भारत में गांधी सरनेम को बहुत सम्मान दिया जाता है और ऐसा लगता है कि ये एक बहुत शक्तिशाली टाइटल यानी उपनाम है. भारत के कई नेताओं का सरनेम भी गांधी रहा है. लेकिन ज्यादातर नेताओं को विरासत में सिर्फ ये सरनेम ही हासिल हुआ. असली गांधी के विचारों को ये नेता अपने आचरण में शामिल नहीं कर सके. नेता ही नहीं देश में जिस किसी का भी सरनेम गांधी है. उसे गर्व का एहसास होना चाहिए और उसे महात्मा गांधी के रास्तों पर चलने की कोशिश करनी चाहिए. लेकिन हमारे देश में लोग महापुरुषों से संबध तो जोड़ लेते हैं. लेकिन उनका अनुसरण नहीं करना चाहते, उनके आदर्शों की विरासत को आगे नहीं बढ़ाना चाहते.

महात्मा गांधी कितने लोकतांत्रिक थे ये समझने के लिए आज आपको उनके साबरमती आश्रम के बारे में जानना चाहिए. महात्मा गांधी हर रोज़ करीब 200 चिट्ठियां लिखा करते थे. वो अपने दोस्तों, साथी नेताओं को चिट्ठी लिखा करते थे और यहां तक कि अपने आलोचकों की चिट्ठियों का भी जवाब देते थे. उनके आश्रम में कोई भी जा सकता था उनसे संवाद कर सकता था और उनसे सवाल भी पूछ सकता था. जबकि आज के नेता जनता से दूरी बनाकर चलते हैं और जनता के सवालों का जवाब देना अपनी तौहीन समझते हैं. लेकिन गांधी अपने विरोधियों को भी अपने करीब आने देते थे.

गांधी जी की छवि एक गंभीर नेता की बनाई गई. लेकिन उनका Sense Of Humor बहुत शानदार था. 1931 में जब गांधी London में थे. तब उनकी मुलाकात ब्रिटेन के राजा से हुई थी, महात्मा गांधी ने इस मुलाकात के दौरान भी सिर्फ धोती पहन रखी थी. जब ये मुलाकात हुई तब London में बहुत ठंड हुआ करती थी. इस मुलाकात के बाद एक पत्रकार ने उनसे ये सवाल पूछा कि क्या राजा से मुलाकात के दौरान उन्हें ठंड नहीं लग रही थी. तब उन्होंने कहा कि आपके राजा ने जितने कपड़े पहन रखे थे. वो हम दोनों के लिए ही काफी थे. यानी महात्मा गांधी सिर्फ कूटनीति में ही नहीं बल्कि Sense Of Humor के साथ अपनी बात मनवाने में भी माहिर थे.