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Zee Jaankari: जादवपुर में बाबुल सुप्रियो के साथ हुई मारपीट का विश्लेषण

गुरुवार को जादवपुर विश्वविद्यालय में केंद्रीय पर्यावरण और वन राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो के साथ मारपीट की गई. उनके बाल खींचे गए. पूरे घटनाक्रम का वीडियो केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रीयो ने खुद ट्वीट किया.

Zee Jaankari: जादवपुर में बाबुल सुप्रियो के साथ हुई मारपीट का विश्लेषण

पाकिस्तान का निर्माण करने वाले नेताओं को आप इस टुकड़े-टुकड़े गैंग के पूर्वज भी कह सकते हैं क्योंकि देश के टुकड़े करने का सपना पहली बार पाकिस्तान का निर्माण करने वाले नेताओं ने ही देखा था. इनमें मोहम्मद अली जिन्ना, मोहम्मद इकबाल और सर सैयद अहमद ख़ान जैसे लोग शामिल थे. आज भारत पाकिस्तान के ऐसे सभी सपनों को तोड़ रहा है. लेकिन भारत में बैठे कुछ लोग पाकिस्तान का ये सपना साकार करने की कोशिश कर रहे हैं.

हो सकता है कि आने वाले दिनों में आपको पश्चिम बंगाल जाने के लिए वीजा लेना पड़े. भविष्य में इस बात की भी संभावना है कि देश के कुछ विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए आपको परमिट लेना पड़े. गुरुवार को जादवपुर विश्वविद्यालय में केंद्रीय पर्यावरण और वन राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो के साथ मारपीट की गई. उनके बाल खींचे गए. पूरे घटनाक्रम का वीडियो केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रीयो ने खुद ट्वीट किया. बाबुल सुप्रियो को जादवपुर विश्वविद्यालय में करीब छह घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया. इस दौरान पश्चिम बंगाल पुलिस ने कोई भी कार्रवाई नहीं की. वहीं राज्य सरकार पूरे घटनाक्रम के प्रति उदासीन बनी रही.

शायद ऐसा देश में पहली बार हुआ होगा. जब एक केंद्रीय मंत्री के साथ ऐसा व्यवहार किया गया हो. इस दौरान पश्चिम बंगाल पुलिस ने कोई भी कार्रवाई नहीं की. बाबुल सुप्रियो के साथ बदसलूकी करने वाले वामपंथी छात्र संगठन Students federation of India यानी SFI के थे. स्थिति बिगड़ने की जानकारी मिलने के बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनकड़ को खुद बाबुल सुप्रियो को सुरक्षित निकालने के लिए विश्वविद्यालय जाना पड़ा. इसके पहले देश ने ऐसा कभी नहीं देखा था कि एक केंद्रीय मंत्री की जान बचाने के लिए किसी राज्यपाल को मौके पर जाना पड़ा हो. पूरे घटनाक्रम को देखकर लगता है कि जैसे पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा ही ना हो. जिसकी जिम्मेदार कहीं ना कहीं वर्तमान राज्य सरकार है. आपको याद होगा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कई ऐसे बयान दिए हैं, जो देशहित पर चोट पहुंचाने वाले थे.

देश के टुकडे-टुकड़े गैंग को इस घटना में असहनशीलता दिखाई नहीं दे रही है. इस घटना को लेकर देश के डिजाइनर पत्रकार, बुद्धिजीवी और अंग्रेजी बोलने वाले celebrities सभी मौन हैं. हद तो ये है कि ये लोग टुकड़े-टुकड़े गैंग की इस गुंडागर्दी की निंदा करने का भी नैतिक साहस जुटा नहीं पा रहे हैं. आजादी के बाद से आज तक इसी सोच की वजह देश को बहुत नुकसान उठाना पड़ा है.

विश्वविद्यालय वो जगह होती है, जहां छात्र ना केवल डिग्री लेने आते हैं, बल्कि उनका व्यक्तित्व का विकास भी होता है. उनकी सोच को एक दिशा मिलती है. जो राष्ट्रहित में होती है. दुख की बात ये है कि देश के कुछ विश्वविद्यालयों में ऐसा नहीं हो रहा है. देश का टुकड़े-टुकड़े गैंग छात्रों में देशविरोधी विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर रहा है. कुछ नेता अपने राजनीतिक स्वार्थ में अंधे होकर टुकड़े-टुकड़े गैंग को अप्रत्यक्ष समर्थन भी देते नजर आते हैं. वर्ष 2016 में JNU के बाद कोलकाता के जादवपुर विश्वविद्यालय में भी देश विरोधी नारे लगे थे. इन घटनाओं का पूरा सच सबसे पहले हमने ही आपको बताया था. हम आगे भी अपनी राष्ट्रवादी पत्रकारिता इसी तरह जारी रखेंगे. और किसी भी देश विरोधी अभियान को सफल नहीं होने देंगे. टुकड़े-टुकड़े गैंग की इन साजिशों के खिलाफ पूरे देश को एक होने की आवश्यकता है.