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Zee Jaankari: पाकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय मूर्खता का विश्लेषण

आज के विश्लेषण की शुरुआत हम चाणक्य के एक कथन के साथ करना चाहते हैं. करीब ढाई हज़ार साल पहले चाणक्य ने कहा था कि मूर्ख लोगों से कभी विवाद नहीं करना चाहिए.

Zee Jaankari: पाकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय मूर्खता का विश्लेषण

आज के विश्लेषण की शुरुआत हम चाणक्य के एक कथन के साथ करना चाहते हैं. करीब ढाई हज़ार साल पहले चाणक्य ने कहा था कि मूर्ख लोगों से कभी विवाद नहीं करना चाहिए. क्योंकि ऐसे लोगों के पास ज़रा सी भी समझदारी नहीं होती. इनसे विवाद करने से सिर्फ ऊर्जा नष्ट होती है, समय की बर्बादी होती है और हासिल कुछ भी नहीं होता. पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति की दुनिया में अब एक ऐसा ही मूर्ख देश बन चुका है. जिसके साथ बात करने या विवाद करने का कोई अर्थ नहीं है. इसलिए भारत अब अपनी कूटनीतिक ऊर्जा का इस्तेमाल दुनिया के बड़े-बड़े देशों के साथ अंतर्राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर बातचीत में करना चाहता है.

इसलिए इस बात की प्रबल संभावना है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान पाकिस्तान का जिक्र नहीं करेंगे और ये भी हो सकता है कि प्रधानमंत्री मोदी संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर पर भी बात ना करें. जबकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ये साफ कर चुके हैं कि वो अपने भाषण के दौरान सिर्फ और सिर्फ कश्मीर पर बात करेंगे और कश्मीर उनके लिए एक मजहबी मुद्दा है.

भारत और पाकिस्तान एक साथ आज़ाद हुए थे, दोनों देशों ने अपना सफर एक साथ शुरू किया था. लेकिन अब भारत जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ चर्चा करता है. जबकि पाकिस्तान कश्मीर से आगे नहीं सोच पाता.

यानी अब कूटनीति की दुनिया में भारत की हैसियत एक Global Leader जैसी हो चुकी है. जो वैश्विक समस्याओं पर बात करता है, उनका हल तलाशता है और बड़े अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर, बड़ी बड़ी Deals साइन करता है. जो अपने ही लोगों की नहीं बल्कि दुनिया भर के लोगों के हितों की बात करता है. जबकि पाकिस्तान का स्तर हर दिन गिरता जा रहा है. इसी का परिणाम है कि अब दुनिया भर के देश पाकिस्तान की बातों से ऊब चुके हैं.

पाकिस्तान ने UNHRC यानी United Nations Human Rights Council में भी कश्मीर पर प्रस्ताव लाने की कोशिश की. लेकिन वो इसमें भी बुरी तरह विफल हो गया. मानवाधिकार परिषद में प्रस्ताव लाने के लिए पाकिस्तान को करीब 16 देशों के समर्थन की ज़रूरत थी. लेकिन परिषद के 47 देशों में से ज्यादातर ने उसका साथ नहीं दिया.

इसके बाद संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधी सैयद अकबरूद्दीन ने एक बयान दिया. जिसमें उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जितना नीचे गिरेगा, भारत उतना ही ऊपर उठेगा. यानी अगर पाकिस्तान ने रसातल में जाने का फैसला ले ही लिया है, तो फिर भारत इसमें कुछ नहीं कर सकता. भारत ने अपने लिए ऊंचे लक्ष्य तय किए हैं. और हम उन्हें हासिल करके ही रहेंगे.