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Zee Jaankari: पीएम मोदी और ट्रंप की कूटनीतिक जुगलबंदी का विश्लेषण

DNA में आज हम सबसे पहले भारत की शानदार कूटनीतिक सफलता का विश्लेषण करेंगे. इस विश्लेषण के तीन आधार हैं. पहला आधार है भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की. Game Changer Diplomacy इसे आप प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति क्रांति भी कह सकते हैं. 

Zee Jaankari: पीएम मोदी और ट्रंप की कूटनीतिक जुगलबंदी का विश्लेषण

DNA में आज हम सबसे पहले भारत की शानदार कूटनीतिक सफलता का विश्लेषण करेंगे. इस विश्लेषण के तीन आधार हैं. पहला आधार है भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की. Game Changer Diplomacy इसे आप प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति क्रांति भी कह सकते हैं. दूसरा आधार है विदेशों में बसे भारतीयों की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक ताकत. जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले कुछ वर्षों में एक प्रभावशाली मंच प्रदान किया है .और इस विश्लेषण का अंतिम और तीसरा आधार है अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर Brand India का बढ़ता प्रभुत्व. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 सितंबर को अमेरिका के Houston में भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे.

इस कार्यक्रम में भारतीय मूल के 50 हज़ार से ज्यादा लोग शामिल होंगे . Houston के NRG स्टेडियम में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के विशेष अतिथि.. अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump होंगे . आप इसे प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की संयुक्त महा रैली भी कह सकते हैं . इस कूटनीतिक जुगलबंदी की धुन..दुनिया के कोने कोने में सुनाई देगी .

और इससे पाकिस्तान जैसे देशों की परेशानी बढ़ना स्वाभाविक है . Houston के NRG स्टेडियम की क्षमता 70 हज़ार दर्शकों की है . ये स्टेडियम अमेरिका की मशहूर फुटबॉल टीम.. Houston Texans का Home Ground यानी घरेलू मैदान भी है . यानी 22 सितंबर को अमेरिका का ये मशहूर स्टेडियम भारत की कूटनीतिक विजय का साक्षी बनेगा . लेकिन ये पहला अवसर नहीं है...

जब प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका में भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे . उन्होंने इसकी शुरुआत वर्ष 2014 में की थी . सितंबर 2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूयॉर्क के मशहूर Madison Square Garden में भारतीय समुदाय को संबोधित किया था . इस कार्यक्रम में भारतीय मूल के करीब 20 हज़ार लोग शामिल हुए थे . तब अमेरिका में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किसी Rockstar की तरह हुआ था . DNA के Special Edition के लिए मैं भी उस वक्त New york में मौजूद था . तब Madison Square Garden के बाहर भारतीय समुदाय के लोगों की लंबी लंबी कतारें लगी हुईं थीं . मैंने उस उत्साह और और ऊर्जा को बहुत करीब से देखा था .

इसलिए आज एक बार फिर मैं आपको पांच वर्ष पहले की वो तस्वीरें दिखाना चाहता हूं . 22 सितंबर को Houston में आयोजित होने वाले कार्यक्रम का नाम Howdy Modi रखा गया है. Texas में How Do You Do को संक्षेप में Howdy कहा जाता है. हिंदी में इसका अर्थ हैं कि... आप कैसे हैं . Texas अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है और यहां 1 लाख 50 हज़ार भारतीय रहते हैं .

यानी प्रधानमंत्री मोदी सिर्फ इन भारतीयों से उनका हालचाल नहीं पूछेंगे बल्कि अमेरिका के राजनीतिक हालात को भी प्रभावित करेंगे . वर्ष 2015 में भी प्रधामंत्री मोदी ने अमेरिका के San Jose (सैन होज़े ) के SAP Centre में.. एक ऐसे ही कार्यक्रम को संबोधित किया था . इस कार्यक्रम में भारतीय मूल के 18 हज़ार से ज्यादा लोग मौजूद थे . लेकिन Houston में मोदी का कार्यक्रम .

.अमेरिका मे उनका अब तक का सबसे बड़ा कार्यक्रम होगा . इससे पहले सिर्फ ईसाइयों के सबसे बड़े धर्म गुरु और वेटिकन सिटी के प्रमुख.. Pope Francis (पोप फ्रांसिस )की अमेरिकी यात्रा के दौरान ही इससे ज्यादा लोग एक साथ, एक जगह पर उपस्थित हुए थे . अमेरिका में करीब 30 लाख भारतीय रहते हैं और वहां अगले वर्ष राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने हैं. ऐसे में इतना बड़ा मंच अमेरिका के राष्ट्रपति Doland Trump के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है . इस मंच से वो ना सिर्फ भारतीय समुदाय को लुभाने की कोशिश करेंगे बल्कि प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता का फायदा उन्हें भी मिलना तय है .

यानी Doland Trump के लिए NRG स्टेडियम में मौजूद भारतीय एक बड़ा Vote Bank होंगे . अमेरिका की पोलिंग एजेंसी Gallup (गैलप) के मुताबिक Texas में Donald Trump की लोकप्रियता 30 राज्यों के मुकाबले सबसे कम है . अमेरिका के चुनाव विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर Donald Trump की Republican Party ने..

वर्ष 2016 में Texas में जीत दर्ज नहीं की होती तो, उनका राष्ट्रपति बनना लगभग नामुमकिन था . इसलिए Donald Trump इस राज्य में ज्यादा से ज्यादा वोट हासिल करना चाहते हैं . आप ये भी कह सकते हैं कि Texas में रहने वाले भारतीय और एशियाई मूल के लोगों के पास अमेरिका की सत्ता की चाबी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप सिर्फ एक साथ भारतीय समुदाय को संबोधित नहीं करेंगे . बल्कि दोनों के बीच द्वीपक्षीय वार्ता भी होगी . पिछले 4 महीनों में ये प्रधानमंत्री मोदी और डोनल्ड ट्रंप के बीच तीसरी मुलाकात होगी .

इससे पहले दोनों नेता जापान में आयोजित G20 सम्मेलन और फ्रांस में आयोजित G7 सम्मेलन में मुलाकात कर चुके हैं . आज हमने अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति की दुनिया की इस सबसे बड़ी खबर को समझने के लिए काफी Research की..कई विशेषज्ञों से बात की और अमेरिका में अपने संवाददातओं से भी संपर्क किया . हम ये समझना चाहते थे कि अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump आखिर क्यों इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए तैयार हुए...और वो इस कार्यक्रम में आकर क्या-क्या कर सकते हैं . एक संभावना तो ये है कि प्रधानमंत्री मोदी और Donald Trump एक साथ..

NRG स्टेडियम में प्रवेश करेंगे .इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी 40 से 50 मिनटों तक दर्शकों को संबोधित करेंगे . और फिर Doland Trump भी 20 से 40 मिनटों तक भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करेंगे. दूसरी संभावना ये है कि Donald Trump कार्यक्रम के बीच में Entry करेंगे . प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करेंगे . फिर दोनों नेता दर्शकों का अभिवादन करके..

वहां से द्वीपक्षीय वार्ता के लिए निकल जाएंगे . इस दौरान Donald Trump अपनी भारत यात्रा को लेकर घोषणा भी कर सकते हैं और संभव है कि आने वाले गणतंत्र दिवस समारोह में वो विशेष अतिथि के तौर पर नज़र आएं . प्रधानमंत्री मोदी और Donald Trump का किसी गैर राजनीतिक मंच पर एक साथ आना एक एतिहासिक पल होगा .

Trump के लिए ये नया अनुभव होगा तो प्रधानमंत्री मोदी के लिए ये अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में उनकी एक और सफलता कहलाएगी . अब आपको प्रधानमंत्री मोदी और Donald Trump की द्वीपक्षीय मुलाकात के कूटनीतिक, रणनीतिक और आर्थिक उद्देश्यों के बारे में बताते हैं. Houston अमेरिका के Texas राज्य का सबसे बड़ा शहर है . Houston को Energy Capital Of The World भी कहा जाता है . क्योंकि यहां बड़ी-बड़ी तेल, गैस और ऊर्जा कंपनियों के Headquarters हैं . अमेरिका की ये कंपनियां अच्छी तरह जानती हैं कि ऊर्जा क्षेत्र में भारत एक बड़ा बाज़ार है .

और अमेरिका का तेल और गैस उद्योग भारत के बगैर आगे नहीं बढ़ सकता . इस दौरान दोनों देशों के बीच कोई बड़ी Energy Deal भी हो सकती है . वर्ष 2018 और 19 में अमेरिका और भारत के बीच करीब 6 लाख 15 हज़ार करोड़ का व्यापार हुआ था . इसमें से भारत ने 3 लाख 66 हज़ार करोड़ रुपये का निर्यात किया था . जबकि अमेरिका ने भारत को 2 लाख 48 हज़ार करोड़ रुपये के मूल्य की वस्तुएं बेची थीं . अमेरिका और चीन के बीच इन दिनों व्यापार युद्ध यानी Trade war चल रहा है. इसलिए अमेरिका की कई बड़ी कंपनियां भारत में Shift होना चाहती हैं .

द्वीपक्षीय वार्ता के दौरान इस संबंध में कोई बड़ी घोषणा हो सकती है. भारत और अमेरिका किसी बड़े रक्षा समझौते पर भी हस्ताक्षर कर सकते हैं . लड़ाकू विमान बनाने वाली LockHeed martin भारत को 2 बिलियन डॉलर्स में चौबीस.. Anti-submarine helicopters बेचना चाहती है.इसके अलावा भारतीय वायुसेना को.. F-21 जैसे लड़ाकू विमान बेचने की भी कोशिशें की जा रही हैं . इसके अलावा बहुत सारे विशेषज्ञ ये भी मानते हैं कि अफगानिस्तान में भारत की भूमिका को लेकर भी कोई बड़ा ऐलान हो सकता है . अमेरिका ने हाल ही में तालिबान के साथ चल रही शांति वार्ता को रद्द किया है.

इससे अफगानिस्तान का भविष्य एक बार फिर अधर में लटक गया है . भारत अफगानिस्तान में अपनी भूमिका को मजबूत करना चाहता है और दोनों देश इस संबंध में भी.. किसी समौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं. इतना ही नहीं अमेरिका की अर्थव्यवस्था में भी भारतीय मूल के लोगों का बड़ा योगदान है . Google, Micro Soft, Master card, Adobe और Nokia जैसी कंपनियों के CEO, भारतीय मूल के हैं . इसलिए Donald Trump प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्वीपक्षीय वार्ता के दौरान भारत के हितों का भी ध्यान रखेंगे .

अमेरिका भारत में निवेश करने वाले Top 5 देशों में शामिल है. लेकिन भारत की कंपनियां भी अब अमेरिका में काफी निवेश कर रही हैं. वर्ष 2017 से अब तक. 100 भारतीय कंपनियां.. अमेरिका में 1 लाख 25 हज़ार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश कर चुकी है . इन कंपनियों की वजह से अमेरिका के 50 राज्यों में करीब 1 लाख 13 हज़ार से ज्यादा लोगों को रोज़गार मिला है .

अमेरिका में भारतीयों को सबसे प्रभावशाली वर्ग माना जाता है. इसलिए अमेरिका की दोनों मुख्य पार्टियां यानी Republican पार्टी और Demaocratic पार्टी, भारतीयों को लुभाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहीं हैं . Howdy Modi Event में Democratic पार्टी के कई बड़े नेता और सांसद भी शामिल हो सकते हैं .अमेरिका में भारतीय समुदाय के लोगों को एक बड़ा वोट बैंक माना जाते हैं . ऐसा भारतीयों की संख्या की वजह से नहीं..बल्कि अमेरिका की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर उनके प्रभाव की वजह से है .