ZEE जानकारी: भारतीय इतिहास के सबसे बड़े Fake News का विश्लेषण

आज हम सबसे पहले..भारत के सबसे बड़े News घोटाले का पर्दाफाश करेंगे. आज हम नेताओं और मीडिया द्वारा फैलाए गए जिस झूठ का विश्लेषण कर रहे हैं उसे आप आज़ाद भारत के इतिहास की सबसे बड़ी Fake News भी कह सकते हैं. 

ZEE जानकारी: भारतीय इतिहास के सबसे बड़े Fake News का विश्लेषण

आज हम सबसे पहले..भारत के सबसे बड़े News घोटाले का पर्दाफाश करेंगे. आज हम नेताओं और मीडिया द्वारा फैलाए गए जिस झूठ का विश्लेषण कर रहे हैं उसे आप आज़ाद भारत के इतिहास की सबसे बड़ी Fake News भी कह सकते हैं. ये Fake News ऱफाल लड़ाकू विमानों के सौदे से जुड़ी है. इस Fake News को आज देश की सबसे बड़ी अदालत. यानी सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दिया है. और नेताओं और मीडिया के उस गैंग को ज़ोर का झटका दिया है..जिसने रफाल डील पर झूठे सवाल उठाकर. अपनी दुकानदारी चमकाई थी. इसलिए आज आपको सुप्रीम कोर्ट के फैसले की चार सबसे अहम बातों को समझ लेना चाहिए !

सुप्रीम कोर्ट ने पहली बात ये साफ कर दी है कि रफाल डील की जांच नहीं होगी. No Investigation
दूसरी बात ये है कि अदालत रफाल विमानों के कीमतों में कोई दखलअंदाज़ी नहीं करेगी
तीसरी बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट ने रफाल डील में भ्रष्टाचार के मामले में मोदी सरकार को पूरी तरह क्लीन चिट दे दी है.
और चौथी महत्वपूर्ण बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को बोलने से पहले सोचने की सलाह दी है .

सुप्रीम कोर्ट ने ये साफ कर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और पार्दर्शिता के नाम पर राष्ट्रिय सुरक्षा से जुड़े सौदों को रोका नहीं जा सकता. कुल मिलाकर कोर्ट ने ये संदेश दिया है कि कुछ लोगों के शक के आधार पर...देश की नीतियों को अधर में नहीं लटकाया जा सकता. यानी सुप्रीम कोर्ट ने आज अपने फैसले में आज़ाद भारत की सबसे बड़ी फेक न्यूज़ के प्रसार प्रचार को रोक दिया है.

देश इस सबसे बड़े वैचारिक घोटाले को नेताओं के साथ मिलकर मीडिया के उन चेहरों ने अंजाम दिया..जिन्हें देश की जनता बहुत विश्वसनीय मानती थी. ये वो लोग हैं...जो रोज़ रात प्राइम टाइम पर जनता के हितों की बात करने का दावा करते हैं...गरीबों के मसीहा बनते हैं और खुद को अल्पसंख्यक अधिकारों का रक्षक मानते हैं. ये वो लोग हैं जिन्होंने अखबारों के पहले पन्ने पर रफाल डील को लेकर बड़ी-बड़ी खबरें छापी और इसकी तुलना Bofors तोप घोटाले से की .

इन लोगों ने टुकड़े टुकड़े गैंग...कथित बुद्धिजीवियों और झूठ बोलने वाले नेताओं के साथ मिलकर...भारत के इतिहास की सबसे बड़ी Fake News की स्क्रिप्ट लिखी. हो सकता है कि ये लोग..रफाल डील पर सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले को भी.अपने पक्ष में बताने लगें. लेकिन आपको इनके झांसे में आने की ज़रूरत नहीं है..क्योंकि आज का हमारा विश्लेषण इन लोगो की पोल खोल देगा.

आज भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिन है. पंडित नेहरू ने कहा था कि Facts are facts and will not disappear on account of your likes. यानी तथ्य हमेशा तथ्य रहते हैं और अगर आप किसी तथ्य को पसंद नहीं करते तो इसका मतलब ये नहीं है कि वो गायब हो जाएगा.

पंडित नेहरू कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पर-नाना लगते हैं. लेकिन शायद राहुल गांधी और कांग्रेस ने पंडित नेहरू की इन बातों को कभी गंभीरता से नहीं लिया . यही वजह है कि आज राहुल गांधी और कांग्रेस द्वारा गढ़ा गया सबसे बड़ा झूठ सुप्रीम कोर्ट में हार गया है. ये एक ऐसा झूठ था..जो राहुल गांधी और उनकी पार्टी को बहुत पसंद था.

लेकिन राहुल गांधी को क्या पसंद है. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. क्योंकि कानून सिर्फ तथ्यों के आधार पर फैसला सुनाता है . और आज सुप्रीम कोर्ट ने रफाल डील पर कांग्रेस और कथित बुद्धीजीवियों के झूठ को एक बार फिर ख़ारिज कर दिया है.सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर 2018 को अपने फैसले में केंद्र सरकार को रफाल डील मामले में क्लीन चिट दे दी थी. कोर्ट ने कहा था कि रफाल सौदे की प्रक्रिया में किसी तरह के नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है.

और सुप्रीम कोर्ट ने इसी फैसले के खिलाफ दायर की गई पुनर्विचार याचिका को भी आज खारिज कर दिया है. ये फैसला चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला एकमत से सुनाया है. यानी इसमें इसमें सभी जजों की राय एक थी .

याचिका-कर्ताओं ने रफाल डील मामले में FIR दर्ज किए जाने की भी अपील की थी. इस अपील को भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में जो भी याचिकाएं दायर की गई थी वो प्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस या उसके किसी नेता द्वारा दायर नहीं की गई थी. बल्कि ये याचिकाएं.

यशवंत सिन्हां, अरुण शौरी और उनके वकील प्रशांत भूषण ने दायर की थी. यशवंत सिन्हां और अरुण शैरी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे हैं. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में कोर्ट में दाखिल रफाल डील के रिकॉर्ड में कोई गलती दिखाई नहीं देती है.

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि अदालत लड़ाकू विमान की कीमतों को तय नहीं कर सकती. और सिर्फ याचिका-कर्ताओं के शक के आधार पर...अदालत रफाल लड़ाकू विमानों की कीमतों का निर्धारण करने के लिए बाध्य नहीं है.

.सुप्रीम कोर्ट ने रफाल की कीमतों को लेकर ये भी कहा है कि सेब की तुलना संतरों से नहीं की जा सकती. क्योंकि बिना हथियारों के लड़ाकू विमान. और हथियारों से लैस लड़ाकू विमान की कीमतों को तय करना..इससे जुड़ी संस्था का काम है. सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2018 में सुनाए गए फैसले में भी साफ किया था कि कोर्ट को रफाल लड़ाकू विमान की खरीद प्रक्रिया पर कोई शक नहीं है.

खरीद प्रक्रिया के अलावा रफाल की कीमत पर भी सवाल उठाए गए थे . 2018 के फैसले में अदालत का कहना था कि याचिकाकर्ताओं ने अखबारों और Magazines में मौजूद जानकारी के अधार पर ये कहा कि रफाल को ज़्यादा दाम देकर खरीदा गया है.

यानी मैगज़ीन और अखबारों में छपी खबरों के दम पर राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने ये पूरा मुद्दा तैयार किया. ये भी एक तरह से फेक न्यूज़ है. पूरी दुनिया में फेक न्यूज़ पर गहन चर्चा हो रही है. फेक न्यूज़ को रोकने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. आपने नोट किया होगा कि WhatsApp और फेसबुक भी फेक न्यूज़ को रोकने के लिए अखबारों और TV पर विज्ञापन दे रहा है.

लेकिन ऐसा लगता है कि ये सब करने का कोई फायदा नहीं है. क्योंकि जब हमारे देश के नेता ही अपनी रैलियों में फेक न्यूज़ फैलाएंगे, तो फिर उन्हें कौन रोकेगा ? आज रफाल डील को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक और महत्वपूर्ण टिप्पणी की है . कोर्ट ने कहा है कि हम एक ऐसे मामले को डील कर रहे हैं...जो लड़ाकू विमानों से जुड़ा है.

और देश को इन Aircrafts की कितनी ज़रूरत है..ये बताने की ज़रूरत नहीं है. फैसले में आगे लिखा गया है कि कोर्ट को इस मामले की जांच इस तरीके से करने की ज़रूरत नहीं है..जेसै हम कोई मछली पकड़ रहे हो रफाल डील पर कांग्रेस और उसका साथ देने वाला बुद्धीजीवी गैंग तीन Round हार चुका है.

ये लोग पहला round तब हारे थे..जब 14 दिसंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सरकार को क्लीन चिट दे दी थी. ये लोग दूसरा राउंड तब हारे...जब चौकीदार चोर है..जैसे नारे लगाने के बाद भी कांग्रेस को लोकसभा चुनावों में सिर्फ 52 सीटें मिली, और आज Fake News के सहारे राजनीति करने वाला ये Gang..तीसरा और अंतिम राउंड भी हार गया है . इसलिए अब बीजेपी कह रही है कि कांग्रेस और राहुल गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए

रफाल डील को मुद्दा बनाने का आइडिया राहुल गांधी का था. लेकिन आज जब इस डील पर फैसला आया..तो राहुल गांधी देश में नहीं थे. आज सुबह कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को..उनके जन्मदिन पर श्रद्धांजलि दी. लेकिन राहुल गांधी इन कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुए क्योंकि वो विपश्यना करने के लिए देश से बाहर गए हुए हैं.

आज सुप्रीम कोर्ट ने रफाल डील के साथ ही राहुल गांधी के खिलाफ दायर अवमानना के मामले पर भी फैसला सुनाया. राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना का ये केस...बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने दर्ज कराया था. राहुल गांधी ने चुनाव प्रचार के दौरान सुप्रीम कोर्ट का नाम लेकर कहा था.कि कोर्ट ने भी मान लिया है कि चौकीदार चोर है. हालांकि राहुल गांधी इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांग चुके हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने आज उनकी माफी को मंजूर करते हुए उनके खिलाफ मामला ना चलाने का फैसला दिया है. लेकिन कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि राहुल गांधी को भविष्य में सावधान रहने की ज़रूरत है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि राहुल गांधी ने..ना तो कोर्ट का आदेश पढ़ा और ना ही तथ्यों की जांच की. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि किसी भी नेता को...किसी भी अदालत को अपनी राजनीति का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए . कोर्ट ने क्या कहा मैं आपको पढ़कर सुनाता हूं .

हिंदी की एक बहुत मशहूर कहावत है कि काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती. यानी किसी भी व्यक्ति को बार बार मूर्ख नहीं बनाया जा सकता है. लेकिन ऐसा लगता है कि अदालत के कठघरे में बार बार हारने के बाद भी कांग्रेस रफाल डील मामले में काठ की हांडी को चढ़ाए रखना चाहती है.

कांग्रेस की इस हांडी में सिर्फ झूठ पक रहा है और इस झूठ के सहारे..कांग्रेस अपनी राजनीतिक भूख मिटाना चाहती है.फैसला सुनाने वाले जजों में से एक जज जस्टिस के एम जोसेफ ने भी रफाल डील पर पुनर्विचार याचिका को खारिज किया है. लेकिन उन्होंने इस मामले पर अलग से टिप्पणी भी की है. जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर CBI को इस मामले में कोई शिकायत या अहम जानकारी मिलती है तो वो भविष्य में इस मामले की जांच करने के लिए स्वतंत्र है . लेकिन इसके लिए CBI को सरकार से इजाजत लेनी होगी.

कहा जा रहा है कि राहुल गांधी एक बार फिर विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं. हालांकि कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी Meditation यानी ध्यान करने के लिए..विदेश गए हैं . राहुल गांधी को विपश्यना ध्यान बहुत पसंद है और वो अक्सर विपश्यना करने के लिए देश से बाहर जाते रहते हैं.

विपश्यना का एक अर्थ होता है विशेष दृष्टि या अंतरदृष्टि यानी मन को भटकाने वाले विचारों से ध्यान हटाकर...सत्य की तरफ ध्यान ले जाना . हम उम्मीद करते हैं कि राहुल गांधी की ये आध्यात्मिक यात्राएं..उन्हें एक सुलझा हुआ नेता बनने में मदद करेगी . एक ऐसा नेता...जो झूठ से परहेज़ करता हो और सत्य के मार्ग पर चलने की हिम्मत रखता हो.

हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं..क्योंकि रफाल डील को लेकर राहुल गांधी लगातार भ्रम फैलाते आए हैं. उन्होंने इस डील को लेकर ऐसी कई बातें कहीं और ऐसे कई झूठ बोले...जो निराधाऱ थे. राहुल गांधी की रफाल को लेकर तैयारी इतनी कमज़ोर रही है कि वो आज तक इन लड़ाकू विमानों की सही कीमत नहीं बता पाए हैं . वो अपने बयानों में अक्सर रफाल की अलग-अलग कीमत बताते रहे हैं और कई बार तो खुद के द्वारा दिए गए तथ्यों को भी बदलते रहे हैं.

आज हम राहुल गांधी द्वारा रफाल पर दिए हए कुछ ऐसी ही बयान निकाले हैं. जिन्हें सुनकर आप समझ जाएंगे कि राहुल गांधी की दिलचस्पी रफाल में नहीं थी..बल्कि इसके बहाने वो देश के इतिहास की सबसे बड़ी Fake News को जन्म दे रहे थे. ये Fake News आगे चलकर..डिजाइनर पत्रकारों के लिए ऐसा ईंधन बन गई..जिसकी आग पर झूठी खबरों की रोटियां सेकी गईं और देश की जनता को गुमराह किया गया.

राहुल गांधी ने सिर्फ रफाल की अलग अलग कीमतें ही नहीं बताई बल्कि इस पूरे मामले पर उनका Home Work इतना कमज़ोर था कि वो कभी एक बयान पर टिक नहीं पाए. आज हमने राहुल गांधी के वो पुराने बयान भी निकाले हैं जिसमें उन्होंने बार बार चौकीदार चोर है..तो कहा लेकिन वो ऐसा क्यों कह रहे हैं..इसका कोई आधार पेश नहीं कर पाए.

राहुल गांधी ने 'चौकीदार चोर है' को आज़ाद भारत की सबसे बड़ी Fake News बनाने की कोशिश की. जबकि शायद भारत के पूरे इतिहास की सबसे बड़ी Fake News महाभारत काल से जुड़ी है.महाभारत के युद्ध में अश्वथामा और उनके पिता द्रोणाचार्य ने पांडवों की सेना को तितर-तिबर कर दिया था. पांडवों के लिए पिता पुत्र की इस जोड़ी को रोकना मुश्किल हो गया था.

पांडवों की सेना की हार देख़कर श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कूटनीति का सहारा लेने को कहा. इस योजना के तहत यह बात फैला दी गई कि "अश्वत्थामा मारा गया" जब गुरु द्रोणाचार्य ने धर्मराज युधिष्ठिर से अश्वत्थामा की सत्यता जानना चाही तो उन्होने जवाब दिया-"अश्वत्थामा मारा गया परन्तु हाथी", लेकिन उन्होंने बड़े धीमें स्वर में "परन्तु हाथी" कहा, योजना के तहत श्रीकृष्ण ने उसी समय शन्खनाद किया, जिसके शोर से गुरु द्रोणाचार्य आखिरी शब्द 'परन्तु हाथी' नहीं सुन पाए.

अपने प्रिय पुत्र की मृत्यु का समाचार सुनकर द्रोणाचार्य ने अपने शस्त्र त्याग दिये और युद्ध भूमि में आखें बन्द कर शोक अवस्था में बैठ गये. गुरु द्रोणाचार्य को निहत्था पाकर द्रौपदी के भाई ने तलवार से उनका सिर काट दिया. इसके बाद..पांडवों की जीत होने लगी. महाभारत काल में ये Fake News न्याय के पक्ष में फैलाई गई थी. हालांकि आज भी कुछ लोग कृष्ण और युद्धिष्टर की Fake News वाली इस कूटनीति पर सवाल उठाते हैं.

लेकिन हमें लगता है कि कलयुग में फैलाई जा रही Fake News ज्यादा खतरनाक है. क्योंकि ये न्याय के लिए नहीं बल्कि न्याय के खिलाफ फैलाई जा रही है.रफाल डील को लेकर...कांग्रेस या कांग्रेस का कोई नेता प्रत्यक्ष तौर पर याचिका-कर्ता नहीं बना. बल्कि इस मामले को अदालत में यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और उनके वकील प्रशांत भूषण लेकर गए थे.

82 वर्ष के यशवंत सिन्हा बीजेपी के पूर्व वरिष्ठ नेता हैं और वो दो बार देश के वित्त मंत्री और एक बार विदेश मंत्री भी रह चुके हैं. लेकिन आजकल वो बीजेपी..और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के धुर विरोधी बन चुके हैं.इसी तरह 78 वर्ष के अरुण शौरी भी बीजेपी में रह चुके हैं और वो अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में देश में संचार मंत्री भी थे.

अरुण शौरी एक अर्थशास्त्री हैं...वो पत्रकार भी रह चुके हैं, उनका राजनीतिक करियर भी लंबा रहा है और वो एक मशहूर लेखक भी हैं. लेकिन ऐसा लगता है कि वो रफाल के अर्थशास्त्र को ठीक से नहीं समझ पाए हैं. इसलिए वो इस मामले पर कई कपोल कल्पनाएं लिख चुके हैं.

और 63 साल के प्रशांत भूषण एक मशहूर वकील हैं वो जन-लोकपाल आंदोलन का हिस्सा रहे हैं. आम आदमी पार्टी के भी सदस्य रहे हैं. और आतंकवादी याकूब मेमन की फांसी रोकने के लिए आधी रात को सुप्रीम कोर्ट खुलवाने वाली वकीलों की टीम का हिस्सा भी रहे हैं .

कांग्रेस का झूठ बेनकाब हो गया. याचिका-कर्ताओं की दलीलें काम नहीं आईं और देश में खोजी पत्रकारिता के नाम पर झूठी खबरें फैलाने वाला मीडिया भी कुछ साबित नहीं कर पाया. ऐसे में ये सवाल उठता है कि क्या कुछ नेताओं, वकीलों और डिजाइनर पत्रकारों के इस Gang ने देश के इतिहास की सबसे बड़ी Fake News को तैयार किया. सबसे पहले आपको आज Fake News का अर्थ समझ लेना चाहिए.

दुनिया में Fake News का चलन किस हद तक बढ़ गया है इसका सबसे बड़ा उदाहरण ये है कि Fake News शब्द को पिछले महीने Oxford Dictionary में औपचारिक तौर पर शामिल कर लिया गया है. Oxford ने Fake News को परिभाषित करते हुए कहा है कि ये वो News होती है जिसमें गलत, झूठी और भ्रामक जानकारियां शामिल होती हैं.

Oxford Dictionary के मुताबिक इस शब्द का इस्तेमाल पहली बार 1890 में किया गया था. लेकिन इसे 2016 के बाद से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने लोकप्रिय बनाया है. जो लगातार अपने देश के मीडिया पर Fake News फैलाने का आरोप लगाते रहते हैं.

Fake News कितनी खतरनाक होती है इसका अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इसे अब मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़े खतरों में गिना जाने लगा है. अमेरिका में Doomsday Clock को विनाश के पल से 2 मिनट पीछे सेट करते हुए कहा गया है कि Fake News, जलवायु परिवर्तन और परमाणु बम...

वो मुख्य कारण हैं जिनकी वजह से दुनिया तबाही की तरफ बढ़ रही है. Doomsday का अर्थ है तबाही वाला दिन. और माना जाता है कि इस घड़ी की सुईंया तबाही वाले पल के जितनी करीब होती है सभ्यता का विनाश भी उतना ही करीब होता है.

यानी Fake News एक देश के मीडिया, राजनीति और सामाजिक ताने बाने को नहीं बिगाड़ती..बल्कि पूरी की पूरी मानव सभ्यता के लिए खतरा बन जाती है. रफाल पर फैलाया गया झूठ भी ऐसा ही Fake News था. इस Fake News को फैलाने का काम उन विश्वसनीय चेहरों ने किया..जो हर रात News Channels पर आकर...जनता, गरीबों, छात्रों और अल्पसंख्यकों के हितों की आवाज़ उठाने के दावे करते हैं.

Fake News का निर्माण करने वाली इस फैक्ट्री को कच्चे माल की सप्लाई..यानी झूठे तथ्यों की सप्लाई कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी जैसे नेताओं ने की और इसे Process करने के काम...मीडिया के उस हिस्से ने किया..जो सिर्फ अपने हितों की रक्षा करना जानता है. इन Pseudo Secular पत्रकारों ने राहुल गांधी के दावों को Cross Check नहीं किया, ना ही उनसे कोई सबूत मांगे ना कोई कागज़ात मांगे.

.इन पत्रकारों ने आंखें मूंद कर कांग्रेस और राहुल गांधी के आरोपों को सही मान लिया. मीडिया के जिस हिस्से ने कांग्रेस से सवाल पूछे...और रफाल डील का सच सामने लाने की कोशिश की..उसे मोदी मीडिया, और गोदी मीडिया जैसे शब्द कहे गए.

ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस अकेले चुनाव मैदान में नहीं उतरी थी..बल्कि उसका इन पत्रकारों के साथ गठबंधन था. हो सकता है कि आने वाले समय में राजनीतिक पार्टियां और मीडिया का एक हिस्सा साथ मिलकर चुनाव लड़ने लगें.

मीडिया का ये हिस्सा...यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण जैसे लोगों का साथ दे रहा था. मीडिया के इस हिस्से ने आंखें बंद करके..राहुल गांधी के हर शब्द को सही मान लिया उसे अपने अखबारों के पहले पन्ने पर जगह दी. Headlines बनाया. और कांग्रेस की चुनावी मशीनरी का हिस्सा बन गए.

नेताओं, वकीलों और मीडिया के इस अनैतिक गठबंधन ने...रफाल डील को देश के इतिहास की सबसे बड़ी Fake News में बदल दिया . देश की रक्षा के हित में हुए एक सौदे को इन लोगों ने घोटाला कहना शुरू कर दिया. इस झूठ को राहुल गांधी और दूसरे नेताओं ने हज़ारों बार दोहराया. अपनी रैलियों में बार बार चौकीदार चोर है के नारे लगाए.

फिर मीडिया ने राहुल गांधी का साथ दिया और इस झूठ को अखबारों और News Channels के ज़रिए घर-घर तक पहुंचाया गया . एक झूठ जब बार बार दोहराया जाता है..तो वो कई बार सच लगने लगता है. खासकर जब एक झूठ को कई लोग एक साथ बोलते हैं और बार बार बोलते हैं ..तो आम आदमी को ऐसा लगने लगता है कि इतने सारे लोग झूठ कैसे बोल सकते हैं और वो इन पर यकीन कर लेता है .

लेकिन इन लोगों की मंशा Fake News को Weapon Of mass Disruption में बदलने की होती है. यानी एक ऐसा हथियार..जिसकी मदद से बड़े पैमाने पर गड़बड़ी फैलाई जा सके. झूठ फैलाने वाला मीडिया का एक हिस्सा ये समझ ही नहीं पाया कि नेता..लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर झूठ के हथौड़े से लगातार वार कर रहे हैं और इस वार से..ये स्तंभ टूट भी सकता है. ये लोग सोचते रहे कि नेता इस स्तंभ पर चोट नहीं कर रहे..बल्कि उनकी पीठ थपथा रहे हैं .

लेकिन आज देश की जनता के सामने इन लोगों का सच आ चुका है. इसलिए फैसला आपको करना है कि आपको सच का साथ देने वाले मीडिया की प्रशंसा करनी है..या फिर झूठ का कारोबार करने वाले पत्रकारों को ही...जनता का सच्चा हितैषी समझना है .

पत्रकारिता का एक प्रमुख सिद्धांत है सत्ता से सवाल पूछना लेकिन इस सिद्धांत पर सवार होकर रफाल के लिए एजेंडा वाली खबरें प्रकाशित की गईं. ऐसा लगता था जैसे मीडिया के एक वर्ग ने मान लिया था कि रफाल डील में काल्पनिक घोटाला हुआ. रफाल के बारे में राहुल गांधी के Fake न्यूज़ पर मीडिया के एक खास हिस्से ने आंखें मूंदकर भरोसा किया था.

और ऐसा करके ये डिजाइनर पत्रकार राहुल गांधी की चुनाव प्रचार टीम का हिस्सा बन गए थे. सबसे पहले राहुल गांधी किसी चुनाव प्रचार में रफाल पर एक नया आरोप लगाते थे. उसके बाद ये डिजाइनर पत्रकार राहुल गांधी की बातों को Trend कराने के लिए खबरें बनाते थे. ऐसे तर्क देते थे जिससे लगता था कि सचमुच में एक बड़ा घोटाला हो गया है.

इस तरह सरकार के खिलाफ राहुल गांधी और एजेंडा चलानेवाले पत्रकारों ने मिलकर दो तरफा मोर्चा खोल दिया था. सिर्फ राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों पर भरोसा करके रफाल पर ऐसी Headlines और खबरें छापी गईं. मानो ये भारत का सबसे बड़ा रक्षा घोटाला हो. आज हमने ऐसी ही खबरों का एक Collection तैयार किया है.

18 फरवरी 2018 को National Herald ने शीर्षक दिया Rafale Jet Deal: Mother of all defence scams यानी रफाल डील. सबसे बड़ा रक्षा घोटाला है. वैसे इस हेडलाइन पर किसी को हैरानी नहीं होगी, क्योंकि National Herald कांग्रेस का मुखपत्र है.

29 जुलाई 2018 को कांग्रेस ने रफाल मुद्दे पर Self Goal कर दिया. National Herald ने पहले पेज पर एक article लिखा जिसकी Headline थी... Rafale: Modi's Bofors... इसका मतलब है कि कांग्रेस के अख़बार में ही बोफोर्स को घोटाला मान लिया. रफाल पर कांग्रेस का ये हमला 'आत्मघाती' था... क्योंकि इससे ऐसा लगा मानो कांग्रेस ने बोफोर्स में घोटाला होने की बात को स्वीकार कर लिया.

4 अक्टूबर 2018 को The Print... ने रफाल के लिए Headline दी... Rafale deal is Bofors many times over, what it lacks is a V.P. Singh.... यानी रफाल डील... बोफोर्स घोटाले से कई गुना बड़ी है...इसमें सिर्फ एक वीपी सिंह की कमी है.

22 नवंबर 2017 को The Wire ने लिखा Modi Should Explain How Rafale Deal Went From 95% Complete to Zero in Two Weeks... इस खबर में सवाल उठाए गए कि... यदि 126 रफाल विमानों का सौदा 95 प्रतिशत पूरा हो गया था तो उसे रद्द क्यों किया गया .

पत्रकारिता का एक और मूल सिद्धांत है.. निष्पक्षता . यानी सच और झूठ... न्याय और अन्याय जैसे मामलों में तटस्थ रहने के बदले... निष्पक्ष रहकर, सच और न्याय का साथ दिया जाना चाहिए . ये झूठ देश के सामने रखकर जनता के दिमाग में शक पैदा करने की कोशिश की गई . राहुल का समर्थन करनेवाले पत्रकारों ने अदालत के फैसले का इंतजार नहीं किया...

और सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया था . इन Headlines को देखकर आप समझ गए होंगे कि कुछ पत्रकारों ने खबरों में निष्पक्षता का पालन करना जरूरी नहीं समझा . इन पत्रकारों का एक मकसद ये भी था कि... ऐसा करने से इन्हें बड़े बड़े अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिलेंगे और आगे भी ये लोग देश की जनता के सामने झूठी खबरें परोसते रहेंगे .

आज रफाल पर सत्य की जीत हुई है... आप ये भी कह सकते हैं कि 'फ़ेक न्यूज़ गैंग' पर आज सत्य की 'सर्जिकल स्ट्राइक' हुई है. पाकिस्तान में जब भारतीय सेना ने 'सर्जिकल स्ट्राइक' की थी तो आतंकवादियों का अंत हो गया था... और आज सत्य की स्ट्राइक के बाद रफाल के आसपास झूठ का नामोनिशान नहीं बचा है.

रफ़ाल डील से जुड़े अवमानना के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को माफी दे दी और उन्हें भविष्य में सोच-समझकर बोलने की हिदायत दी.. चुनाव के दौरान झूठ का सहारा लेकर कांग्रेस को 52 सीटें मिल गईं... यानी मतदाताओं को झूठ से प्रभावित करके देश का नुकसान किया जा चुका है.

लेकिन क्या वोटरों को ऐसे नेताओं को माफ करना चाहिए? अगर रफाल पर असत्य राजनीति नहीं की गई होती... तो भी क्या कांग्रेस को इतनी ही सीटें मिलतीं? ऐसे मुद्दों के सहारे राहुल गांधी भी केरल के वायनाड से चुनाव जीतकर सांसद बन गए हैं जनता के प्रतिनिधियों से उम्मीद की जाती है कि वो राजनीतिक जीवन में शुचिता और नैतिकता का पालन करके श्रेष्ठ राजनीतिक संस्कृति को कायम रखेंगे.

लेकिन ऐसे झूठ की वजह से ही नेताओं के प्रति लोगों का भरोसा कम होता है और कोई युवा राजनीति को अपना करियर नहीं बनाना चाहता है. आज देश के इतिहास में सबसे सच्चा फैसला सामने आया है... अगर राहुल गांधी चाहें तो रफाल पर झूठ बोलने के लिए देश से माफी मांग सकते हैं.

और रफाल पर सच्चा बयान दे सकते हैं... लेकिन इससे उनका गुनाह कम नहीं होगा... क्योंकि रफाल पर झूठ बोलकर देश की सुरक्षा से खिलवाड़ किया गया और वायुसेना को मजबूत करने की कोशिश को रोकने की कोशिश की गई.