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Zee Jaankari: चीन और भारत के बीच असली विवाद का विश्लेषण

भारत चीन से ज्यादा सामान खरीदता है. जबकि चीन भारत से कम सामान खरीदता है.

Zee Jaankari: चीन और भारत के बीच असली विवाद का विश्लेषण

आपको ये भी समझना चाहिए कि चीन और भारत के बीच विवाद के असली मुद्दे क्या हैं? कई लोगों को लगता है कि सीमा विवाद और कश्मीर दोनों देशों के बीच विवाद का विषय है. लेकिन ऐसा नहीं है. भारत और चीन के बीच विवाद का सबसे बड़ा विषय व्यापार है. भारत और चीन के बीच बहुत बड़ा व्यापारिक असंतुलन है. भारत चीन से ज्यादा सामान खरीदता है. जबकि चीन भारत से कम सामान खरीदता है. ये व्यापारिक असंतुलन वर्ष 2014 से अब तक 52 प्रतिशत बढ़ चुका है. भारत और चीन के बीच व्यापारिक घाटा साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का है.

चीन चाहता है कि भारत प्रस्तावित REGIONAL COMPREHENSIVE ECONOMIC PARTNERSHIP एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करे. ये 16 देशों के बीच प्रस्तावित एक Free Trade Agreement है. जिसमें चीन और भारत भी शामिल हैं. अगर 16 देशों ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए तो ये दुनिया का सबसे बड़ा व्यापारिक Block बन जाएगा. लेकिन इससे भारत को काफी नुकसान हो सकता है. भारत का इस प्रस्ताव में शामिल ज्यादातर देशों के साथ पहले से Free Trade Agreement है. भारत इस पर हस्ताक्षर करेगा तो भारत के बाज़ार में चीन की स्थिति और मजबूत हो जाएगी. इससे चीन के साथ भारत का व्यापारिक घाटा और बढ़ जाएगा.

चीन का अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध चल रहा है. इसलिए चीन चाहता है कि भारत इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करे. लेकिन भारत को बहुत सावधान रहना होगा. क्योंकि शुरुआत में इससे भारत के किसानों और उद्योगों को नुकसान हो सकता है. हालांकि जानकार मानते हैं कि भविष्य में इससे भारत को फायदा होगा. लेकिन फिलहाल भारत ऐसी स्थिति में नहीं है कि अर्थव्यवस्था के साथ कोई रिस्क ले सके. इसलिए व्यापार और अर्थव्यस्था ही भारत और चीन के बीच बड़े मुद्दे हैं. जिन लोगों को ऐसा लगता है कि चीन कश्मीर पर भारत से बातचीत करेगा और इसे लेकर भारत से रिश्ते बिगाड़ेगा वो गलतफहमी में जी रहे हैं. मोदी और शी जिनपिंग दोनों देशों के संबंधों को साबरमती से वुहान और फिर वुहान से महाबलीपुरम तक लेकर आए हैं.