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Zee Jaankari: भारत-चीन के रिश्ते में भरोसा बढ़ाने के तरीकों का विश्लेषण

वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य गुजरात में साबरमती नदी के किनारे दोनों नेता पहली बार मिले थे तब इनके बीच 12 समझौते हुए और जिनपिंग ने भारत में 1 लाख 40 हजार करोड़ निवेश का वादा किया था

Zee Jaankari: भारत-चीन के रिश्ते में भरोसा बढ़ाने के तरीकों का विश्लेषण

अब आपको बताते हैं कि भारत और चीन के रिश्ते में भरोसा और विश्वास बढ़ाने के लिए कैसे अलग और अनौपचारिक तरीके अपनाए गए? और इससे दोनों देशों क्या क्या हासिल हुआ?

वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य गुजरात में साबरमती नदी के किनारे दोनों नेता पहली बार मिले थे तब इनके बीच 12 समझौते हुए और जिनपिंग ने भारत में 1 लाख 40 हजार करोड़ निवेश का वादा किया था. वर्ष 2015 में शी जिनपिंग ने अपने Home Town शियान में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया था. दोनों देशों के बीच भरोसा और बढ़ा और आतंकवाद के साथ सीमा विवाद पर भी बात हुई.

इसके बाद लगातार दोनों नेता दुनिया के अलग-अलग मंचों पर मिलते रहे. जिससे भारत और चीन के संबंध और बेहतर हुए. वर्ष 2015 से 2017 के बीच मोदी और जिनपिंग 7 बार मिले. कश्मीर पाकिस्तान और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता जैसे मुद्दों पर एक जैसा विचार ना होने के बावजूद दोनों देशों के विकास वाले संबंध लगातार बढ़ते रहे. भारतीय कंपनियों ने चीन में 7 हजार करोड़ का निवेश किया. इसके बदले भारत में 8 गुना ज्यादा करीब 56 हजार करोड़ का Investment किया गया है.

भारत और चीन के संबंध दुनिया के दूसरे देशों के लिए एक सबक हैं कि सीमा विवाद जैसे गंभीर मुद्दों के बावजूद दो देश आपस में बड़े व्यापारिक साझेदार बन सकते हैं. विश्व में शांति बनाए रखने के लिए बाकी देशों को भी ऐसी ही समझदारी दिखानी चाहिए.