ZEE जानकारी: अपनी भाषा पर गर्व कीजिए. उसे सहेज कर रखिए

यूनेस्को की हाल ही में आई रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में करीब 6700 भाषाएं बोली जाती हैं.

ZEE जानकारी: अपनी भाषा पर गर्व कीजिए. उसे सहेज कर रखिए

महाराष्ट्र में अगर वक्त रहते सरकार का गठन हो गया होता तो अबतक वहां पर किसानों और जनता के लिए विकास का काम शुरु हो गया होता . लेकिन राजनीति की वजह से महाराष्ट्र के किसानों की उम्मीदों की बलि दी जा रही है. महाराष्ट्र के पड़ोसी राज्य गुजरात से आज दो तस्वीरें आई हैं. जहां पर किसानों ने अपनी आवश्यकता को आविष्कार की जननी बना दिया है. गुजरात के वडोदरा में किसान बिजली की कमी से परेशान थे... लेकिन अब वो अपनी बिजली का निर्माण खुद कर रहे हैं. और दूसरी तस्वीर है गुजरात के ही जामनगर की. यहां एक High Tech किसान YouTube की मदद से हर महीने लाखों रुपए कमा रहे हैं.

किसान के परिश्रम से तैयार हो रही फसल को अगर वक्त पर पानी ना मिले. तो कई महीनों की मेहनत पर पानी फिर जाता है. वडोदरा के किसानों ने सोलर प्लांट लगाकर पानी की समस्या का इलाज ढूंढ लिया है. सूरज से बनी बिजली दिन में 12 घंटे लगातार मिलती है. किसान इस बिजली से पंप चलाकर अपने खेतों की सिंचाई करते हैं और बची हुई बिजली को बिजली कंपनियों को बेच देते हैं . ये किसानों के लिए डबल फायदा देने वाली योजना है... एक तरफ उनके खेतों की सिंचाई सही समय पर हो रही है. और बिजली बेचने से उन्हें पैसे भी मिल रहे हैं.

वडोदरा की तरह जामनगर में भी एक किसान सिस्टम के भरोसे रहने के बदले आत्मनिर्भर बन कर, कई लोगों की प्रेरणा बन गया . जामनगर के निकुंज वसोया की उम्र 30 वर्ष है... और उन्होंने 7 वर्ष पूर्व YouTube पर अपना Food Channel शुरु किया था. निकुंज अपने ही खेत में 30 अलग अलग प्रकार की सब्जियों की खेती करते हैं. और फिर इन्हीं से काठियावाड़ी व्यंजन तैयार करने का वीडियो तैयार करते हैं. YouTube पर देश विदेश के 10 लाख से ज्यादा लोग इन Videos को देखते हैं. और इन Videos को मिलने वाले Views से होने वाली कमाई का एक हिस्सा निकुंज को भी मिलता है. जितने लोग इन Videos को देखते हैं..

उसके हिसाब से ही कमाई बढ़ती जाती है. अपने Cooking Videos की मदद से निकुंज लाखों लोगों तक पहुंच गए हैं... ये दोनों किसान हमारे देश के लिए एक शुभ समाचार की तरह है.आप भी अपनी चुनौतियों का मुकाबला करने की रणनीति खुद बना सकते हैं. और हर एक काम के लिए नेताओं के भरोसे रहने से छुटकारा पा सकते हैं.

हमारे देश में कहा जाता है कि..कोस कोस पर बदले पानी, चार कोस पर वाणी . यानी हर चार कोस पर वाणी बदल जाती है..भाषा बदल जाती है . भाषाओं के मामले में भारत दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक है . हमारे देश में
अभी लगभग 450 जीवित भाषाएं हैं . लेकिन चिंता की बात है कि हमारे देश की 10 भाषाएं ऐसी हैं जिनके जानकार 100 से भी कम लोग बचे हैं .

भाषाओं का विलुप्त होना...ये सिर्फ भारत की नहीं पूरे विश्व की बड़ी समस्या है . यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र ...वर्ष 2019 को international year of indigenous languages के रूप में मना रहा है . ताकि ऐसी भाषाओं को संरक्षित किया जा सके, जो विलुप्त हो रही हैं.

यूनेस्को की हाल ही में आई रिपोर्ट के मुताबिक

विश्व में करीब 6700 भाषाएं बोली जाती हैं

इनमें से 2 हजार 680 भाषाएं विलुप्त हो रही हैं

भारत की बात करें तो यहां की 197 भाषाएं विलुप्त हो रही हैं

इनमें अहोम, एंड्रो, रंगकास, सेंगमई, तोलचा जैसी भाषाएं हैं

ये सभी भाषाएं हिमालय के आसपास के इलाकों में बोली जाती हैं

कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में ''रंग'' भाषा का जिक्र किया . उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले में धारचूला नाम की जगह है . यहां ''रंग'' समाज के लोग रहते हैं जो अपनी भाषा को बचाने के लिए कोशिश कर रहे हैं . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कोशिश के लिए इन लोगों की तारीफ की . आपको भी आज ये देखना चाहिए कि आखिर उत्तराखंड के ''रंग'' समाज ने अपनी भाषा को कैसे बचाया...और ये भी...कि आज की पीढ़ी के सामने उसकी मातृभाषा को लेकर क्या संकट है?

आपको भाषाओं के बारे में कुछ दिलचस्प जानकारियां देने का वक्त है .

1950 से अब तक भारत की 5 भाषाएं विलुप्त हो चुकी हैं

इस वक्त भारत की 42 भाषाओं पर गंभीर खतरा है

दुनिया में 3,741 ऐसी भाषाएं हैं जिन्हें 1 हजार से भी कम लोग बोलते हैं

Tiniguan ऐसी भाषा है जिसे बोलने वाले लोगों की संख्या सिर्फ 1 है

Papua New Guinea ऐसा देश है जहां दुनिया में सबसे ज्यादा 840 जीवित भाषाएं हैं .

इसलिए अपनी भाषा पर गर्व कीजिए . उसे सहेज कर रखिए . और भाषा को सिर्फ लिखने पढ़ने का ज़रिया नहीं..बल्कि अपनी जीवनशैली समझिए .