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Zee Jaankari: क्या ट्रेनिंग से सिखाया जा सकता है राष्ट्रवाद?

अब आपको बताते हैं आखिर राष्ट्रवाद है क्या ? हमने जब राष्ट्रवाद की परिभाषा खोजने की कोशिश की तो हमें पता चला कि राष्ट्रवाद की कोई एक तय परिभाषा नहीं है. 

Zee Jaankari: क्या ट्रेनिंग से सिखाया जा सकता है राष्ट्रवाद?

अब आपको बताते हैं आखिर राष्ट्रवाद है क्या ? हमने जब राष्ट्रवाद की परिभाषा खोजने की कोशिश की तो हमें पता चला कि राष्ट्रवाद की कोई एक तय परिभाषा नहीं है . आप कह सकते हैं कि इसकी कोई सीमित परिभाषा नहीं है .राष्ट्रवाद एक ऐसा विषय है जिसकी व्याख्या सदियों से अलग-अलग रूप में होती रही है .अमेरिकी इतिहासकार प्रोफेसर हैंस कोन (Prof. Hans Kohn) के मुताबिक....एक ऐसी मानसिक स्थिति जहां हर व्यक्ति राष्ट्र के प्रति समर्पण को अपना सबसे बड़ा दायित्व मानता हो . वही राष्ट्रवाद है . उन्होंने ये भी कहा कि राष्ट्रवाद को किसी पर थोपा नहीं जा सकता.

राष्ट्रवाद की एक और परिभाषा है...लोगों की सामूहिक आस्था...यानी राष्ट्रवाद या Nationalism लोगों की सामूहिक आस्था का नाम है, जिसके तहत वे ख़ुद को साझा इतिहास, परम्परा, भाषा, जातीयता और संस्कृति के आधार पर एकजुट मानते हैं . 2 अक्टूबर को एक अखबार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी पर एक लेख लिखा था.

इस लेख में उन्होंने गांधी जी के राष्ट्रवाद की परिभाषा बताई थी . प्रधानमंत्री ने लिखा था कि..मानवता की सेवा के लिए काम करना ही राष्ट्रवाद है . और राष्ट्रवादी हुए बिना किसी का अंतर्राष्ट्रीयवादी होना नामुमकिन है . अंतर्राष्ट्रीयता तभी संभव है जब राष्ट्रवाद एक तथ्य के तौर पर उभरे.

4 अक्टूबर को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने World Economic Forum के मंच से दुनिया को भारत के राष्ट्रवाद का संदेश दिया . उनके मुताबिक, एक ही समय में राष्ट्रवादी रहना और दूसरे देशों के साथ मिलकर रहने में कोई विरोधाभास नहीं है. भारत में राष्ट्रवाद की बात करने वाली राजनीतिक पार्टियों को अक्सर देश को बांटने वाला कहा जाता है. जबकि सच ये है कि राष्ट्रवाद देश को बांटने वाली नहीं बल्कि जोड़ने वाली विचारधारा है.

इजरायल की  Hebrew University of Jerusalem के प्रोफेसर और इतिहासकार Yuval Noa Harari के मुताबिक दुनिया के सबसे सफल और शांतिपूर्ण देश वो हैं, जहां राष्ट्रवाद की विचारधारा बहुत मजबूत हैं. इनमें जापान, स्विटज़रलैंड, और स्वीडन जैसे देश शामिल हैं. जबकि जिन देशों में राष्ट्रवाद की विचारधारा बहुत कमज़ोर हैं वो देश दुनिया के सबसे गरीब और हिंसाग्रस्त देशों में शामिल हैं.

आप इसे कांगो, सोमालिया और अफगानिस्तान जैसे देशों के उदाहरण से समझ सकते हैं . Yuval Noah Harari के मुताबिक राष्ट्रवाद आपको बताता है कि आपके देश की कुछ विशेषताएं है और आपको अपने देश के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए. भारत की भी अपनी विशेषताएं हैं इसलिए भारत की विशेषताओं पर गर्व करना असली राष्ट्रवाद है.

ये राष्ट्रवाद अब दुनिया के कई हिस्सों में अपनी जड़ें मजबूत कर रहा है . इसे आपको कुछ उदाहरणों से समझना चाहिए . अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump एक राष्ट्रवादी नेता माने जाते हैं. Trump चाहते हैं कि उनके देश में गैरकानूनी तरीके से घुसने वाले लोगों पर रोक लगाई जाए . और इसके लिए सख्त कानून बनाए जाए . वो अमेरिका और Mexico के Border पर दीवार बनाकर घुसपैठ को रोकने की कोशिश कर रहे हैं.

लेकिन अमेरिका के बुद्धिजीवी, और डिजाइनर  पत्रकार उनका ये कहकर विरोध कर रहे हैं कि Donald Trump को मानवता की चिंता नहीं है. इसी तरह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Boris  johnson को भी राष्ट्रवादी नेता माना जाता है . जून 2016 में ब्रिटेन के लोगों ने Voting के ज़रिए European Union से अलग होने का फैसला लिया था . माना जाता है कि राष्ट्रवाद की वजह से ब्रिटेन के लोग...

.यूरोप के साथ नहीं रहना चाहते थे . ब्रिटेन के लोग भी अब अपने देश के संसाधनों को दूसरों के साथ बांटने के पक्ष में नहीं हैं . ब्रिटेन में आतंकवाद की घटनाओं में प्रवासियों का शामिल होना भी..बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है. इटली में भी राष्ट्रवादी और दक्षिणपंथी नेता Maitteo Salvini (माटेओ सल्वीनी) वर्ष 2018 में सत्ता में आए थे .

उन्हें इटली का उप प्रधानमंत्री बनाया गया था .उनकी पार्टी Northern League भी अफ्रीकी देशों से आने वाले प्रवासियों का विरोध करती  रही है. वर्ष 2017 में जर्मनी की Alternative for Germany नामक पार्टी को चुनावों में 12 प्रतिशत वोट मिले थे . ये भी एक दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी पार्टी है . जिसका गठन सिर्फ 8 साल पहले हुए था . और 8 वर्षों में ही ये जर्मनी की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बन गई है. जापान में भी राष्ट्रवादी पार्टी Nippon Kaigi (निप्पोन काइगी) इस वक्त सत्ता में और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे..इस पार्टी के अध्यक्ष हैं .

यानी दुनिया के सफल देशों में राष्ट्रवाद बहुत तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है . औऱ कई देशों ने इसी राष्ट्रवाद की बदौलत...सफलता की ऊंचाइयों को छुआ है.आखिर भारत में राष्ट्रवाद का उदय कैसे हुआ? इसकी सही-सही व्याख्या कर पाना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन भारत में एक बात जो निश्चित तौर पर कही जा सकती है कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भावना प्राचीन काल से ही भारतीयों में मौजूद रही है. प्राचीन काल के चार धाम, पवित्र नदियां, धर्म-संस्कृति, रीति रिवाज और सांस्कृतिक परंपराओं ने भारत को राष्ट्रीयता के एक सूत्र में बांधने का काम किया.

हमने कश्मीर से कन्याकुमारी तक राष्ट्रवाद के एक सूत्र में पिरोकर देश की एकता, अखंडता की भावना को मुखर किया है .महान कूटनीतिज्ञ चाणक्य के मुताबिक राष्ट्रवाद का अर्थ है सबसे पहले राष्ट्र की सुरक्षा . राष्ट्र के मान सम्मान, सभ्यता संस्कृति की रक्षा करना ही राष्ट्रवाद है . अब सवाल ये उठता है कि जिस राष्ट्रवाद के स्वरूप पर आज हम चर्चा कर रहे हैं उसकी शुरुआत कहां से हुई.

आधुनिक भारत में राष्ट्रवाद के उदय की कुछ खास वजहें हैं. पहली वजह... 1857 की क्रांति... प्रथम स्वतंत्रता संग्राम ने भारतीयों में राष्ट्रवाद की भावनाओं को भरने में मुख्य भूमिका निभाई. इसे सैनिक विद्रोह की भी संज्ञा दी गई लेकिन आप इस घटना को आधुनिक भारत में राष्ट्रवाद का बीजारोपण भी कह सकते हैं. दूसरी वजह...

19वीं सदी के सामाजिक और धार्मिक आन्दोलन... 19वीं सदी के प्रारंभ में सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र में ब्रह्म समाज, आर्य समाज, रामकृष्ण मिशन जैसी संस्थाओं ने जनता के अंदर अविश्वास और कुप्रथाओं को खत्म कर राष्ट्रीयता के सूत्र में बांधने में अहम भूमिका निभाई. तीसरी वजह..भारतीय प्रेस और साहित्य.. संवाद कौमुदी, वंदे मातरम्, मराठा और केसरी जैसे समाचार पत्र आजादी के आन्दोलन में राष्ट्रवाद का आईना बन गए.

बंकिम चंद चटर्जी का आनंद मठ क्रांतिकारियों का गीता बन गया और वंदे मातरम् ने भारतीय जनता में राष्ट्रवाद की भावना कूट-कूटकर भर दी. दरअसल, भारत में राष्ट्रवाद का गौरवशाली इतिहास रहा है इसीलिए हमारा मानना है कि राष्ट्रवाद पर राजनीति होने की बजाय हम सभी को इस पर गर्व करना चाहिए.