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Zee Jaankari: स्वदेशी हथियारों से दुनिया का नया सुपरपावर बनेगा चीन!

आज People’s Republic of China की स्थापना के 70 वर्ष पूरे हो गए हैं. इस मौके पर चीन की राजधानी बीजिंग में एक शानदार परेड का आयोजन किया गया.

Zee Jaankari: स्वदेशी हथियारों से दुनिया का नया सुपरपावर बनेगा चीन!

आज हम DNA की शुरुआत चीन से आई कुछ शानदार तस्वीरों के साथ करेंगे. आज People’s Republic of China की स्थापना के 70 वर्ष पूरे हो गए हैं. इस मौके पर चीन की राजधानी बीजिंग में एक शानदार परेड का आयोजन किया गया. आज से ठीक 70 वर्ष पहले 1 अक्टूबर 1949 को People’s Republic of China यानी चीन लोक गणराज्य की स्थापना हुई थी . और Mao Zedong के नेतृत्व में चीन में Communist Party की सरकार बनी थी.
Mao Zedong ने ना सिर्फ चीन की सत्ता हासिल की. बल्कि, देखते ही देखते कुछ ही दशकों के भीतर चीन, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया.

चीन गणराज्य के 70 साल पूरे होने के मौके पर आज चीन की राजधानी बीजिंग में एक भव्य परेड का आयोजन किया गया. जिसमें चीन ने दुनिया को ये दिखाने की कोशिश की...कि उसे आज Super Power क्यों कहा जाता है.

आज हम भारत की चुनौतियों, सफलताओं और असफलताओं को चीन की विकास यात्रा के नज़रिए से समझने की कोशिश करेंगे. और इसके लिए हम चीन का S.W.O.T ANALYSIS कर रहे हैं . SWOT में S का मतलब है STRENGTH यानी ताकत...W का अर्थ है WEAKNESS यानी कमज़ोरी . O का अर्थ है OPPORTUNITIES मतलब अवसर और T यानी THREATS का अर्थ है खतरे.सबसे पहले आपको चीन की STRENGTH यानी ताकत के बारे में बताते हैं.
इस परेड के दौरान दुनिया के सबसे शक्तिशाली सैन्य हथियारों का प्रदर्शन किया गया . अमेरिका तक वार करने में सक्षम intercontinental ballistic मिसाइलों को भी इस परेड में शामिल किया गया था . इस मौके पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत...उनके महान देश की बुनियाद को हिला नहीं सकती.

सैन्य परेड के बाद चीन की सांस्कृतिक...ऐतिहासिक और राजनीतिक विरासत का प्रदर्शन किया गया . शी जिनपिंग ने अपनी limousine में सवार होकर...इस परेड का मुआयना किया. कुछ लोग इसे चीन का दिखावा कह रहे हैं तो कुछ लोगों का मानना है कि चीन में तानाशाही है . इसलिए चीन दुनिया को इस तरह से अपनी ताकत दिखा रहा है.

चीन 70 वर्षों में 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सक्षम रहा है.चीन का लक्ष्य वर्ष 2020 तक अपने देश से गरीबी को पूरी तरह खत्म करना है .पिछले 70 वर्षों में हर 8 साल के दौरान चीन की अर्थव्यस्था का आकार दोगुना होता रहा है. वर्ष 2050 तक चीन की अर्थव्यवस्था अमेरिकी से दोगुनी हो जाएगी, हालांकि कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन ये चमत्कार..2030 से पहले भी कर सकता है. हालांकि चीन को अभी भी एक विकासशील देश माना जाता है. लेकिन ऐसा इतिहास में पहली बार हो रहा है जब कोई विकासशील देश...दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है.

ये भी सच है कि चीन ने आर्थिक तरक्की का सफर 70 वर्ष पहले नहीं..बल्कि सिर्फ 41 साल पहले शुरु किया था. 1978 में चीन में डेंग ज़ाओपिंग सत्ता में आए और उन्होंने उदारीकरण की शुरुआत की, यानी चीन ने दुनिया के लिए अपने दरवाज़े भारत से 13 वर्ष पहले खोल लिए थे . भारत में आर्थिक उदारीकरण का दौर 1991 में शुरु हुआ था.

1978 में चीन की अर्थव्यवस्था सिर्फ 150 बिलियन डॉलर्स यानी आज के हिसाब से 10 लाख करोड़ रुपये थी. जबकि आज भारत का बजट ही 27 लाख करोड़ रुपये है . चीन की अर्थव्यवस्था 1997 में बढ़कर 1 ट्रिलियन डॉलर्स यानी 73 लाख करोड़ रुपये हो गई. और आज चीन की अर्थव्यवस्था भारत से 4 गुना ज्यादा बड़ी है . जिसका आकार 12 ट्रिलियन डॉलर्स का है. ये 853 लाख करोड़ रुपये के बराबर है.

वर्ष 1980 में चीन World Bank और International Monetry Fund का सदस्य बना और चीन में चार Special Economic Zones बनाए गए. दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनियां चीन आने लगीं, क्योंकि चीन में Labour Cost बहुत कम है . इस लिए चीन कुछ ही वर्षों में दुनिया की Factory बन गया .

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सबसे बड़े नेताओं में से एक.. Deng Xiaoping (डेंग ज़ाओपिंग )ने एक बार कहा था कि समाजवाद का मतलब गरीबी नहीं है, अमरी होना भी यशस्वी होने के बराबर है.आज चीन सिर्फ आर्थिक तौर पर ही नहीं बल्कि सैन्य और कूटनीतिक तौर पर भी दुनिया के शक्तिशाली देशों में शामिल है .

लेकिन इस विकास यात्रा में चीन ने कभी भी अपनी सांस्कृतिक विरासत को नज़र अंदाज़ नहीं किया बल्कि अपनी एतिहासिक और सामाजिक पहचान को बड़े गर्व के साथ दुनिया के सामने रखा. आधुनिक इतिहास में ऐसा पहली बार है, जब दुनिया की किसी Super Power का संबध..पश्चिम से नहीं पूर्व से है .