Zee Jaankari: 17 नवंबर से पहले राम मंदिर को लेकर आ जाएगा फैसला, ये है 4 संभावना

491 वर्ष पुराने अयोध्या विवाद में भारत के करीब 108 करोड़ हिंदू सुप्रीम कोर्ट की तरफ देख रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा है कि वो 17 नवंबर से पहले राम मंदिर को लेकर फैसला सुना देगा.

Zee Jaankari: 17 नवंबर से पहले राम मंदिर को लेकर आ जाएगा फैसला, ये है 4 संभावना

491 वर्ष पुराने अयोध्या विवाद में भारत के करीब 108 करोड़ हिंदू सुप्रीम कोर्ट की तरफ देख रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा है कि वो 17 नवंबर से पहले राम मंदिर को लेकर फैसला सुना देगा. आपने शायद कभी सोचा भी नहीं होगा आप जीते जी राम मंदिर विवाद में फैसले के साक्षी बनेंगे. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि क्योंकि पिछले करीब 70 वर्षों से इस विवाद को लेकर देश की अदालतों में बहस होती रही, निचली अदालतों ने इस संबंध में फैसले भी सुनाए, लेकिन कभी कोई ऐसा रास्ता नहीं निकला जो इस विवाद से जुड़े हिंदू और मुस्लिम पक्ष को एक साथ मंजूर हो. लेकिन अब हो सकता है कि आपको इसी वर्ष राम मंदिर निर्माण की तारीख का पता चल जाए.

इस साल 27 अक्टूबर को दीवाली है. दीवाली का त्योहार भगवान राम के अयोध्या वापस लौटने की खुशी में मनाया जाता है. और हो सकता कि इस बार राम भक्तों को एक महीने में दो बार दीवाली मनाने का मौका मिल जाए. आज सुप्रीम कोर्ट में कुछ ऐसा हुआ है, जिससे लग रहा है कि इस साल नवंबर में 'राम जन्मभूमि केस' में अंतिम फैसला आ जाएगा.

आज हम इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का विश्लेषण करेंगे. और ये बताने की कोशिश करेंगे कि इस मामले में देश का सर्वोच्च न्यायलय क्या फैसला सुना सकता है. 90 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के दौरान एक नारा.. 'राम लला हम आएंगे...मंदिर वहीं बनाएंगे' बहुत चर्चित हुआ था. अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि है इसलिए देश के करोड़ों हिंदू चाहते हैं कि वहीं राम मंदिर का निर्माण किया जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या फैसला सुनाएगा ये जानने के लिए आपको पूरे एक महीने का इंतजार करना होगा.

आज का दिन इस पूरे मामले में एक Turning Point है क्योंकि आज भगवान श्री राम 'तारीख पर तारीख' वाले चक्रव्यूह से बाहर निकल चुके हैं. आज सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले पर सुनवाई हुई.  इस दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि सुनवाई 18 अक्टूबर तक खत्म होनी चाहिए. जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट हर शनिवार को भी सुनवाई करने को तैयार है. इसके साथ ही जरुरत पड़ने पर रोजाना एक घंटे तक अतिरिक्त सुनवाई भी की जा सकती है. इसके साथ ही चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने ये भी कहा कि अगर 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी हो जाती हैं, तो उन्हें फैसला लिखने के लिए चार हफ्तों का समय मिल जाएगा .

यहां आपको ये भी बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं . इसके अलावा आज सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर से मध्यस्थता का मुद्दा भी उठा. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़ा से मिले एक पत्र का उल्लेख किया. पत्र में मध्यस्थता पैनल के जरिए मंदिर मुद्दे का समाधान खोजने की मांग की गई थी.

इस पर जस्टिस रंजन गोगोई ने साफ किया कि मंदिर मुद्दे पर सुनवाई बहुत आगे तक पहुंच गई है. अगर पक्षकार मध्यस्थता के माध्यम से विवाद हल करना चाहते हैं, तो कर सकते हैं. लेकिन इस दौरान सुनवाई जारी रहेगी. चीफ जस्टिस ने ये भी साफ कर दिया कि मध्यस्थता पैनल की गोपनीयता बनी रहनी चाहिए.

कहने का मतलब ये है कि अगर मध्यस्थता पैनल के माध्यम से मंदिर विवाद का कोई समाधान निकलता है, तो ठीक है, नहीं तो 17 नवंबर के पहले सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना देगा. ये भारत का सबसे लंबा चलने वाला कानूनी विवाद है.  इसलिए अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि नवंबर में क्या फैसला आ सकता है. 

आज हम आपको इसकी चार संभावनाओं के बारे में बताएंगे. पहली संभावना ये है कि सुप्रीम कोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखे. 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन जजों की पीठ ने अयोध्या विवाद में फैसला सुनाया था.  फैसले में विवादित 2.77 एकड़ के स्थान को तीन बराबर हिस्सों में बांट दिया गया था. 

एक हिस्सा रामलला विराजमान को, और दूसरा हिस्सा निर्मोही अखाड़े को दिया गया था .  जबकि तीसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया था.  दूसरी संभावना ये है कि पूरी विवादित जमीन हिन्दू पक्षकारों यानि निर्मोही अखाड़े और रामलला विराजमान को दे दी जाए. तीसरी संभावना ये है कि पूरी विवादित जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को दे दी जाए. चौथी संभावना ये भी है कि सभी पक्षकारों के दावों से संतुष्ट ना होने पर जमीन सरकार को सौंप दी जाए.