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Zee Jaankari: ट्रैफिक कानूनों में डिस्काउंट यानि मौत की गारंटी!

हेलमेट पहनना लोगों को Fashion के विरुद्ध लगता है . सीट बेल्ट लगाना लोगों के लिए बंधन जैसा हो जाता है . 

Zee Jaankari: ट्रैफिक कानूनों में डिस्काउंट यानि मौत की गारंटी!

कल DNA में हमने आपको इंसानों की आत्महत्या के बारे में बताया था. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे कानून के बारे में बताएंगे जिसकी हत्या देश के अलग-अलग राज्यों में की जा रही है. इस कानून का नाम है Motor Vehicles Act, 2019. इसे 1 सितंबर से पूरे देश में लागू किया कर दिया गया था. ट्रैफिक नियमों से जुड़े इस नए कानून पर पूरा देश पिछले 11 दिनों से चर्चा कर रहा है. इसके तहत ट्रैफिक नियमों का पालन ना करने वालों पर भारी जुर्माने का प्रावधान है. नए नियम का उद्देश्य ट्रैफिक नियमों का पालन कराकर..

पूरे देश में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है. लेकिन अब तक देश की कई राज्य सरकारें वोट बैंक की खातिर या तो इसे लागू करने से इनकार कर चुकी हैं या फिर इसके प्रावधानों को कमज़ोर कर रही हैं. बीजेपी शासित गुजरात एक ऐसा ही राज्य है. गुजरात सरकार ने नए Motor Vehicles कानून में फेरबदल करके..नियमों का उल्लंघन करने वालों को भारी Discount दे दिया है.

ये Discount 50 से 90 प्रतिशत तक है. अब गुजरात में बिना हेलमेट या बिना सीट बेल्ट लगाए वाहन चलाने पर 1 हज़ार रुपये की जगह सिर्फ 500 रुपये का जुर्माना देना होगा. बिना लाइसेंस के कार चलाने पर 5 हज़ार रुपये की जगह 3 हज़ार रुपये और बिना लाइसेंस के Two Wheeler चलाने पर 5 हज़ार रुपये की जगह सिर्फ 2 हज़ार रुपये का जुर्माना लगेगा. इसी तरह दो पहिया वाहनों पर Trippling करने वालों को एक हज़ार रुपये की जगह सिर्फ 100 रुपये का जुर्माना देना होगा. आप कह सकते हैं कि गुजरात सरकार ने ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों को भारी छूट दे दी है .

हो सकता है किसी और राज्य की सरकार आने वाले दिनों में जुर्माने का प्रावधान ही खत्म कर दें . यानी लोगों को मनचाहे तरीके से वाहन चलाने की आज़ादी दे दी जाएं . या ये भी हो सकता है कि चुनावों से पहले राज्य सरकारें ये ऐलान कर दें कि वो सभी का जुर्माना माफ कर देगी . और जुर्माने की ये सामूहिक माफी...वोट की गारंटी बन जाएगी .

भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक सड़क दुर्घटनाओं में मरने वाले 65 प्रतिशत लोगों की उम्र 18 से 35 वर्ष के बीच होती है . जबकि गुजरात में 18 से 29 वर्ष के वोटर्स की संख्या एक करोड़ से ज्यादा है . यानी इनमें से करीब 65 प्रतिशत लोगों पर दुर्घटना में घायल होने या जान गंवाने का खतरा है. लेकिन गुजरात सरकार के लिए ये एक करोड़ युवा सिर्फ एक करोड़ मतदाता हैं . जिन्हें लुभाने के लिए उनकी जान को खतरे में डाला जा रहा है .गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी कह रहे हैं कि उन्होंने जुर्माने की रकम में कमी..मानवता के आधार पर की है. लेकिन सवाल ये है कि जो कानून इंसानों की जान की रक्षा करने के लिए बनाया गया है, उसे कमज़ोर करके मानवता का भला कैसे हो सकता है ? हैरानी की बात ये है कि गुजरात प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का गृह राज्य है और प्रधानमंत्री मोदी कई बार..

भारत में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को लेकर चिंता जता चुके हैं .गुजरात सरकार के परिवहन मंत्रालय के मुताबिक वर्ष 2017 में राज्य में 20 हज़ार सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें करीब 7 हज़ार लोगों की मौत हो गई थी . यानी गुजरात में हर दिन करीब 20 लोगों की मौत Road Accidents में हो जाती है . फिर भी विजय रुपाणी कह रहे हैं कि उन्होंने गुजरात के लोगों की भलाई के लिए कानून में बदलाव किए हैं .पिछले वर्ष पूरे देश में सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा मौतें उत्तर प्रदेश में हुईं थी . जिन राज्यों में इन मौतों के आंकड़ों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई उनमें गुजरात दूसरे नंबर पर था

.भारत में हर साल करीब 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं . वर्ष 2018 में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या 1 लाख 49 हज़ार थी . इनमें से ज्यादातर मौतें, Over Speeding, सीट बेल्ट ना लगाने, हेलमेट ना पहनने और गलत दिशा में वाहन चलाने की वजह से होती है .वोट बैंक के लिए नए ट्रैफिक नियमों को ठोकर मारने वाला गुजरात अकेला राज्य नहीं है. बल्कि मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, और ओडिशा जैसे राज्य भी इसे लागू करने में ज्यादा रुचि नहीं ले रहे हैं . जबकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस कानून को लागू करने से साफ मना कर दिया है .

वहीं महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखकर कहा है कि इस कानून पर फिर से गौर किया जाए . क्योंकि इसे लेकर लोगों में काफी गुस्सा है . विडंबना ये है कि महाराष्ट्र में भी बीजेपी की सरकार है.नया ट्रैफिक कानून...सड़क पर सुरक्षा की गारंटी बन सकता है . लेकिन इसके लिए सरकारों को वोट बैंक की राजनीति छोड़नी होगी . क्योंकि जिन राज्यों में लोगों के मन में कानून के प्रति डर और सम्मान नहीं होगा वहां एक तरह की अराजकता फैल जाएगी और ये अराजकता विनाशकारी साबित हो सकती है. केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भी राज्य सरकारों से कहा है कि वो New India के निर्माण में सहयोग करें .

हमारा भी ये मानना है कि सख्त कानून ही न्यू इंडिया की बुनियाद को मजबूत बना सकते हैं .अगर आपको भी लगता है कि नया कानून ज़रूरत से ज्यादा सख्त है और इसमें दिए गए चालान के प्रावधानों को कमज़ोर किया जाना चाहिए . तो आपको हमारा आज का ये विश्लेषण देखना चाहिए..क्योंकि सड़क पर सामने से आ रही मौत किसी वोट बैंक से प्रभावित नहीं होती और किसी को कोई Discount भी नहीं देती .अभी जो तस्वीरें आपने देखी वो इस बात प्रमाण हैं कि हमारे देश में लोग कानूनों का पालन जिम्मेदारी समझ कर नहीं करते . बल्कि जुर्माने के डर से करते हैं .

हेलमेट पहनना लोगों को Fashion के विरुद्ध लगता है . सीट बेल्ट लगाना लोगों के लिए बंधन जैसा हो जाता है . जो लोग अपनी और दूसरों की जान की पहवाह नहीं करते...वो पर्यावरण, प्रकृति और समाज की परवाह कैसे करेंगे ? . इन दिनों ज्यादातर शहरों के प्रदूषण जांच केंद्रो पर Pollution Test कराने के लिए लंबी लंबी लाइनें लग रही हैं . ऐसा इसलिए नहीं हो रहा क्योंकि लोग अचानक से पर्यावरण के प्रति जागरुक हो गए हैं . बल्कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि लोगों को भारी जुर्माने का डर सता रहा है . भारत के वायु प्रदूषण में वाहनों से निकलने वाले धुएं की हिस्सेदारी 30 से 40 प्रतिशत है.