ZEE जानकारी: क्या SPG सुरक्षा को कांग्रेस अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानती है?

आज लोकसभा का समय बर्बाद करने की कोशिश करके कांग्रेस ने साबित कर दिया... कि उनके लिए गांधी परिवार की सुरक्षा ही देश का सबसे बड़ा मुद्दा है .

ZEE जानकारी: क्या SPG सुरक्षा को कांग्रेस अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानती है?

अब हम. SPG सुरक्षा को जन्मसिद्ध अधिकार मानने वाली कांग्रेस की सोच का DNA टेस्ट करेंगे. भारत एक कृषि प्रधान देश है. और हमारे देश में किसानों की समस्याएं एक बड़ा मुद्दा है. वर्ष 2022 तक देश के किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है. किसानों से जुड़े ऐसे ही मामलों पर आज लोकसभा में बहस हो रही थी. लेकिन कांग्रेस के लिए किसानों से ज्यादा जरूरी मुद्दा... गांधी परिवार को SPG यानी Special Protection Group की सुरक्षा है. इसलिए कांग्रेस ने किसान Vs SPG के मुद्दे में SPG को चुन लिया . और सदन के अंदर... लगातार SPG सुरक्षा का मुद्दा उठाकर हंगामा किया .

इसी महीने की 8 तारीख को केंद्र सरकार ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की SPG की सुरक्षा हटा दी थी. इसकी जगह उन्हें अब Z PLUS सुरक्षा दी जा रही है. गृहमंत्रालय के मुताबिक गांधी परिवार की सुरक्षा कम नहीं हुई है, केवल सुरक्षा करने वाली एजेंसी बदल गई है . पहले इन्हें SPG सुरक्षा मिली थी और अब उन्हें CRPF के जवान सुरक्षा देते हैं. यानी देश में अब केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास ही SPG सिक्योरिटी है . हालांकि उनके परिवार को भी SPG की सुरक्षा नहीं दी गई है .

आज लोकसभा का समय बर्बाद करने की कोशिश करके कांग्रेस ने साबित कर दिया... कि उनके लिए गांधी परिवार की सुरक्षा ही देश का सबसे बड़ा मुद्दा है . लोकसभा में किसानों की समस्या पर बहस हो रही थी... लेकिन कांग्रेस के हंगामे से ऐसा लगा मानो SPG सुरक्षा भी गांधी परिवार की विरासत हो गई है.

और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है. संसद के अंदर आज तानाशाही बंद करो और विपक्ष पर हमला बंद करो के नारे लगाए गए... और जब लोकसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के सांसदों को समझाने की कोशिश की... तो उन्होंने सदन से Walk Out किया . यानी किसानों का भला करने से ज्यादा कांग्रेस को चिंता गांधी परिवार की सुरक्षा की है.

गृहमंत्रालय के मुताबिक Z PLUS सुरक्षा में भी सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की सुरक्षा उतनी ही मजबूत होगी जितनी पहले थी .गांधी परिवार को पूरे देश में कहीं भी यात्रा के दौरान Bulletproof कार और एडवांस में सुरक्षा टीम मिलेगी... काफिले में Jammers की सुविधा भी होगी... जो बम धमाके से सुरक्षा दे सकते हैं.

SPG कवर में भी ऐसी ही सुरक्षा होती है. CRPF के पास Bulletproof गाड़ियों की कमी है... इसलिए उन्होंने SPG और गृह मंत्रालय से उन Bulletproof गाड़ियों की मांग की. जिन्हें SPG इस्तेमाल कर रही है. CRPF के मुताबिक ये गाड़ियां ज्यादा बेहतर हैं. गृह मंत्रालय ने गांधी परिवार के सुरक्षा प्रोटोकॉल पर राज्य सरकारों को चिट्ठी लिखी है. सूत्रों के मुताबिक इस चिट्ठी में CRPF की तरफ से गांधी परिवार के नए सुरक्षा प्रोटोकॉल का जिक्र है.

SPG सुरक्षा हटाने का एक दूसरा पक्ष भी है. जब सरकार ने गांधी परिवार को SPG सुरक्षा दी हुई थी.

तो उन्होंने सैकड़ों बार SPG प्रोटोकॉल को फॉलो नहीं किया था. और जब सरकार ने इसे वापस ले लिया. तो कांग्रेस इसे बदले की कार्रवाई बता रही है. पिछले 4 वर्षों में गांधी परिवार ने कुल मिलाकर 22 सौ से ज्यादा मौकों पर SPG सुरक्षा के प्रोटोकॉल को तोड़ा है. सिर्फ राहुल गांधी ने वर्ष 2015 से मई 2019 तक 1892 बार SPG का प्रोटोकॉल तोड़ा है.

1892 बार राहुल गांधी ने Bulletproof कार का इस्तेमाल नहीं किया था.इसी अवधि में सोनिया गांधी 24 बार बिना SPG सुरक्षा के विदेश यात्रा पर गईं. और उन्होंने 50 बार Bulletproof कार का इस्तेमाल नहीं किया था. इसी तरह प्रियंका गांधी वाड्रा ने 339 बार Bulletproof कार का इस्तेमाल नहीं करके. SPG प्रोटोकॉल को नहीं माना. सवाल है कि क्या गांधी परिवार को अब भी SPG सुरक्षा की जरूरत है?

जिन खतरों की वजह से गांधी परिवार को SPG सुरक्षा दी गई थी. क्या वो अब भी मौजूद हैं? वर्ष 1991 में आतंकवादी संगठन LTTE यानी Liberation Tigers of Tamil Eelam ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी थी. LTTE के खतरे को देखते हुए सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को SPG की सुरक्षा मिली थी. लेकिन मई 2009 में LTTE के प्रमुख वी प्रभाकरण के मारे जाने के बाद इस आतंकवादी संगठन का अस्तित्व लगभग खत्म हो चुका है. यानी अब LTTE का कोई खतरा नहीं है.

पिछले 10 सालों में आतंकवाद का स्वरूप बदल चुका है. आज देश को सबसे बड़ा खतरा इस्लामिक आतंकवादी संगठनों से है. ऐसे आतंकवादी संगठनों के सीधे निशाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और RSS से जुड़े लोग हैं. इनमें से ज्यादातर आतंकवादी संगठन पाकिस्तान के समर्थन से भारत को निशाना बनाते हैं .

और इनके बयानों से ऐसा नहीं लगता है कि कांग्रेस के बड़े नेता उनके निशाने पर हैं . कांग्रेस के मणिशंकर अय्यर जैसे नेताओं की पाकिस्तान में तारीफ होती है... वो वहां जाकर भारत में अपनी सरकार बनाने के लिए मदद भी मांगते हैं. और हाफिज सईद जैसे मोस्ट वांटेड आतंकवादी तो कांग्रेस की तारीफ करते भी नजर आते हैं.

SPG सुरक्षा पर कांग्रेस के आरोप में कितनी सच्चाई है और कितनी राजनीति. इसे समझने के लिए SPG के इतिहास को समझना जरूरी है. वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उन्हीं के सुरक्षाकर्मियों ने हत्या कर दी थी. जून 1984 में Operation Blue Star के बाद खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों से उनको खतरा था. और 31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री आवास में ही उनकी हत्या कर दी गई थी. इसके बाद ही प्रधानमंत्री की सुरक्षा को मजबूत और अभेद्य बनाने के लिए 1985 में SPG का गठन किया गया. और तीन साल बाद वर्ष 1988 में SPG एक्ट संसद में पास हो गया.

शुरुआत में ये सिर्फ प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए था लेकिन मई 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद SPG एक्ट में संशोधन किया गया था. संशोधन के बाद प्रधानमंत्री के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिवार के करीबी लोगों की सुरक्षा भी SPG के दायरे में आ गई थी. वर्ष 1991 से 2003 तक पूर्व प्रधानमंत्री और उनके पत्नी और बच्चों को 10 साल तक के लिए SPG सुरक्षा दी जाती थी.

लेकिन वर्ष 2003 में SPG एक्ट में संशोधन कर इसे 10 साल से घटाकर एक साल के लिए कर दिया गया था. यानी पद से हटने के एक साल के बाद अगर पूर्व प्रधानमंत्री, उनकी पत्नी और बच्चों को किसी आतंकी संगठन से खतरे का अंदेशा हो तो SPG सुरक्षा दी जा सकती है. और अगर खतरा नहीं हो तो SPG कवर हटाकर दूसरी सुरक्षा दी जाती है.

15 अक्टूबर 1991 से गांधी परिवार के तीनों सदस्य यानी सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को लगातार SPG सुरक्षा मिल रही थी . नियम के मुताबिक समय-समय पर सुरक्षा की समीक्षा होती रही है... लेकिन ज्यादातर समय कांग्रेस या कांग्रेस समर्थित सरकार होने की वजह से गांधी परिवार की SPG सुरक्षा नहीं हटाई गई. आपको जानकर हैरानी होगी कि देश में प्रधानमंत्री के अलावा सिर्फ गांधी परिवार को ही SPG सुरक्षा मिली हुई थी. यहां तक की पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और एचडी देवगौड़ा से भी SPG सुरक्षा वापस ली जा चुकी है.

देश में अभी सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को SPG सुरक्षा प्राप्त है. उनकी सभी यात्राओं के दौरान Special Protection Group उनके साथ रहता है. चाहे वो पैदल यात्रा कर रहे हो, विमान से, रेल से या फिर समुद्री रास्ते से. SPG में इस वक्त करीब 3 हज़ार Commandos हैं, जिन्हें BSF, CISF, ITBP, और CRPF जैसे सुरक्षा बलों से भर्ती किया जाता है.

SPG में शामिल होने के लिए Commandos को बहुत कड़ी Training से गुज़रना होता है. इनकी Training और काम की तुलना. अमेरिका की Secret Service से की जाती है. Secret Service का काम अमेरिका के राष्ट्रपति की सुरक्षा करना होता है. SPG को दुनिया की बेहतरीन सुरक्षा एजेंसियों में एक माना जाता है. इसलिए SPG सुरक्षा पर सियासत करने के बदले इनके जज्बे और परिश्रम का सम्मान होना चाहिए.

देश के दुश्मनों से सबसे ज्यादा खतरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को है. और उनके परिवार को भी SPG की सुरक्षा नहीं दी गई है. हमारे देश की बड़ी समस्या ये है कि यहां सुरक्षा एक Status Symbol बन गई है. और जिस नेता के पास जितनी सुरक्षा होती है. उसका राजनीतिक कद उतना ही बड़ा माना जाता है. पिछले 5 वर्षों से कांग्रेस की राजनीतिक शक्ति लगातार कम हुई है.

2019 लोकसभा चुनाव के बाद तो उनके पास सिर्फ 52 सांसद हैं. लेकिन गांधी परिवार से जुड़ा मुद्दा होने की वजह से... कांग्रेस SPG सुरक्षा पर अपना हक मानती है. सियासत में हर तस्वीर के पीछे एक कहानी होती है. और इसका उदाहरण है आज कांग्रेस पार्टी की तरफ से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को दी गई श्रद्धांजलि.

102 वर्ष पूर्व आज ही के दिन. इंदिरा गांधी का जन्म इलाहाबाद में हुआ था. आज के अखबारों में इंदिरा गांधी की तस्वीर के साथ एक संदेश देकर कांग्रेस पार्टी ने उन्हें याद किया है. इस तस्वीर के साथ लिखा गया है. भारत की अदम्य भावना की प्रतीक. लेकिन रुद्राक्ष की मालाओं वाली इस तस्वीर में एक और Political Message छिपा हुआ है.

वो संदेश है कांग्रेस का सॉफ्ट हिंदुत्व. ऐसी तस्वीरों की मदद से कांग्रेस. खुद को देश के बहुसंख्यक समाज के करीब दिखाना चाहती है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी ऐसा ही करते रहे हैं. चुनाव के मौसम में कभी वो रामभक्त बन जाते हैं तो कभी शिवभक्त. कांग्रेस एक तरफ धर्मनिरपेक्षता की बात करती है लेकिन दूसरी तरफ Soft हिंदुत्व का फायदा भी उठाना चाहती है.