ZEE जानकारी: 360 मिनटों में शिवसेना और कांग्रेस का सत्ता हासिल करने टूट गया सपना?

रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच. यानी कुल 360 मिनटों में शिवसेना और कांग्रेस का. सत्ता हासिल करने का सपना टूट गया. इस सपने को तोड़ने के पीछे.. सबसे अहम किरदार थे..अजित पवार.

ZEE जानकारी: 360 मिनटों में शिवसेना और कांग्रेस का सत्ता हासिल करने टूट गया सपना?

रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच. यानी कुल 360 मिनटों में शिवसेना और कांग्रेस का. सत्ता हासिल करने का सपना टूट गया. इस सपने को तोड़ने के पीछे.. सबसे अहम किरदार थे..अजित पवार.अजित पवार का पूरा नाम है अजित अनंत राव पवार . वो NCP के अध्यक्ष शरद पवार के भतीजे हैं . अजित पवार के पिता फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े थे . अजित चाहते तो अपने पिता के पदचिन्हों पर चल सकते थे . लेकिन उन्होंने अपने चाचा शरद पवार की तरह राजनीति को चुना .लेकिन शायद ये बात किसी को नहीं पता थी कि वो राजनीति के सबसे बड़े ड्रामे के Script Writer बन जाएंगे.

अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार का साथ छोड़कर...महाराष्ट्र की राजनीति को Climax तक पहुंचा दिया . लेकिन अभी इस ड्रामे की Happy Ending नहीं हुई है..क्योकि Floor Test यानी विधानसभा में बहुमत साबित करना अभी बाकी है .सुबह 8 बजकर 7 मिनट पर देवेंद्र फड़णवीस..महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन चुके थे. और उनके साथ अजित पवार को उप मुख्यमंत्री का पद मिल चुका था . उस वक्त अजित पवार के साथ 10 से 11 विधायक मौजूद थे . हालांकि सूत्रों का दावा है कि अजित पवार को NCP के कम से कम 22 विधायकों का समर्थन हासिल है.

इसके बाद दोपहर को शिवसेना, कांग्रेस और NCP के बीच एक बैठक हुई . इस बैठक के बाद शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और NCP के अध्यक्ष शरद पवार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की . इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में शरद पवार ने..अजित पवार के साथ गए तीन विधायकों को मीडिया के सामने पेश किया . इन विधायकों ने कहा कि अजित पवार उन्हें गुमराह करके..राजभवन ले गए थे . NCP ने ये भी दावा किया है कि अजित पवार के साथ गए विधायकों में से कुल 8 विधायक लौट आए हैं .

लेकिन हैरानी की बात ये थी कि इस संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस का कोई नेता शामिल नहीं था. कांग्रेस ने इस मामले पर अलग से मीडिया से बात की. यानी कांग्रेस शिवसेना और NCP के साथ भी रहना चाहती और दोनों से एक उचित दूरी भी बनाकर रखना चाहती है .

लेकिन अभी भी किसी को ये समझ नहीं आ रहा है कि NCP पूरी तरह से टूट गई है ? या फिर अजित पवार के दावे कमज़ोर हैं . कुछ लोग ये सवाल भी पूछ रहे हैं कि क्या राजनीतिक शतरंज की ये बिसात खुद शरद पवार ने बिछाई है ? और शिवसेना और कांग्रेस उनके मोहरे बन गए हैं .

इसके बाद शाम को शरद पवार ने अपने विधायकों की एक बैठक बुलाई जिसमें 40 से ज्यादा विधायकों ने हिस्सा लिया और इनमें अजित पवार के करीबी माने जाने वाले. धनजंय मुंडे भी शामिल थे. NCP का दावा है कि अजित पवार के साथ गए..कुछ विधायकों की घर वापसी भी हो चुकी है. यानी अब वो अजित पवार के साथ नहीं हैं .

सबसे बड़ा सवाल शरद पवार को लेकर ही है...क्योंकि राजनीति की भाषा में कहा जाता है कि वो हवा का रुख देखकर ये बता सकते हैं कि भविष्य की राजनीति में क्या होने वाला है . लेकिन इस बार वो ये अंदाज़ा नहीं लगा पाए..कि उनका भतीजा ही उनके पांव तले ज़मीन खिसका रहा है .

पवार फैमिली से एक 'पवार' यानी अजित बीजेपी के साथ जा चुके हैं और दूसरे पवार यानी शरद अभी भी शिवसेना और कांग्रेस के साथ खड़ें है . लेकिन कुछ लोग आज मज़ाक में ये भी कह रहे हैं कि वो शरद पवार नहीं बल्कि Shared पवार बन गए हैं . क्योंकि उनकी पार्टी का एक हिस्सा बीजेपी के साथ है और दूसरा शिवसेना और कांग्रेस के साथ .

शिवसेना कह रही है कि रातों रात सरकार बनाकर..बीजेपी ने लोकतंत्र का गला घोंटा है . लेकिन बीजेपी का कहना है कि जो शिवसेना सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस के साथ चली गई और जिसने अपनी विचारधारा की तिलांजलि दे दी उसे बीजेपी पर सवाल उठाने का कोई हक नहीं है .

20 नवंबर को हुई इस मीटिंग में गृह मंत्री और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी शामिल हुए थे. आज सुबह जब महाराष्ट्र में शपथ की खबर आई तो ऐसा लगा कि बीजेपी- NCP गठबंधन की सरकार शरद पवार की सहमति से बनी है. और इसकी बड़ी वजह मानी जा रही थी- प्रधानमंत्री मोदी और शरद पवार के बीच हुई बैठक. संकेतों की इस राजनीति में, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई NCP की तारीफ भी याद आ रही थी, जो पिछले दिनों उन्होंने संसद में की थी .

लेकिन, शाम होते-होते जब NCP के ज्यादातर विधायक शरद पवार के पास पहुंचने लगे, तब ऐसा लगने लगा कि. NCP में जो रहो रहा है, वो तो परिवार-वाद का नतीजा है. यानी, राजनीति में सिद्धांतों की उम्मीद मत कीजिए . ये कलयुग है, यहां शिष्य ...गुरु का अंगूठा काट लेता है .आज का दिन राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार के लिए सबसे ज्यादा कष्ट देने वाला था क्योंकि आज उनकी पार्टी भी टूटी और अपने भतीजे अजित पवार से रिश्ता भी टूट गया. शरद पवार और अजित पवार के बीच राजनीतिक रिश्ते के अलावा जो रिश्ता बेहद अहम है वो चाचा और भतीजे का रिश्ता है.

अजित पवार को शरद पवार ही राजनीति में लेकर आए और उन्होंने ही अजित पवार को राजनीतिक रूप से आगे भी बढ़ाया. शरद पवार ने ही महाराष्ट्र में कांग्रेस-NCP की सरकार में अजित पवार को मंत्री और उपमुख्यमंत्री जैसे ताकतवर पद दिलाए. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शरद पवार के बाद अजित पवार ही सबसे ताकतवर नेता थे और ये ताकत खुद शरद पवार ने उन्हें दी थी.

चाचा शरद पवार और भतीजे अजित पवार की इस जोड़ी की वजह से सहयोगी कांग्रेस पार्टी महाराष्ट्र में हमेशा दबाव में रहती थी. लेकिन 2006 में जब शरद पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले को राज्यसभा सदस्य बनाया तो अजित पवार को ये संकेत मिल गया था कि उनके पास शरद पवार की एकछत्र विरासत नहीं आएगी .

इसके बाद शरद पवार और अजित पवार के बीच दरार तब पड़ी, जब 2008 में अजित पवार के पक्ष में ज्यादा एनसीपी विधायक होने के बावजूद, शरद पवार ने छगन भुजबल को महाराष्ट्र का उपमुख्यमंत्री बना दिया.कांग्रेस एनसीपी के 15 साल के शासनकाल के दौरान अजित पवार ने कई बार कांग्रेस से गठबंधन तोड़कर शिवसेना के साथ सरकार बनाने की कोशिश की, क्योंकि अजित पवार को उम्मीद थी कि शिवसेना के साथ गठबंधन करने पर मुख्यमंत्री का पद उन्हें मिल सकता है. लेकिन शरद पवार कांग्रेस के साथ ही रहे. अजित पवार को धीरे धीरे ये लगने लगा था कि शरद पवार उन्हें ज्यादा आगे नहीं बढ़ने देना चाहते.

अजित पवार इस बात से भी नाराज थे की शरद पवार उनके बेटे पार्थ पवार को महाराष्ट्र की राजनीति में आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं . शरद पवार के मना करने के बावजूद 2019 के लोकसभा चुनाव में अजित पवार ने अपने बेटे पार्थ पवार को मावल से NCP के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ाया लेकिन पार्थ पवार चुनाव हार गए . अजित पवार को लगा कि शरद पवार नहीं चाहते थे कि पार्थ पवार चुनाव जीतें.

अजित पवार की शरद पवार को लेकर नाराजगी तब और बढ़ी जब 2019 विधानसभा चुनाव में शरद पवार ने अपने एक और भतीजे राजेंद्र पवार के बेटे रोहित पवार को कर्जत जामखेड़ विधानसभा क्षेत्र से NCP का टिकट दिया और रोहित पवार ये चुनाव जीत भी गए. अब अजित पवार को ये महसूस हुआ कि शरद पवार रोहित पवार को आगे बढ़ाकर उनके कद को छोटा करना चाहते हैं .

अक्टूबर महीने में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जब शरद पवार को ED यानी प्रवर्तन निदेशालय का नोटिस आया था उसके बाद अजित पवार ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था और शरद पवार से दो दिनों तक फ़ोन पर भी बात नहीं की थी.

हांलाकि इस पारिवारिक पॉलिटिकल झगड़े में आज भावनाओं का एंगल भी देखने को मिला. जहां अजित पवार ने पूरी तरह से राजनीतिक फैसला लिया. और अपनी ही पार्टी से बगावत करके बीजेपी से हाथ मिलाया. मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के साथ उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. वहीं शरद पवार की बेटी और रिश्ते में अजित पवार की बहन सुप्रिया सुले भाई की बगवात पर दुखी दिखाई दीं. आज सुबह जब उन्हें अजित पवार की बगावत की जानकारी मिली तो उन्होंने सबसे पहले सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी. सुप्रिया सुले ने Whats App पर अपना पहला स्टेट्स अंग्रेजी में अपडेट किया और लिखा.. Party and family split यानी पार्टी और परिवार टूट गया.

सुप्रिया सुले ने एक और वॉट्सऐप स्टेटस लगाया जिसमें उन्होंने लिखा, 'जीवन में क्यों किसी पर भरोसा करें, मैंने खुद को इतना ठगा हुआ पहले कभी महसूस नहीं किया. जिसे इतना प्यार किया, बचाव किया, बदले में देखो क्या मिला सोशल मीडिया पर स्टेट्स अपडेट के बाद सुप्रिया सुले सुबह जब मीडिया के सामने आईं तो उनकी आंखों में आंसू थे . उन्होंने कहा, 'मैं जल्द ही सबकुछ बताऊंगी... हांलाकि इसके बाद उन्होंने मीडिया में परिवार को लेकर अब तक कुछ नहीं कहा है.