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ZEE Jaankari: अंग्रज़ों ने बसाई थी लुटियंस दिल्ली, जानें क्या है इसका इतिहास

वर्ष 1911 में अंग्रेज़ों ने दिल्ली को भारत की नई राजधानी बनाने का फैसला किया. इससे पहले कलकत्ता भारत की राजधानी हुआ करता था. वर्ष 1911 में नई दिल्ली के एक इलाके को अंग्रज़ों की ज़रूरतों के हिसाब से डिजाइन करने का काम शुरू हुआ. इसकी जिम्मेदारी British architect-Sir Edwin Lutyens और Sir Herbert Baker (हर्बट बेकर) को सौंपी गई थी. Edwin Lutyens के नाम पर ही इस इलाके को Lutyens Delhi कहा जाने लगा.

ZEE Jaankari: अंग्रज़ों ने बसाई थी लुटियंस दिल्ली, जानें क्या है इसका इतिहास

दिल्ली के जिस ऐतिहासिक क्षेत्र के रूपांतरण की योजना बनाई जा रही है आज आपको उसके इतिहास के बारे में भी जानना चाहिए. वर्ष 1911 में अंग्रेज़ों ने दिल्ली को भारत की नई राजधानी बनाने का फैसला किया. इससे पहले कलकत्ता भारत की राजधानी हुआ करता था. वर्ष 1911 में नई दिल्ली के एक इलाके को अंग्रज़ों की ज़रूरतों के हिसाब से डिजाइन करने का काम शुरू हुआ. इसकी जिम्मेदारी British architect-Sir Edwin Lutyens और Sir Herbert Baker (हर्बट बेकर) को सौंपी गई थी. Edwin Lutyens के नाम पर ही इस इलाके को Lutyens Delhi कहा जाने लगा.

Lutyens Delhi में ही Lutyens Bungalow Zone भी है जो 26 वर्ग किलोमीटर के इलाके में फैला है. इसी ज़ोन में और इसके आसपास देश के बड़े बड़े मंत्री, सांसद, तीनों सेनाओं के प्रमुख, सुप्रीम कोर्ट और हाइकोर्ट के जज और बड़े अधिकारी रहते हैं. यानी ये एक VIP इलाका है. ये देश के डिजाइनर पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और अंग्रेज़ी बोलने वाली celebreties की भी पसंदीदा जगह है. बुद्धिजीवियों की भाषा में इस जगह को लुटियंस ज़ोन भी कहा जाता है. यहां इन लोगों के कई Clubs और कई ऐसी Coffee Shops हैं जहां बैठकर ये लोग देश के संदर्भ में रणनीतियां बनाते हैं और इन्हीं Coffee Shops में बैठकर ये लोग ये भी तय कर लेते हैं, कि देश में कौन सी पार्टी चुनाव जीत रही है और कौन सी पार्टी चुनाव हार रही है.

हमें इस बात की भी आशंका है कि कुछ लोग इस बदलाव का भी विरोध शुरू कर सकते हैं. हमारे देश में जब भी मुगल कालीन या ब्रिटिश कालीन सड़कों, शहरों और इमारतों के नाम बदले जाते हैं तो कुछ लोग हंगामा शुरू कर देते हैं. लुटियंस दिल्ली को अंग्रज़ों ने बसाया था. अंग्रेज़ इसे बसाने के करीब 15 वर्षों के बाद भारत से चले गए, लेकिन वो अपने पीछे गुलामी वाली मानसिकता की जड़ें बहुत मजबूत करके गए थे.

इसी का परिणाम है कि आज भी भारत के बहुत सारे डिजाइनर प्रत्रकार और अंग्रेज़ी बोलेने वाले Celebrities.. गुलाम सोच के प्रतीक बने हुए हैं. ये अंग्रेज़ों और मुगलों को भारतीयों का उद्धार करने वाला मसीहा मानते हैं.  इन्हें क्रूर मुगल शासकों के नाम पर बनाई गई सड़कों का नाम बदलने पर भी आपत्ति होती है और गुलामी की याद दिलाने वाली इमारतों के आसपास टहलते हुए ये गर्व महसूस करत हैं. आप इन्हें लुटियंस के लाडले पत्रकार और Celebreties भी कह सकते हैं और हो सकता है ये लुटियंस गैंग इस नई परियोजना का विरोध भी शुरू कर दे.