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Zee Jaankari: भोजन बर्बाद करने वाले जरा सोचें, देश में हर दिन 19 करोड़ लोग भूखे रहते हैं

आज हमने World Food Day यानी विश्व खाद्य दिवस के मौके पर DNA के विश्लेषण वाले Menu में सबसे ऊपर भूख की समस्या को ही रखा है. World Food Day के मौके पर Global Hunger Index के भी आंकड़े जारी किए गए हैं और इस Index में भारत की स्थिति को देखकर आज आपको बहुत पीड़ा होगी.

Zee Jaankari: भोजन बर्बाद करने वाले जरा सोचें, देश में हर दिन 19 करोड़ लोग भूखे रहते हैं

हमें उम्मीद है कि इस वक्त DNA देखते हुए आप में से बहुत सारे लोग..खाना खा रहे होंगे. दिन भर की मेहनत के बाद भोजन का स्वाद लेना एक सुखद अनुभव है और हम कामना करते हैं कि ये सुखद अनुभव हमेशा आपके साथ ऐसे ही बना रहे . लेकिन क्या आप जानते हैं कि ठीक इसी वक्त भारत में करीब 19 करोड़ लोग भूखे पेट सोने की तैयारी कर रहे हैं. और पूरी दुनिया में भूख से मजबूर लोगों की संख्या 82 करोड़ से भी ज्यादा है. इसलिए आज हमने World Food Day यानी विश्व खाद्य दिवस के मौके पर DNA के विश्लेषण वाले Menu में सबसे ऊपर भूख की समस्या को ही रखा है.

World Food Day के मौके पर Global Hunger Index के भी आंकड़े जारी किए गए हैं और इस Index में भारत की स्थिति को देखकर आज आपको बहुत पीड़ा होगी, गुस्सा आएगा और अगर आप भोजन की बर्बादी करते हैं तो आपको शायद शर्म भी आएगी .2019 के Global Hunger Index में कुल 117 देशों को शामिल किया गया है और इसमें भारत 102 नंबर पर है .

जबकि पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल और यहां तक की उत्तर कोरिया की स्थिति भी भारत से अच्छी है . इस रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों के कुपोषण के मामले में भारत दुनिया में पहले नंबर पर है . पिछले साल भारत इस Index में 77 देशों की लिस्ट में 55वें नंबर पर था . यानी इस मामले में भारत की स्थिति नहीं सुधर रही है .आपको जानकर हैरानी होगी कि Food Products के उत्पादन के मामले में भारत पूरी दुनिया में दूसरे नंबर पर है.

भारत से ज्यादा Food Production सिर्फ चीन में होता है . लेकिन इसके बावजूद भारत में 5 वर्ष से कम उम्र के करीब 4 हज़ार 500 बच्चे प्रतिदिन भूख और कुपोषण से मर जाते हैं. यानी ये बच्चे एक आज़ाद देश में जन्म लेने का मतलब समझने से पहले ही दम तोड़ देते हैं. संयुक्त राष्ट्र के World Food Program के मुताबिक भारत में पैदा होने वाली कई पीढ़ियां जन्म के साथ ही भुखमरी और कुपोषण का शिकार हो जाती हैं.

कुपोषित माएं..कुपोषित बच्चों को जन्म देती हैं और ये सिलसिला ऐसे ही चलता रहता है. 2015 से 2016 के बीच भारत में 5 वर्ष से कम उम्र के 38 प्रतिशत बच्चे कुपोषित थे. जबकि 35 प्रतिशत बच्चों का वज़न बहुत कम था. भूखमरी की समस्या सबसे ज्यादा..झारखंड , बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश , गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में हैं.

महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात भारत की GDP में सबसे ज्यादा योगदान देते हैं. फिर भी ये राज्य भुखमरी की समस्या से नहीं निपट पा रहे. लेकिन भारत में रोज़ रात भूखे पेट सोने को मजबूर लोगों के गुनहगार सिर्फ सरकारें, सिस्टम और ये राज्य ही नहीं है बल्कि आम लोग भी हैं. क्योंकि खाना बर्बाद करने के मामले में भी भारतीय बहुत आगे हैं.

संयुक्त राष्ट्र की एक संस्था Food and Agriculture Organization के मुताबिक पूरी दुनिया में पैदा होने वाला 33 प्रतिशत भोजन ..कभी किसी ज़रूरतमंद की थाली तक पहुंच ही नहीं पाता है . करीब 45 प्रतिशत फल और सब्जियां लोगों तक पहुंचने से पहले ही बेकार हो जाती हैं . 35 प्रतिशत सी-फूड और 30 प्रतिशत अनाज का भी यही हाल होता है .

जबकि 20 प्रतिशत दूध से बने उत्पाद और 20 प्रतिशत मीट भी लोगों का पेट भरने के काम नहीं आता .Food Sustainability Index 2017 के मुताबिक प्रति व्यक्ति भोजन की बर्बादी के मामले में ऑस्ट्रेलिया सबसे आगे है . ऑस्ट्रेलिया में हर व्यक्ति प्रति वर्ष करीब 361 किलो खाना फेंक देता है . दूसरे नंबर पर अमेरिका है जहां प्रति वयक्ति 278 किलो खाना बर्बाद होता है . 123 किलो प्रति व्यक्ति के साथ कनाडा तीसरे नंबर पर है . भारत में प्रति व्यक्ति खाने की बर्बादी 51 किलो है .

वर्ष 2018 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पैदा होने वाला 40 प्रतिशत भोजन बर्बाद हो जाता है इस भोजन से पूरे ब्रिटेन का पेट भरा जा सकता है. यानी अन्न को देवता मानने वाले देश में अन्न का अनादर किया जा रहा है और कोई भी उन 19 करोड़ लोगों के बारे में नहीं सोच रहा जो हर रात भूखे पेट सोने को मजबूर होते हैं.

यानी एक तरफ हम चांद पर जाने का सपना देख रहे हैं, दूसरी तरफ धरती पर इंसानों के पास खाने के लिए रोटियां नहीं हैं. भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है..भारत के पास दुनिया की चौथी सबसे शक्तिशाली सेना है . अरबपतियों की संख्या के मामले भारत दुनिया में 8वें नबर पर है .

यानी ताकत, अर्थव्यवस्था और रसूख के मामले में भारत की Ranking दुनिया में बहुत अच्छी है. लेकिन इसके बावजूद भारत भूखमारी के खिलाफ चल रही लड़ाई हार रहा है. एक अनुमान के मुताबिक.. पूरी दुनिया में बर्बाद होने वाले भोजन का अगर सिर्फ 25 प्रतिशत भी बचा लिया जाए तो दुनिया भर के 82 करोड़ भूखे लोगों का पेट भरा जा सकता है.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक पूरी दुनिया में हर साल बर्बाद होने वाले भोजन का वज़न 130 करोड़ टन से ज्यादा होता है . जब हमने इस संख्या को Screen पर किलो में लिखने की कोशिश की तो हमें 13 के आगे 11 शून्य लगाने पड़े . ये 4 हज़ार Empire state बिल्डिंग और 70 लाख Blue Whales के वज़न के बराबर है. विकसित देश करीब 47 लाख करोड़ रुपये की कीमत का भोजन बर्बाद करते हैं .

जबकि विकासशील देशों में 22 लाख करोड़ रुपये का खाना हर साल बर्बाद हो जाता है .संयुक्त राष्ट्र की Food And Agriculture Organization के मुताबिक बर्बाद भोजन से मिथेन गैस निकलती है और ये गैस कार्बन डाई ऑक्साइड से भी 28 गुना ज्यादा खतरनाक होती है . इसी संस्था के मुताबिक अगर बर्बाद भोजन का अपना एक देश होता तो ये Carbon Emmision के मामले में दुनिया में तीसरे नंबर पर होता .

यानी जो भोजन आप कूड़े के ढेर में फेंक देते हैं वो Global Warming की समस्या को भी बढ़ा रहा है.अमेरिका के संस्थापकों में से एक Banjamin Franklin ने कहा था...मैने जितने लोगों को भूख से मरते हुए देखा है..उससे कहीं ज्यादा लोगों को अधिक भोजन की वजह से मरते हुए देखा है . Banjamin Franklin ने ये बात आज से 300 वर्ष पहले कही थी .

आज भी मोटापा दुनिया की सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है .New England Journal of Medicine के मुताबिक पूरी दुनिया के 30 प्रतिशत यानी करीब 200 करोड़ लोग मोटापे का शिकार हैं . यानी दुनिया के 30 प्रतिशत लोग ज़रूरत से ज्यादा खाना खा रहे हैं . जबकि 82 करोड़ लोगों को दो वक्त का भोजन भी नहीं मिल पा रहा है .भारत में अन्न उगाने वाला किसान अपनी लागत भी वसूल नहीं कर पाता .

किसान जब कर्ज़ के बोझ से दब जाता है तो कई बार आत्महत्या भी कर लेता है . जबकि अन्न को भगवान कहने वाले भारतीय..इसी भगवान का अपमान करते हैं और बड़ी मात्रा में भोजन बर्बाद कर देते हैं . यानी हम भोजन को सम्मान देने की बड़ी बड़ी बातें तो करते हैं . लेकिन ये भोजन ज़रूरतमंद लोगों तक पहुंच पाए...

इसके लिए कोई कोशिश या उपाय नहीं करते .भारत में अक्सर अलग-अलग धर्मों के लोग...सार्वजनिक भंडारों का आयोजन करते हैं..जहां बड़ी संख्या में लोगों को भोजन कराया जाता है . लेकिन क्या ये भोजन उस व्यक्ति तक पहुंच पाता है...जो सच में भूख से तड़प रहा है . कई बार इन भंडारों में वो लोग भी भोजन करते हैं...जिन्हें इसकी ज़रूरत नही होती .

जनसेवा के नाम पर लोगों को मुफ्त का भोजन करने की आदत लगा दी जाती है . जबकि ज़रूरतमंदों तक ये खाना नहीं पहुंच पाता . लोग अपने आध्यात्मिक लाभ के लिए इसका आयोजन करते हैं. लेकिन इसके लिए सुपात्र व्यक्ति को ढूंढने की कोशिश नहीं करते. हमें लगता है कि असली पुण्य तभी मिल सकता है.

..जब ये भोजन सच में उस व्यक्ति तक पहुंचे..जिसे इसकी सबसे ज्यादा आवश्यक्ता है .खाना बर्बाद ना करने की आपकी छोटी सी पहल..भूख से तड़पते किसी व्यक्ति का जीवन सुधार सकती है . उसे भोजन का सुख दे सकती है.