ZEE जानकारी: दुनिया का हर छठा व्यक्ति कैंसर से पीड़ित, अमेरिका ने भी माना हल्दी है सबसे कारगर उपाय

भारत में हल्दी का इस्तेमाल त्वचा को खूबसूरत बनाने से लेकर सर्दी-जुकाम, डायबिटीज, हृदय रोग और मोटापे के इलाज में भी किया जाता है.

ZEE जानकारी: दुनिया का हर छठा व्यक्ति कैंसर से पीड़ित, अमेरिका ने भी माना हल्दी है सबसे कारगर उपाय

आज हम कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों की सबसे बड़ी दुश्मन और इंसानों की दोस्त, हल्दी का. एक आयुर्वेदिक DNA टेस्ट करेंगे. भारत में हल्दी का इस्तेमाल त्वचा को खूबसूरत बनाने से लेकर सर्दी-जुकाम, डायबिटीज, हृदय रोग और मोटापे के इलाज में भी किया जाता है. हल्दी हमारे खाने का स्वाद और रंग दोनों को बढ़ा देती है. कुल मिलाकर हल्दी हमारी रसोई में मौजूद एक मेडिकल स्टोर की तरह है. इसलिए भारतीय परिवारों में गुणकारी हल्दी का खूब इस्तेमाल किया जाता है. अब हल्दी की कैंसर से लड़ने की ताकत को अमेरिका ने भी पहचाना है और दो भारतीय संस्थाओं को संयुक्त रूप से अमेरिका में इससे जुड़ा एक Patent मिला है.

भारतीय परंपरा में हल्दी को शुभ माना जाता है 
कैंसर, दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारियों में एक है और अब हल्दी का उपयोग करके कैंसर के खिलाफ लड़ाई को हम और मजबूती से लड़ सकते हैं. भारतीय परंपरा में हल्दी को शुभ माना जाता है और इसके इस्तेमाल से आपके स्वास्थ्य को शुभ-लाभ वाला फायदा मिलेगा. सबसे पहले आज की पूरी खबर को समझिए. ताकि आप ये समझ जाएं कि हल्दी और कैंसर की लड़ाई में. हल्दी की जीत क्यों तय है?

हमारे पौराणिक ग्रथों में हल्दी को संजीवनी माना जाता है और अगर आप हल्दी का इस्तेमाल करते हैं तो इसकी 'आयुर्वेदिक शक्तियों' से आपके Healthy रहने की संभावना बढ़ जाती है. हल्दी में प्राकृतिक रूप से एक रासायनिक तत्व Curcumin(कर-क्यूमिन) पाया जाता है. और इस तत्व में कैंसर से मुकाबला करने की क्षमता है.

अक्सर कैंसर प्रभावित मरीजों में सर्जरी के बाद भी. दोबारा कैंसर की वापसी हो जाती है. क्योंकि शरीर में कैंसर की बची हुई कुछ कोशिकाएं भी. फिर से इस बीमारी को बढ़ा सकती हैं. लेकिन अब सर्जरी के बाद शरीर के उन हिस्सों पर कर-क्यूमिन से बना एक Skin Patch लगाया जा सकता है. त्वचा पर लगाए जाने के बाद ये Patch शरीर के उन हिस्सों में मौजूद कैंसर की कोशिकाओं को जड़ से खत्म कर देगा. लेकिन इससे स्वस्थ कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं होगा. और शरीर पर इसका कोई Side Effect भी नहीं होगा.

हमारे देश में तिरवनंत-पुरम के एक संस्थान और दिल्ली के Indian Council for Medical Research ने मिलकर इस Skin Patch को विकसित किया है. और इन दोनों संस्थानों को संयुक्त रूप से अमेरिका ने Patent दिया है. ये कैंसर पीड़ितों और उनके परिवार वालों को राहत देने वाली खबर है. क्योंकि कैंसर दुनिया और भारत में दूसरी सबसे खतरनाक बीमारी है.

संस्कृत भाषा में हल्दी के 53 अलग-अलग नाम हैं
दुनिया का हर छठा व्यक्ति कैंसर से पीड़ित है और वर्ष 2018 में दुनिया भर में कैंसर से 96 लाख लोगों की मौत हुई है. लेकिन अब हल्दी की मदद से कैंसर पीड़ितों को इस बीमारी से पूरी आजादी मिलेगी.ज्यादातर लोग जिसे हल्दी के नाम से जानते हैं वो संस्कृत के शब्द 'हरिद्रा' से बना है. संस्कृत भाषा में हल्दी के 53 अलग-अलग नाम हैं और दक्षिण भारत में इसे 'मंजल' कहा जाता है.

इसके नाम भले ही अलग हों लेकिन हल्दी का काम सिर्फ एक है. और वो है आपको बीमारियों से मुक्त रखना. माना जाता है कि भारत में हल्दी का इस्तेमाल पिछले 4 हजार वर्षों से किया जा रहा है. और तब से ये हमारी परंपरा, रसोई और चिकित्सा पद्धति का हिस्सा है. वर्ष 700 में हल्दी भारत से चीन और अगले कुछ सौ सालों में ये पूरे अफ्रीका महाद्वीप में पहुंच गई थी.

वर्ष 1280 में इटली के व्यापारी Marco Polo (मार्को पोलो) ने हल्दी के गुणों से प्रभावित होकर इसकी तुलना केसर से की थी . ऐसा करके उन्होंने हल्दी को सम्मान दिया था क्योंकि केसर दुनिया के सबसे महंगे मसालों में एक है. भारत के महान आचार्य सु-श्रुत ने आज से करीब 2500 वर्ष पहले अपने ग्रंथ सु-श्रुत संहिता में हल्दी का जिक्र किया था. और आचार्य सु-श्रुत को दुनिया का पहला Surgeon भी कहा जाता है.

आपने अपने घर में दादी और नानी मां के घरेलू नुस्खों में भी हल्दी का इस्तेमाल देखा होगा. आज आपको ये भी जानना चाहिए कि आपको प्रतिदिन हल्दी कितनी मात्रा में लेनी चाहिए. हल्दी में मौजूद एक रासायनिक तत्व कर-क्यूमिन आपके शरीर को कैंसर से लड़ने की क्षमता देता है. और ये आपको स्वस्थ रखने वाले गुणों से भी भरपूर है.

ब्रिटेन में हुई एक रिसर्च में कर-क्यूमिन ने 24 घंटे में ही कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करना शुरु कर दिया था. यानी हल्दी में मिलने वाले इस प्राकृतिक रसायन से कैंसर के नए इलाज विकसित किए जा सकते हैं. एक स्वस्थ व्यक्ति को दिनभर में 5 सौ से 2 हजार मिलीग्राम कर-क्यूमिन की जरूरत होती है. लेकिन इसके लिए आपको अलग से हल्दी का सेवन करने की आवश्यकता नहीं है.

सुबह-शाम अगर आप हल्दी से बना भारतीय खाना खाते हैं तो आपकी जरूरतें पूरी हो जाएगी. अगर आप भारतीय खाना नहीं खाते हैं तो भी प्रतिदिन एक चम्मच हल्दी का इस्तेमाल आपके लिए काफी होगा. और हल्दी का इस्तेमाल करने के लिए आपको ज्यादा पैसे भी खर्च करने की जरूरत नहीं है.

2018 में भारत ने करीब 1600 करोड़ रुपए की हल्दी का Export किया
क्योंकि दुनिया भर में भारत में ही सबसे ज्यादा और सबसे बेहतर Quality की हल्दी का उत्पादन होता है और उसका करीब 80 प्रतिशत हिस्सा देश में ही इस्तेमाल किया जाता है. ये हल्दी सिर्फ आपके स्वास्थ्य ही नहीं, अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर है. वर्ष 2018 में भारत ने करीब 1600 करोड़ रुपए की हल्दी का Export किया है. और इसका सबसे ज्यादा निर्यात अमेरिका को किया जा रहा है.

अमेरिका में कैंसर के खिलाफ काम करने वाली एक संस्था American Cancer Society ने हल्दी को कैंसर से लड़ने वाला एक Superhero बताया है. तरह तरह ही बीमारियों से जूझती दुनिया के लिए हल्दी का इस्तेमाल वरदान साबित हो सकता है. इसलिए हमने शुद्ध भारतीय इलाज यानी हल्दी का एक DNA टेस्ट किया है.

दुनिया को हल्दी की ताकत का पता अब चला है
हमें लगता है कि आप भी अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए हल्दी को आज़मा सकते हैं. क्योंकि इसमें अपार संभावनाएं हैं. दुनिया को हल्दी की ताकत का पता अब चला है लेकिन भारत में हज़ारों वर्षों से जड़ी-बूटियों की सहायता से रोगों का इलाज किया जा रहा है. और इस कला को आप आयुर्वेद कह सकते हैं. और ये भारत की प्राचीनतम विद्याओं में से एक है. 

पिछले कुछ समय से धरती पर लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है. इसलिए एक बार फिर दुनिया, भारत के प्राचीन ज्ञान पर भरोसा कर रही है. और अमेरिका समेत दुनिया के तमाम देशों में हल्दी और आयुर्वेद के गुणों को ढूंढकर उसे बढ़ावा दिया जा रहा है. पूरी दुनिया में आयुर्वेदिक Products और दवाइयों से जुड़ा बाज़ार अभी करीब 5 लाख करोड़ रुपये का है. जबकि अमेरिका और Europe में इसका बाजार लगातार बढ़ रहा है.

भारत इस बाजार पर कब्जा करके दुनिया में अपनी Soft Power बढ़ा सकता है. लेकिन आयुर्वेदिक उत्पादों को निर्यात करने के मामले में भारत, चीन से भी पीछे है. चीन पूरी दुनिया में Herbal Products का निर्यात करने में पहले नंबर पर है. जबकि आयुर्वेद की जन्म भूमि भारत दूसरे नंबर पर है. अगर हम इसी तरह से आयुर्वेद के वरदान को अनदेखा करते रहे तो हो सकता है भविष्य में हमें Made in China आयुर्वेदिक दवाइयां भी खानी पड़ सकती हैं.

हल्दी की गुणकारी शक्ति से कैंसर का इलाज
कुल मिलाकर अब दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी बीमारी कैंसर का इलाज हल्दी की गुणकारी शक्ति से हो पाएगा. अब दुनिया के बड़े-बड़े देश भारत से आयुर्वेदिक शक्ति हासिल करके जानलेवा बीमारियों का इलाज ढूंढ रहे हैं. ऐसे में भारत को भी ज्यादा रिसर्च करके, आयुर्वेद को आगे बढ़ाना होगा . और अगर हम ऐसा नहीं करेंगे तो हमारी चिकित्सा पद्धतियों का इस्तेमाल करके दुनिया के देश हमें ही पीछे छोड़ देंगे.