ZEE जानकारी: महाराष्ट्र के सियासी संकट के 80 घंटे की पूरी कहानी

पिछले 85 घंटों में महाराष्ट्र में राजनीतिक घटनाक्रम इतनी तेज़ी से बदले कि बहुत सारे लोगों को तो ये समझ ही नहीं आया कि आखिर हो क्या रहा है . 

ZEE जानकारी: महाराष्ट्र के सियासी संकट के 80 घंटे की पूरी कहानी

आज संविधान दिवस है . आज से 70 वर्ष पहले यानी 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान बनकर तैयार हुआ था और संविधान सभा ने इसके मसौदे को स्वीकार किया था . संविधान का निर्माण करते हुए हमारे पूर्वजों ने देश के भविष्य की जो कल्पना की थी . उसे संविधान की प्रस्तावना में लिखी गई कुछ महत्वपूर्ण बातों से समझा जा सकता है . इस प्रस्तावना में संविधान की जिन मूल भावनाओं को शामिल किया गया है.. वो हैं न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व . लेकिन आज के परिदृश्य को देखकर ऐसा लगता है कि अब इन मूल्यों की परवाह किसी को नहीं है . जो नेता किसी भी कीमत पर सत्ता हासिल करना चाहते है उनके लिए राजनैतिक न्याय के कोई मायने नहीं हैं..इस बात को आज हम महाराष्ट्र के उदाहरण से समझेंगे .

जो सिस्टम युवाओं को रोज़गार नहीं दे पा रहा...उसके लिए समानता के मूल्य का कोई महत्व नहीं है . क्योंकि हमारे देश में बड़ी बड़ी डिग्रियां रखने वाले युवा...चपरासी की नौकरी के लिए आवेदन कर रहे हैं हैं . बिहार में ग्रुप D, यानी चतुर्थ श्रेणी के 166 पदों के लिए करीब 5 लाख लोगों ने आवेदन किए हैं...और खास बात ये है कि इनमें इंजीनियरिंग से लेकर MBA की डिग्री रखने वाले लोग भी शामिल हैं .

जिन छात्रों को JNU जैसे विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिए छात्रवृति मिलती है ...उन्हें सबकुछ मुफ्त में चाहिए . JNU प्रशासन के मुताबिक यूनिवर्सिटी के 70 प्रतिशत छात्रों को हर महीने 2 हज़ार रुपये लेकर 47 हज़ार रुपये तक की छात्रवृति मिलती है. लेकिन फिर भी JNU के छात्रों को मुफ्त में पढ़ने की लालसा है . ये लोग संविधान द्वारा दी गई स्वतंत्रता पर भी सिर्फ अपना एकाधिकार समझते हैं .

लेकिन सबसे पहले बात महाराष्ट्र की राजनीति की कर लेते हैं . जहां शपथ लेने के 78 घंटों बाद..अजित पवार ने उप मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.. तो शपथ लेने के लिए 80 घंटों के बाद...देवेंद्र फड़णवीस को भी मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा . महाराष्ट्र में सिर्फ तीन दिनों में बीजेपी की सरकार बिना बहुमत परीक्षण के ही गिर गई . यानी चुनाव के नतीजे के आने के 32 दिनों के बाद..महाराष्ट्र एक बार फिर से सरकार विहीन हो गया है . हालांकि अब खबर ये है कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे 1 दिसंबर को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं.

लेकिन इन सबके बीच 78 साल के शरद पवार महाराष्ट्र की राजनीति के असली विजेता बनकर उभरे हैं . 78 साल के शरद पवार ने 78 घंटों में महाराष्ट्र की राजनीति को पूरी तरह पलट कर रख दिया . शरद पवार ने करीब 15 वर्ष पहले कैंसर से लड़ाई लड़ी थी . तब डॉक्टरों ने उन्हें कहा था कि उनका बचना मुश्किल है. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और कैंसर को हरा दिया और आज उन्होंने अपने जीवन की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती को भी जीत लिया है .

अक्टूबर में जब महाराष्ट्र में चुनाव हो रहे थे..तब शरद पवार का एक वीडियो वायरल हो गया था . शरद पवार.. सतारा में बारिश में भीगते हुए एक रैली को संबोधित कर रहे थे . जब उनसे छाता इस्तेमाल करने का आग्रह किया गया तो उन्होंने इससे मना कर दिया . और वो लगातार भाषण देते रहे . शरद पवार की इस तस्वीर ने साबित कर दिया था कि सभी लड़ाईंया जीतने के लिए नहीं लड़ी जाती . बल्कि कुछ लड़ाईयों का मकसद दुनिया को ये बताना भी होता है कि मैदान में जमे रहने वाला व्यक्ति ही असली योद्धा होता है .

अब आप एक और तस्वीर देखिए . ये Blak And White तस्वीर 1982 की है . इस तस्वीर में NCP के नेता..छगन भुजबल...शरद पवार, बाल ठाकरे और जॉर्ड फर्नांडिस को एक माला पहना रहे हैं . इस तस्वीर में तीन अलग अलग विचारधाराओं वाली पार्टियों के नेताओं को एक साथ देखा जा सकता है.

लेकिन किसे पता था कि 37 वर्ष पहले खींची गई एक तस्वीर आज के दौर की राजनीति को भी चरितार्थ कर देगी . हमारे पास आज एक और पुरानी तस्वीर है..जिसमें शरद पवार और शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे को एक साथ देखा जा सकता है . ये तस्वीर भी कई दशक पुरानी है .

आज हम ये तस्वीरें आपको इसलिए दिखा रहे हैं क्योंकि आज शरद पवार..उन्हीं बाला साहब के बेटे उद्धव ठाकरे के साथ सरकार बनाने जा रहे हैं . दशकों पहले जो Black And White तस्वीरें खींची गई थीं..उनमें भले ही सिर्फ शिष्टाचार छिपा था . लेकिन आज की तस्वीरें बता रही हैं कि राजनीति में नेताओं के रंग भी बदल जाते हैं..और सिद्धांत भी .

हम आपको आज की एक तस्वीर भी दिखाना चाहते हैं . इस तस्वीर को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे उद्धव ठाकरे शरद पवार के पांव छू रहे हैं . यानी एक ज़माना वो था जब शरद पवार..बाला साहब ठाकरे का सम्मान कर रहे थे और आज उद्धव ठाकरे...शरद पवार को वैसा ही सम्मान दे रहे हैं . हालांकि बाल ठाकरे और शरद पवार विरोधी विचारधारा के नेता थे . लेकिन आज बाल ठाकरे के पुत्र उद्ध ठाकरे और शरद पवार मिलकर सरकार बनाने जा रहे हैं.

बाला साहब ठाकरे ने 19 जून 166 को शिवसेना की स्थापना की थी. शिवसेना की स्थापना का उद्धेश्य महाराष्ट्र के लोगों के हितों की रक्षा करना था . तब बाल ठाकरे ने एक नारा दिया था . ये नारा था -अस्सी प्रतिशत समाज और बीस प्रतिशत राजनीति . यानी तब शिवसेना का 80 प्रतिशत मकसद अपने समाज के हितों की रक्षा करना था और उसमें राजनीति की गुंजाइश सिर्फ 20 प्रतिशत थी . लेकिन अब दौर बदल गया है और शिवसेना 100 प्रतिशत शुद्ध राजनीति करने वाली पार्टी बन गई है.

लेकिन आज की ताज़ा खबर ये है कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को ..शिवसेना, NCP और कांग्रेस के गठबंधन का नेता चुन लिया गया है . यानी अब महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे होंगे .गठबंधन का नेता चुना जाने के बाद उद्धव ठाकरे ने कहा कि वो शपथग्रहण के लिए प्रधानमंत्री मोदी को न्योता देने दिल्ली जाएंगे .

उद्धव ठाकरे ने नए साथियों के साथ आने के बाद कहा कि बीजेपी जरूरत पड़ने पर साथ देती है ....और जरूरत निकलने के बाद साथ छोड़ देती है . उद्धव ठाकरे के लिए सत्ता का रास्ता पिछले 85 घंटों के घटनाक्रम के दौरान साफ हुआ. आज सुबह साढ़े 10 बजे सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि कल शाम 5 बजे तक महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत परीक्षण कराया जाए . सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद..

महाराष्ट्र में इस्तीफों का दौर शुरू हो गया . सबसे पहले उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले अजित पवार ने इस्तीफा दिया और उसके बाद दोपहर साढ़े तीन बजे..देवेंद्र फड़णनवीस ने भी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया . यानी 23 तारीख को सुबह 8 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले देवेंद्र फड़णवीस..80 घंटों में ही मुख्यमंत्री से पूर्व मुख्यमंत्री में बदल गए . और अजित पवार को भी अपने Twitter Account पर स्टेटस बदलकर लिखना पड़ा Former Deputy Chief Minister, Maharashtra |

पिछले 85 घंटों में महाराष्ट्र में राजनीतिक घटनाक्रम इतनी तेज़ी से बदले कि बहुत सारे लोगों को तो ये समझ ही नहीं आया कि आखिर हो क्या रहा है . लेकिन आज हमने आपके लिए ऐसे 10 Points तैयार किए हैं..जिन्हें समझकर आप महाराष्ट्र की ही नहीं बल्कि देश की राजनीति के भी एक्सपर्ट बन जाएंगे .

सबसे पहली बात ये है कि इस पूरे घटनाक्रम की वजह से...महाराष्ट्र मज़ाक बन गया है . जब बीजेपी ने सरकार बनाई तो बीजेपी के नेताओं ने कहा कि ये महाराष्ट्र की जनता की जीत है . और अब..जब शिवसेना, NCP और कांग्रेस सरकार बना रहे हैं..तो वो भी कह रहे है कि ये जनता की जीत है. लेकिन जनता को ये समझ नहीं आ रहा कि आखिर हो क्या रहा है .

दूसरी बात ये है कि महाराष्ट्र की राजनीति में हर नेता..खुद को चाणक्य साबित करने की कोशिश कर रहा है. हर नेता को यही लग रहा है कि सबकुछ उसी की रणनीति के मुताबिक हो रहा है.

तीसरी बात ये है कि महाराष्ट्र की राजनीति हास्य रस का ज़रिया बन गई है . होटल मालिक सरकार बना सकते हैं ये मज़ाक कल सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा था और आज लोग कह रहे हैं कि महाराष्ट्र में सबसे कम समय तक सीएम रहने का रिकॉर्ड अभी भी अभिनेता अनिल कपूर के नाम है...क्योंकि वो 2001 में आई फिल्म नायक में सिर्फ 24 घंटे के लिए महाराष्ट्र के सीएम बने थे .

चौथी बात ये है कि आज पूरे देश में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका की तारीफ हो रही है . क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जो फैसला सुनाया..वो सभी पार्टियों को पसंद आया और सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर साबित कर दिया वो देश के राजनेताओं को मर्यादाओं से बाहर नहीं जाने देगा .

पांचवीं बात ये है कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान..शरद पवार सबसे बड़े राजनेता बनकर उभरे हैं. आज उनके पास सत्ता भी है और उनका कद पहले से भी बड़ा हो गया है .

छठी बात ये है कि महाराष्ट्र में सत्ता किसी को भी मिले....लेकिन वहां सिद्धांत हार चुके हैं . वैचारिक दुश्मन आज राजनीतिक साझेदार बन चुके हैं .

सातवीं बात ये है कि इस पूरे मामले में लोकतंत्र की हार हुई है. किसी भी नेता ने जनादेश की परवाह नहीं की . और संविधान की शपथ खाने वाले नेताओं ने..संविधान की मूल भावना को ही चोट पहुंचा दी . आठवीं बात ये है कि जिन लोगों ने चुनाव के दौरान NOTA का बटन दबाया..यानी किसी को भी वोट नहीं दिया..आज वही लोग सबसे ज्यादा समझदार लग रहे हैं . नौवीं बात ये है कि बीजेपी ने अजित पवार के भरोसे गलत दांव चल दिया....अजित पवार के भरोसे...सत्ता हासिल करने की जल्दबाज़ी बीजेपी को भारी पड़ गई

और 10वीं और आखिरी बात ये है कि इस पूरे मामले में राज्यपाल की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं...क्योंकि विपक्ष लगातार ये पूछ रहा है कि आखिर बिना किसी को खबर दिए...रातों रात राष्ट्रपति शासन हटाने ...और देवेंद्र फड़णवीस को शपथ दिलाने का फैसला...राज्यपाल ने क्यों लिया .

महाराष्ट्र में पिछले 85 घंटों में जो कुछ हुआ..वो अप्रत्याशित था . लेकिन राजनीति के जानकार कहते हैं कि सियासत में कुछ भी अचानक से नहीं होता . तो क्या ये माना जाए कि अजित पवार का बीजेपी के साथ जाना भी NCP और शरद पवार की रणनीति का हिस्सा था ? अजित पवार..बीजेपी की सरकार बनवाने जा रहे थे..लेकिन 78 घंटों के अंदर वही बीजेपी की सरकार गिरने की सबसे बड़ी वजह बन गए. क्या अजित पवार ने ऐसा..शरद पवार के इशारे पर किया ? इस बात की पुष्टि करना फिलहाल मुश्किल है .

लेकिन यहां हम आपको ढाई हज़ार वर्ष पहले घटी..एक घटना के बारे में बताना चाहते हैं . ढाई हज़ार वर्ष पहले ग्रीस की सेना ने Troy नाम के एक शहर पर कब्ज़ा करने की योजना बनाई . लेकिन ये काम इतना आसान नहीं था क्योंकि तब Troy एक शक्तिशाली राजा के साम्राज्य का हिस्सा था .

ग्रीस के सैनिकों ने एक लकड़ी के विशालकाय घोड़े को उस शहर के बाहर रख दिया गया . लकड़ी का घोड़ा देखकर Troy के सैनिकों को लगा कि शायद ये कोई पुरस्कार यानी ट्रॉफी है . सैनिकों ने उस घोड़े को शहर के अंदर खींच लिया . और शहर के लोगों ने नाच गाकर..उस घोड़े का स्वागत किया . लेकिन Troy के सैनिकों को ये नहीं पता था कि उस लकड़ी के घोड़े में दुश्मन राज्य के सैनिक छिपे हैं . जब रात हुई..तो घोड़े में छिपे सैनिक बाहर निकले और अपनी बाकी की सेना के लिए शहर के दरवाज़े खोल दिए . इसके बाद..रातों रात Troy की सेना हार गई .

तब से इसे Trojan War के नाम से जाना जाता है. और दुश्मन को धोखा देने वाले घोड़े को Trojan Horse कहा जाता है . अब राजनीति के जानकर कह रहे हैं कि शायद..अजित पवार...शरद पवार की तरफ से बीजेपी में भेजे गए एक Trojan Horse थे . जिसे देखकर बीजेपी धोखे में आई गई और उसके हाथ से सत्ता पूरी तरह निकल गई .

अब महाराष्ट्र में शिवसेना, NCP और कांग्रेस की सरकार बनना तय हो गया है. लेकिन इस जीत का असली चाणक्य शरद पवार को माना जा रहा है . कहा जा रहा है कि शरद पवार ने एक तीर से चार शिकार किए हैं . पहला शिकार ये है कि NCP तीसरे नंबर की पार्टी से सीधे...सत्ता में हिस्सेदार बन गई है . फिलहाल तो उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं लेकिन हो सकता है कि कुछ वक्त के बाद...मुख्यमंत्री की कुर्सी पर शरद पवार के परिवार का ही कोई सदस्य विराजमान हो जाए .

शरद पवार का दूसरा शिकार ये है कि उन्होंने अपनी राजनीतिक बुद्धिमता के दम पर..ऐसे हालात पैदा किए कि केंद्र सरकार महाराष्ट्र से राष्ट्रपति शासन हटाने पर मजबूर हो गई . क्योंकि बीजेपी को लगा कि अजित पवार के साथ आने से...उसके लिए सत्ता के दरवाज़े खुल गए हैं .

शरद पवार ने तीसरा शिकार ये किया कि उन्होंने अजित पवार का शुद्धिकरण करा दिया . जिन अजित पवार पर भ्रष्टाचार के आरोप थे . उन्हें बीजेपी ने उप मुख्यमंत्री बना दिया . अब बीजेपी किस मुंह से कहेगी कि अजित पवार भ्रष्टाचार के आरोपी हैं .

और शरद पवार का चौथा शिकार ये था कि उन्होंने खुद की छवि एक ऐसे नेता की बना ली है...जिसे चुनौती देना बहुत मुश्किल है . सिर्फ महाराष्ट्र में ही नहीं बल्कि अब वो राष्ट्रीय तौर पर भी खुद को प्रधानमंत्री को चुनौती देने वाले सबसे बड़े नेता के तौर पर स्थापित कर सकते हैं .

महाराष्ट्र की स्थिति देखकर आप समझ गए होंगे कि राजनीति में बहुमत का कोई महत्व नहीं रह गया है . बीजेपी महाराष्ट्र चुनावों में 105 सीटों के साथ Topper बनकर उभरी लेकिन अब महाराष्ट्र में सरकार वो पार्टियां बनाने जा रही हैं जिनके पास बीजेपी के मुकाबले कम सीटे हैं . आज हमने आपको ये बात समझाने के लिए एक छोटा सा वीडियो निकाला है . इस वीडियो को देखकर आप समझ जाएंगे कि कैसे राजीनीति में कम अंक यानी कम सीटें हासिल करने वाली पार्टियां भी सरकार बना लेती हैं .

राजनीति में कोई भी स्थायी मित्र या शत्रु नहीं होता है. समय के साथ विचारधारा ऐसे बदल जाती है जिसपर भरोसा करना जनता के लिए मुश्किल होता है . हम आपको इसी अवसरवादी राजनीति का चरित्र बताने वाले दो बयानों की चर्चा करना चाहते हैं. इसमें पहला बयान है शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे का और दूसरा बयान है देवेंद्र फड़णवीस का. आज उद्धव ठाकरे... कांग्रेस के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बना रहे हैं. और सोनिया गांधी को इसके लिए धन्यवाद दे रहे हैं. लेकिन, सिर्फ दो महीने पहले सितंबर में उद्धव ठाकरे... कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी के बारे में कैसी अभद्र टिप्पणी कर रहे थे... पहले आपको ये बयान सुनना चाहिए.

देश की सभी राजनीतिक पार्टियों का ऐसा ही हाल है. जिस अजित पवार के साथ मिलकर देवेंद्र फड़णवीस ने 78 घंटों की सरकार बनाई थी... पांच साल पहले फड़णवीस उन्हें सिंचाई घोटाले के आरोप में जेल भेजने की बात कर रहे थे .
<<Pcr Gfx in- Fadnavis on Pawar>> फड़णवीस ने कहा था कि अगर उनकी सरकार आई तो अजित पवार जेल जाएंगे .

1967 में इंदिरा गांधी के खिलाफ पूरा विपक्ष एकजुट हुआ था . इंदिरा गांधी vs All का वो दौर 1977 तक चला था, जब इंदिरा गांधी को सत्ता से दूर रखने के लिए जनता पार्टी की सरकार बनाई गई थी . आज की तारीख में वही राजनीतिक स्थिति बन गई है, अब नरेंद्र मोदी Vs All का दौर है .

2014 में नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक जीत के बाद सबसे पहले बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी को रोकने के लिए दो कट्टर विरोधी लालू प्रसाद यादव और नीतिश कुमार एक हो गए थे .

इसी तरह 2018 में, कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस ने कम सीटों वाले JDS के साथ हाथ मिलाकर उसे मुख्यमंत्री पद दे दिया था .

2019 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी को हराने के लिए दो राजनीतिक दुश्मन समाजवादी पार्टी और BSP ने गठबंधन कर लिया था .

और अब महाराष्ट्र में, बीजेपी को रोकने के लिए उसके 30 साल पुराने मित्र दल शिवसेना ने...अपने पुराने राजनीतिक शत्रु कांग्रेस और NCP से हाथ मिला लिया .