ZEE जानकारी: हिंदू-मुसलमान के नाम पर 70 वर्षों तक देश को डराने वाले Gang

आज हम सबसे पहले. हिंदू-मुसलमान के नाम पर 70 वर्षों तक देश को डराने वाले Gang को बेनकाब करेंगे.

ZEE जानकारी: हिंदू-मुसलमान के नाम पर 70 वर्षों तक देश को डराने वाले Gang

आज हम सबसे पहले. हिंदू-मुसलमान के नाम पर 70 वर्षों तक देश को डराने वाले Gang को बेनकाब करेंगे. शनिवार को राम मंदिर को लेकर आए फैसले पर देश भर की मीडिया ने अपना-अपना विश्लेषण किया. आपको इस फैसले से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात की जानकारियां भी दी गईं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि जिस दिन ये फैसला आ रहा था. उस दिन आपके शहर की सड़कें सूनी क्यों पड़ी थी ? जिन सड़कों पर अक्सर भीड़-भाड़ होती है, चहल पहल होती है...वहां एक सन्नाटा क्यों पसरा हुआ था . बाज़ार क्यों खाली थे, और लोग अपने घरों से बाहर क्यों नहीं निकल रहे थे . इसकी एक बड़ी वजह ये थी कि इस कि इस फैसले को लेकर देश के कुछ नेताओं और मीडिया ने लोगों के मन में एक डर भर दिया था.

ये लोग डर की इस डोर से पूरे समाज को बंधक बनाकर रखना चाहते थे और इसी डर के नाम पर 70 साल से अपनी दुकानदारी चलाते आए हैं. लेकिन अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद...हमारे देश में डर की राजनीति करने वाले इस टुकड़े-टुकड़े Gang का पर्दाफाश हो गया है .

शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अयोध्या में राम मंदिर बनेगा..तो इन लोगों को लगा कि अब देश में आग लग जाएगी . लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हो जाएंगे और हिंदू और मुसलमानों के बीच मतभेदों की खाई और बड़ी हो जाएगी . लेकिन शनिवार निकल गया, रविवार निकल गया और सोमवार भी खत्म होने वाला है . लेकिन देश में कहीं से भी कोई अप्रिय समाचार नहीं आया और पूरे देश में शांति कायम है . क्या आपने सोचा है कि इसका क्या मतलब निकलता है....इसका मतलब ये निकलता है कि नेताओं और मीडिया का ये अनैतिक गठबंधन पिछले 70 वर्षों से देश में सिर्फ डर की राजनीति कर रहा था और आपको गुमराह कर रहा था .

इन लोगों ने हर मुद्दे को बवाल की शक्ल देकर...खौफ का एक बुलबुला पैदा करने की कोशिश की . लेकिन आज इनका ये बुलबुला फूट गया है .पिछले 70 वर्षों से देश के करोड़ों लोगों को अयोध्या पर फैसले का डर दिखाया जा रहा था . कहा जा रहा था कि अयोध्या पर फैसला आया तो देश जल उठेगा . देश में दंगे हो जाएंगे और हिंदू-मुसलमान एक दूसरे के खून के प्यासे बन जाएंगे . आप ज़रा उन अखबारों और News Channels की Headlines को याद कीजिए...जिनके ज़रिए आपको अयोध्या के नाम पर हमेशा डराया गया .

धर्मनिरपेक्षता के नाम चल रही पत्रकारिता का बहाना बनाकर....इन लोगों ने सिर्फ अपने एजेंडे की रक्षा की . इस दौरान किसी सरकार ने भी इस दुष्प्रचार और भ्रम को समाप्त करने की कोशिश नहीं की . और अगर किसी की तरफ से ये कोशिश हुई भी..तो उसे नफरत का एजेंडा चलाने वालों ने दबा दिया .

अयोध्या पर फैसले के बाद देश में शांति बरकरार रही. कई जगहों से हिंदू-मुस्लिम एकता की तस्वीरें सामने आई ....और कुल मिलाकर देश ने शांति और समझदारी से आगे बढ़ने का संकल्प लिया है. रविवार को पैगंबर मोहम्मद साहब का जन्मदिन था और माना जाता है कि इसी दिन उनका निधन भी हुआ था . इस दिन उत्तर प्रदेश के कई शहरों में विशाल जुलूस निकाले गए. सैकड़ों लोग जुलूस में तिरंगा झंडा लहराते हुए नजर आए.

माहौल खुशी का था इसलिए हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्म के लोगों ने गले मिलकर... मिठाई खिलाकर और माला पहनाकर एक दूसरे को बधाई दी . इन तस्वीरों को साधारण मत समझिएगा . इन तस्वीरों का मतलब है कि जनता अब पहले से ज्यादा समझदार हो गई है . ये नया भारत है जो नफरत के रास्ते पर नहीं..

तरक्की के रास्ते पर चलना चाहता है . जिसके लिए मंदिर-मस्जिद विवाद नहीं बल्कि विकास महत्वूर्ण है . जो दंगे नहीं चाहता, लेकिन 5 G की स्पीड के साथ इंटरनेट Data चाहता है . जो धर्म के नाम पर राजनीति नहीं चाहता..लेकिन रोज़गार चाहता है. जो नेताओं की डर वाली राजनीति नहीं चाहता बल्कि हिम्मत के साथ Space Technology में आगे बढ़ना चाहता है .

नए भारत के लिए....नेताओं और मीडिया की Anti India वाली साजिश नहीं..बल्कि Artificial intelligence की तकनीक मायने रखती है . और शनिवार को आए फैसेले के बाद पूरे देश ने जिस परिपक्वता का उदाहरण दिया है वो इस नए भारत की सबसे बड़ी पहचान बन गया है .

जब भी कोर्ट फैसला सुनाता है तो एक पक्ष की हार और दूसरे पक्ष की जीत होती है... लेकिन अयोध्या मामले में दोनों पक्षों की जीत हुई है. अयोध्या मामले का फायदा उठाने की पूरी तैयारी की गई थी. कुछ नेताओं और कुछ मीडिया वालों के अनैतिक गिरोह ने मुसलमानों की छवि ऐसी बनाई थी मानो वो इसका जबरदस्त विरोध करेंगे... कानून अपने हाथ में ले लेंगे और इससे देश में कानून-व्यवस्था बिगड़ जाएगी . लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है और हमें यकीन है कि आगे भी ऐसा नहीं होगा .

सिर्फ अयोध्या ही नहीं..कुछ नेताओं और पत्रकारों के इस गैंग ने कई वर्षों से कई मुद्दों पर देश को बंधक बनाकर रखने की कोशिश की है . इन्हीं में से एक मुद्दा था..कश्मीर से धारा 370 को हटाना .कुछ नेता ये बयान देते थे कि अगर धारा 370 हटी तो देश में खून की नदियां बह जाएंगी. और इन नेताओं के इन नफरत भरे बयानों को कुछ पत्रकार Headlines बना देते थे.

इस गैंग की कोशिश होती थी कि जब जब कश्मीर की बात हो..उसमें पाकिस्तान को भी एक पार्टी बनाया जाए. लेकिन अनुच्छेद 370 हटा, कश्मीर में शांति बनी रही और इस मुद्दे पर पाकिस्तान की बात पूरी दुनिया में किसी ने नहीं सुनी .

इसके अलावा देश में डर फैलाने वाले इस गैंग ने पाकिस्तान के नाम पर भी...देश के लोगों को खूब डराया . इन लोगों ने एक तरफ तो पाकिस्तान को कश्मीर से जोड़कर रखा और बार-बार ये भी कहा कि अगर भारत ने पाकिस्तान को नाराज़ किया तो पाकिस्तान भारत पर परमाणु हमला कर देगा .

लेकिन पिछले 3 वर्षों में भारतीय सेना ने पाकिस्तान पर दो बार सर्जिकल Strikes की है. यानी हमारी सेना ने पाकिस्तान के घर में घुसकर..आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया और जवाब में पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मंच पर दुनिया के सामने मदद के लिए गिड़गिड़ाने के अलावा कुछ नहीं कर पाया .

देश में एक और मुद्दा था..जिसे लेकर सबसे ज्यादा अफवाह और डर का कारोबार किया गया. ये मुद्दा था..ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून .लेकिन देश में डर फैलाने वाले कुछ नेताओं और पत्रकारों के इस गैंग ने इसे मुस्लिम धर्म पर हमला बताना शुरू कर दिया . कहा गया कि अगर शरिया कानून से छेड़छाड़ की गई तो..देश में अशांति फैल जाएगी . लेकिन इस कानून को भी ज्यादातर मुसलमानों ने खुले दिल से स्वीकार किया और इस गैंग का एजेंडा फेल कर दिया .

आज जब हम ये विश्लेषण कर रहे हैं तो हम नेताओं से ज्यादा उन पत्रकारों से सवाल पूछ रहे हैं जो इस डर वाले Nexus की सबसे अहम कड़ी हैं . इसी मीडिया के एक हिस्से ने अपने कैमरों के Lense से देश को सिर्फ डर की झूठी तस्वीरें दिखाई और कलम से खबर लिखने वाले पत्रकारों ने उसमें एजेंडी वाली स्याही भरकर...आपको खून से सनी खबरें बेचने की कोशिश की .

अब सवाल ये है कि क्या ये सारे पत्रकार किसी विशेष राजनीतिक विचारधारा का एजेंडा चला रहे थे या फिर ये जनता से ही कट चुके थे और इन्हें इस बात का एहसास तक नहीं था कि इन मुद्दों को लेकर देश की जनता क्या सोचती है , क्या चाहती है .

आज देश में डर का माहौल बनाने वाले इस छद्म वामपंथियों, छद्म धर्मनिरपेक्ष पत्रकारों को देश से माफी मांगनी चाहिए . क्योंकि इनकी कलम ने देश के 70 साल नष्ट कर दिए . जो मुद्दे पहले हल हो सकते थे उन्हें इन लोगों ने एक अंतहीन राजनीति में बदल दिया . लेकिन अब ये लोग बेनकाब हो चुके हैं और इन्हें पूरे देश से हाथ जोड़कर माफी मांगनी चाहिए .

आज देश में डर का माहौल बनाने वाले इन pseudo वामपंथियों, pseudo secular पत्रकारों को देश से माफी मांगनी चाहिए . क्योंकि इनकी कलम ने देश के 70 साल नष्ट कर दिए. जो मुद्दे पहले हल हो सकते थे उन्हें इन लोगों ने एक अंतहीन राजनीति में बदल दिया . लेकिन अब ये लोग बेनकाब हो चुके हैं और इन्हें पूरे देश से हाथ जोड़कर माफी मांगनी चाहिए .क्योंकि ये देश का सबसे बड़ा वैचारिक घोटाला था..