ZEE जानकारी: क्या कांग्रेस के लिए पाकिस्तान 'भगवान' बन गया है

हमारे ही देश के कुछ नेता ऐसे हैं. जो अपने बयानों से देश की एकता और अखंडता पर ग्रहण लगा देते हैं. 

ZEE जानकारी: क्या कांग्रेस के लिए पाकिस्तान 'भगवान' बन गया है

आज मकर संक्रांति का पर्व है. आपको और आपके पूरे परिवार को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं. वैसे तो संक्रांति का अर्थ होता है. सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण करना. यानी एक राशि से दूसरी राशि में जाना. लेकिन मकर संक्रांति का एक अर्थ सत्य की क्रांति भी है और आज पूरे देश को सत्य से भरपूर ऐसी ही क्रांति की ज़रूरत है. क्योंकि जिस देश में सत्य को क्रांति का आधार बना दिया जाता है उसे कोई हरा नहीं सकता.

हालांकि हमारे ही देश के कुछ नेता ऐसे हैं. जो अपने बयानों से देश की एकता और अखंडता पर ग्रहण लगा देते हैं. कांग्रेस के मणिशंकर अय्यर भी एक ऐसे ही नेता हैं. मणिशंकर अय्यर अक्सर पाकिस्तान का हीरो बनने के चक्कर में अपने ही देश की आलोचना करने लगते हैं. और उन्होंने एक बार फिर ऐसा ही किया है. मणिशंकर अय्यर उसी कांग्रेस के नेता हैं. जो 1947 में भारत के बंटवारे के समय खामोश थी. और कांग्रेस ने धर्म के आधार पर हो रहे इस बंटवारे का उस वक्त विरोध नहीं किया.

कांग्रेस की इस चुप्पी का खामियाज़ा लाखों करोड़ों लोगों ने भुगता और धर्म के नाम पर पाकिस्तान जैसे कट्टर इस्लामिक देश का जन्म हुआ...लेकिन आज उसी कांग्रेस के नेता ये कह रहे हैं कि भारत सही मायनों में एक धर्म निरपेक्ष देश तभी बन पाएगा...जब भारत पाकिस्तान के साथ दोस्ती कर लेगा .

मणिशंकर अय्यर रविवार को पाकिस्तान के लाहौर में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे. इस दौरान मणिशंकर अय्यर ने भारत विरोधी विचारों से पाकिस्तान को खुश करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारे बगैर. भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश नहीं बन सकता.यानी जिस धर्म के नाम पर 1947 में भारत का बंटवारा हुआ. और जिस धर्म के नाम पर पाकिस्तान बना आज उसी पाकिस्तान से बेहतर रिश्ते कांग्रेस के लिए धर्म-निरपेक्षता का सर्टिफिकेट बन गए हैं .

आप मणिशकर अय्यर का बयान का ये हिस्सा सुनिए फिर हम आपको बताएंगे कि कैसे मणिशंकर अय्यर पाकिस्तान को प्रसन्न करने के चक्कर में सारी लक्ष्मण रेखाएं लांघ गए. इसी चर्चा के दौरान मणिशंकर अय्यर ने एक सच भी कबूला. इस सच से कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियां दूर भागती हैं. लेकिन पाकिस्तान से Browny Points हासिल करने के चक्कर में मणिशंकर अय्यर ने वहां बैठे दर्शकों को ये बता दिया कि लोकसभा चुनाव हारने के बाद सभी विपक्षी पार्टियां बुरी तरह से हताश हो गई थी और कांग्रेस को तो ये तक लगने लगा था कि कहीं धर्मनिरपेक्षता की वजह से ही उसकी हार तो नहीं हुई.

मणिशंकर के मुताबिक विपक्षी पार्टियां भी उस वक्त हिंदुत्तव को एक मिठाई की तरह देखनी लगी थीं और सारी विपक्षी पार्टियां इस मिठाई का एक टुकड़ा हासिल करना चाहती थीं. ऐसा लग रहा था जैसे मणिशंकर अय्यर पाकिस्तान में भारत विरोधी दुष्प्रचार की एक दुकान खोलने गए हैं. वैचारिक विरोध की उनकी इस दुकान में हर वो सौदा था. जिसे पाकिस्तान हाथों हाथ खरीदना चाहेगा. मणिशंकर अय्यर लगातार पाकिस्तान को खुश करने वाले बयान दे रहे थे और नए नागरिकता कानून को लेकर गलत बयानबाज़ी भी कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि ये कानून NPR और NCR के साथ मिलकर भारत के मुसलमानों के लिए मुसीबत बन जाएगा. भारत के ऐसे हिंदू जिनके पास नागरिकता के प्रमाण नहीं हैं वो तो CAA की मदद से फटाफट नागरिकता हासिल कर लेंगे लेकिन मुसलमान इससे वंचित रह जाएंगे.

मणिशंकर अय्यर Idea Of India यानी आधुनिक भारत के विचार के लिए भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को श्रेय दे रहे हैं. पंडित नेहरू को ये श्रेय दिया भी जा सकता है. लेकिन मणिशंकर को ये भी सोचना चाहिए था कि पंडित नेहरू के Idea Of India में भारत के बंटवारे को जगह कैसे मिल गई.  क्यों धर्म निरपेक्ष कांग्रेस धर्म के आधार पर हो रहे भारत के बंटवारे को रोक नहीं पाई.

लेकिन शायद मणिशंकर अय्यर या कांग्रेस की दिलचस्पी इन सवालों का जवाब देने में नहीं है. कांग्रेस के नेताओं पर अक्सर पाकिस्तान की भाषा बोलने के आरोप लगते रहे हैं. लेकिन मणिशंकर अय्यर का लाहौर से लौटकर दिल्ली के शाहीन बाग जाना इस बात का जीता जागता प्रमाण बन गया है कि कांग्रेस को भारत विरोध की प्रेरणा कहां से मिलती है. अब मणिशंकर अय्यर के इन बयानों पर राजनीति भी हो रही है आगे बढ़ने से पहले आपको इस मुद्दे पर कुछ राजनैतिक बयान भी सुन लेने चाहिए.

मणिशंकर अय्यर पाकिस्तान में जाकर जो बयानबाज़ी कर रहे हैं. उसका आधार भारत का नया नागरिकता कानून है. इस नए कानून में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है.

ये कानून कहीं से भी भारत के मुसलमानों की नागरिकता के लिए खतरा नहीं है. लेकिन कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियां भारत और भारत के बाहर ये दुष्प्रचार कर रही हैं कि ये कानून भारत के मुसलमानों का दुश्मन है. इसे लेकर दिल्ली के शाहीन बाग में भी पिछले एक महीने से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इसके लिए 4 किलोमीटर लंबी सड़क को जाम करके रखा गया है और इस वजह से ऐसे लाखों लोग जो इस प्रदर्शन का हिस्सा नहीं है वो भी इसकी लपटों को महसूस कर रहे हैं. ठीक वैसे ही जैसे धूम्रपान ना करने वाले ना चाहकर भी अक्सर Passive Smoking का शिकार हो जाते हैं .

देश की राजधानी दिल्ली के शाहीन बाग में प्रदर्शन करने वालों को आज बांग्लादेश की राजधानी ढाका से आई कुछ तस्वीरों से सबक लेना चाहिए. कल ढाका के शाह बाग इलाके में ढाका यूनिवर्सिटी के सैंकड़ो छात्रों ने एक विरोध प्रदर्शन किया. लेकिन ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों का ये विरोध प्रदर्शन किसी कानून के विरोध में नहीं था. बल्कि ये छात्र सरस्वती पूजा के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे थे.

ढाका में 30 जनवरी को स्थानीय चुनाव होने है..लेकिन उसी दिन सरस्वती पूजा भी है. जिसका बांग्लादेश में रहने वाले हिंदुओं के लिए बहुत महत्व है . छात्रों ने इस प्रदर्शन के ज़रिए बांग्लादेश के चुनाव आयोग के सामने ये मांग रखी है कि चुनाव की तारीख बदल दी जाए..क्योंकि अगर सरस्वती पूजा वाले दिन चुनाव आयोजित किए जाएंगे तो हिंदू समुदाय के लोग अपना त्योहार ठीक से नहीं मना पाएंगे. इस मामले पर ढाका के हाईकोर्ट में भी एक अपील दायर की गई थी. लेकिन हाईकोर्ट ने चुनाव की तारीख में बदलाव से इनकार कर दिया था. इसके बाद से हज़ारों लोग ढाका की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

अगर हम आपको बांग्लादेश के इन छात्रों की पहचान ना बताएं तो सिर्फ तस्वीरें देखकर आप ये पता नहीं लगा पाएंगे कि ये कहां के छात्र हैं. हो सकता है आपको लगे कि ये JNU के छात्र हैं..या फिर जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्र है . या फिर भारत की किसी और यूनिवर्सिटी के छात्र हैं . लेकिन जो बात इन छात्रों को भारत के प्रदर्शनकारी छात्रों से अलग बनाती है वो ये है कि ये हिंदुओं के अधिकारों विरोध नहीं बल्कि उसका समर्थन कर रहे हैं .

जबकि भारत में JNU और जामिया जैसी यूनिवर्सिटी के छात्र CAA का विरोध करने के नाम पर....पाकिस्तान और बांग्लादेश देश से आए अल्पसंख्यक हिंदुओं का ही विरोध कर रहे हैं . क्योंकि इस नागरिकता कानून का सबसे ज्यादा फायदा पड़ोसी देशों में अत्याचार झेलने वाले हिंदुओं को ही मिलने वाला है . जबकि बांग्लादेश के छात्र वहां के अल्पसंख्यक हिंदुओं के अधिकारों की बात कर रहे हैं.

दिल्ली के शाहीन बाग और बांग्लादेश के शाह बाग के प्रदर्शनों का ये अंतर साफ करता है कि बुराई विरोध प्रदर्शनों में नहीं है. बल्कि इसमें होने वाली एजेंडे की मिलावट मे हैं. भारत में विरोध प्रदर्शन अक्सर राजनीतिक पर्यटन का केंद्र बन जाते हैं और छात्रों द्वारा शुरु किए गए आंदोलन. राजनेताओं द्वारा HighJack कर लिए जाते हैं. जबकि भारत के ही पड़ोसी बांग्लादेश में धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिए जो प्रदर्शन हो रहे हैं. उन्हें अभी तक एजेंडे की मिलावट से दूर रखा गया है.