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ZEE जानकारी: अयोध्या विवाद के आरम्भ का ऐतिहासिक विश्लेषण

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले केंद्र सरकार ने अयोध्या में 4 हज़ार अतिरिक्त फोर्स भेजने का फ़ैसला किया है. 

ZEE जानकारी: अयोध्या विवाद के आरम्भ का ऐतिहासिक विश्लेषण

नई दिल्ली: कहा जाता है अगर कोई पीढ़ी अपने इतिहास को नजरअंदाज करे तो उसका ना अतीत बचता है और ना ही भविष्य . इसलिए आज हम देश के सबसे बड़े मुद्दे... अयोध्या का धार्मिक नहीं, ऐतिहासिक दृष्टि से विश्लेषण करेंगे . और ये भी बताएंगे कि इतिहास इस बारे में क्या कहता है ?अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 17 नवंबर से पहले आने की संभावना है. 17 नवंबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई रिटायर होने वाले हैं. रिटायरमेंट से पहले, उनके पास काम काज के लिए सिर्फ 6 दिन बचे हैं. सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे देश के 135 करोड़ लोग... इस निर्णायक घड़ी में सौहार्द का संदेश देने का फैसला कर चुके हैं.

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले केंद्र सरकार ने अयोध्या में 4 हज़ार अतिरिक्त फोर्स भेजने का फ़ैसला किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में सांप्रदायिक सौहार्द बरकरार रखने की अपील की है. प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों और मंत्रियों को विवादित बयान देने से बचने के लिए कहा है. ये भी कहा कि न्यायपालिका के फैसले का सम्मान होना चाहिए... ना कोई इस फैसले का जश्न मनाए और ना ही गम हो . उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज सभी जिलों के डीएम और एसपी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की...और कानून व्यवस्था को लेकर निर्देश दिये.

हिंदू हों या मुस्लिम पक्ष सबकी कोशिश है अदालत चाहे कोई भी फैसला सुनाए... देश की एकता और अखंडता पर कोई आंच ना आए . भारत की आज़ादी के बाद से ये केस करीब 70 वर्षों से चल रहा है. और इस दौरान देश के लोगों ने बहुत सहनशीलता का परिचय दिया है . ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि भारत के लोग.भगवान राम को अपना आदर्श पुरुष मानते हैं . यहां के लोग वैसे ही सहनशील और धैर्यवान हैं जैसे भगवान राम . आप ये भी कह सकते हैं कि इस समय देश को राजनीति से ज्यादा ''राम नीति'' पर चलने की जरूरत है. ताकि समाज में शांति बरकरार रहे .

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का काउंटडाउन शुरू हो चुका है . और हम चाहते हैं कि आज़ाद भारत का सबसे बड़े कानूनी विवाद पर जब फैसला आए... तो देश शांति और भाईचारे की मिसाल पेश करे. ZEE NEWS इस पूरे मामले पर लगातार आपसे शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाये रखने की अपील कर रहा है . अयोध्या पर अपने विश्लेषण को आगे बढ़ाने से पहले अब हम आपको सांप्रदायिक सौहार्द की राम धुन सुनाना चाहते हैं . जिसे बच्चों ने खुद गाया है . हमें उम्मीद है ये राम धुन आपको बहुत पसंद आएगी .

भगवान राम हिंदुओं के आराध्य हैं, वो मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, और सबसे बड़ी बात ये है कि वो सिर्फ हिंदू या मुसलमान के नहीं, बल्कि पूरे हिंदुस्तान के हैं . हिंदू उन्हें राजा राम कहते हैं, तो मुसलमान उन्हें इमाम-ए-हिंद कहते हैं ...और इमाम-ए-हिंद का मतलब भी भारत का नेता...यानी इस राज्य का राजा ही हुआ . देखा जाए तो भगवान को राम को लेकर कोई भेद-भाव नहीं है, वो हमारे देश के आदर्श हैं .हमारे देश के कण कण में श्रीराम बसते हैं . पौराणिक कथाओं के मुताबिक अयोध्या उनकी जन्मभूमि है. इसलिए आज से आपको इतिहास के पन्नों से अयोध्या पर विशेष सीरीज दिखाएंगे .

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या पर सुनवाई के दौरान पूर्व IPS अधिकारी किशोर कुणाल की किताब Ayodhya Revisited से तथ्य रखे गए थे . आज हम अयोध्या का इतिहास बताने के लिए इसी किताब से कुछ खास घटनाएं बताएंगे . वर्ष 1634 में ब्रिटिश इतिहासकार Thomas Herbert(हर्बर्ट) ने अपनी किताब में अयोध्या में कई पुराने स्थलों के होने के बारे में लिखा था . उन्होने बताया कि वहां सबसे शानदार वो महल था जिसे रामचंद्र ने 9 लाख.. 94 हजार.. पांच सौ वर्ष पहले बनवाया था .

वर्ष 1660 में अयोध्या के शासक फेदाई खान ने कई मंदिरों को बर्बाद कर दिया था. जिसमें राम जन्मभूमि मंदिर भी शामिल था . वर्ष 1767 में क्रिश्चियन मिशनरी Father Joseph ने भारत पर लिखी गई अपनी किताब में... अयोध्या में एक मस्जिद बनाए जाने का जिक्र किया था. इस किताब में बताया गया कि वहां राम मंदिर को गिराकर मस्जिद का निर्माण किया गया था. बाद में वर्ष 1775 में अवध का सूबेदार शुजा-उद्दौला अपनी राजधानी अयोध्या से फैजाबाद ले गया. इसके बाद बैरागी साधुओं ने वहां वीरान पड़े मंदिरों का पुनर-निर्माण कराया था.

ऐतिहासिक जानकारियों के मुताबिक अयोध्या में मंदिरों के विध्वंस का सिलसिला यहीं नहीं रुका. वर्ष 1801 में फ्रांस के इतिहासकार C. Mentelle(मेंटेल) ने लिखा कि अयोध्या में मुगल शासक औरंगजेब ने कई मंदिरों को तोड़ा. लेकिन कई जानकारों ने ये भी कहा कि इसका जिम्मेदार बाबर था.अयोध्या में मंदिरों को तोड़ने के बारे में एक और सबूत वर्ष 1813 का है. तत्कालीन East India Company के सर्वेयर Francis Buchanan(फ्रांसिस बुखनन) ने अयोध्या का निरीक्षण किया था. उस वक्त वहां की जनता ने उनको बताया कि औरंगजेब ने ही मथुरा, काशी और अयोध्या के मंदिरों को नष्ट करवाया . Buchanan ने ये भी बताया कि बाबर के आदेश पर उसके सेनापति मीर बाकी ने मस्जिद का निर्माण कराया था.

बताया ये भी जाता है कि जुलाई 1855 में सुन्नी धर्मगुरु शाह गुलाम हुसैन ने 4 सौ से 6 सौ हथियारबंद लोगों के साथ हनुमान गढ़ी पर हमला किया था... तब बैरागी साधुओं ने उनका मुकाबला किया था... जिसमें शाह हुसैन की हार हुई थी. कहा जाता है कि ये मंदिर के लिए हिंदुओं और मुसलमानों के बीच हुई पहली लड़ाई थी.

अयोध्या देश के करीब 100 करोड़ हिंदुओं के लिए एक पवित्र स्थान है. वर्ष 1858 में इतिहासकार और लेखक विष्णुभट गोडसे ने अपनी किताब में '1858 The Real Story of the Great Uprising' में अयोध्या के बारे में विस्तार से लिखा है. उनके मुताबिक रामनवमी के दिन वहां 8 लाख लोग मौजूद थे. उस समय 22 दिनों तक विष्णुभट गोडसे अयोध्या में रहे और एक एक घटना के बारे में लिखा . शायद अयोध्या विवाद के बारे में आपको कुछ वर्षों या दशकों पहले पता चला होगा. लेकिन इतिहासकारों के मुताबिक इस मामले की शुरुआत करीब 400 वर्ष पहले हो गई थी.

इतिहास के बाद अब हम अयोध्या के वर्तमान में चलते हैं. यहां हमेशा से गंगा जमुनी तहजीब रही है. जिसमें सभी समुदाय के लोग आपस में मिल जुलकर रहते हैं. अयोध्या विवाद को आधार बनाकर पूरे देश में राजनीति की गई .. लेकिन उसका असर यहां के लोगों की भावनाओं पर कभी नहीं पड़ा . आज भी वहां हिंदू... मुस्लिम.. सिख और ईसाई धर्म के लोगों ने मिलकर समाज को जोड़ने वाली प्रार्थना की. लेकिन देश को जोड़े रखने की जिम्मेदारी हमारी... आपकी यानी हम सबकी है .

ZEE NEWS की कोशिश है कि ये भावना पूरे देश के सभी लोगों तक पहुंचे . इसलिए आज आपको अयोध्या से आई ये रिपोर्ट ध्यान से देखनी चाहिए .अयोध्या देश के सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक है . इसलिए राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले... यहां सुरक्षा सबसे ज्यादा बढ़ा दी गई है .सुरक्षा के लिए अयोध्या को अभी 4 Zone में बांट दिया गया है सबसे पहले Red Zone है... ये राम जन्मभूमि के आसपास का इलाक़ा है, यहाँ पर सुरक्षा व्यवस्था सबसे ज़्यादा सख्त रहेगी .

फ़ैसले के दिन बिना पास के इस इलाक़े में किसी को जाने की अनुमति नहीं होगी . इसके बाद पूरे अयोध्या परिसर को Yellow Zone में रखा गया है. सभी मंदिर, धर्मशाला, होटल, घाट और रिहायशी इलाके इस ज़ोन में हैं, यहाँ पर भी सुरक्षा के कई घेरे होंगे . Blue Zone में अयोध्या के बाहरी इलाक़े को रखा गया है, जिसमें पुराना फ़ैज़ाबाद शहर आता है और सबसे अंतिम Green Zone है... इसमें अयोध्या के पड़ोसी सभी 5 जिले हैं.

अयोध्या में सभी होटल, धर्मशाला और गेस्ट हाउस में रूकने वाले लोगों की जाँच की जा रही है . अगर आप इस वक्त अयोध्या में हैं तो अपना पहचान पत्र हमेशा अपने साथ रखें और सुरक्षा जांच में सहयोग करें . खुफिया एजेंसियों के साथ उत्तर प्रदेश की Anti Terrorist Squad के Commandos भी अयोध्या में तैनात हैं . आपको हमने पहले भी बताया था कि वहां सभी अधिकारियों और पुलिस कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं .

अभी ड्रोन से भी अयोध्या की हवाई निगरानी की जा रही है. साथ ही सोशल मीडिया पर भी ध्यान दिया जा रहा है. ताकि अफवाह फैलानेवालों से निबटा जा सके . आपको याद होगा... 4 सदी पुराने ऐतिहासिक अयोध्या भूमि विवाद को सुलझाने की तमाम कोशिशें नाकाम हो गई थीं. लेकिन अब उम्मीद है.. अगले कुछ दिनों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद... इस विवाद का हमेशा के लिए हल निकल जाएगा . अब सारा देश पूरे मन से इस फैसले को स्वीकार कर ले... ZEE NEWS यही अपील लगातार आपसे कर रहा है .