ZEE जानकारी: शाहीन बाग में 'देश विरोधी गैंग' की 'दादागिरी' कब तक सहेंगे?

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहा करते थे कि जब मजबूत इरादों वाले लोगों का एक छोटा सा समूह भी अपने मिशन पर दृढ़ विश्वास करके आगे बढ़ता है. तो वो इतिहास बदलने में सक्षम होता जाता है. Zee News भी पक्के इरादों वाले लोगों का एक ऐसा ही छोटा सा समूह है. जिसने एक ऐसा इतिहास रचा है. जिसका हिस्सा अब भारत के करोड़ों लोग बनने लगे हैं. 

ZEE जानकारी: शाहीन बाग में 'देश विरोधी गैंग' की 'दादागिरी' कब तक सहेंगे?

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहा करते थे कि जब मजबूत इरादों वाले लोगों का एक छोटा सा समूह भी अपने मिशन पर दृढ़ विश्वास करके आगे बढ़ता है. तो वो इतिहास बदलने में सक्षम होता जाता है. Zee News भी पक्के इरादों वाले लोगों का एक ऐसा ही छोटा सा समूह है. जिसने एक ऐसा इतिहास रचा है. जिसका हिस्सा अब भारत के करोड़ों लोग बनने लगे हैं. कल हमने आपको बताया था कि कैसे जम्मू-कश्मीर से हटने के बाद धारा 370 अब दिल्ली के शाहीन बाग़ में लग गई है. हमने आपको कल का DNA शाहीन बाग़ से ही दिखाया था. इसके बाद हमें जो प्रतिक्रियाएं मिलीं वो ऐतिहासिक थीं, देश के मीडिया इतिहास में ये पहला ऐसा मौका था. जब दो चैनल एक उद्धेश्य के लिए एक साथ आए थे.

मैंने और वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया ने आपको शाहीन बाग़ का आंखों देखा हाल दिखाया था. हमारी इस मुहिम को देश-विदेश से जबरदस्त समर्थन मिला है. लेकिन आज हम अपने मिशन को आगे बढ़ाते हुए आपके सामने एक सवाल लेकर आए हैं. और हमरा सवाल ये है कि क्या हम सब मिलकर शाहीन बाग़ को टुकड़े टुकड़े गैंग से आज़ाद नहीं करा सकते?

शाहीन बाग़ में टुकड़े टुकड़े गैंग के सदस्य हाथों में तिरंगा लेकर लेकर रहेंगे आज़ादी वाले नारे लगा रहे हैं. आज हम पूरे भारत की तरफ से इन लोगों से कहना चाहते हैं कि हम लेकर रहेंगे शाहीन बाग़. क्योंकि शाहीन बाग़ किसी एक खास विचारधारा वाले लोगों का नहीं हो सकता. ये देश का हिस्सा है और इस पर सबसे पहला हक देश के लोगों का ही है.

शहीन बाग़ को लेकर देश के लोगों का धैर्य भी अब जवाब देने लगा है और इसलिए अब शाहीन बाग़ को जल्द से जल्द खाली कराना होगा. शाहीन बाग़ से हमारा विश्लेषण कल पूरी दुनिया में देखा गया. और उसके बाद पूरे देश में जो प्रतिक्रिया हुई. उसे देखकर ऐसा लगता है कि पूरा देश अब इस मुद्दे पर जाग चुका है.

शाहीन बाग़ से हमारा DNA देखने के बाद अब पूरा देश ये सवाल पूछ रहा है कि शाहीन बाग़ में भारतीयों की एंट्री कब होगी? और शाहीन बाग़ को टुकड़े टुकड़े गैंग से आज़ादी कब मिलेगी? शाहीन बाग़ में जो सड़क है जिस पर ये सारे लोग कब्ज़ा करके बैठे है. वो हमारे टैक्स के पैसे से बनी है. शाहीन बाग़ में जो बिजली पानी आता है, वो हमारे टैक्स के पैसे से ही आती है. इसलिए शाहीन बाग़ पर पहला हक देश के लोगों का है.

4 वर्ष पहले Zee News टुकड़े टुकड़े गैंग और अफज़ल प्रेमी गैंग का दुश्मन नंबर एक बन गया था. इसके बाद हमें दुश्मन मानने वालों में डिजाइनर पत्रकारों और बुद्धीजीवियों का गिरोह भी शामिल हो गया और अब शाहीन बाग़ गैंग ने हमें अपना सबसे बड़ा शत्रु मान लिया है. Zee News को देखते ही अब शाहीन बाग़ में Go Back के नारे लगने लगते हैं और हमारे किसी भी पत्रकार को शाहीन बाग़ में घुसने नहीं दिया जाता है. लेकिन हम अपने इस विरोध को पत्रकारिता का Medal मानते हैं.

क्योंकि जो लोग हमारा विरोध कर रहे हैं. वो इस बात का सबूत दे रहे हैं कि हमारी पत्रकारिता बिल्कुल ठीक रास्ते पर है. और अच्छी बात ये है कि हमारी पत्रकारिता को ये सराहना. Editors guild Of India या Press Council Of India से नहीं बल्कि देश के लोगों से मिल रही है. शाहीन बाग़ के लोगों को हम इसलिए चुभ रहे हैं क्योंकि हम अफज़ल गुरु को आतंकवादी मानते हैं. बुरहान वाणी को आतंकवादी मानते हैं. जो लोग बुरहान वाणी को हेड मास्टर का बेटा मानते थे. वही लोग देशद्रोह के आरोपी शरजील इमाम को भी क्रांतिकारी मान रहे हैं.

कहा जाता है पत्रकारिता की असली पहचान तब होती है. जब पत्रकार विरोध की परवाह किए बैगर अपने उद्धेश्य पर अडिग रहता हैं. जबकि हमारे ही देश के कुछ पत्रकार विरोध तो छोड़िए इन प्रदर्शनकारियों से सवाल तक पूछने की हिम्मत नहीं करते लेकिन कल हमने ये हिम्मत दिखाई. ये जानते हुए भी कि हमें इसका खामियाज़ा उठाना पड़ सकता है. हमें मारा-पीटा जा सकता है. या फिर हालात Mob Lynching जैसे भी हो सकते हैं.

हमारे और शाहीन बाग़ के बीच में कुछ Baricades थे. हमें प्रदर्शनकारियों ने ये Baricades पार करने नहीं दिए. हमें ऐसा लग रहा था..जैसे ये Baricades बल्कि दो देशों के बीच का Border है. इन Baricades और शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों के बीच ज़मीन का एक बड़ा हिस्सा खाली था. ये हिस्सा देख कर ऐसा लग रहा था कि ये एक No Man's Land है. यानी ज़मीन का एक ऐसा हिस्सा. जिस पर हक जताने के लिए आपको अपनी जान तक गंवानी पड़ सकती है.

हमने कल शाहीन बाग़ के प्रदर्शन स्थल तक जाने के लिए एक नहीं बल्कि कई कोशिशें की लेकिन पुरुष प्रदर्शनकारियों ने महिलाओं और बच्चों को आगे कर दिया और खुद पीछे की पंक्ति में जाकर खड़े हो गए. ये लोग हमें देखकर Go Back के नारे लगाने लगे और हमें हमारे ही देश की राजधानी के एक हिस्से में घुसने की आज़ादी नहीं नहीं दी गई. ऐसा लग रहा था जैसे शाहीन बाग़ पहुंचकर भारत की सारी सीमाएं समाप्त हो जाती हैं. और इन Baricades के आगे किसी दूसरे देश की सीमाएं शुरु होती हैं.

आपने सुना होगा कि हर शहर में एक ऐसा मोहल्ला होता है जहां पत्रकार तो क्या. पुलिस भी जाने से डरती है. शाहीन बाग़ पहुंचकर हमे ऐसा ही लग रहा था. जैसे हम ऐसे ही किसी मोहल्ले में आ गए हैं. इसलिए आज हमने एक बार फिर आपको शाहीन बाग़ से हमारे कल के DNA का एक हिस्सा दिखाने का फैसला किया है. ये विश्लेषण देखकर आप समझ जाएंगे कि कैसे हमारे देश में शाहीन बाग़ जैसी जगहों के नाम पर अलगाववाद की छोटी छोटी दुकाने खोल दी गई हैं..और अपने ही देश के लोग अब इन इलाकों में अपनी मर्ज़ी से आ और जा नहीं सकते.

शाहीन बाग़ में मीडिया के सिर्फ उस हिस्से को प्रवेश दिया जा रहा है. जो टुकड़े टुकड़े गैंग की भाषा बोलता है. जबकि मीडिया का जो हिस्सा इन विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठा रहा है. और इनसे जुड़ा सच दिखा रहा है. उन्हें यहां घुसने नहीं दिया जा रहा. शाहीन बाग़ कैसे टुकड़े टुकड़े गैंग का मुख्यालय बन गया है. ये हमारे विश्लेषण में साफ हो चुका है. पूरा देश भी पिछले 24 घंटे से शाहीन बाग़ से दिखाए गए DNA की चर्चा कर रहा है. इस पर हमें देश भर से प्रतिक्रियाएं हासिल हुई है. 

किसी भी आज़ाद देश की पहचान इस बात से होती है कि वहां के मीडिया को कितनी आजादी हासिल है . भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है..और पत्रकारिता को इसका चौथा स्तंभ माना जाता है..लेकिन शाहीन बाग़ में कैसे लोकतंत्र के इस चौथे स्तंभ को...चोट पहुंचाने की कोशिश हो रही है . ये हमने आपको दिखाया...अब आपको इस मामले पर आई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सुन लेनी चाहिए .

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शाहीन बाग़ दिल्ली के जामिया नगर में है और इस जगह को टुकड़े टुकड़े गैंग का मुख्यालय बना दिया गया है लेकिन शाहीन बाग़ की शाखाएं पूरे देश में खुल चुकी हैं. इनमें से कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन दिन में कुछ घंटों के लिए होते हैं जबकि कुछ जगहों पर ये सिलसिला सातों दिन और 24 घंटे चलता रहता है.  आज जब हमने दिल्ली के अलग अलग इलाकों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों की पड़ताल की तो हमें अपनी रिपोर्टिंग के दौरान एक बार फिर से प्रदर्शनकारियों के विरोध का सामना करना पड़ा. शाहीन बाग़ गैग के प्रदर्शनकारी कैसे Zee News को अपना दुश्मन नंबर एक मानने लगे हैं ये आपको देखना चाहिए.

पूरे देश में जो लोग नागरिकता कानून का विरोध कर रहे हैं उनकी Modus Operandiयानी कार्यप्रणाली एक सी है,  और ये Modus Operandi है. ज़ी न्यूज़ को सच दिखाने से रोकना. आप कह सकते हैं कि पूरे देश में टुकड़े टुकड़ गैंग शाहीन बाग़ की Franchise बांट रहा है. और Franchise की खासियत ये होती है कि आपको सभी जगहों पर एक जैसे Standards यानी नियम दिखाई देंगे.

यानी टुकड़े टुकड़े गैंग पूरे देश में विरोध प्रदर्शन करने वालों को एक SOP यानी standard operating procedure जारी कर चुका है. जिसका उद्धेश्य एक जैसे मापदंडों के तहत इन विरोध प्रदर्शनों को आयोजित करना है. और इनके SOP का सबसे महत्वपूर्ण अंग है. सच दिखाने वाले मीडिया का विरोध करना. टुकड़े टुकड़े गैंग के तरीके देखकर लगता है कि जल्द ही शाहीन बाग़ की कोई ना कोई शाखा आपके शहर में भी खुल जाएगी. इसलिए आज देश को ऐसे शाहीन बाग़ों से आज़ादी दिलाना बहुत ज़रूरी हो गया है.

इसे आप हलके में मत लीजिए क्योंकि अगर आपके शहर में भी शाहीन बाग़ आ रहा है तो ये बहुत गंभीर बात है. ऐसी ही मुहीम और विरोध प्रदर्शनों के बाद कश्मीर का क्या हाल हुआ ये सब जानते हैं इसलिए आपको सावधान हो जाना चाहिए.