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ZEE जानकारी: साइबर युद्ध के लिए भारत कितना तैयार है?

हम आपको पिछले कई दिनों से बता रहे हैं कि कैसे आपका निजी डाटा कभी भी असुरक्षित हाथों में जा सकता है. लेकिन आज आपको सरल भाषा में ये भी समझ लेना चाहिए कि ये डाटा आखिर होता क्या है. 

ZEE जानकारी: साइबर युद्ध के लिए भारत कितना तैयार है?

नई दिल्ली: हम आपको DNA में पहले भी कई बार बता चुके हैं कि डाटा को नए ज़माने का ऑयल कहा जाता है. क्योंकि आज की तारीख में दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनियां आपकी निजी जानकारियों के बदले में..मोटी कीमत चुकाने को तैयार हैं . हम डाटा को नए ज़माने का तेल क्यों कह रहे हैं कि इसे समझने के लिए आपको एक रोचक आंकड़े पर ध्यान देना होगा . इस वक्त दुनिया में सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली कंपनी है सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी Aramco....जिसका पिछले साल का मुनाफा 7 लाख 80 हज़ार करोड़ रुपये का था .

जबकि 4 लाख 20 हज़ार करोड़ रुपये की कमाई के साथ एप्पल दूसरे नंबर पर है . बैंक ऑफ अमेरिका के अनुमान के मुताबिक आज की तारीख में Aramco की मार्किट वेल्यू 1 ट्रिलियन डॉलर्स यानी 70 लाख करोड़ रुपये हो सकती है . और अब आपको जानकर हैरानी होगी कि वर्ष 2025 तक भारत की डिजिटल इकोनॉमी का आकार भी करीब 70 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा . ये आंकड़ा भारत के आईटी मंत्रालय और मैकिन्से (McKinsey) द्वारा की गई एक स्टडी पर आधारित हैं .

यानी भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर्स की अर्थव्यवस्था बनाने में भारत के करोड़ों लोगों के डाटा की सबसे बड़ी भूमिका होगी और इस डाटा का मूल्य सऊदी अरब से निकलने वाले तेल से भी ज्यादा हो जाएगा . और सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात ये है कि आज भारत सऊदी अरब से तेल खरीदता है और तेल खरीदने के मामले में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है. लेकिन आने वाले कुछ वर्षों में भारत दुनिया में सबसे ज्यादा डाटा का उत्पादन करने वाला देश बन जाएगा और दुनिया के बड़े बड़े देश मोटी कीमत चुकाकर ये डाटा खरीदने के लिए लाइन में लगे होंगे ... कुछ देश भारत पर साइबर हमला करके भी इस मूल्यवान डाटा को हासिल करने की कोशिश करेंगे और हमें लगता है कि इसकी शुरुआत हो भी चुकी है .

आज हम आपको देश में हो रही साइबर घुसपैठ के खतरे से आगाह कर रहे हैं . भारत में जब आम आदमी की मूल ज़रूरतों की बात होती है..तो रोटी कपड़ा और मकान का जिक्र आता है . लेकिन लोग इसमें प्राइवेसी यानी निजता को शामिल करना भूल जाते हैं . सांस्कृतिक तौर पर भारत के लोग इस निजता यानी प्राइवेसी को बहुत पसंद करते हैं . घर की बात बाहर नहीं जाने देने देते और अपने से जुड़ी जानकारी उन लोगों के साथ कभी साझा नहीं करते...जिनकी नियत पर शक होता है . 

लेकिन भारत के साइबर संसार में अब निजता के इन संस्कारों के लिए कोई जगह नहीं बची है . लोग अपनी सारी जानकारी...Social Media, Mobile Apps, और इंटरनेट पर साझा कर लेते हैं . यानी लोग खुद अपनी निजी जानकारियों 
को अंजाने में इंटरनेट की दुनिया पर नीलाम कर रहे हैं .क्योंकि दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनियां आपका ये डाटा खरीदने के लिए लाखों करोड़ों रुपये की बोली लगा रही हैं .स्वीडन की कंपनी Ericsson द्वारा किए गए एक सर्वे के मुताबिक भारत के लोग दुनिया में सबसे ज्यादा डाटा इस्तेमाल करते हैं . फिलहाल इसका औसत करीब 10 GB प्रति महीना है..जो 2024 तक बढ़कर 18 GB से ज्यादा हो जाएगा .

इसी सर्वे के मुताबिक भारत के लोग 5G जैसी सेवाओं पर 320 रुपये प्रति महिने का प्रीमियम देने के लिए भी तैयार है . यानी भारत के लोग डाटा का इस्तेमाल करने के लिए ढेर सारा पैसा भी खर्च कर सकते हैं. लेकिन डाटा प्राइवेसी से जुड़े मजबूत कानूनों के अभाव की वजह से....भारतीयों का ये सारा डाटा..कभी भी दुश्मन देश के साइबर सैनिकों या फिर साइबर आतंकवादियों के हाथ में पड़ सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक भारत को जल्द ही...इस समस्या से निपटने के लिए मजबूत कानून बनाने होंगे और डाटा की सुरक्षा को लेकर विदेशी कंपनियों की जवाबदेही तय करनी होगी .

हम आपको पिछले कई दिनों से बता रहे हैं कि कैसे आपका निजी डाटा कभी भी असुरक्षित हाथों में जा सकता है. लेकिन आज आपको सरल भाषा में ये भी समझ लेना चाहिए कि ये डाटा आखिर होता क्या है . सरल भाषा में डाटा उन जानकारियों और तथ्यों को कहते हैं जिन्हें कहीं स्टोर किया जा सकता है और उसका विश्लेषण किया जा सकता है . डाटा किसी व्यक्ति से जुड़ा भी हो सकता है, वस्तु से जुड़ा भी और इतिहास से जुड़ा भी .

Computer की भाषा में तो डाटा को बनाया या मिटाया जा सकता है. लेकिन हमें लगता कि धीरे धीरे आपसे जुड़ा सारा डाटा Immortal यानी अमर हो जाएगा . क्योंकि Internet की दुनिया में आप जो भी जानकारी दूसरों तक पहुंचाते हैं...वो कभी मिटती नहीं है...बल्कि सिर्फ उसका रूप बदलता रहता है . यानी मानव शरीर की तरह आपका Mobile Phone या Computer तो नष्ट हो सकता है लेकिन किसी आत्मा की तरह डाटा अपना शरीर यानी device बदलता रहता है .

30 अक्टूबर को पहली बार DNA में हमने आपको बताया था कि कैसे इजरायल की एक कंपनी NSO द्वारा..एक Spyware की मदद से दुनिया के 1400 लोगों की जासूसी की गई . अब NSO और इसका इस्तेमाल करने वाली सरकारों के खिलाफ दुनिया भर में मुकदमे दायर किए जा रहे हैं . हम आपको NSO के खिलाफ Whatsapp द्वारा दायर किए गए मुकदमे के बारे में बता चुके हैं . और अब आपको ये भी जान लेना चाहिए कि मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था Amnesty International ने भी इस मामले में एक केस फाइल किया है . Amnesty ने ये मुकदमा इजरायल के रक्षा मंत्रालय के खिलाफ दायर किया है .

साइबर संसार...अब युद्ध का सबसे बड़ा मैदान है . ये एक आभासी दुनिया है, जहां कदम-कदम पर छल है . यानी जो दिखाई पड़ता है, ज़रूरी नहीं है कि वही सच हो . युद्ध में दुश्मन को परास्त करने के लिए सूचना को रणनीति बनाने की परंपरा बहुत पुरानी है . महाभारत की एक मशहूर घटना है ...जिसमें अश्वत्थामा की मौत के बारे में अफवाह उड़ाई गई थी .

तब अश्वत्थामा नाम के हाथी को मारा गया था, लेकिन इस बात को इस तरीके से पेश किया गया था...कि युद्ध के मैदान में सबने यही समझा ...कि गुरु द्रोणाचार्य का बेटा अश्वत्थामा मारा गया . पांडवों ने युधिष्टिर ने इस बात का ऐलान कराया, कि ''अश्वत्थामा मारा गया'', और जैसे ही युधिष्ठिर ने कहा कि 'मुझे नहीं पता वो इंसान है या हाथी'...तभी युद्ध के मैदान में शंख बजा दिया गया . 

पांडवों ने जान-बूझकर युधिष्ठिर को चुना, क्योंकि उन्हें पता था, युधिष्ठिर की छवि अच्छी है, उनकी बात पर हर कोई भरोसा करेगा . पांडवों ने ऐसा इसलिए किया ताकि द्रोणाचार्य शोक से भर जाएं और अस्त्र त्याग दें . हुआ भी यही . क्योंकि अपने बेटे की मौत की खबर सुनकर द्रोणाचार्य शोक ग्रस्त हो गए और हथियार त्याग कर बैठ गए, जिसके बाद द्रौपदी के भाई ने उनकी हत्या कर दी . ठीक इसी तरह शिखंडी को भी पांडवों ने अपनी सेना में इसलिए सबसे आगे कर दिया था, ताकि भीष्म पितामह किसी स्त्री को सामने देखकर अस्त्र और शस्त्र का प्रयोग ना करें . और इस तरह से पांडवों ने कौरवों के एक और योद्धा को कमज़ोर कर दिया . कहने का मतलब ये है कि युद्ध में बल के साथ छल...और सूचना का रणनीतिक इस्तेमाल...बहुत पहले से किया जा रहा है . 

हम आपको पिछले करीब एक हफ्ते से Whatsapp की मदद से की गई जासूसी की खबर दिखा रहे हैं . हमने इस मामले की तह तक जाने के लिए भारत से लेकर इजरायल और ब्रिटेन तक...तहकीकात की . इस दौरान हमें जो बात समझ आई...वो मैं आपके साथ बांटना चाहता हूं . हमें ये बात समझ आई कि दुनिया अब Cold War के युग से आगे बढ़कर...Code War के दौर में आ गई है . साइबर स्पेस दुनिया का सबसे बड़ा युद्ध का मैदान बन गया है...जहां लगातार एक दूसरे पर हमले किए जा रहे हैं . इसलिए भविष्य में जो युद्ध होंगे उनमें वही देश विजयी होगा जिसके साइबर सैनिक सबसे ज्यादा मजबूत होंगे और जिसके नागरिक अपने निजी डाटा को लेकर जागरुक होंगे .

फिलहाल हमारे देश में निजता यानी प्राइवेसी एक दूर की कौड़ी है. क्योंकि अभी ज्यादातर भारतीय बुनियादी सुविधाओं के लिए ही संघर्ष कर रहे हैं . और इसमें निजता की कोई जगह नहीं है..एक छोटे से कमरे में पूरा परिवार अपना जीवन बिताता है. संयुक्त परिवार की परंपरा भी अभी भारत में जीवित है और हमारे यहां प्राइवेसी की परवाह करने वाले लोगों को समाज अच्छी नज़र से नहीं देखता . कोई अकेला रहना चाहता है तो उससे भी कई तरह के सवाल पूछे जाते हैं. यानी इंटरनेट पर निजी डाटा की रक्षा करने के लिए पहले हमें निजता के महत्व को समझना होगा और जब इसकी शुरुआत हमारे घरों से होगी तो धीरे धीरे हम इंटरनेट पर भी अपनी जानकारी बांटने से परहेज़ करने लगेंगे .