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Zee Jaankari: ICJ में PAK का पक्ष रखने वाले वकील ने बताया पाकिस्तान का सच

कश्मीर के विषय पर पाकिस्तान पूरी तरह Confused है. और Confusion की स्थिति में इंसान से अक्सर ग़लतियां हो जाया करती हैं. 

Zee Jaankari: ICJ में PAK का पक्ष रखने वाले वकील ने बताया पाकिस्तान का सच

कुछ दिनों पहले इमरान ख़ान ने कश्मीर के मुद्दे को ना सिर्फ United Nations General Assembly में उठाने की बात कही थी.बल्कि ये भी कहा था, कि वो इस मामले को International Court Of Justice में लेकर जाएंगे. यहां हम इमरान ख़ान को यही सलाह देना चाहेंगे, कि वो अपनी ही देश के वकील Khawar Qureshi की बातों को ध्यान से सुनें. और उनका कहना मानकर, कश्मीर की ज़िद छोड़ दें. इमरान ख़ान को पहले बलोचिस्तान और अपने ही देश में अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचार और मानव अधिकार के हनन पर ध्यान देने की ज़रुरत है. क्योंकि, अब पूरी दुनिया भारत के नेतृत्व में पाकिस्तान में हो रहे मानव अधिकार उल्लंघन के खिलाफ खड़ी हो रही है.

कश्मीर के विषय पर पाकिस्तान पूरी तरह Confused है. और Confusion की स्थिति में इंसान से अक्सर ग़लतियां हो जाया करती हैं. एक ऐसी ही ग़लती इमरान ख़ान से पिछले महीने हुई थी. जब उन्होंने आवेश में आकर भारत के खिलाफ परमाणु युद्ध की धमकी दी थी. हालांकि, अब इमरान ख़ान ने अपनी ग़लती में सुधार किया है.

और कहा है, कि पाकिस्तान No First Use की Policy के तहत पहले हमला नहीं करेगा. प्रश्न ये है, कि क्या पाकिस्तान के परमाणु सिद्धांत में No First Use की नीति है भी या नहीं. आज हम आपको इसका भी जवाब देंगे. लेकिन पहले इमरान ख़ान की बातें सुनिए. वर्ष 1998 से भारत ने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर तीन बातों का ख़ास ख़्याल रखा है.

पहली बात है - Credible Minimum Deterrence यानी ज़रुरत के मुताबिक कम से कम हथियार का इस्तेमाल. दूसरी अहम बात है - No First Use यानी पहले परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. और तीसरी अहम बात है - परमाणु हथियारों से हमला किए जाने की स्थिति में Massive Retaliation यानी भारी पैमाने पर जवाबी कार्रवाई करना.

जहां तक पाकिस्तान की बात है, तो उसका कोई Nuclear Doctrine यानी परमाणु सिद्धांत नहीं है. वर्ष 2016 में पाकिस्तान की Strategic Planning Division के लेफ्टिनेंट जनरल खालिद किदवई, इस बात को स्वीकार कर चुके हैं, कि पाकिस्तान के सारे परमाणु हथियार, भारत पर हमला करने के लिए Fix किए गए हैं.

अगर कोई देश No First Use के सिद्धांत से बंधा हुआ है, तो ऐसी स्थिति में परमाणु हमला करने का फैसला दूसरे देश को ही लेना होता है. पाकिस्तान को पता है, कि कश्मीर के विषय पर ना तो दुनिया उसका साथ देगी. और ना ही बड़े-बड़े अंतर्राष्ट्रीय संगठन. इसीलिए, घाटी को अशांत करने के लिए उसने एक बार फिर वही पुराना तरीका आज़माया है.

और वो है आतंकवाद...सुरक्षाबलों ने हाल ही में पाकिस्तानी मूल के दो आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है. इनमें से एक आतंकी रावलपिंडी का रहने वाला है. और दूसरा क्वेटा का रहने वाला है. इन दोनों ने पूछताछ में स्वीकार किया है, कि पाकिस्तानी सेना ने उन्हें भारतीय सुरक्षाबलों पर हमले की ज़िम्मेदारी दी थी.

और इसके लिए रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय में उनकी मुलाकात कुछ बड़े अधिकारियों से भी कराई गई थी. इन दोनों ने ये भी खुलासा किया है, कि कम से कम 50 आतंकवादी, भारत में घुसपैठ करने की फिराक में हैं. और ये सबकुछ पाकिस्तान के इशारों पर हो रहा है.