ZEE जानकारी: बर्फीले तूफान में भी भारतीय सेना का 'ऑपरेशन ख़ैरियत' जारी है

हमारे सैनिकों की वीरता और समर्पण की वजह से ही, आप सबको चैन से जीने का अधिकार मिलता है. 

ZEE जानकारी: बर्फीले तूफान में भी भारतीय सेना का 'ऑपरेशन ख़ैरियत' जारी है

अब हम देश की सीमाओं के रक्षक भारतीय सेना को धन्यवाद देना चाहते हैं. हमारे सैनिकों की वीरता और समर्पण की वजह से ही, आप सबको चैन से जीने का अधिकार मिलता है. आज भारतीय सेना दिवस है और ये मौका देश के 135 करोड़ लोगों के लिए किसी त्यौहार से कम नहीं है. Indian Army के 13 लाख से अधिक सैनिकों की वीरता को आज पूरा देश प्रणाम कर रहा है. आज 72वें सेना दिवस के मौके पर हम Indian Army का देशभक्ति से भरपूर एक विश्लेषण करेंगे.

जम्मू-कश्मीर में पिछले 72 घंटों से भारी बर्फबारी हो रही है
सेना दिवस पर सबसे पहले आपको सेना का असली पराक्रम देखना चाहिए. जो सिर्फ युद्धकाल में ही नहीं बल्कि शांतिकाल में भी दिखता है. जम्मू-कश्मीर में पिछले 72 घंटों से भारी बर्फबारी हो रही है और वहां पर लोगों की मदद करने के लिए सेना ने ऑपरेशन खैरियत लॉन्च किया है. 14 जनवरी को बारामूला में सेना के एक कंपनी कमांडर के पास शमीमा नामक एक गर्भवती महिला के मुश्किल में फंसे होने की खबर आई. शमीमा अपने गांव Darad Pora (दारदपोरा) में मदद का इंतजार कर रही थीं. ये गांव जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में हैं.

खबर मिलते ही सेना की तीन टीमों नें एक Operation launch किया. पहली टीम सेना के डॉक्टरों के साथ शमीमा के पास पहुंच गई. दूसरी टीम ने बारामूला के उपलोमा इलाके में हेलीपैड की सफाई शुरु कर दी और सेना की तीसरी टीम शमीमा को हेलीपैड तक लाने की तैयारी करने लगी.

शमीमा को सुरक्षित स्ट्रेचर पर ले जाने के लिए 100 से ज्यादा सेना के जवान और 30 लोग बर्फ के बीच 4 घंटे से ज्यादा समय तक पैदल चले. अस्पताल पहुंचते ही शमीमा ने एक बच्चे को जन्म दिया है. अब वो और उनका बच्चा दोनों ही स्वस्थ हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस वीडियो को ट्वीट करके सेना की बहादुरी और मानवता की तारीफ की है.

आज जम्मू-कश्मीर से सेना का एक और वीडियो आया है. 14 जनवरी को बारामूला में दो लोग एवलांच में फंस गए थे. जफर इकबाल और तारिक अहमद ये दोनों शख्स हिमस्खलन में फंस गए थे. और ये घटना वहां पर भारतीय सेना के बेस के पास हुई.

खबर मिलते ही सेना ने तुंरत आकर इन दोनों लोगों को बचा लिया. सेना के डॉक्टरों ने इलाज के बाद एक व्यक्ति को उसी समय छुट्टी दे दी गई लेकिन दूसरे व्यक्ति की हालत खराब होने के बाद उसे बारामूला के सैनिक अस्पताल भेजा गया है. जहां उसका इलाज चल रहा है. यानी बर्फीले तूफान में भी भारतीय सेना का 'ऑपरेशन ख़ैरियत' जारी है.

भारत के लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहना ही हमारी सेना की सबसे बड़ी खासियत है. वो आतंकवादियों से हमारी रक्षा करती है लेकिन अगर कोई प्राकृतिक आपदा आए तो भी मदद करने के लिए अपना हाथ बढ़ा देती है. और ये दोनों तस्वीरें सेना के इसी साहस की सबसे सच्ची गवाही दे रही हैं.

आज सेना दिवस पर पूरे देश में भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास का जश्न मनाया जा रहा है. इस मौके पर भारतीय सेना की Northern Command ने 70 सेकेंड का एक वीडियो ट्वीट है. इस वीडियो को देखकर आपको मुश्किल मौसम में भी देश की रक्षा करने वाली सेना की कठोर साधना का अहसास होगा .

 हर वर्ष 15 जनवरी को सेना दिवस  मनाया जाता है
अब आपको सेना दिवस के इतिहास के बारे में जानना चाहिए. हर वर्ष 15 जनवरी को सेना दिवस इसलिए मनाया जाता है, क्योंकि वर्ष 1949 में आज ही के दिन. भारतीय सेना को अपना पहला भारतीय कमांडर-इन-चीफ मिला था.

15 जनवरी 1949 को भारतीय सेना की कमान ब्रिटिश जनरल Francis Butcher(फ्रांसिस बुचर) से फील्ड मार्शल KM करिअप्पा के हाथ में आ गई थी. फील्ड मार्शल KM करिअप्पा, आज़ाद भारत के पहले सेनाध्यक्ष बने थे. और इसके साथ ही British Indian Army से British शब्द हमेशा के लिए हट गया था. और उसे Indian Army कहा जाने लगा था. भारतीय सेना को आज़ादी से पहले तक ब्रिटिश इंडियन आर्मी के तौर पर जाना जाता था. तब से लेकर आज तक हर वर्ष 15 जनवरी को सेना दिवस के तौर पर मनाया जाता है.

वर्ष 2019 में भारत के 78 सैनिकों ने शहादत दी है. और इनमें से 6 अधिकारी हैं. यानी भारतीय सेना में शहीद होने वाला हर 13वां योद्धा एक अफसर है. इसकी एक वजह ये है कि भारतीय सेना में अधिकारी पीछे खड़े होकर आदेश देने के बदले ऑपरेशन में अपने सैनिकों का नेतृत्व करते हैं.

इसी वजह से हम कह रहे हैं कि आज पूरा देश भारतीय सेना के उन जवानों का कर्ज़दार है जो सीमा पर हर मुश्किल में सीना ताने खड़े रहते हैं. जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी है. आज उन सभी शहीदों को दिल से श्रद्धांजलि देने का दिन है और हम इन जवानों को और इनके परिवारों को शत-शत नमन करते हैं.

जम्मू-कश्मीर में पिछले 14 दिनों में सुरक्षाबलों ने 8 आतंकवादियों का एनकाउंटर किया है. भारतीय सेना पाकिस्तान के खिलाफ दो बड़ी कारवाइयां कर रही है. एक तरफ पाकिस्तान की तरफ से भेजे गए आतंकवादियों को उनके असली अंजाम तक पहुंचाया जा रहा है. और दूसरी तरफ Line of Control पर पाकिस्तानी सेना की फायरिंग का करारा जवाब भी दिया जा रहा है. आज सेना दिवस के मौके पर सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने पाकिस्तान को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है और कहा है कि आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान अगर नहीं सुधरा तो भारतीय सेना नए तरीके भी अपना सकती है.

जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के इस बयान में सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि पाकिस्तान अगर भारतीय सेना को मजबूर करता रहा तो फिर भारत की सेना आतंकवाद पर रोक लगाने के लिए ऐसी कार्रवाई भी कर सकती है जो अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई हो. जनरल मनोज मुकुंद नरवणे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी और चौथी सबसे ताकतवर सेना का नेतृत्व करते हैं. इसीलिए पाकिस्तान को और वहां की सेना को जनरल नरवणे द्वारा कही गई बातों को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए.

- भारत के पास इस वक्त 13 लाख से ज्यादा सक्रिय सैनिक हैं. और इनमें Paramilitary के जवानों की संख्या शामिल नहीं है.
- जबकि पाकिस्तान की सेना में सिर्फ 6 लाख 37 हज़ार जवान हैं. यानी भारत की सैनिक शक्ति से आधे से भी कम है पाकिस्तान के सैनिकों की संख्या.

कैप्टन तान्या सेना की सिग्नल कोर में कैप्टन हैं
आज सेना दिवस के मौके पर दिल्ली के करियप्पा परेड ग्राउंड में हुई परेड में पहली बार एक महिला अधिकारी, कैप्टन तान्या शेरगिल ने सेना के मार्चिंग Contingents का नेतृत्व किया है. कैप्टन तान्या 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की परेड में भी भारतीय सेना के मार्चिंग Contingents का नेतृत्व करेंगी. कैप्टन तान्या सेना की सिग्नल कोर में कैप्टन हैं और उन्हें चेन्नई की Officers Training Academy से वर्ष 2017 में कमीशन मिला था. उनके परिवार की चार पीढ़ियां सेना में शामिल रही हैं. कैप्टन तान्या के पिता भारतीय सेना के तोपखाने में, उनके दादा सेना की Armoured(आर्मर्ड) Regiment में और परदादा सिख रेजिमेंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

आज आपको ये भी याद रखना चाहिए कि जब भारतीय सेना के जवान ठंड में अपनी हड्डियां गलाते हैं. अपने सीने पर गोली खाते हैं. तब जाकर आपको और हमको एक सुरक्षित जीवन जीने की गारंटी मिलती है. पिछले 48 घंटों में भारतीय सेना के 5 और बीएसएफ का एक जवान बर्फबारी और एवलांच की वजह से शहीद हो गए हैं.

हिमालय के ऊंचे हिस्सों में हिमस्खलन होना आम बात है. मगर ये बर्फीले तूफान तब और ख़तरनाक हो जाते हैं. जब ऊंची चोटियों पर ज़्यादा बर्फ जम जाती है. दबाव बढ़ने की वजह से बर्फ की परतें खिसकने लगती हैं और तेज बहाव के साथ नीचे की तरफ बहने लगती हैं. इस हिमस्खलन के रास्ते में जो कुछ भी आता है वो उसे अपने साथ ले जाती हैं.

इस प्राकृतिक आपदा को रोका तो नहीं जा सकता है. लेकिन नुकसान को कम ज़रूर किया जा सकता है. यही वजह है कि सेना ने अपने जवानों को ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से बेहतर ढंग से निपटने के लिए ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी है.