ZEE जानकारी: केरल हाईकोर्ट का इंटरनेट को लेकर क्रांतिकारी फैसला

केरल हाईकोर्ट ने एक क्रांतिकारी फैसले में इंटरनेट के इस्तेमाल को...हर नागरिक का मौलिक अधिकार बताया है. अब आपको बताते हैं कि केरल में मौलिक अधिकारों की इस इंटरनेट क्रांति की शुरुआत कैसे हुई...सितंबर 2019 में 19 वर्ष की छात्रा फहीमा शिरीन ने केरल हाईकोर्ट में एक अर्जी दी . 

ZEE जानकारी: केरल हाईकोर्ट का इंटरनेट को लेकर क्रांतिकारी फैसला

वर्ष 1974 में एक फिल्म आई थी 'रोटी, कपड़ा और मकान'. सुपरस्टार मनोज कुमार, अमिताभ बच्चन और शशि कपूर की ये फिल्म शायद आपने भी देखी होगी. 1970 के दशक में आम आदमी रोटी, कपड़ा और मकान के लिए संघर्ष करता था. लेकिन अगर यही फिल्म वर्ष 2019 में बनती, तो इसका नाम होता 'Data, कपड़ा और मकान' . क्योंकि आज के जमाने में Data... रोटी से भी ज्यादा जरूरी बन गया है. एक जमाने में रोटी, कपड़ा और मकान चुनावी मुद्दा होता था... लेकिन आने वाले समय में संभव है Data भी चुनावी मुद्दा बन जाए. हो सकता है इंटरनेट अब तक आपकी जरूरत या शौक रहा हो...

लेकिन केरल में अब ये हर नागरिक का अधिकार बन गया है. केरल हाईकोर्ट ने एक क्रांतिकारी फैसले में इंटरनेट के इस्तेमाल को...हर नागरिक का मौलिक अधिकार बताया है. अब आपको बताते हैं कि केरल में मौलिक अधिकारों की इस इंटरनेट क्रांति की शुरुआत कैसे हुई...सितंबर 2019 में 19 वर्ष की छात्रा फहीमा शिरीन ने केरल हाईकोर्ट में एक अर्जी दी .

फहीमा कालीकट के श्री नारायण गुरु कॉलेज में Graduation की छात्रा हैं . और उसी कॉलेज के Girls Hostel में रहती हैं. उनके मुताबिक Hostel मैनेजमेंट ने जून 2019 में शाम 6 बजे से रात 10 बजे के बीच इंटरनेट सुविधा को बंद कर दिया था . लेकिन लड़कों के Hostel में इंटरनेट की सुविधा दी जा रही थी . इस भेदभाव का विरोध करने पर फहीमा को Hostel से निकाल दिया गया था .

और वो ये मामला केरल हाई कोर्ट में ले गईं. उन्होंने अदालत को बताया कि पढ़ाई करने के लिए उनको इंटरनेट की जरूरत है और सिर्फ लड़की होने की वजह से उनको इंटरनेट सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता है. केरल हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने सितंबर के तीसरे हफ्ते में ऐतिहासिक फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट सुविधा बंद कर देना...फहीमा के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है . हाईकोर्ट ने इंटरनेट के इस्तेमाल को संविधान के तहत दिए गए शिक्षा और निजता के अधिकार का हिस्सा बताया.

संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत देश के सभी नागरिकों को 6 मौलिक अधिकार मिले हुए हैं. और सभी को इनपर समान अधिकार है. यानी इन मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं हो सकता है . हाईकोर्ट के फैसले के बाद फहीमा वापस अपने Hostel लौटकर इंटरनेट की सुविधा के साथ पढ़ाई कर रही हैं. इस फैसले ने देश के लिए एक बड़ी लकीर खींच दी है... जिसके मुताबिक यदि आप इंटरनेट सुविधा से वंचित हैं तो आपके मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है.

आज इंटरनेट के बिना जीवन की कल्पना करना मुश्किल हो गया है . अगर पढ़ाई की बात करें तो घर में बच्चों का होमवर्क हो...या स्कूल-कॉलेज के छात्रों को रिसर्च की जरूरत पड़े...इन सबके लिए इंटरनेट जरूरी है . कई शैक्षणिक संस्थान तो अपने छात्रों को होमवर्क भी ऑनलाइन ही देते हैं . आप कह सकते हैं कि आज इंटरनेट की मदद के बिना छोटे बच्चों का Homework भी संभव नहीं है.

हर उम्र के लोग इंटरनेट के भरोसे हैं . आप इंटरनेट की मदद से घर बैठे अपने सारे काम निपटा सकते हैं. आपको अपने घरवालों को मैसेज भेजना हो या... Shopping... Entertainment...बैंकिंग या फिर खाना ही क्यों ना ऑर्डर करना हो... ये सारे काम आप इंटरनेट की मदद से कर सकते हैं. हो सकता है आप इंटरनेट का इस्तेमाल इसके अलावा भी दूसरे काम करने के लिए करते होंगे . यानी आज की तारीख में इंटरनेट हमारे लिए प्राण-वायु की तरह है .

लोगों की इंटरनेट वाली इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केरल सरकार ने Data को मूलभूत नागरिक अधिकार माना है.100 प्रतिशत साक्षरता के बाद अब केरल के हर घर को इंटरनेट से जोड़ा जाएगा और 20 लाख गरीब परिवारों को ये सुविधा मुफ्त मिलेगी . इंटरनेट को आम आदमी तक पहुंचाने के लिए Network और Wi-Fi Centres बनाए जाएंगे . 1548 करोड़ रुपए का ये प्रोजेक्ट दिसंबर 2020 तक पूरा हो जाएगा .

आप कह सकते हैं कि...अब लोक कल्याणकारी राज्य की नई परिभाषा में... इंटरनेट को नागरिकों का मौलिक अधिकार होना चाहिए .इससे पहले दुनिया में कुछ देशों... जैसे France, Spain, Greece, Finland, Estonia और Costa Rica ने इंटरनेट को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया है.

भारत में दिल्ली, तमिलनाडु और तेलंगाना में Free या सस्ता इंटरनेट देने की बात की गई. करोड़ों लोगों को ये सपना दिखाया गया लेकिन अबतक इस फ्री स्कीम का लोगों को फायदा नहीं मिला है .अनेकता में एकता की खासियत वाले भारत में Digital India की एकता को साकार होने में अभी काफी वक्त लगेगा... क्योंकि शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट Users की संख्या में बड़ा अंतर है.भारत में करीब 60 करोड़ इंटरनेट Users हैं. इस मामले में... दुनिया में चीन के बाद भारत दूसरे नंबर पर... और अमेरिका तीसरे स्थान पर है.

दिल्ली और आस पास के इलाकों में करीब 70 प्रतिशत लोग इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं. ये देश में सबसे ज्यादा है और दूसरे नंबर पर केरल है जहां 54 प्रतिशत जनता इंटरनेट से Connected है.

पिछले कुछ वर्षों में भारत में आम आदमी और इंटरनेट के बीच की दूरी लगातार कम हुई है. भारतीय इंटरनेट Users सोशल मीडिया इस्तेमाल करने में नंबर 1 हैं .भारत में 27 करोड़ Facebook .... और 20 करोड़ WhatsApp Users हैं... ये दुनिया में सबसे ज्यादा है. यानी भारत के लोग विश्व में सबसे ज्यादा Facebook और WhatsApp इस्तेमाल करते हैं.देश में Smartphones पर सबसे ज्यादा सोशल मीडिया का प्रयोग और दूसरे नंबर पर Videos देखा जाता है.

सोशल मीडिया पर भारतीय प्रतिदिन औसतन 2 घंटे 25 मिनट बिताते हैं. सबसे ज्यादा वक्त बिताने में भारतीय चौथे नंबर पर हैं जबकि फिलीपींस के लोग 4 घंटे से ज्यादा वक्त बिताकर पहले नंबर पर हैं.इसकी एक वजह ये भी है कि भारत में Mobile Data दुनिया में सबसे सस्ता है. यहां 1 GB मोबाइल Data की कीमत 18 रुपए है. जबकि दुनिया में सबसे महंगा Data... Zimbabwe में है...

वहां 1 GB मोबाइल Data... 5 हजार रुपए से ज्यादा महंगा है. यही वजह है कि आज भारत के इंटरनेट Users. दुनिया का 20 प्रतिशत मोबाइल Data इस्तेमाल करते हैं . दुनिया में सबसे ज्यादा मोबाइल Data का इस्तेमाल हमारे देश में होता है. भारत की एक और खासियत है नए विचारों और नई तकनीक को तेजी से अपना लेना . Digital Payment...

पिछले कुछ वर्षों में देश में 50 प्रतिशत से ज्यादा रफ्तार से बढ़ रहा है. Reserve Bank Of India के मुताबिक दिसंबर 2021 तक 8 हजार 700 करोड़ रुपए से ज्यादा के Transaction.. डिजिटल तरीके से होंगे. पैसा भेजना हो या फिर यात्रा करना. डिजिटल तरीका यहां भी हिट है. प्रतिदिन भारतीय रेल के 8 लाख टिकट ऑनलाइन बुक किए जाते हैं.

NITI आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगले साल तक भारत में 73 करोड़ Internet Users होंगे . इनमें से 17 करोड़ लोग ऐसे होंगे जो Online Shopping करेंगे .70 प्रतिशत Online खरीददारी Smart Phones के ज़रिए होगी और नए इंटरनेट उपभोक्ताओं में से 75 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग होंगे. यानी अगर भारत के इंटरनेट उपभोक्ता अपना अलग देश बना लें तो जनसंख्या के हिसाब से ये चीन और भारत के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश होगा.

इंटरनेट हमारी आपकी जिंदगी में तो क्रांति ला चुका है...और अब ऑनलाइन शॉपिंग में भी रोज नये रिकॉर्ड बना रहा है .चीन की E-commerce कंपनी अलीबाबा ने 24 घंटे की सेल में 2 दशमलव 7 लाख करोड़ रुपये का सामान बेचा है. चीन में Singles' Day के मौके पर इस Sale को लॉन्च किया गया था . भारत की एक दिन की अर्थव्यवस्था करीब 52 हजार करोड़ रुपए है...

और अलीबाबा ने एक दिन में ही इससे 5 गुना ज्यादा का सामान बेच दिया. आप सुनकर हैरान होंगे कि... Sale शुरु होने के बाद सिर्फ 68 सेकेंड में ही अलीबाबा को 7 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की आमदनी हुई और 30 मिनटों में ये आंकड़ा 70 हजार करोड़ के पार चला गया . Singles' Day... चीन में मनाया जाने वाला एक शॉपिंग Holiday है...

चीन में इसकी शुरुआत 1990 के दशक में छात्रों ने की थी . महान स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक ने वर्ष 1916 में कहा था 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा'. आजादी के आंदोलन में ये नारा बहुत लोकप्रिय था  लेकिन 100 वर्षों के बाद आज भारत की नई पीढ़ी का नारा है... 'Data मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा'. चाहे इसके लिए उन्हें कोर्ट ही क्यों ना जाना पड़े .