ZEE जानकारी: 2019 में भारत में सबसे अधिक हुआ Internet Shutdown

दुख की बात है कि इंटरनेट पर पाबंदी लगाने के मामले में भारत दुनिया का नंबर एक देश बन गया है . वर्ष 2018 ही नहीं बल्कि वर्ष 2019 में भी Internet Shutdown की सबसे ज्यादा घटनाएं भारत में हुईं 

ZEE जानकारी: 2019 में भारत में सबसे अधिक हुआ Internet Shutdown

लोगों में ही नहीं. बल्कि दुनिया भर की सरकारों में भी असहनशीलता बढ़ी है. 2019 में आम लोग सड़कों पर उतरे. तो सरकारों ने भी इन आंदोलनों को दबाने की पूरी कोशिश की. इसका एक नया उदाहरण चीन से आया है. जिसके बारे में हम आपको आगे बताएंगे. लेकिन पहले ये समझ लीजिए कि कैसे सरकारों के प्रति लोगों की असहनशीलता ने Internet पर सबसे बड़ी चोट की. और 2019 में Internet Shut Downs. New Normal यानी सामान्य घटना बन गए. 2019 को आप इंटरनेट पर पाबंदियों का वर्ष भी कह सकते हैं.

दुख की बात है कि इंटरनेट पर पाबंदी लगाने के मामले में भारत दुनिया का नंबर एक देश बन गया है . वर्ष 2018 ही नहीं बल्कि वर्ष 2019 में भी Internet Shutdown की सबसे ज्यादा घटनाएं भारत में हुईं . वर्ष 2019 में 15 दिसंबर तक भारत में 93 बार इंटरनेट सेवाएं रोकी गईं थी और अब ये आकंड़ा 100 के पार जा चुका है . इंटरनेट सेवाएं रोकने के मामले में भारत के बाद कजाकिस्तान का नंबर आता है . जबकि सुडान, Russia और श्रीलंका जैसे देशों में भी इस साल अभूतपूर्व तरीके से Internet पर पाबंदी लगाई गई.

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल Internet Shut Down की वजह से Telecom कंपनियों को हर घंटे ढाई करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ . Indian Council for Research on International Economic Relations के मुताबिक वर्ष 2012 से 2017 के दौरान इंटरनेट पर पाबंदी की वजह से देश की अर्थव्यवस्था को 21 हज़ार 700 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. लेकिन ये नुकसान अब सामान्य सी बात है. क्योंकि सरकारों के सामने सिर्फ सड़कों पर ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर होने वाली हिंसा रोकने की भी चुनौती है.

मजे की बात ये है कि एक तरफ वर्ष 2019... इंटरनेट पर पाबंदियों का साल रहा तो दूसरी तरफ इसी साल Internet Data इस्तेमाल करने के मामले में भारतीयों ने कई नए Records बना दिए . Telecom Regulatory Authority of India यानी TRAI के मुताबिक सितंबर 2019 तक भारतीयों ने साढ़े 5 करोड़ TeraBytes...Data का इस्तेमाल कर लिया था . ये 55 अरब GB Data के बराबर है . पूरी दुनिया के मुकाबले भारत में Internet DATA सबसे सस्ता है . भारत में 1 GB DATA करीब 18 रुपये में मिल जाता है. यही वजह है कि भारत के लोगों के लिए Data Plans ही नए Diet Plan में बदल गए हैं.

भारत में इस वक्त करीब 62 करोड़ लोग Internet का इस्तेमाल करते हैं और इन 62 करोड़ लोगों से जुड़ा Data हासिल करने के लिए दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनियां मुंह मांगी कीमत देने को तैयार हैं .आबादी के लिहाज़ से दुनिया के सबसे बड़े देश चीन में... Facebook, Google और Whatsapp पर पाबंदी है...और इन कंपनियों के लिए भारत ही सबसे बड़ा बाज़ार है . इसलिए भारतीयों से जुड़े Data को लेकर दुनिया भर की कंपनियों के बीच DATA WAR चल रहा है और वर्ष 2020 में ये युद्ध और तेज़ हो जाएगा.

वर्ष 2019 DATA चोरी का भी साल रहा है. इस साल दुनिया भर में 13 करोड़ लोगों से जुड़े DATA को चोरी किया गया . हैकर्स ने दुनिया भर के लोगों के स्वास्थ्य, पैसों, सोशल मीडिया, और यहां तक कि Debit और Credit Card से जुड़ी जानकारियां भी चुरा लीं . लेकिन Hackers के बीच सबसे ज्यादा होड़ आपके स्वास्थ्य से जुड़ा Data हासिल करने की है.

साइबर अपराधियों को Debit और Credit से जुड़ी जानकारियां हासिल करने में उतना फायदा नहीं होता. जितना आपके स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियां हासिल करके होता है . इंटरनेट के चोर बाज़ार में ये DATA वित्तीय DATA के मुकाबले तीन गुना ज्यादा कीमत पर बिकता है . क्योंकि आप अपना Credit या Debit Card तो Block करा सकते हैं..लेकिन अपने स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियों को Block करना बहुत मुश्किल है.

वर्ष 2019 में ही इजरायल की कंपनी NSO द्वारा बनाए गए एक जासूसी Malware Pegasus की भी बहुत चर्चा रही..क्योंकि इस Maleware की मदद से दुनिया की कई सरकारें अपने नागरिकों की जासूसी कर रही थी . Whatsapp पर आने वाली एक Missed Call के ज़रिए इस जासूसी वायरस को आपको मोबाइल फोन में पहुंचाया जा सकता है और आपकी हर एक हरकत पर नज़र रखी जा सकती है.

यानी आपका प्राइवेट DATA बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है..और दुनिया की सरकारें और कंपनियां आपसे जुड़ी हर एक जानकारी एक Click पर हासिल कर सकती हैं . आप क्या खाते हैं, कहां जाते हैं , किससे मिलते हैं ? आपको कौन सी बीमारी हैं, आपकी वित्तीय स्थिति कैसी है. सबकुछ इन कंपनियों और सरकारों को पता है..क्योंकि इनके पास आपका निजी DATA मौजूद है.

Cambridge Analytica जैसी कपनियां तो इसी DATA का इस्तेमाल करके. मतदाताओं को भी प्रभावित कर सकती है. यानी वर्ष 2019 जाते जाते..हमें ये सिखा गया कि आपके निजी DATA को ही नहीं आपके निजी मत को भी Hack किया जा सकता है और कंपनियां और सरकारें अपनी मर्ज़ी के मुताबिक आपका इस्तेमाल कर सकती हैं.

कुल मिलाकर वर्ष 2019 में DATA से जुड़ी जंग और DATA चोरी की घटनाएं बहुत तेज़ हो गईं. और DATA को नए ज़माने का तेल मानना. New Normal बन गया.