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Zee Jaankari: जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई को भारत जीत रहा है या हार रहा है?

ये विश्लेषण देखकर आप समझ जाएंगे कि प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई को भारत जीत रहा है या हार रहा है.

Zee Jaankari: जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई को भारत जीत रहा है या हार रहा है?

ये विश्लेषण देखकर आप समझ जाएंगे कि प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई को भारत जीत रहा है या हार रहा है .पृथ्वी की सेहत को प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से तो नुकसान हो ही रहा है. प्लास्टिक से होने वाला प्रदूषण भी..पर्यावरण को स्थाई चोट पहुंचा रहा है . प्लास्टिक से बनी चीज़ें आपके जीवन को आसान बनाती हैं . लेकिन क्या आपको पता है कि अगर ये प्लास्टिक आपके शरीर में पहुंच जाए, तो आपका शरीर बीमारियों का घर बन सकता है . प्लास्टिक से बनी बोतलों और कंटेनर्स में Endocrine Disrupting Chemicals यानी EDC पाए जाते हैं .

ये EDC कैंसर, डायबिटीज़ और कई तरह की Neurological बीमारियों की वजह बन सकते हैं . संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में इस बार Plastic के खिलाफ सिर्फ बातें ही नहीं की गई, बल्कि काम भी किया गया . Summit में इस बार पानी के लिए प्लास्टिक की बोतलों की जगह Paper Box और Aluminium की Bottles का इस्तेमाल किया गया .

यानी आप कह सकते हैं कि संयुक्त राष्ट्र ने भी Single Use Plastic के खिलाफ मिशन शुरू कर दिया है . आज प्रधानमंत्री मोदी ने भी न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम मे जलवायु परिवर्तन को लेकर क्या कहा..आप भी सुनिए. संयुक्त राष्ट्र के Climate Change Summit के बाद पूरी दुनिया में एक 16 साल की लड़की की चर्चा हो रही है . इस लड़की ने अपने सवालों से..

.दुनियाभर के नेताओं को जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर...नए सिरे से सोचने ​के लिए मजबूर ​कर दिया . स्वीडन की रहने वाली पर्यावरण कार्यकर्ता Greta Thunberg (ग्रेटा थनबर्ग) ने जब बोलना शुरू किया...तो शायद वहां मौजूद नेताओं को अंदाजा नहीं था... कि इस लड़की के सवाल इतने सख्त होंगे .

आंखों में आंसू और चेहरे पर गुस्से के भाव के साथ Greta ने दुनिया भर के नेताओं से कहा...How Dare You यानी आपकी हिम्मत कैसे हुई . Greta यहां पर उन झूठे वादों की बात कर रही थीं, जो दुनिया भर के नेता जलवायु परिवर्तन से लड़ने को लेकर करते आए हैं . पहले आप 16 साल की इस लड़की के गुस्से का ज्वालामुखी देखिए..

.फिर हम अपने विश्लेषण को आगे बढ़ाएंगे . सवाल ये है कि क्या जहरीली हवा से बचने का कोई तरीका नहीं है. हम अब आपको बताते हैं कि इस समस्या का हल क्या है. इस समस्या का हल है प्रदूषण के खिलाफ युद्ध स्तर पर काम करना. सबसे पहले हमें अपने घर में और बाहर पेड़-पौधे की संख्या बढ़ानी होगी. मनी प्लांट और एरिका पाम जैसे कई पौधे लगाने होंगे.

अगर एक घर में पांच लोग रहते हैं तो आपको कम से कम 20 पौधे लगाने होंगे. इतनी संख्या में पौधे लगाने पर ही घर के अंदर की हवा सांस लेने लायक मानी जाएगी. इसके साथ ही वाहनों से पैदा होने वाले प्रदूषण को कम करना होगा . सरकार 2030 तक Electric वाहनों को बढ़ावा देकर, पेट्रोल और डीज़ल गाड़ियों पर रोक लगाना चाहती है, ये एक अच्छी पहल है..लेकिन इसके लिए बड़ा Infrastructure खड़ा करना होगा .

प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगो पर भारी जुर्माना लगाकर भी इस समस्या को रोका जा सकता है . चीन जैसे देशों में जब प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा हो जाता है तो वहां Pollution फैलाने वाली Factories को बंद कर दिया जाता है. शहरों में निर्माण के दौरान उड़ने वाली धूल भी प्रदूषण का बड़ा कारण है,

इसके लिए सख्त नियम कायदे बनाए जा सकते हैं, और ज्यादा प्रदूषण वाले दिनों में निर्माण कार्यों को रोका भी जा सकता है. भारत 2030 तक Carbon Emission में 30 से 35 प्रतिशत की कमी लाने का वादा भी कर चुका है. लेकिन हमें लगता है कि ये सब और जल्दी करना होगा, क्योंकि प्रदूषण लोगों की जान लेने से पहले, स्थिति में सुधार का इंतज़ार नहीं करता .