ZEE जानकारी: अभिव्यक्ति के नाम हिंसा फैलाना क्या जायज है?

धरना, प्रदर्शन और आंदोलन किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण अंग माने जाते हैं. लेकिन लोकतंत्र ने अपनी आवाज़ उठाने के जो अधिकार हमें दिए हैं. उसमें हिंसा की कोई जगह नहीं है. 

ZEE जानकारी: अभिव्यक्ति के नाम हिंसा फैलाना क्या जायज है?

धरना, प्रदर्शन और आंदोलन किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण अंग माने जाते हैं. लेकिन लोकतंत्र ने अपनी आवाज़ उठाने के जो अधिकार हमें दिए हैं. उसमें हिंसा की कोई जगह नहीं है. फिर भी आज देश भर में प्रदर्शनों के नाम पर हिंसा की जा रही है . पुलिस पर पत्थर बरसाए जा रहे हैं, बसों को जलाया जा रहा है, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और शहरों को बंधक बनाने की कोशिश हो रही है..फिर भी कई लोग इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी का नाम देकर..इसका समर्थन कर रहे हैं .

सबसे पहले आप कुछ तस्वीरें देखिए...जिन्हें देखकर आप समझ जाएंगे कि अभिव्यक्ति की आज़ादी और हिंसा करने की आज़ादी में क्या फर्क होता है. दिल्ली में National Register of Citizens of India यानी NRC और नागरिकता संशोधन कानून का विरोध हो रहा है. लेकिन इस विरोध के नाम पर गुंडागर्दी हो रही है, अपशब्दों का इस्तेमाल करके कहा जा रहा है कि जहां भारत सरकार की गाड़ी दिखे..उसे निशाना बनाया जाए . पहले आप ये पूरा वीडियो देखिए

इस वीडियों में भारत सरकार के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल हो रहा है..जिन्हें हम आपको नहीं सुना सकते..लेकिन हमने ये वीडियो सुना है और इस वीडियो को सुनकर कोई भी ये समझ सकता है कि उपद्रवियों के निशाने पर कौन है.भारत की सरकार लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार है. भारत के 90 करोड़ वोटर्स ने अभी 6 महीने पहले ही इस सरकार को चुना है. ऐसे में ये विरोध कितना जायज़ है.

दिल्ली में जो लोग हिंसा कर रहे हैं उन्होंने अपने चेहरे रूमाल से ढक रखे हैं . सवाल ये है कि अगर इनका विरोध अभिव्यक्ति की आज़ादी है..तो फिर इन्हें अपने चेहरे ढकने की ज़रूरत क्या है .नागरिकता संशोधन कानून का विरोध सिर्फ दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्र नहीं कर रहे हैं..बल्कि इसमें उनका साथ देश भर की कुछ Universities के छात्र भी दे रहे हैं . आज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के नदवा कॉलेज में भी छात्रों ने पुलिस पर पत्थराव किया और कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश की.

जिस तरह हर शहर में एक मोहल्ला या इलाका ऐसा होता है...जहां पुलिस भी जाने से डरती है. ठीक उसी तरह ये छात्र देश भर के विश्वविद्यालयों को भी वैसा ही मोहल्ला बनाने की कोशिश कर रहे हैं . आपने भी गौर किया होगा कि हर शहर के कुछ इलाके ऐसे होते हैं..जहां कानून व्यवस्था का राज नहीं चलता . वहां सिर्फ एक खास समुदाय का कब्ज़ा होता है.

इन मोहल्लों में कुछ विशेष लोगों की गुंडागर्दी चलती है और अगर आप इस इलाके में फंस गए तो फिर पुलिस भी आपकी मदद नहीं कर पाती है . कुछ छात्र.. कॉलेजों और Universities को भी ऐसा ही मोहल्ला बनाना चाहते है..जहां मीडिया नहीं घुस सकता...पुलिस नहीं घुस सकती और नियम कायदों के पालन का तो..सवाल ही पैदा नहीं होता .पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी आज NRC और नागरिकता कानून के विरोध में एक रैली निकाली गई . पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद इस रैली का नेतृत्व कर रही थीं .

लेकिन इस दौरान आम लोगों की दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो गई. कोलकाता की सड़कों पर जाम लग गया. बसें रोक दी गई..और विरोध प्रदर्शन के नाम पर एक शहर को बंधक बना लिया गया. पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर में भी...विरोध प्रदर्शनों के नाम पर वाहनों में तोडफोड़ की गई और .यहां तक कि एक Ambulance को भी निशाना बनाया गया. वाराणसी में भी National Students Union of India यानी NSUI के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी की

दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भी जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्रों के साथ एकता दिखाने के लिए विरोध प्रदर्शन किया . लेकिन इस दौरान कुछ लोगों ने छात्रों द्वारा की जा रही हिंसा का भी विरोध किया और हिंसक छात्रों के खिलाफ नारेबाज़ी की

दिल्ली के इंडिया गेट पर आज कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा ने भी धरना दिया और इस धरने में कांग्रेस के कई बड़े नेता शामिल हुए. आप कह सकते है कि आज हमारे देश में दिल्ली से लेकर कोलकाता और हैदराबाद से लेकर लखनऊ तक राजनीति की नई दुकानें खुल गई हैं...और राजनीतिक दल इन दुकानों के ज़रिए दूषित विचारों की Campus Placement कर रहे हैं . इन हिंसक प्रदर्शनों को हमारे देश का टुकड़े टुकड़े गैंग और इस गैंग को समर्थन करने वाले लोग जिस तरह से कानूनी मान्यता दे रहे हैं...वो बहुत खतरनाक बात है

दिल्ली में हो रहे विरोध प्रदर्शनों की वजह से आज 5 मेट्रो Stations भी बंद कर दिए गए...इसके अलावा दिल्ली की कई मुख्य सड़कों पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया . लेकिन फिर भी प्रदर्शनकारी इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी बता रहे हैं . NRC और नागरिकता संशोधन को लेकर कल भी देश की राजधानी दिल्ली और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हिंसक प्रदर्शन हुए थे. दिल्ली के जामिया नगर और Friends Colony में सरकारी बसों में आग लगा दी गई...कई वाहन भी जला दिए गए और पुलिस पर पत्थरबाज़ी भी की गई .

हालांकि जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी का दावा है कि इन प्रदर्शनों में यूनिवर्सिटी के छात्र शामिल नहीं थे. और फर्ज़ी I cards के सहारे कुछ असामाजिक तत्व जामिया को बदनाम कर रहे हैं . इस यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर का दावा है कि कैंपस में ऐसे 750 फर्ज़ी I Cards पाए गए हैं . लेकिन दूषित विचारों को किसी पहचान पत्र की ज़रूरत नहीं होती...ऐसे विचार और संस्कार खुद ब खुद सामने आ जाते हैं . ऐसा ही कल भी हुआ जब Zee News की टीम..इन प्रदर्शनों की कवरेज के लिए दिल्ली पुलिस के मुख्यायलय पहुंची .

जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी और JNU के छात्रों ने हमारी टीम के साथ बदलसलूकी की...हमारा कैमरा छीनने की कोशिश की और Zee News के खिलाफ नारेबाज़ी भी की कल सिर्फ दिल्ली में ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भी विरोध प्रदर्शन हुए. ये प्रदर्शन भी बिल्कुल उसी तरीके से हुए.

जिस तरह से आजकल देश में हो रहे हैं.. यानी शांति से अपनी बात कहने की जगह..पुलिस पर पथराव किया गया और हिंसा का सहारा लिया गय़ा. देश भर में हो रहे इन प्रदर्शनों.और इसके पीछे छिपी राजनीति को समझने के लिए हमने एक वीडियो विश्लेषण तैयार किया है. जिसे देखकर आप समझ जाएंगे कि भारत में ये विरोध प्रदर्शन कैसे एक खास एजेंडे के तहत हो रहे हैं.