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Zee Jaankari: जानिए, चीन की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है? फिर भी आगे बढ़ रहा देश

अब आपको चीन के सामने मौजूद THREATS यानी खतरों के बारे में बताते हैं . कहते हैं हर सिक्के के दो पहलू होते हैं . चीन के इस आर्थिक चमत्कार के भी दो पहलू है. 

Zee Jaankari: जानिए, चीन की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है? फिर भी आगे बढ़ रहा देश

आज हम आपको चीन के आर्थिक विकास में छिपे खतरों के बारे में भी बताएंगे लेकिन पहले आपको ये समझना चाहिए कि चीन ने 40 वर्षों में ये चमत्कार आखिर किया कैसे ? इसे समझने के लिए आज हमने कई विशेषज्ञों से बात करके रिसर्च किया और चीन के इतिहास का बारीकी से अध्ययन किया . 1978 तक चीन में Confucius मूल्यों को बहुत महत्व दिया जाता था . इन मूल्यों में मानवता, ज्ञान, एकजुटता , वफादारी, और सही आचरण जैसी बातें शामिल थी . लेकिन चीन की कम्युनिस्ट सरकारों ने धीरे धीरे इन मूल्यों को आधुनिकता के साथ जोड़ने का काम शुरु किया और इस विकास यात्रा में कुछ मूल्यों को सिरे से भूला भी दिया गया .

एतिहासिक तौर चीन में हमेशा से शासन करने वालों को बहुत सम्मान दिया जाता रहा है . चीन की संस्कृति के मुताबिक वहां शासक को एक Guardian यानी संरक्षक माना जाता है . यानी चीन के पारिवारिक मूल्यों में भी सत्ता का प्रभाव अक्सर दिखाई देता है . विशेषज्ञों का कहना है कि चीन में सरकार और समाज को एक ही Unit माना जाता है .

इसलिए वहां की सरकार जब सख्त नियम लागू करती है, तो ज्यादातर लोग इनका विरोध नहीं करते, बल्कि ये मान लेते हैं कि ये नियम घर के किसी बड़े ने..उनको लाभ पहुंचाने के लिए तय किए हैं . यानी चीन में सत्ता को बहुत शक्तिशाली माना जाता है और उसके खिलाफ जाने की हिम्मत कोई नहीं करता . अब आपको चीन की WEAKNESS यानी कमज़ोरियों को भी समझना चाहिए .

चीन की सबसे बड़ी कमज़ोरी है वहां विपक्ष और लोकतंत्र का अभाव . ये चीन की विकास यात्रा का वो पहलू है जिससे भारत ने हमेशा बचने की कोशिश की है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और एक लोकतंत्र की विशेषता ये होती है कि वहां सब की बात सुनी जाती है . विपक्ष को भी अहमियत दी जाती है .

लोगों की राय का सम्मान किया जाता है. विरोध प्रदर्शन को दबाया नहीं जाता, बल्कि इसे लोकतंत्र की ताकत माना जाता है . हालांकि इसकी वजह से कई बार विकास की रफ्तार धीमी हो जाती है . लक्ष्य वक्त पर हासिल नहीं हो पाते . इसलिए कुछ लोग इसे Democracy Tax भी कहते हैं . चीन में अमीर और गरीबों के बीच की खाई पहले से भी बड़ी हो गई है.

चीन के ग्रामीण इलाकों में ये असमानता बहुत ज्यादा है . और चीन की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा आज भी LOW SKILLED है . यानी इनकी काम करने कुशलता बहुत कम है . हालांकि चीन को कभी एशिया के सबसे गरीब और दरिद्र देशों में शामिल किया जाता था, लेकिन आज चीन दुनिया की महाशक्ति बन गया है.

इसलिए आज हमने चीन से आई कुछ तस्वीरों के आधार पर एक विश्लेषण तैयार किया है . इस विश्लेषण में आपको चीन की सैन्य ताकत की झलक दिखाई देगी और आपको ये भी समझने में मदद मिलेगी कि चीन ने कैसे सिर्फ 70 वर्षों में खुद को दुनिया के सर्वशक्तिशाली देशों में शामिल कर लिया. चीन के सामने कुछ OPPORTUNITIES यानी अवसर भी हैं .

अपनी अर्थव्यवस्था के दम पर चीन चाहता है कि दुनिया के बड़े बड़े देश उसे सम्मान की नज़र से देखें और दुनिया के बड़े कूटनीतिक फैसले उसके बगैर ना लिए जाए . चीन अब भी दुनिया के लिए एक बंद देश है . दुनिया की कई बड़ी कंपनियां चीन में सामान बना तो सकती हैं. लेकिन वहां के बड़े बाज़ार का इस्तेमाल आसानी से नहीं कर सकती .

चीन चाहें तो अपने बाज़ार को दुनिया के लिए खोल सकता है . दुनिया भर की कंपनियां चीन के नियमों के मुताबिक अपने Products में बदलाव करने के लिए भी तैयार है. और अगर बड़ी कंपनियों को चीन में Entry मिल गई...तो चीन की अर्थव्यवस्था को और भी फायदा होगा . विदेशी कंपनियां ही नहीं बल्कि Hollywood और Bollywood जैसी Film Industries भी चीन के बाज़ार की अहमियत पहचानती हैं और इसे बाज़ार के तौर पर देखती हैं.

अब आपको चीन के सामने मौजूद THREATS यानी खतरों के बारे में बताते हैं . कहते हैं हर सिक्के के दो पहलू होते हैं . चीन के इस आर्थिक चमत्कार के भी दो पहलू है. एक पहलू ये है कि चीन ने आर्थिक विकास के सारे Records ध्वस्त कर दिए हैं . चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है . चीन में लोगों का रहन-सहन बहुत बेहतर हुआ है और 1978 के बाद चीन के 50 करोड़ लोग गरीबी से मुक्त हुए हैं .

लेकिन इस विकास यात्रा का दूसरा पहलू ये है कि चीन में लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोंटा गया है . वहां सरकार के खिलाफ बोलने, या सरकार के फैसलों का विरोध करने की मनाही है . चीन में Internet पर भी सेंसरशिप लागू है . विदेशी मीडिया भी चीन में आकर आसानी से रिपोर्टिंग नहीं कर सकती .

चीन की सरकार अपने हर नागरिक का रिकॉर्ड रख सकती है . चीन में वीगर मुस्लिमों पर वहां की सरकार अत्याचार करती है . ऐसा माना जाता है कि चीन ने लाखों वीगर मुस्लिमों को Detention Centers में कैद करके रखा गया है . चीन में सरकार का विरोध करने वालों को जेल में डाल दिया जाता है. वर्ष 1989 में चीन में लोकतंत्र के समर्थन में विरोध प्रदर्शन हुए थे.

..तब चीन की सरकार ने इन प्रदर्शनों को बड़ी क्रूरता के साथ कुचल दिया था . ऐसा भी माना जाता है कि बीजिंग में हुए इन विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले कई लोगों को चीन की सेना ने मार दिया था . एक Chinese Tank के सामने खड़े प्रदर्शनकारी की ये तस्वीर पूरी दुनिया में आज भी मशहूर है . चीन आज एक बार फिर मुश्किलों के दौर से गुज़र रहा है .

Hong-kong में प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है. आज भी Hong Kong में जबरदस्त प्रदर्शन हुए और कई जगहों से दंगों की भी खबर आई . Hong-kong में आज एक प्रदर्शनकारी को पुलिस ने गोली भी मार दी . चीन के शहरों में People’s Republic of China की 70वीं सालगिरह का जश्न आतिशबाज़ी करके मनाया जा रहा है तो Hong-kong में प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ आतिशबाज़ी कर रहे हैं.

इसी तरह चीन ताइवान पर भी कब्ज़ा करना चाहता है . तिब्बत के लोग भी लंबे समय से चीन से आज़ादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं. लेकिन चीन की सरकार के सामने सिर्फ इतनी ही चुनौतियां नहीं है . इसी वर्ष 3 सितंबर को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक भाषण दिया था, इस भाषण के दौरान जिनपिंग ने 50 बार Chinese भाषा के शब्द डूजेंग का इस्तेमाल किया .

डूजेंग का मतलब संघर्ष करना होता है . अमेरिका के साथ चल रहे व्यापार युद्ध और आंतरिक समस्याओं की वजह से शी जिनपिंग देश के युवाओं को संघर्ष के लिए तैयार कर रहे हैं . चीन की Belt And Road initiative योजना को भी कई देशों में झटका लग चुका है . इन योजनाओं में पार्दर्शिता की कमी, कर्ज़ के दबाव और चीन की साम्राज्य स्थापित करने वाली मंशा की वजह से कई देश इस योजना पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं .

यानी चीन ने ज़ोरदार आर्थिक तरक्की तो कर ली..लेकिन ये सब उसने लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या करके किया . हालांकि भारत चीन से आज अनुशासन, दूरदर्शिता , सामाजाकि एकजुटता और राष्ट्रवाद जैसी बातें सीख सकता है. क्योंकि चीन के विकास में इन मूल्यों का भी बहुत योगदान है .