close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

Zee Jaankari: जानिए, बैंक अगर डूब जाए तो आपके जमा पैसों का क्या होगा?

भारत में मुख्य रूप से तीन प्रकार के बैंक हैं. पहले हैं राष्ट्रीय बैंक जिन्हें सरकारी बैंक भी कहा जाता है. इन Banks की संख्या 18 है . जबकि PMC जैसे Urban Cooperative banks की संख्या 15 सौ 42 है . 

Zee Jaankari: जानिए, बैंक अगर डूब जाए तो आपके जमा पैसों का क्या होगा?

भारत में मुख्य रूप से तीन प्रकार के बैंक हैं. पहले हैं राष्ट्रीय बैंक जिन्हें सरकारी बैंक भी कहा जाता है. इन Banks की संख्या 18 है . जबकि PMC जैसे Urban Cooperative banks की संख्या 15 सौ 42 है .  इसी तरह Scheduled Private Banks की संख्या 22 है . अच्छी बात ये है कि वर्ष 1991 के उदारीकरण के बाद से भारत के किसी भी Commercial Bank में रखा ग्राहकों का पैसा नहीं डूबा है.  अगर कभी ऐसे हालात पैदा भी हुए हैं तो सरकार ने खराब वित्तीय स्थिति वाले बैकों का अच्छी स्थिति वाले बैकों के साथ विलय कर दिया है . लेकिन इस दौरान 350 Cooperative banks की वित्तीय हालत जरूर खराब हुई है. 

और जिन लोगों के इन बैंकों में खाते थे...उन्हें Insurance के रूप में कुल 4 हज़ार 822 करोड़ रुपये मिले .  लेकिन किसी भी मामले में ये राशि 1 लाख रुपये से ज्यादा नहीं रही होगी  . अब आपको ये समझना चाहिए कि ये तीनों तरह के बैंक काम कैसे करते हैं  . सरकारी और प्राइवेट बैंकों का गठन Companies Act के अंतर्गत किया जाता है. 

सरकारी बैंकों का नियंत्रण सीधे वित्त मंत्रालय के हाथ में होता है .  जबकि प्राइवेट बैंकों की जिम्मेदारी इनके मालिकों की होती है.  और इन पर निगाह रखने का काम RBI करता है. Cooperative banks अलग-अलग राज्यों के Cooperative Act के तहत रजिस्टर किए जाते हैं.  ये Banks केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं.  यानी इन पर वित्त मंत्रालय का नियंत्रण नहीं होता. 

ये बैंक RBI, राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के नियमों के अंतर्गत काम करते हैं. तीनों प्रकार के बैंक...पैसा जमा करने, निकालने और कर्ज़ की सुविधा देते हैं.  लेकिन इन तीनो की कार्य प्रणाली में क्या अंतर है आपको ये भी समझना चाहिए. सरकारी और निजी बैंक शाखा आधारित होते हैं.  यानी ये Banks देश में कहीं भी अपनी Branch खोल सकते हैं. 

जबकि Cooperative Banks के लिए ऐसा करने की सीमाएं तय हैं. Cooperative बैंकों की स्थापना 1966 में की गई थी. ऐसा इसलिए किया गया था ताकि आम लोगों को भी Banks से कर्ज़ लेने में आसानी हो. सरकारी और निजी बैंकों का नियंत्रण सरकार और शेयर होल्डर्स के हाथ में होता है..जबकि Cooperative Banks सहकारिता यानी आपसी सहयोग की भावना पर आधारित होते हैं और इनका नियंत्रण भी आम लोगों का होता है.

यानी ये एक लोकतांत्रिक ढांचे पर आधारित हैं. जिसमें जनता ही मालिक है. 1966 के बाद से Cooperative Banks की मदद से लोगों को घर बनाने के लिए कर्ज़ आसानी से मिलने लगा और महाराष्ट्र, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में लाखों लोगों ने इन्हीं बैंकों से कर्ज़ लेकर अपने घर बनाए  . इन Banks के अधिकारियों का आम लोगों से पुराना परिचय होता है.  इन Banks की शाखाएं अक्सर लोगों के घरों के पास होती है और आपसी सहयोग की भावना से चलने की वजह से लोग इन पर विश्वास करते है. लेकिन PMC Bank जैसे घोटाले..इसी भावना को ठेस पहुंचाते हैं . 

जिन बैंकों का गठन आम आदमी को सशक्त बनाने के लिए हुआ था..अगर वही उद्योगपतियों के इशारों पर काम करने लगेंगे.  तो फिर आम आदमी के भरोसे का क्या होगा ? Reserve Bank Of India ने आज Indiabulls Housing Finance और लक्ष्मी विलास बैंक के विलय को भी अनुमति देने से इनकार कर दिया है . Indiabulls का विलय लक्ष्मी विलास बैंक के साथ किए जाने की कोशिश की जा रही थी.

RBI ने लक्ष्मी विलास बैंक पर कर्ज़ देने की पाबंदी लगाई हुई है...तो Indiabulls का इरादा विलय के बाद Bank बनने का था. लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा. India Bulls पर कई तरह ही वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप हैं. ये खबर हमने आपको इसलिए बताई है..क्योंकि भारत में कई बार प्राइवेट बैकों के मालिकों के हित..बैंक की वित्तीय स्थिति से टकरा जाते हैं .

PMC बैंक एक Cooperative बैंक था.  जिसका दोहन उद्योगपतियों ने.. बैंक के अधिकारियों के साथ मिलकर किया. इसलिए Private बैंकों के गलत इस्तेमाल का खतरा तो और भी बड़ा है. हमारे देश में सरकारी बैंक भी उद्योगपतियों के धोखे का शिकार हो जाते हैं. नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे व्यापारियों ने बैकों को 14 हज़ार करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लगाया. 

और देश छोड़कर भाग गए जबकि विजय माल्या 9 हज़ार करोड़ रुपये का कर्ज़ लेकर फरार हो गया. ICICI की पूर्व चेयरमैन चंदा कोचर पर भी एक प्राइवेट कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप लग चुका है.  आरोपों के मुताबिक उन्होंने अपने प्रभाव का दुरुपयोग करके...300 करोड़ रुपये का Loan Sanction किया था. ये बात सही है कि भारत में अब तक किसी बड़े Commercial बैंक के डूबने की नौबत नहीं आई है.  लेकिन भविष्य में भी ऐसा नहीं होगा...ये पुख्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता.  बैंकों में जिस तरह से उद्योगपतियों का दखल बढ़ रहा है  . 

जिस तरह से नेता सहकारी बैकों को अपनी मुट्ठी में रखते हैं .  उसे देखकर ये नहीं कहा जा सकता कि आपके पैसे पर कभी संकट नहीं आएगा. और सबसे बड़ा खतरा Cooperative बैंकों के खाताधारकों को ही होता है.  इसलिए आज हम आपको बताएंगे कि आप इससे बचने के लिए क्या कर सकते हैं .

सबसे पहले ये देखें कि आपके सहकारी बैंक के Management में कौन कौन लोग हैं.  इस बात की भी जांच करें कि उनकी छवि सही है या नहीं और नेताओं और उद्योगपतियों से उनके कैसे रिश्ते हैं ? Cooperative बैंक कई बार ग्राहकों को ज्यादा ब्याज़ दर का लालच देते हैं.  लोन जल्द पास कराने का वादा भी करते हैं. 

आपसी जान पहचान की वजह से लोग इन बैकों पर विश्वास करते हैं.  लेकिन ये विश्वास कई बार आपकी जमा पूंजी पर भारी पड़ जाता है  . इस बात का भी ध्यान रखें कि आप एक ही Bank में अपना सारा पैसा जमा ना करें.  इसे अलग अलग दो-तीन बैंकों में जमा करें.  और किसी भी एक बैंक में आपके कुल पैसों का 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए .

Cooperative बैंकों में तो आपका कम से कम 1 लाख रुपये तक का पैसा सुरक्षित होता है..लेकिन Credit Cooperative societies में पैसे की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होती.  इसलिए इन संस्थाओं के साथ डील करते वक्त आपको सावधानी बरतनी चाहिए. छोटे शहरों में कई छोटे वित्तीय संस्थान बड़े बैंकों से मिलता जुलता नाम रख लेते हैं.  इससे ग्राहकों को धोखा हो जाता है.  इसलिए ऐसे वित्तीय संस्थानों में पैसा रखने से पहले..उसकी अच्छी तरह जांच कर लें.