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Zee Jaankari: जानिए, वीर सावरकर हिंदुत्व के हीरो क्यों?

स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर से अंग्रेज तो डरते ही थे . लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि उनसे कांग्रेस पार्टी भी डरती है. वीर सावरकर ने देश के लिए 10 वर्ष तक कालापानी की सजा काटी. 

Zee Jaankari: जानिए, वीर सावरकर हिंदुत्व के हीरो क्यों?

हमने आपको Online Discount के बारे में बताया. अब देश के उन महापुरुषों के बारे में बताएंगे. जिनके साथ पक्षपात करने में उन्हें कोई Discount नहीं दिया गया था. और ऐसा देश के आजाद होने के बाद 70 वर्षों तक चलता रहा. स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर से अंग्रेज तो डरते ही थे . लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि उनसे कांग्रेस पार्टी भी डरती है. वीर सावरकर ने देश के लिए 10 वर्ष तक कालापानी की सजा काटी. अपनी पूरी जिंदगी देश पर कुर्बान कर दी. लेकिन जब ऐसे वीरों को सम्मान देने का वक्त आया तो. इसपर कांग्रेस ने सियासत शुरू कर दी है. वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग की जा रही है.

लेकिन कांग्रेस इसका विरोध कर रही है. आप सोच रहे होंगे कि भारत पर शासन करनेवाले अंग्रेज और कांग्रेस की सोच में इतनी समानता क्यों है ? क्या कांग्रेस के नेता... वीर सावरकर का अपमान इसलिए कर रहे हैं... क्योंकि वो कांग्रेस पार्टी के मुख्य विरोधी दल बीजेपी के आदर्श पुरुष हैं ? DNA में हमने कल भी आपको वीर सावरकर के बारे में बताया था.

लेकिन उनकी वीर गाथा और समाज सुधार के बारे में बताने के लिए इतना कुछ है कि इसपर कई किताबें लिखी जा सकती हैं.. लेकिन कांग्रेस और उसके दरबारी इतिहासकारों ने हमेशा सावरकर जैसे महानायकों का सच छिपाया है... देश की आज़ादी में उनके योगदान को कम करके दिखाने की कोशिश की है. आज आपको वीर सावरकर के बारे मे पूरी सच्चाई देखकर ये विचार करना चाहिए कि उन्हें भारत रत्न क्यों नहीं मिलना चाहिए.

सबसे पहले ये समझिए कि भारत के राष्ट्रवादी इतिहास में सावरकर का क्या योगदान है. वर्ष 1906 से 1910 के बीच ही सावरकर ने The Indian War of Independence, 1857 नामक एक किताब लिखी थी. इसमें उन्होंने 1857 के विद्रोह को अंग्रेज़ों के खिलाफ पहला स्वतंत्रता संग्राम कहा था. अंग्रेजों ने इस किताब पर प्रतिबंध लगा दिया था.

मार्च 1910 में वीर सावरकर को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ हिंसा और युद्ध भड़काने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. वीर सावरकर पर मुकदमा चलाया गया और वर्ष 1911 में अंडमान द्वीप में 10 वर्षों तक कालापानी की सज़ा दी गई. यहां उन्हें अंग्रेजों के अत्याचार झेलने पड़े और ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वो... भारत का असली इतिहास देश के लोगों को बताना चाहते थ.

लेकिन आज़ादी से पहले अंग्रेज सरकार. और स्वतंत्रता मिलने के बाद कांग्रेस सरकार ने कुछ महापुरुषों के योगदान को कम करके दिखाया . सावरकर का ये योगदान देश के लिए कितना महत्वपूर्ण है ये आपको बताएंगे. लेकिन पहले आप पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की एक ऐतिहासिक कविता सुनिए..

जिसमें उन्होंने सावरकर शब्द का पूरा मतलब बताया था. क्रांतिकारियों और महापुरुषों के बारे में आधी अधूरी जानकारियां देश के सामने नहीं आनी चाहिए . क्योंकि कोई भी देश अपने इतिहास... संस्कृति और विरासत पर गर्व किए बिना आगे नहीं बढ़ सकता है .

भारत के 135 करोड़ लोगों को अपना असली इतिहास जानने का हक है... इसलिए देश का इतिहास नए सिरे से लिखा जाना चाहिए. जिसमें किसी महापुरुष या क्रांतिकारी के साथ कोई भेदभाव ना हो... उनके योगदान को आजादी के दूसरे महानायकों के मुकाबले कम ना किया गया हो.

आजादी से जुड़ा एक ऐसा ग्रंथ हो.. जिसे पढ़कर हम अपने असली देशप्रेमियों की पहचान कर सकें . इसमें सिर्फ सत्य की खोज करके. उसे उचित स्थान दिया जाए . ये देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देनेवालों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी . इससे आनेवाली पीढ़ियों को प्रेरणा भी मिलेगी और उनमें राष्ट्रीय स्वाभिमान की भावना का संचार होगा .

सवाल ये उठता है कि सिर्फ 28 वर्ष की उम्र में सावरकर को 50 वर्ष तक कालापानी की सजा क्यों मिली ? महात्मा गांधी के भारत आने से पहले वीर सावरकर देश के क्रांतिकारियों के प्रेरणास्रोत बन चुके थे . अंग्रेजों के खिलाफ इस विद्रोह के कारण सावरकर को जितनी सजा मिली... उसका 25 प्रतिशत भी महात्मा गांधी और नेहरू के हिस्से में कभी नहीं आया था .

693 कमरों वाली इस जेल में कैदियों के रहने की जगह बहुत छोटी हुआ करती थी....रोशनी के लिए सिर्फ एक छोटा सा रोशनदान होता था . क्रांतिकारियों को वहां पर तरह-तरह की यातनाएं दी जाती थीं, उन्हें बेड़ियों से बांधा जाता था. उनसे कोल्हू से तेल निकालने का काम करवाया जाता था . वहां हर कैदी को एक निश्चित समय में करीब साढ़े तेरह किलो नारियल और सरसों से तेल निकालना होता था.

और अगर कोई ऐसा नहीं कर पाता था....तो उसे बुरी तरह पीटा जाता था और बेड़ियों से जकड़ दिया जाता था. अंग्रेज़ बहुत निर्दयी थे और हमेशा भारतीय लोगों के सम्मान पर चोट करते रहते थे. भारतीय क़ैदियों को गंदे बर्तनों में खाना दिया जाता था. उन्हें पीने का पानी भी सीमित मात्रा में मिलता था . कैदियों के पैर हमेशा ज़ंजीरों में बंधे रहते थे .

उनके लिए चलना-फिरना और नित्य कर्म करना भी मुश्किल होता था . वीर सावरकर ने इतने मुश्किल हालात के बावजूद काल कोठरी की दीवारों पर 8 से 10 हजार पंक्तियां लिखी थीं . उन्होंने कविताएं लिखने के लिए पत्थर को कलम और जेल की दीवार को कागज की तरह इस्तेमाल किया था .अंग्रेज सरकार वीर सावरकर को यातनाएं देती थी...

जबकि भारत की दूसरी जेलों में बंद जवाहरलाल नेहरू जैसे कैदियों को लिखने पढ़ने की सारी सुविधाएं मिलती थीं .उन्हें रोजाना अखबार भी मिलता था. जिससे उन्हें देश और दुनिया की हरेक खबर मिलती थी. लेकिन अंडमान द्वीप पर बनी इस जेल के चारों तरफ समुद्र था और यहां की यातनाओं से परेशान होकर. कई क्रांतिकारियों ने फांसी लगा ली थी.

कुछ क्रांतिकारियों ने अनशन भी किया था . लेकिन सावरकर ने आत्महत्या और अनशन को गलत रणनीति बताते हुए जिंदा रहकर और आजाद होकर देश की सेवा करने का रास्ता अपनाया था. आज कांग्रेस. वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर सवाल उठा रही है. ऐसे वक्त में वर्ष 1980 में सावरकर की तारीफ करते हुए लिखा गया एक पत्र सामने आया है.

इंदिरा गांधी ने इस पत्र में लिखा ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ वीर सावरकर के साहसिक विरोध का आजादी की लड़ाई में अहम योगदान है. मैं भारत मां के महान सपूत वीर सावरकर की सौवीं जयंती के सफल आयोजन की कामना करती हूं. ये पत्र 20 मई 1980 का है, और इस पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के हस्ताक्षर साफ़ देखे जा सकते हैं.

यानी 39 वर्ष पहले इंदिरा गांधी. सावरकर को भारत मां का महान सपूत मानती थी. लेकिन आज कांग्रेस उन्हें भारत रत्न दिए जाने की बात कहे जाने से ही परेशान है. लेकिन कांग्रेस राज के दौरान हमारे देश में अब तक ऐसे कई व्यक्तियों को भारत रत्न दिया जा चुका है. जिनके देश के प्रति योगदान के बारे में जानने के लिए आपको काफी खोजबीन करनी पड़ेगी.

और हो सकता है कि आप निराश भी हो जाएं. जिन लोगों का देश के प्रति योगदान वीर सावरकर के योगदान का 25 प्रतिशत भी नहीं है. उन्हें भी भारत रत्न मिल चुका है. आपको पूरी जानकारी देने के लिए हमने आज भारत रत्न सम्मान पर गहरा रिसर्च किया है . आपको ये सुनकर हैरानी होगी कि वर्ष 1954 से लेकर वर्ष 2019 तक सबसे ज़्यादा भारत रत्न कांग्रेस के नेताओं को मिले हैं.

अब तक 25 नेताओं को ये सम्मान मिला है, जिनमें से 15 नेता कांग्रेस पार्टी के हैं. जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी...दो ऐसे प्रधानमंत्री रहे हैं.. जिन्होंने अपने कार्यकाल में खुद को भारत रत्न दिया था. ये बात नैतिक तौर पर हैरान करती है. अब तक 7 प्रधानमंत्रियों को भारत रत्न से सम्मानित किया गया है. जिनमें से 3 प्रधानमंत्री नेहरू-गांधी परिवार के रहे हैं.

यानी जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी. अब तक कुल 48 लोगों को भारत रत्न से सम्मानित किया गया है. जिनमें से 43 पुरुष और 5 महिलाएं हैं. लेकिन सरदार वल्लभ भाई पटेल को उनके निधन के 41 साल बाद भारत रत्न दिया गया. वर्ष 1991 में राजीव गांधी के साथ सरदार पटेल को भारत रत्न दिया गया था.

भारत रत्न हमारे देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है. ये उन्हें दिया जाता है जिन्होंने देश की असाधारण सेवा की हो. लेकिन कांग्रेस पार्टी ने भारत रत्न को 'फैमिली अवॉर्ड' बना दिया. वर्ष 1976 में इंदिरा गांधी की सरकार ने कांग्रेस नेता कुमारस्वामी कामराज को भारत रत्न दिया था. तब ऐसा कहा गया था कि तमिलनाडु में वर्ष 1977 में होने वाले चुनावों में फायदे के लिए ये फैसला लिया गया था. और वर्ष 1988 में तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और तमिल फिल्मों के सुपस्टार एम जी रामचंद्रन को ये सम्मान दिया गया . तब देश में राजीव गांधी की सरकार थी.

और तब ये कहा गया था कि तमिलनाडु में वर्ष 1989 के चुनावों में बढ़त के लिए. ये सम्मान दिया गया. ये बड़े आश्चर्य की बात है कि देश के कुछ नेताओं ने जीते जी. खुद को भारत रत्न से सम्मानित कर लिया. लेकिन वीर सावरकर और नेता जी सुभाष चंद्र बोस जैसे महान नेताओं को भारत रत्न नहीं दिया गया. इसी तरह संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर को वर्ष 1990 में वीपी सिंह सरकार ने देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया.

कांग्रेस पार्टी की एक और समस्या है. वो हैं गांधी परिवार के नाम से उनका प्यार. आज़ादी के बाद अगर नेताओं को देश का नाम बदलने का विकल्प मिलता तो शायद... हिंदुस्तान का नाम बदलकर गांधीस्तान रखा जा सकता था .हम ऐसा क्यों कह रहे हैं. इसकी वजह समझिए.

वर्ष 2012 में एक RTI से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले 25 वर्षों में गांधी परिवार के तीन प्रधानमंत्री यानी जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के नाम पर 650 योजनाएं चलाई गईं. राज्यों द्वारा संचालित 52 योजनाएं गांधी परिवार के नाम पर हैं..25 राजीव गांधी और 27 इंदिरा गांधी के नाम से चल रही हैं. केंद्र सरकार की 27 योजनाएं गांधी परिवार के नाम पर हैं. देश की 55 University और शैक्षिक संस्थाएं राजीव गांधी के नाम पर हैं...21 इंदिरा गांधी के नाम पर और 22 जवाहर लाल नेहरु के नाम पर हैं.

गांधी परिवार के सदस्यों के नाम पर 51 पुरस्कार दिए जाते हैं. देश के 5 एयरपोर्ट गांधी परिवार के नाम पर हैं. इसके अलावा हमारे देश में 15 Scholarship Scheme भी गांधी परिवार के नाम पर चल रही हैं. गांधी परिवार के नाम पर सड़कों, चौराहों और पार्कों की तो गिनती करना भी मुश्किल है. यानी कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए..

जहां तक संभव हुआ वहां तक हर जगह गांधी परिवार का नाम Copy Paste कर दिया.अपने ही देश में पक्षपात वीर सावरकर के अलावा उन महापुरुषों के साथ भी हुआ... जो एक खास परिवार से नहीं थे .लेकिन अब देश के महापुरुषों को उनका स्थान देने की शुरुआत हुई है. आप इसे पुरानी गलतियों को सुधारने के लिए चलाया जा रहा. न्यू इंडिया का भूल सुधार कार्यक्रम भी कह सकते हैं.

इसकी शुरुआत 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के कार्यक्रम पर होगी. और देश के पहले गृहमंत्री सरदार पटेल की जयंती पर गुजरात में Statue of Unity पर बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इस कार्यक्रम में प्रध्रनमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह शामिल होंगे.

गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सुरक्षा बल और सभी पुलिस बलों को अपने दफ्तरों में सरदार पटेल की तस्वीर लगाने का आदेश जारी किया है .सरदार पटेल की तस्वीरों पर भारत की सुरक्षा और एकता को हम हमेशा अक्षुण्ण रखेंगे का संदेश भी लगाया जाएगा.आज जैसा विरोध वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर हो रहा है .

ऐसा ही वर्ष 2014 में सरदार पटेल की मूर्ति बनाने के फैसले के बाद भी हुआ था. यानी देश में हमेशा से. एक खास विचारधारा वाले महापुरुषों का विरोध किया जा रहा है. ये वो जन-नायक हैं जिनका किसी खास परिवार से संबंध नहीं है. हमारा मानना है... किसी भी राष्ट्र में नायकों की पूजा होनी चाहिए..

. उन्हें उचित सम्मान दिया जाना चाहिए... उनके बारे में देश की नई पीढ़ी को बताना चाहिए... ऐसा करना बहुत जरूरी है... क्योंकि आज़ादी के बाद देश में एक खास Surname या एक विशेष परिवार के लोगों की ही व्यक्तिपूजा की गई थी.