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Zee Jaankari: जानिए, Online Shopping में क्यों मिलता है भारी-भरकम Discount

क्या सच में  E-commerce कंपनियां ग्राहकों को 10 से 80 प्रतिशत तक की छूट देती हैं ? और अगर ऐसा है...तो फिर ये कंपनियां मुनाफा कैसे कमाती है ? 

Zee Jaankari: जानिए, Online Shopping में क्यों मिलता है भारी-भरकम Discount

आज करवाचौथ का त्योहार है. हो सकता है कि इस मौके पर आपने. अपने पति या अपनी पत्नी को गिफ्ट देने के लिए हाल ही में Shopping की हो. और इस बात की भी पूरी संभावना है कि आप में से ज्यादर लोगों ने ये Shopping Online की होगी. क्योंकि Online Shopping पर इन दिनों भारी Discount Offers चल रहे हैं.  हमें उम्मीद है कि Sale के दौरान ये Products आपको भारी Discount पर मिले होंगे. बड़ी ई- कॉमर्स कंपनियां दिवाली को देखते हुए एक बार फिर से ऐसी ही Sale का आयोजन कर रही हैं जिनमें ग्राहकों को अलग-अलग Products पर 10 से लेकर 80 प्रतिशत तक का Discount दिया जा रहा है.

हो सकता है कि आप भी दिवाली के मौके पर कुछ नया सामान खरीदने की योजना बना रहे हों और कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले Discounts का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हो . लेकिन क्या सच में  E-commerce कंपनियां ग्राहकों को 10 से 80 प्रतिशत तक की छूट देती हैं ? और अगर ऐसा है...तो फिर ये कंपनियां मुनाफा कैसे कमाती है ?

और अगर भारी भरकम Discount देने के बाद भी इन कंपनियों को हज़ारों करोड़ रुपये की कमाई हो रही है तो फिर देश के छोटे दुकानदारों का भविष्य कैसा है ? छोटे दुकानदार बहुत कम Margin पर सामान बेचते हैं...इसलिए उनका मुनाफा भी छोटा होता है और यही वजह है कि वो ग्राहकों को ज्यादा Discount भी नहीं दे पाते हैं. भारत में इस वक्त करीब 7 करोड़ छोटे और बडे व्यापारी हैं.

इनके व्यापार पर करीब 28 करोड़ जिंदगियां निर्भर करती हैं. इनमें इनके परिवार के लोग, और इनकी दुकानों पर काम करने वाला Staff शामिल है. एक अनुमान के मुताबिक भारत में Online Shopping करने वाले लोगों की संख्या 15 करोड़ से ज्यादा है. जबकि Online सामान बेचने वाली कंपनियों की संख्या 50 से ज्यादा है. इन्हें E-Commerce कंपनी भी कहा जाता है.

इसलिए आज हम देश के 135 करोड़ ग्राहकों, 7 करोड़ व्यापारियों और E-commerce कंपनियों के नज़रिए से Discount वाली इस दुनिया का विश्लेषण करेंगे. लेकिन ये विश्लेषण करते हुए हम आपको जानकारी के मामले में कोई Discount नहीं देंगे, क्योंकि जानकारी में मिला Discount आपको भ्रमित कर सकता है और आप अपना नुकसान करवा सकते हैं.

भारत सरकार E-commerce कंपनियों द्वारा त्योहारों के मौके पर दिए जा रहे Discounts पर नज़र रख रही है .वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने देश की कई बड़ी E Commerce कंपनियों के प्रतिनिधियों से इस मामले पर मुलाकात भी की है. सरकार ऐसा इसलिए कर रही है..क्योंकि व्यापारिक संगठनों द्वारा इन कंपनियों पर..

बाज़ार के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया जा रहा है. Confederation of All India Traders यानी CAIT के मुताबिक Online Retail कंपनियों द्वारा दिए जा रहे Discounts की वजह से छोटे व्यापारियों को बहुत नुकसान हो रहा है और इस महीने उनकी बिक्री में 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी आई है . CAIT के आरोपों के मुताबिक ये कंपनियां Foriegn Direct Investment यानी FDI से जुड़े नियमों का भी उल्लंघन कर रही है . मेरे हाथ में इस वक्त CAIT की वो चिट्ठी है, जिसमें व्यापारियों ने सरकार से E-Commerce कंपनियों की शिकायत की है. केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को भेजी गई इस चिट्ठी में क्या लिखा है वो मैं आपको पढ़कर सुनाना चाहता हूं.

हालांकि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के ऑफिस की तरफ से एक Tweet करके इस बात का भरोसा दिलाया गया है कि सरकार ने E-Commerce को लेकर स्पष्ट गाइडलाइंस बनाई हैं  और किसी भी कंपनी को इनसे जुड़े नियमों के उल्लंघन की इजाजत नहीं दी जाएगी . भारत में होने वाले संगठित Retail व्यापार में Online Shopping की हिस्सेदारी फिलहाल 25 प्रतिशत है .

Nasscom के मुताबिक भारत में E-commerce का बाज़ार 2 लाख 70 हज़ार करोड़ रुपये से ज्यादा का है. Federation of Indian Chambers of Commerce & Industry यानी FICCI के मुताबिक E-commerce का ये बाज़ार 2021 में बढ़कर 5 लाख 80 हज़ार करोड़ रुपये और वर्ष 2026 में 14 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा. E Commerce कंपनियां Mobile Phones से लेकर रसोई के बर्तनों तक पर डिस्काउंट दे रही हैं .

इसके अलावा Online कपड़े, जूते  और राशन बेचने वाली कंपनियां भी ग्राहकों को लगातार डिस्काउंट देकर लुभाने की कोशिश कर रही हैं .लेकिन ये सब हो कैसे रहा है. और ये ग्राहकों और छोटे दुकानदारों के हित में है या उनके खिलाफ.. ये समझने के लिए आपको पहले भारत के E-Commerce वाले बाज़ार के मॉडल को समझना होगा .

भारत में इसे दो हिस्सों में बांटा गया है. पहला हिस्सा है Marketplace और दूसरा हिस्सा है Inventory. भारत में E-commerce के Marketplace मॉडल में 100 प्रतिशत तक विदेशी निवेश की इजाजत है . यहां E-commerce Marketplace का मतलब उन Online Platforms से है जो विक्रेताओं और ग्राहकों को आपस में जोड़ते हैं .

जैसे Flipkart, Amazon, Myntra, Snapdeal, Paytm,Shopclues आदी .भारत में अभी  E-commerce  के Inventory मॉडल में विदेशी निवेश की इजाजत नहीं है . इस मॉडल के तहत E-commerce कंपनियां खुद सामान और सेवाओं की मालिक होती हैं और वो उन्हें सीधे ग्राहकों को बेच सकती हैं . अमेरिका में Amazon और Wallmart जैसी कई कंपनियां इसी मॉडल पर काम करती हैं .भारत में E-commerce के Inventory Model में विदेशी निवेश की इजाजत इसलिए नहीं दी गई है...ताकि उन छोटे दुकानदारों को बचाया जा सके..

जो इन कंपनियों की तरह बड़ी मात्रा में सामान नहीं खरीद सकते .भारत में कई E-commerce कंपनियों की अपनी Wholesale Units हैं . जो पहले बड़ी मात्रा में सामान खरीदती हैं और फिर उन्हें उन छोटे विक्रेताओं को बेच देती हैं जो उनके Platform पर Listed हैं. ग्राहक इन Platforms का इस्तेमाल करके..इन छोटे Sellers से सामान खरीदते हैं .

मौजूदा नियमों के मुताबिक E-Commerce कंपनियां अपने Platforms पर मौजूद सामान की मालिक नहीं बन सकती . FDI से जुड़े नियम ये भी कहते हैं कि E-Commerce कंपनियों को सामान बेचने वाला कोई भी विक्रेता..अपने कुल सामान का 25 प्रतिशत से ज्यादा...इन कंपनियों की Whole Sale Units से नहीं खरीद सकता.

अगर वो ऐसा करता है तो ये माना जाएगा कि उस पर इन कंपनियों का नियंत्रण है . इन नियमों का पालन करते हुए हैं कंपनियां अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए जो रणनीति अपनाती है उसी का एक हिस्सा है भारी भरकम Discount Offers व्यापारिक संगठनों का आरोप है कि कंपनियां इसी Discount वाले लालच का सहारा लेकर.

छोटे दुकानदारों और व्यापारियों को प्रतियोगिता से बाहर कर रही हैं. हमने आज इस बारे में National Consumer Helpline के प्रमुख..सुरेश मिश्रा से बात की...उन्होंने इस बारे में क्या कहा..ये आपको सुनना चाहिए. आज हमने व्यापारियों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को लेकर Amazon और Flipkart से भी उनका पक्ष जानने की कोशिश की.

इन कंपनियों ने हमें जवाब भेजा है जिसमें इन्होंने भरोसा दिलाया है कि वो सभी नियमों का पालन कर रही हैं और वो ऐसा कोई काम नहीं करेंगी जिससे बज़ार की नैतिकता को चोट पहुंचती हो . हमने आज Discount वाले इस खेल को समझने के लिए कई विशेषज्ञों से बात की और इस विषय पर काफी रिसर्च भी किया . इस दौरान हमें जो पता लगा.

वो आपको भी हैरान कर देगा. भारत में Online सामान बेचने वाली ज्यादातर बड़ी कंपनियां भारी नुकसान में चल रही है. वर्ष 2018 में भारत की तीन सबसे बड़ी E-commerce कंपनियों का कुल नुकसान 11 हज़ार करोड़ रुपये से ज्यादा का था. दूसरी तरफ इन कंपनियों ने इस महीने की शुरुआत में त्योहार वाली Sale के नाम पर. 6 दिनों में 19 हज़ार करोड़ रुपये का सामान बेचा था.

लेकिन फिर भी ये कंपनियां नुकसान में चल रही हैं . और नुकसान और बिक्री के इन्हीं आंकड़ों के बीच वो सवाल छिपे हैं..जिनका जवाब हर कोई जानना चाहता है . विशेषज्ञों ने हमे बताया कि FDI के नियमों के मुताबिक E Commerce कंपनियां Product का दाम तय नहीं कर सकतीं . Product के दाम तय करने का अधिकार विक्रेताओं के पास है . और वही ये तय करते हैं कि ग्राहकों को कितना Discount देना है.

लेकिन Experts के मुताबिक कई E-Commerce कंपनियां Discount से होने वाले इस नुकसान की भरपाई करने का वादा विक्रेताओं से करती हैं. अब आप सोचिए अगर कंपनियां नुकसान में भी चल रही है और Discount भी दे रही है तो फिर इन्हें फायदा कैसे होगा ? इस सवाल का जवाब वर्तमान में नहीं बल्कि भविष्य में छिपा है . Experts के मुताबिक इन कंपनियों का उद्देश्य अपने Network का विस्तार करना है.

और इसके लिए ये नुकसान उठाने के लिए भी तैयार हैं . Sale और Discount के ज़रिए ग्राहकों को लुभाकर ये कंपनियां उनकी खरीददारी के Patern को मानसिक तौर पर Highjack कर लेती हैं . किसी Platform पर जितने ज्यादा ग्राहक होंगे उतने ही ज्यादा सामान बेचने वाले दुकानदार होंगे और उनके बीच लगातार प्रतियोगिता भी होगी .

जिससे ग्राहकों को Discount जैसे फायदे मिलते रहेंगे . और इसके बाद धीरे धीरे लोग पारंपरिक जगहों से खरीददारी करना कम कर देंगे , तब बाज़ार पर इन कंपनियों का एकछत्र राज हो जाएगा .
विशेषज्ञों को ऐसी आशंका है कि एक बार बाज़ार पर कब्ज़ा हो जाने के बाद ये कंपनियां अपनी मर्ज़ी से Products के दाम तय कर पाएंगी.

और आज आपको जो सामान 50-60 प्रतिशत डिस्काउंट पर मिल रहा है वो काफी महंगा मिलने लगेगा . इस विषय पर आज आपको एक Expert का विश्लेषण सुनना चाहिए . इसे सुनकर आप समझ जाएंगे कि कैसे ये कंपनियां वर्तमान में नुकसान उठाकर भविष्य में निवेश कर रही हैं.