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Zee Jaankari: 'पावर'फुल शरद पवार पर ED ने क्यों कसा शिकंजा, जानिए पूरी वजह

महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक में कथित अनियमितताओं के लिए NCP अध्यक्ष शरद पवार के अलावा 71 राजनेताओं के खिलाफ जांच NABARD की तरफ से 2010 में तैयार की गई जांच रिपोर्ट के आधार पर शुरू की है.

Zee Jaankari: 'पावर'फुल शरद पवार पर ED ने क्यों कसा शिकंजा, जानिए पूरी वजह

मुंबई: महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक में कथित अनियमितताओं के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) अध्यक्ष शरद पवार (Sharad Pawar) के अलावा 71 राजनेताओं के खिलाफ जांच नैशनल बैंक फॉर अग्रीकल्चर ऐंड रूरल डिवेलपमेंट (NABARD) की तरफ से 2010 में तैयार की गई जांच रिपोर्ट के आधार पर शुरू की है. इस मामले में मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक्स विंग ने मामला दर्ज किया है जिसमें किसी भी आरोपी का नाम न लिखकर उसमें महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री, बैंक के पूर्व डायरेक्टरों और पदाधिकारियों के पदों का जिक्र किया गया है तो वहीं ईडी ने एफआईआर में लगी धारा 120 (B) और 34 क्रिमिनल कॉनप्रेसि विथ कॉमन इंटेशन के तहत शरद पवार सहित अन्य लोंगों पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है. ईडी ने क्रिमिनल कॉनप्रेसि विथ कॉमन इंटेशन के तहत जांच कर रही और और उसे जानकारी मिल रही है कि इस कॉनप्रेसि में शरद पवार का हाथ हो सकता है.

महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक में कथित अनियमितताओं के चलते 25 हज़ार करोड़ का घोटाले के आरोप में ईडी ने शरद पवार सहित 71 लोंगो के नाम से मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है. इस मामले में देखा जाए तो मुंबई पुलिस के इकोनॉमिक्स विंग ने जो एफआईआर दर्ज की उसमें किसी भी नेता का नाम ना होकर उस वक़्त के तत्कालीन पदों का जिक्र है. इसके साथ ही मुंबई पुलिस के एफआईआर में आईपीसी की धारा 120 (B) और 34 लगाई है जिसका मतलब होता है कि क्रिमिनल कॉनप्रेसि विथ कॉमन इंटेशन और इसी आधार पर ईडी ने जांच शुरू की और शरद पवार पर मामला दर्ज किया.

शरद पवार का इन्वॉलमेंट!
इस मामले में ईडी का कहना है कि पुलिस की एफआईआर में आईपीसी की धारा 120 (B) और 34 लगाई है जिसका मतलब होता है कि क्रिमिनल कॉनप्रेसि विथ कॉमन इंटेशन है. ED को जानकारी मिली है कि इस मामले में शरद पवार का इन्वॉलमेंट हो सकता है और जो 25 हज़ार करोड़ का कर्ज दिया गया, उस कर्ज का फाइनल बेनिफिशरी कौन है? हमें जांच करके उसका भी पता लगाना है.  साथ ही जिन CSFs (co-operative sugar factories) को लोन दिया गया था, उसमें नियमों को ताक  पर रखा गया था. बाद में mismanagement और  underutilisation के चलते इनमें से कई CSFs (co-operative sugar factories) दिवालिया हो गई और इन्हें कौड़ियों के दामों पर रिज़र्व प्राइस से भी कम कीमत पर बेच दिया गया और यहां पैसा का अवैध लेन-देन होने का शक ED को है.   शरद पवार पर लगाए गए इस आरोप की जांच ईडी को करनी है कि शरद पवार ने रिमोट से इस सबको कंट्रोल करते हुए अंजाम दिया.  

पवार के इशारे पर ही चीनी मिल मालिकों को कर्ज दिया गया
इस मामले के शिकायतकर्ता सुरेंद्र अरोड़ा ने हाईकोर्ट में याचिका की थी जिस याचिका की सुनवाई कर हाइकोर्ट ने मुंबई पुलिस को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे. हाई कोर्ट के आदेश पर इस मामले में मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक्स विंग ने एफआईआर दर्ज की जिसमे किसी का नाम नहीं था. इसी एफआईआर में दर्ज धाराओं के तहत ईडी ने शरद पवार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया. इस पर याचिकाकर्ता के वकील सतीश तलेकर का कहना है  कि शरद पवार एक बड़े और पावरफुल नेता हैं, उस समय कांग्रेस-एनसीपी की सरकार थी और उनके ही इशारों पर ही चीनी मिल मालिकों को कर्ज दिया गया था.