ZEE जानकारी: दिल्ली में आपकी सिर्फ 3.6% सांसे शुद्ध है

आज हम सबसे पहले आपकी सांसों की कीमत का एक विश्लेषण करेंगे. आजकल Online Shopping कंपनियां Packaged यानी बोतलबंद Oxygen भी बेच रही हैं क्योंकि हमारे वातावरण में Oxygen की गुणवत्ता लगातार कम हो रही है.10 लीटर की एक ऑक्सीजन की बोतल...9 हज़ार रुपये में उपलबध है. अगर आप पूरा दिन इन्हीं बोतलों के सहारे सांस लेंगे तो आपको प्रतिदिन करीब 3 लाख रुपये खर्च करने होंगे. यानी एक सांस की कीमत करीब 13 रुपये बैठेगी. इस हिसाब से आप आज DNA देखते-देखते...करीब 19 हज़ार रुपये की सांस ले चुके होंगे.

ZEE जानकारी: दिल्ली में आपकी सिर्फ 3.6% सांसे शुद्ध है

आज हम सबसे पहले आपकी सांसों की कीमत का एक विश्लेषण करेंगे. आजकल Online Shopping कंपनियां Packaged यानी बोतलबंद Oxygen भी बेच रही हैं क्योंकि हमारे वातावरण में Oxygen की गुणवत्ता लगातार कम हो रही है.10 लीटर की एक ऑक्सीजन की बोतल...9 हज़ार रुपये में उपलबध है. अगर आप पूरा दिन इन्हीं बोतलों के सहारे सांस लेंगे तो आपको प्रतिदिन करीब 3 लाख रुपये खर्च करने होंगे. यानी एक सांस की कीमत करीब 13 रुपये बैठेगी. इस हिसाब से आप आज DNA देखते-देखते...करीब 19 हज़ार रुपये की सांस ले चुके होंगे.

हमने आज ये आंकलन....भविष्य की उन आशंकाओं को देखते हुए किया है जिनके मुताबिक हमारे देश के ज्यादातर शहरों में शायद एक दिन भी हवा सांस लेने लायक नहीं होगी और तब आपको Oxygen बाज़ार से ही खरीदनी पड़ेगी . एक आम इंसान एक दिन में 17 से 23 हज़ार बार..सांस लेता है. यानी वर्ष में करीब 62 से 84 लाख बार. ये सांसे जीवन का आधार होती हैं.

इसलिए जब तक सांसे चलती हैं तब तक जीवन भी चलता रहता है. और इन सांसों के रुकने के साथ ही. जीवन भी समाप्त हो जाता है . इसलिए कहा जाता है कि आपको एक ऐसे वातावरण में रहना चाहिए...जहां कि हवा साफ और स्वास्थ्य वर्धक हो... ताकी आप लंबा जीवन जी सकें .

लेकिन क्या आपको पता है कि पिछले 1 हज़ार 672 दिनों में दिल्ली वाले सिर्फ 61 दिन ही साफ हवा में सांस ले पाए हैं . आसान भाषा में कहें तो जनवरी 2015 से लेकर...अगस्त 2019 तक सिर्फ 61 दिन ऐसे थे..जब दिल्ली में हवा सांस लेने लायक थी ...बाकी के दिन दिल्ली वालों को सांस लेने के लिए हवा की जगह धुआं मिल रहा था.

यानी पिछले पांच वर्षों में दिल्ली में रहने वाले एक व्यक्ति ने औसतन 3 करोड़ 85 लाख बार सांस ली होगी और इसमें से करीब 3 करोड़ 71 लाख बार..उसके शरीर में सिर्फ ज़हरीली हवा पहुंची होगी. और साफ हवा सिर्फ 14 लाख बार शरीर के अंदर गई होगी .

Centre for Science and Environment यानी CSE ने ये रिसर्च Central Pollution Control Board द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के आधार पर किया है . CSE के मुताबिक वर्ष 2015 में सिर्फ 5 दिन ऐसे थे...जब दिल्ली की हवा सांस लेने लायक थी. 2016 में एक भी दिन ऐसा नहीं था . एक बार फिर से सुन लीजिए...2016 में एक भी दिन ऐसा नहीं था..जब दिल्ली में हवा सांस लेने लायक रही हो.

इसी तरह...2017 में सिर्फ 20 दिन...2018 में सिर्फ 18 दिन और जनवरी 2019 से लेकर अब तक सिर्फ 18 दिन ऐसे रहे हैं...जब दिल्ली में Air Quality Index.. 50 या उससे कम था. और इससे सरकार और प्रशासन को कोई फर्क नहीं पड़ता . यहां तक कि लोगों ने भी अभी तक प्रदूषण के खिलाफ कोई मुहिम नहीं छेड़ी है.

भारत में अगर हवा में PM-2.5 कणों का स्तर 50 या उससे कम होता है...तो उसे स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता ह . हालांकि World Health Organization के मुताबिक साल भर में Pm2.5 कणों का औसत 15 से 25 के बीच होना चाहिए .यानी हमारे देश में जिस हवा को साफ माना गया है...वो भी अंतर्राष्ट्रीय मानकों के हिसाब से ज़हरीली है . लेकिन भारत में प्रदूषण जैसे मुद्दों की परवाह कोई नहीं करता और लोगों को 5 वर्षों में 60 दिन भी ऐसे नहीं मिल पाते...जब हवा साफ रही हो .

All India Institute of Medical Sciences यानी AIIMS के डॉक्टरों के मुताबिक...ज्यादा प्रदूषण वाले दिनों में सांस की बीमारी से जुड़े मरीज़ों की संख्या 40 प्रतिशत तक बढ़ जाती है .इसी तरह ऐसे बच्चों की संख्या भी 50 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है जिन्हें अब सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो रही हैं .AIIMS में पिछले 2 वर्षों के दौरान इमरजेंसी में भर्ती होने वाले एक लाख बच्चों पर भी एक रिसर्च किया गया. इस रिसर्च के मुताबिक इनमें से 40 प्रतिशत बच्चों को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी .

डॉक्टरों के मुताबिक...प्रदूषण का असर बच्चों के फेफड़ों के विकास और उनकी क्षमता पर भी पड़ रहा है. यानी प्रदूषण की वजह से दिल्ली के 40 से 50 प्रतिशत बच्चों के फेफड़े धीरे धीरे काम करना बंद कर रहे हैं..और किसी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है.

हमारे देश में मंदिर-मस्जिद को लेकर बहस होती है...विरोध प्रदर्शन होते हैं और अदालतों में लंबे कानूनी मुकदमे भी लड़े जाते हैं. लेकिन सांसों के स्वराज के लिए कोई लड़ाई नहीं लड़ता..कोई बहस नहीं होती और इस मामले को अदालत में भी नहीं ले जाता . अगर ऐसा ही चलता रहा तो भविष्य में आपको Oxygen हासिल करने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा . ये बात समझाने के लिए हम आपको एक Short Film दिखाना चाहते हैं...ये फिल्म देखकर आप समझ जाएंगे कि कैसे आने वाले वर्षों में आपको साफ हवा हासिल करने के लिए Online बोली भी लगानी पड़ सकती है.

एक औसत मानव शरीर में करीब 37 लाख करोड़ कोशिकाएं होती हैं . इन्हें अंकों में लिखने के लिए आपको 37 के आगे कुल 12 शून्य लगाने पड़ेंगे . इनमें से करोड़ों कोशिकाएं हर दिन मरती हैं और नई कोशिकाएं उनकी जगह ले लेती है. ये प्रक्रिया जब सुचारू रूप से चलती है तो इंसान स्वस्थ बना रहता है .

लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके शहर का प्रदूषण इन सभी.. 37 लाख करोड़ कोशिकाओं को किसी ना किसी रूप में बीमार कर रहा है . इसलिए अगर आप किसी प्रदूषित शहर में रहते हैं तो इस बात की पूरी आशंका है..कि आपके शरीर की शायद एक भी कोशिका फिलहाल स्वस्थ ना हो .

हम आपको डरा नहीं रहे हैं...बल्कि वो ज़रूरी सच बता रहे हैं जिसे जानने के बाद..आप इस प्रदूषण से अपनी और अपने परिवार की रक्षा करने पर मजबूर हो जाएंगे .

कनाडा की Mcgill यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च के मुताबिक जैसे ही कोई व्यक्ति कम प्रदूषण वाले शहर से...ज्यादा प्रदूषण वाले शहर में जाता है...तो उसे ब्रेन कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है . ये स्टडी वर्ष 1991 से वर्ष 2016 के बीच 19 लाख लोगों पर की गई थी . Study के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति सांस के ज़रिए पूरे साल में सामान्य से 10 हज़ार अतिरिक्त Nano-Particles भी अपने शरीर में पहुंचाते है तो उसे ब्रेन कैंसर का खतरा 10 प्रतिशत तक बढ़ जाता है .

लेकिन अब जो हम आपको बताने जा रहे हैं वो आपको हैरान कर देगा और आप चिंता में पड़ जाएंगे . कनाडा में ये स्टडी Montreal और Toronto जैसे शहरों में की गई है . Montreal का आज का औसत AQI सिर्फ 3 है .जबकि Toronto में आज का AQI ..21 था . जबकि दिल्ली में आज अलग-अलग Air Monitoring Systems द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक AQI साढ़े 300 से साढ़े 500 के बीच में है . यानी दिल्ली में...लोगों को ब्रेन कैंसर देने में इन प्रदूषित कणों को 1 वर्ष का नहीं सिर्फ 20 दिन का वक्त लगेगा . क्योंकि आज की तारीख में दिल्ली में Toronto के मुकाबले 20 गुना ज्यादा प्रदूषण है ...औरइस हिसाब से दिल्ली में रहने वाले लोगों को ब्रेन कैंसर होने का खतरा भी..कई गुना ज्यादा है .

Federation of American Societies for Experimental Biology में छपी एक नई रिपोर्ट के मुताबिक प्रदूषित हवा में सांस लेने से वज़न भी बढ़ सकता है. यानी आप मोटापे का भी शिकार हो सकते हैं . ये रिसर्च...चूहों के दो अलग-अलग समूहों पर किया गया था . एक समूह को प्रदूषित हवा में रखा गया...तो दूसरे समूह को साफ और स्वच्छ हवा में रखा गया .

19 दिनों के बाद..जब प्रदूषण वाली हवा में रखे गए चूहों की जांच की गई तो पता चला कि...इन चूहों के फेफड़ों में सूजन आ गई थी .और इनका Cholesterol भी 50 प्रतिशत बढ़ गया था . इन चूहों के शरीर में इंसुलिन के प्रति भी..Resistance पैदा हो गया था . और 8 हफ्तों के बाद..इनका वज़न भी बढ़ चुका था . इंसानों का Working DNA..चूहों के Working DNA से 97.5 प्रतिशत मेल खाता है. यानी प्रदूषण का जो असर रिसर्च में शामिल चूहों पर हुआ है...वो इंसानों पर भी हो सकता है . दिल्ली जैसे शहरों में प्रदूषण अब साल भर रहता है . और यहां रहने वाले लोगों को जिंदगी भर...जहरीली सांस लेनी पड़ती है .

आज हमने इस विषय पर केंद्र सरकार के पर्यावरण सचिव..और The Energy and Resources Institute यानी TERI के डीजी से भी बात की..इन दोनों अधिकारियों का प्रदूषण को लेकर क्या कहना है..ये आपको भी सुनना चाहिए .

अब आपको समझ आ गया होगा कि कैसे हमारे देश में मंदिर और मस्जिद के निर्माण की तारीख तो देर सवेर तय हो जाती है . लेकिन कोई नेता...कोई सरकार और कोई प्रशासन आपको ये नहीं बताता...कि आपको साफ हवा का स्वराज किस तारीख को मिलेगा ? आप इस पर सोचिएगा ज़रूर .