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Zee Jaankari: पाकिस्तान की ये गलती पड़ सकती है भारी, पीएम मोदी के विमान को नहीं दिया रास्ता

पाकिस्तान ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे के लिए पाकिस्तानी वायुसीमा के इस्तेमाल की इजाज़त नहीं दी है. प्रधानमंत्री मोदी, 20 सितम्बर को अमेरिका की यात्रा पर जाने वाले हैं. 

Zee Jaankari: पाकिस्तान की ये गलती पड़ सकती है भारी, पीएम मोदी के विमान को नहीं दिया रास्ता

पाकिस्तान ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे के लिए पाकिस्तानी वायुसीमा के इस्तेमाल की इजाज़त नहीं दी है. प्रधानमंत्री मोदी, 20 सितम्बर को अमेरिका की यात्रा पर जाने वाले हैं. भारत ने इसके लिए पाकिस्तान से उसकी वायुसीमा के इस्तेमाल की इजाजत मांगी थी.  ये अनुरोध, Protocol के तहत किया गया था.  क्योंकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विमान यानी Air India One, कोई Commercial Flight नहीं है. बल्कि ये एक VVIP Flight है. लेकिन पाकिस्तान के फैसले के बाद अब Air India One को लंबी दूरी तय करनी होगी.  यानी पाकिस्तान की वायुसीमा का इस्तेमाल ना करके अब कोई दूसरा Route लिया जाएगा. 

इसका मतलब ये होगा, कि प्रधानमंत्री मोदी के विमान का Flying Time कम से कम 50 मिनट तक बढ़ जाएगा.  प्रधानमंत्री मोदी, दिल्ली से सीधे Houston के लिए रवाना होंगे.  लेकिन Air India One को ईंधन भरवाने के लिए Frankfurt में रुकना होगा.  सवाल ये है, कि क्या पाकिस्तान ने अपनी वायुसीमा के इस्तेमाल पर रोक लगाकर किसी अंतर्राष्ट्रीय संधि का उल्लंघन किया है. आज हम आपको इस सवाल का जवाब देंगे.  लेकिन उससे पहले ये देखिए, कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इस विषय पर क्या कहा है . 

By Air यानी विमान से दिल्ली से Houston के बीच की दूरी क़रीब साढ़े 13 हज़ार किलोमीटर है.  Air India One पाकिस्तान के इंकार के बाद अब एक नई वायुसीमा का इस्तेमाल करेगा. और रिपोर्ट्स के मुताबिक ये Route, Mumbai होते हुए अरब सागर के ऊपर से गुज़रेगा.  और फिर Muscat होते हुए Frankfurt पहुंचेगा.  और वहां ईंधन भरवाने के बाद Houston के लिए रवाना होगा.  अगर पाकिस्तान ने अपनी वायुसीमा के इस्तेमाल की इजाज़त दे दी होती .  तो Air India One, दिल्ली से पाकिस्तान होते हुए, अफगानिस्तान और ईरान की वायुसीमा के रास्ते से गुज़रते हुए Frankfurt पहुंचता .

पाकिस्तान द्वारा लिया गया फैसला, एक प्रकार से कूटनीतिक आत्महत्या है . क्योंकि, उसका फैसला ICAO यानी International Civil Aviation Organization Charter का उल्लंघन है.  ये संयुक्त राष्ट्र की ही एक संस्था है.  पाकिस्तान इसका Signatory है.  यानी उसने इस संधि पर हस्ताक्षर किए हैं.  इस संधि का Article 9 कहता है, कि कोई देश, किसी असाधारण स्थिति या आपात काल के दौरान ही अपनी वायुसीमा के इस्तेमाल पर रोक लगा सकता है.  और ये रोक सभी देशों के विमान पर लागू होना चाहिए.  इसमें कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता.  इस स्थिति में पाकिस्तान ने दोनों स्तरों पर संधि के नियमों का उल्लंघन किया है. 

और अगर भारत चाहे तो पाकिस्तान के फैसले के खिलाफ वो, ICAO में शिकायत दर्ज कर सकता है.  संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था में शिकायत सही पाई जाने के बाद, पाकिस्तान पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है.  इस संधि में ऐसा प्रावधान भी है, कि नियमों का उल्लंघन करने वाले देशों से Civil Aviation की सबसे बड़ी अंतर्राष्ट्रीय संस्था यानी ICAO में वोटिंग का अधिकार छीना जा सकता है .

कई लोग पाकिस्तान द्वारा लिए गए फैसले को उसकी जीत बता रहे हैं.  लेकिन, सच्चाई ये है, कि पाकिस्तान का फैसला, भारत का कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक है .  अब ये समझिए, कि ऐसा क्यों है ? पाकिस्तान के इंकार के बाद भारत ICAO में जा सकता है.  और अगर भारत के पक्ष में फैसला आया, तो पाकिस्तान को जुर्माना देना होगा. 

अगर पाकिस्तान ने अपनी वायुसीमा के इस्तेमाल की इजाज़त दे दी होती, तो इमरान ख़ान को अपने देश में ही शर्मिन्दा होना पड़ता. इसी महीने पाकिस्तान ने भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के विमान को भी अपनी वायुसीमा का इस्तेमाल नहीं करने दिया था. बालाकोट में भारतीय वायुसेना के हवाई हमले के बाद 27 फरवरी 2019 को पाकिस्तान ने अपनी वायुसीमा बंद कर दी थी.

जिसे 138 दिनों के बाद 16 जुलाई को दोबारा खोला गया था.  और इन 138 दिनों के दौरान दिल्ली से पश्चिमी देशों की तरफ जाने वाले विमानों को लंबी दूरी तय करनी पड़ी.  इससे भारत की Airlines का तो कुछ नुकसान हुआ .  लेकिन कर्ज़ में डूबे पाकिस्तान को भी अपनी वायुसीमा बंद करने की वजह से, क़रीब साढ़े 8 सौ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था.

पाकिस्तान द्वारा लिए गए फैसले के बाद आज भारत ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. और कहा है, कि दो हफ्तों के भीतर VVIP Special Flights को वायुसीमा के इस्तेमाल की इजाज़त ना देकर, अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन नहीं किया है. और ये काफी दुखद है .

कूटनीतिक भाषा में कहें, तो राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विमान से जुड़े मुद्दे को भारत बड़े मंच पर उठा सकता है.  ताकि वो ये साबित कर सके, कि पाकिस्तान ने बार-बार अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन किया.