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Zee Jaankari: जम्मू-कश्मीर के लोगों को मिले 'सुरक्षा कवच' विश्लेषण

हमने वो दौर देखा है, जब देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवादी हमलों की परवाह किए बगैर, श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराया था.

Zee Jaankari: जम्मू-कश्मीर के लोगों को मिले 'सुरक्षा कवच' विश्लेषण

हमने वो दौर देखा है, जब देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवादी हमलों की परवाह किए बगैर, श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराया था. ये क़रीब 27 वर्ष पुरानी बात है. लेकिन अब कश्मीर में नए दौर की शुरुआत हो चुकी है. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के 29 दिनों के अंदर घाटी में शांति और अमन का वातावरण फैल चुका है. लोग धीरे-धीरे इस सुखद बदलाव को स्वीकार करने लगे हैं. और ना सिर्फ अपने राज्य का निए सिरे से निर्माण कर रहे हैं. बल्कि देशहित के लिए सेना में शामिल होकर, 'भारत माता की जय' के नारे भी लगा रहे हैं. सबसे पहले आप कश्मीर के युवाओं की ये गगनभेदी गूंज सुनिए.

ये सिर्फ इकलौती तस्वीर नहीं है. तीन दिन पहले ही जम्मू-कश्मीर के 575 युवा, Jammu And Kashmir Light Infantry Regiment में शामिल हुए हैं. और Passing Out Parade में शपथ लेने के दौरान, जो भाव उनके चेहरे पर दिखाई दे रहे थे. और जिस जोशिले अंदाज़ से वो शपथ ले रहे थे, वो भी 2019 के नए कश्मीर की सुखद तस्वीर ही है. सबसे बड़ी बात ये है, कि जिस कश्मीर से आए दिन गोलीबारी की ख़बरें आती थीं.

उसी कश्मीर में पिछले एक महीने से ना तो एक भी गोली चली है. ना ही Tear Gas छोड़े गए हैं. और ना ही किसी प्रकार की कोई Casualty यानी दुर्घटना हुई है. पत्थरबाज़ी की छोटी-मोटी घटनाएं ज़रुर हुई हैं. लेकिन ये सभी घटनाएं कुछ सीमित इलाकों में हुई हैं. लेकिन, कश्मीर के नाम पर एजेंडा चलाने वाला पश्चिमी मीडिया और हमारे अपने ही देश के मीडिया का एक वर्ग वहां की सच्ची तस्वीरें देश और दुनिया तक नहीं पहुंचा रहा.

अनुच्छेद 370 के खत्म किए जाने के बाद केंद्र सरकार लगातार, घाटी के विकास की योजनाओं पर काम कर रही है. इसी सिलसिले में आज जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से आए करीब 100 लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की है. इस प्रतिनिधिमंडल में घाटी के क़रीब दो दर्जन सरपंच भी थे. इनमें जम्मू के सरपंच भी थे.

और आतंकवाद प्रभावित कश्मीर के अलग-अलग इलाकों के सरपंच भी थे. इन तस्वीरों को देखते वक्त आज आप भी अपने द़िमाग पर ज़ोर डालिए और सोचिए .... कि क्या आज से पहले आपने कभी ऐसी तस्वीरें देखी थी. जब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के नुमाइंदे, खुद देश के गृह मंत्री से मिलने पहुंचे हों .

इन 100 लोगों में से कई लोग ऐसे थे जिन्होंने कहा, कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने से पहले तक, कुछ लोगों ने अपनी शक्ति का ग़लत इस्तेमाल करके, राज्य के आम लोगों को सत्ता से दूर रखा . जनता के हितों से जुड़ी जो योजनाएं ज़मीन पर उतरनी चाहिए थीं, वो फाइलों में ही सिमट कर रह गई थीं. लेकिन, नए दौर के कश्मीर की सूरत अब बदल रही है.

और वहां के लोग अब खुद अपना और अपने राज्य का भविष्य संवारने के लिए प्रतिबद्ध हैं. जम्मू-कश्मीर के विषय पर भारत की हर मोर्चे पर जीत हो रही है. और पाकिस्तान की हार हो रही है. अब पाकिस्तान ने ये भी स्वीकार कर लिया है, कि कश्मीर पर उसका मानव अधिकार वाला कार्ड फेल हो चुका है.

कुलभूषण जाधव के केस में IcJ में पाकिस्तान का पक्ष रखने वाले वकील, Khawar Qureshi ने पाकिस्तान और वहां के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को वास्तविकता का आईना दिखाया है. और स्वीकार किया है कि कश्मीर भारत का आंतरिक मसला है. और कश्मीर में मानव अधिकार के उल्लंघन का केस बेहद कमज़ोर है. कुरैशी ने ये भी कहा, कि अगर पाकिस्तान IcJ में कश्मीर में कथित मानव अधिकार के उल्लंघन का मामला उठाता है, तो उसे साबित करना पाकिस्तान के लिए बेहद मुश्किल होगा. 

कुछ दिनों पहले इमरान ख़ान ने कश्मीर के मुद्दे को ना सिर्फ United Nations General Assembly में उठाने की बात कही थी.बल्कि ये भी कहा था, कि वो इस मामले को International Court Of Justice में लेकर जाएंगे. यहां हम इमरान ख़ान को यही सलाह देना चाहेंगे, कि वो अपनी ही देश के वकील Khawar Qureshi की बातों को ध्यान से सुनें. और उनका कहना मानकर, कश्मीर की ज़िद छोड़ दें. इमरान ख़ान को पहले बलोचिस्तान और अपने ही देश में अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचार और मानव अधिकार के हनन पर ध्यान देने की ज़रुरत है.

क्योंकि, अब पूरी दुनिया भारत के नेतृत्व में पाकिस्तान में हो रहे मानव अधिकार उल्लंघन के खिलाफ खड़ी हो रही है. कश्मीर के विषय पर पाकिस्तान पूरी तरह Confused है. और Confusion की स्थिति में इंसान से अक्सर ग़लतियां हो जाया करती हैं. एक ऐसी ही ग़लती इमरान ख़ान से पिछले महीने हुई थी. जब उन्होंने आवेश में आकर भारत के खिलाफ परमाणु युद्ध की धमकी दी थी.

हालांकि, अब इमरान ख़ान ने अपनी ग़लती में सुधार किया है. और कहा है, कि पाकिस्तान No First Use की Policy के तहत पहले हमला नहीं करेगा. प्रश्न ये है, कि क्या पाकिस्तान के परमाणु सिद्धांत में No First Use की नीति है भी या नहीं. आज हम आपको इसका भी जवाब देंगे. लेकिन पहले इमरान ख़ान की बातें सुनिए.