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Zee Jaankari: दुनिया के कई सारे देशों के लोग वाहनों के कम ध्वनि से हैं परेशान

भारत में वाहनों से होने वाला वायु प्रदूषण ही नहीं, बल्कि उनसे होने वाला ध्वनि प्रदूषण भी एक बड़ी समस्या बन चुका है. लेकिन दुनिया के कई देश ऐसे हैं जो वाहनों की कम होती आवाज़ और Horn का इस्तेमाल ना किए जाने से परेशान हैं. 

Zee Jaankari: दुनिया के कई सारे देशों के लोग वाहनों के कम ध्वनि से हैं परेशान

भारत में वाहनों से होने वाला वायु प्रदूषण ही नहीं, बल्कि उनसे होने वाला ध्वनि प्रदूषण भी एक बड़ी समस्या बन चुका है. लेकिन दुनिया के कई देश ऐसे हैं जो वाहनों की कम होती आवाज़ और Horn का इस्तेमाल ना किए जाने से परेशान हैं. ये दुनिया के वो देश हैं जहां Electric वाहनों का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ रहा है . Electric वाहन Battery पर आधारित होते हैं. इसलिए उनसे किसी तरह का शोर पैदा नहीं होता . Electric वाहनों को चलाने के लिए Combustion Engine की जगह मोटर का इस्तेमाल किया जाता है . ये मोटर इतनी शांत होती है कि सड़क पर पैदल चलने वाले लोगों को पता ही नहीं चलता कि पीछे से कोई वाहन आ रहा है.

इससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए अब Electric वाहन बनाने वाली कंपनी Tesla ने अपने ग्राहकों को एक नई सुविधा देने की घोषणा की है. Tesla के CEO... Elon Musk ने Twitter पर इस बात की जानकारी दी है कि अब Tesla के ग्राहक कारों में Customized Acoustic Sound System का इस्तेमाल कर पाएंगे .

यानी ग्राहक ये तय कर पाएंगे कि सड़क पर चलते हुए उनकी कार से किस तरह की आवाज़ निकलेगी . Elon Musk के मुताबिक फिलहाल बकरी के मिमयाने की आवाज़, घोड़ों के दौड़ने की आवाज़, हवा का शोर और नारियल तोड़े जाने जैसी आवाज़ों का इस्तेमाल ग्राहक कर पाएंगे . भविष्य में ग्राहक अपनी मर्ज़ी की Sound Clip को भी Install कर सकेंगे .

इन Sounds का इस्तेमाल Horn के तौर पर भी किया जा सकेगा . अमेरिका के कानूनों के मुताबिक...सभी Electric वाहनों के लिए ये ज़रूरी है कि 30 किलोमीटर प्रति घंटे से कम कि गति पर चलते हुए वो इतनी आवाज़ पैदा करे...कि पैदल चलने वाले लोग इसे सुन पाएं . यूरोप में भी इसी वर्ष जून में इससे जुड़ा एक नया कानून लागू किया गया था .

जिसके मुताबिक कंपनियों के लिए Electric वाहनों में Acoustic Vehicle Alert System लागाना अनिवार्य होगा . ये सिस्टम तब एक विशेष प्रकार की ध्वनि पैदा करेगा जब वाहन 19 किलोमीटर प्रति घंटे से कम रफ्तार पर चल रहा होगा . ये System कार को Reverse करते वक्त भी Activate हो जाएगा .

कुल मिलाकर दुनिया के कुछ देश वाहनों में शोर इसलिए पैदा कर रहे हैं ताकि लोगों की जान बचाई जा सके, जबकि हमारे देश में वाहनों का शोर एक तरह की हिंसा का रूप ले चुका है . लोग वाहनों में गैरकानूनी तरीके से Horns लगवा लेते हैं. मोटरसाइकिलों के Silencers को Modify कर देते हैं  और उन्हें ध्वनि प्रदूषण की हिंसा वाला हथियार बना देते हैं .

आज हमने वाहनों की शोर वाली संस्कृति का एक छोटा सा विश्लेषण किया है . जो आपको ये समझने में मदद करेगा कि दुनिया भर में वाहन कैसे शांत होते जा रहे हैं. दुनिया को शांति का संदेश देने वाले भारत की सड़कें बहुत अशांत हैं . और वजह है वाहनों का शोर और Horns का गैरज़रूरी इस्तेमाल..

लेकिन जिन देशों में इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन बढ़ रहा है वहां कारें शांत होती जा रही हैं...इतनी शांत कि किसी को उनके आने की आहट तक नहीं लगती . इसलिए अब इस जानलेवा शांति से बचने के लिए नए नए उपाय किए जा रहे हैं. घोड़ों के दौड़ने की ये आवाज़ और नारियल के टकराने से पैदा होने वाला Sound अब जल्द ही टेस्ला की कारों का नया फीचर बन सकता है.

इसके अलावा हवा की सर सराहट....रेस देने के साथ बढ़ता इंजन का शोर...और यहां तक कि बकरी के मिमियाने की आवाज़ का इस्तेमाल भी Tesla के ग्राहक कर पाएंगे . ये सब हो रहा है अमेरिका और यूरोप के उन नियमों की वजह से...जिनके मुताबिक इलेक्ट्रिक वाहनों को कम से कम इतना शोर पैदा करना ही होगा..

जिससे पैदल चल रहे लोग सावधान हो जाएं . इसके लिए अब संगीतकारों की भी मदद ली जा रही है. वाहनों में Electric Horns का इस्तेमाल वर्ष 1908 में शुरु हुआ था..जिसका मकसद था...पैदल चल रहे लोगों को सावधान करना...लेकिन धीरे धीरे ये धव्नि प्रदूषण वाली हिंसा के हथियार में बदल गया .

लेकिन अब इलेक्ट्रिक वाहन सड़कों पर शांति का युग भी लेकर आए हैं और संगीत की लहरें भीं. ये विडंबना है कि भारत ने ही दुनिया को शांति का संदेश दिया था . लेकिन आज भारत की सड़कें पूरी तरह अशांत हो चुकी है . जबकि दुनिया के देश और वहां की सड़कें शांति का मार्ग बनती जा रही हैं.