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Zee Jaankari: नेहरू पर गुरूर करें थरूर लेकिन पीएम मोदी की निंदा क्यों है जरूरी?

इमरान ख़ान के बाद अब हम कांग्रेस नेता शशि थरूर की अज्ञानता का DNA टेस्ट करेंगे.

Zee Jaankari: नेहरू पर गुरूर करें थरूर लेकिन पीएम मोदी की निंदा क्यों है जरूरी?

इमरान ख़ान के बाद अब हम कांग्रेस नेता शशि थरूर की अज्ञानता का DNA टेस्ट करेंगे. रविवार को अमेरिका के Houstan में आयोजित Howdy Modi कार्यक्रम को आप कूटनीति की दुनिया के सबसे सफल आयोजनों में से एक कह सकते हैं. इसकी सफलता का आधार भारत और अमेरिका की दोस्ती है .जिसका चर्चा आज पूरी दुनिया में हो रही है. लेकिन ऐसा लगता है कि कांग्रेस इस सफलता का सच स्वीकार करने को तैयार नहीं है .इसलिए कुछ कांग्रेसी नेता इसे Flop Show कह रहे हैं तो कुछ नेता..पुरानी और Fake तस्वीरें दिखाकर. नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पर प्रश्नचिह्न लगाने की कोशिश कर रहे हैं.

कांग्रेस के नेता शशि थरूर ने कल भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उनकी बेटी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की एक तस्वीर Tweet की .इस तस्वीर को लेकर शशि थरूर ने दावा किया कि ये नेहरू के 1954 के अमेरिकी दौरे की तस्वीर है. इस तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा कि- देखिए कैसे नेहरू और इंदिरा का स्वागत करने के लिए अमेरिका की जनता सड़कों पर उतर आई .शशि थरूर ने आगे लिखा कि ये सब किसी PR मैनेजमेंट, NRI Crowd Manegment और Media Hype के बगैर हुआ था. शशि थरूर ने इस Tweet में सिर्फ गलत तथ्य ही पेश नहीं किए बल्कि उन्होंने इंदिरा की Spelling भी गलत लिख थी .

उन्होंने Indira की जगह India लिख दिया .वैसे आपको बता दें कि वर्ष 1974 में कांग्रेस के नेता देव कांत बरुआ ने Indira is India,India is Indira जैसा विवादित नारा दिया था .ये इस बात का पहला प्रमाण था कि कांग्रेस के नेताओं को एक परिवार और एक व्यक्ति के आगे कुछ दिखाई नहीं देता .हो सकता है थरूर से Spelling Mistake हो गई हो..लेकिन उनके इस Tweet को 5 हज़ार से ज्यादा लोगों ने Retweet किया .लेकिन जब हमने इस तस्वीर पर गहन रिसर्च किया और इसका विश्लेषण किया तो कांग्रेस का झूठ सामने आ गया. शशि थरूर ने अंग्रेज़ी के भारी भरकम शब्दों और इतिहास के प्रकांड पंडित वाली छवि का इस्तेमाल करके ये तस्वीर Tweet की थी .

लेकिन हमारे DNA टेस्ट में ये पता चला है कि ये तस्वीर आधी हकीकत और आधा फसाना है. हमने Reverse Image तकनीक की मदद से इसकी पड़ताल की .इस तकनीक की मदद से आप Internet पर किसी तस्वीर के मूल स्त्रोत यानी Original Source तक पहुंच सकते हैं. हमारी पड़ताल में सामने आया कि ये तस्वीर वर्ष 1954 की नहीं बल्कि 1955 की है .

और ये अमेरिका में नहीं बल्कि उस वक्त के सोवियत संघ में ली गई थी. हालांकि Social Media पर कुछ लोगों ने ये भी दावा किया कि ये तस्वीर वर्ष 1956 की है और इसे Russia की राजधानी Moscow में Click किया गया था .लेकिन हमारी जांच में सामने आया कि ये तस्वीर जून 1955 में तब ली गई थी जब पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी एक Open Car में सवार होकर रूस के (Chelyabinsk) चेल्याबिन्स्क शहर से गुज़र रहे थे.

इसके अलावा हमने Russia की कुछ News Websites पर भी इस तस्वीर को ढूंढा. हमे इसी RoadShow के दौरान दूसरे Angle से ली गई एक और तस्वीर Fotosoyuz नाम की वेबसाइट पर भी मिली .ये Chelyabinsk (चेल्याबिन्स्क) इलाके की Union of Russian Photographers की Website है .इससे भी इस तथ्य की पुष्टि हो गई कि ये तस्वीर अमेरिका की नहीं बल्कि Russia की है. आज जब हम कांग्रेस के झूठ का DNA टेस्ट कर रहे थे तब हमें सोवियत संघ की यात्रा पर रवाना होते पंडित नेहरू और उनकी बेटी इंदिरा गांधी की तस्वीरें भी मिलीं.

इसके अलावा हमने आज उनकी Georgia यात्रा की तस्वीरें भी देखीं, जिनमें जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी Open Car में सवार होकर एक सड़क से गुज़र रहे हैं और उनके स्वागत के लिए सड़क के दोनों तरफ भारी संख्या में लोग भी मौजूद हैं .उस वक्त के ज्यादातर Videos..Black And White हुआ करते थे..इसलिए उनमें भेद करना थोड़ा मुश्किल काम है.लेकिन शशि थरूर एक नेता होने के साथ साथ इतिहासकार और लेखक भी हैं.इसलिए उनसे उम्मीद की जाती है वो कोई भी तस्वीर या Video शेयर करने से पहले...उसकी पृष्ठभूमि की जांच ज़रूर कर लेंगे.

हालांकि झूठ का खुलासा होने पर शशि थरूर ने ये कहते हुए अपने Tweet में सुधार किया कि ये तस्वीर उन्हें किसी ने Forward की थी, और शायद से सोवियत संघ में ली गई तस्वीर है .लेकिन उन्होंने इस भूल सुधार वाले Tweet में ये भी कह दिया कि इससे बात का मतलब नहीं बदल जाता है बल्कि ये तस्वीर साबित करती है कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री भी विदेशों में बहुत लोकप्रिय थे.

हैरानी की बात ये है कि शशि थरूर ने सफाई देने के बाद भी...पुराना Tweet Delete नहीं किया .यानी शशि थरूर ने पहले एक झूठ बोला...फिर इस झूठ को हज़ारों लोगों तक पहुंचने दिया और सच सामने आने के बाद भी झूठ के इस प्रसार पर रोक नहीं लगाई. अंग्रेज़ी की एक मशहूर कहावत है 'A Lie Can Travel Half Way Around The World While The Truth Is Putting On Its Shoes' .यानी सच के मुकाबले झूठ की चाल बहुत तेज़ होती है और जितनी देर में सच अपने जूते के फीते बांधता है, उतनी देर में झूठ आधी दुनिया का सफर तय कर लेता है. आज कांग्रेस का एक ऐसा ही झूठ अमेरिका से शुरू हुआ और Russia पर आकर खत्म हुआ.

Howdy Modi कार्यक्रम की सफलता के बाद..कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने भी इसे मोदी द्वारा ट्रंप के लिए किया गया चुनाव प्रचार बताया था .यानी कांग्रेस को देश के सम्मान में भी राजनीति ढूंढने की आदत है. जब भी कभी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सम्मान होता है तो कांग्रेस इसमें कमियां ढूंढने लगती है .राजनीति करने के लिए देश की प्रतिष्ठा को भी कांग्रेस के नेता चोट पहुंचाने लगते हैं और हर आयोजन, हर कूटनीति की तुलना पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी की कूटनीति से से की जाने लगती है.

शशि थरूर ने वर्ष 2017 में उनके खिलाफ मीडिया में चल रही खबरों की आलोचना अंग्रेज़ी के भारी भरकम शब्दों में की थी इसके लिए उन्होंने Exasperating farrago of distortions जैसे वाक्य का इस्तेमाल किया था .जिसका सरल हिंदी में अर्थ होता है गलत तथ्यों का ऐसा मिश्रण जो किसी को भी चिड़चिड़ा बना देता है .यानी आप इसे झूठे तथ्यों का खतरनाक मेल भी कह सकते हैं. लेकिन अब थरूर अपनी ही बातों को भूलकर खुद झूठे तथ्यों का मिश्रण पेश कर रहे हैं .शशि थरूर को Twitter पर 70 लाख से ज्यादा लोग Follow करते हैं .

शशि थरूर को बुद्धीजीवी माना जाता है.वो अंग्रेज़ी में बात करते हैं, उन्होंने भारत के इतिहास, राजनीति और धर्म को लेकर कई किताबें लिखी हैं .उनकी किताबें लाखों लोग पढ़ते हैं, यानी उन पर लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने की जिम्मेदारी है. लेकिन लाखों लोगों को एक झूठे Tweet के जाल में फंसाकर थरूर ने साफ कर दिया कि..

सिर्फ अंग्रेज़ी के भारी भरकम शब्दों का इस्तेमाल करना और ज्ञान की बातें करना प्रामाणिकता की निशानी नहीं है. वर्ष 2006 में शशि थरूर ने संयुक्त राष्ट्र का महासचिव बनने के लिए चुनाव भी लड़ा था .यानी वो दुनिया के सबसे बड़े अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहते थे .हालांकि थरूर वो चुनाव हार गए थे .

लेकिन ज़रा सोचिए अगर अपने अधूरे ज्ञान के साथ वो संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बन गए होते..तो क्या होता.पाकिस्तान के नेता भी ईर्ष्या की वजह से मोदी के कार्यक्रम को Flop बता रहे हैं, टुकड़े टुकड़े गैंग को भी इसमें भारत की कूटनीतिक सफलता नज़र नहीं आ रही है...और कांग्रेस भी पाकिस्तान और टुकड़े-टुकड़े गैंग की भाषा बोल रही है. और ये झूठ फैलाने के लिए अंग्रेज़ी का सहारा लिया जा रहा है .हमारे देश में अंग्रेज़ी को बहुत प्राथमिकता दी जाती है .अंग्रेज़ी में कहे गए झूठ भी लोगों को सच लगने लगते हैं .अंग्रेज़ी में देश के खिलाफ कई गई बातें भी साहित्य जैसी लगने लगती हैं .

यानी अंग्रेज़ी में लोगों को बहुत आसानी से झूठ भी बेच दिया जाता है. कांग्रेस के नेता, अंग्रेज़ी बोलने वाले Celebrities, और डिजाइनर पत्रकार...टुकड़े टुकड़े गैंग के Friend, Philosopher और Guide बन गए हैं .ये लोग देश की छवि को धुमिल करने का कोई मौका नहीं छोड़ते .झूठ का प्रोपेगेंडा करते हैं.अधूरे ज्ञान के सहारे आम लोगों को बरगलाते हैं .

और अपनी कोशिश में असफल हो जाने पर बड़ी बेशर्मी से सफाई पेश कर देते हैं .लेकिन झूठ का व्यापार बंद नहीं करते .उसे निरंतर जारी रखते हैं. इसलिए अगली बार अंग्रेज़ी का चोला ओढ़े..जब कोई झूठ आपके दरवाज़े पर दस्तक दें...तो सावधान हो जाए, झूठ बोलने वालों से प्रमाण देने के लिए कहें और झूठ बोलने वाले बेशक कितनी भी भारी भरकम अंग्रेज़ी का इस्तेमाल करें...

आप सच जानने पर अडिग रहें .सच की कोई भाषा नहीं होती उसे किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती लेकिन सच की परख करना एक कला है और जब तक आप इस कला में माहिर नहीं हो जाते हम झूठ बोलने वालों की पोल खोलते रहेंगे.