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Zee Jaankari: 'स्मार्ट सिटी' तो बस सपना है, 'सुशासन' का सच तो पटना है?

बिहार के कई इलाकों में पिछले 5 दिनों से भारी बारिश हो रही है. और इस बरसात से पटना भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है . 

Zee Jaankari: 'स्मार्ट सिटी' तो बस सपना है, 'सुशासन' का सच तो पटना है?

DNA की शुरुआत मैं... आज से 2300 वर्ष पहले की एक घटना के साथ करना चाहता हूं. करीब 2300 वर्ष पहले ग्रीस के महान इतिहासकार और राजनयिक Megasthenes (मेगस्थनीज) भारत के एक शहर आए थे. ये शहर तब मौर्य साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था . शहर के विकास और व्यवस्था को देखकर Megasthenes (मेगस्थनीज) अभिभूत हो गए थे. तब उन्होंने इस शहर को दुनिया के सबसे शानदार और व्यवस्थित शहरों में से एक माना था.
उस शहर का नाम था पाटलिपुत्र, जिसे आज हम सब पटना के नाम से जानते हैं. पाटलिपुत्र मौर्य साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था और 2 हज़ार वर्ष पहले दुनिया इस शहर को एक स्मार्ट सिटी के तौर पर देखा करती थी.

जबकि आज का पटना..बिहार की राजधानी है, जिसे आधुनिक पैमानों पर Smart City बनाने की कोशिशे चल रही हैं . लेकिन सच ये है कि हमारे Smart शहर..थोड़ी सी बारिश भी नहीं झेल पाते और Smart City के सपने देखते ही देखते पानी में डूब जाते हैं. बिहार के कई इलाकों में पिछले 5 दिनों से भारी बारिश हो रही है. और इस बरसात से पटना भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है .

हालात ये हो गए कि राज्य के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी...बाढ़ की वजह से अपने घर में फंस गए. आज तीन दिनों के बाद उन्हे एक नाव की मदद से बाहर निकाला गया. पटना में अस्पताल, सरकारी दफ्तर, बस अड्डे स्कूल और घर.. तालाब में बदल गए. बड़े बड़े मंत्रियों और सरकारी अधिकारियो के घरों में भी पानी घुस गया. बिजली और पानी की सप्लाई बंद हो गई और लोग अपने घरों में कैद हो गए. इसके अलावा स्कूल और कॉलेजों को भी बंद करना पड़ा है. हालांकि फिलहाल पटना में बारिश नहीं हो रही है और हालात धीरे धीरे सामान्य हो रहे हैं. जल्द ही लोग बाढ़ की इस त्रासदी को भुला देंगे .

सड़कों पर पहले जैसी चहल पहल लौट आएगी . और फिर ऐसा लगने लगेगा.. जैसे कुछ हुआ ही ना हो. इसलिए आज हम सिर्फ पटना की बाढ़ का नहीं, बल्कि उस सोच का विश्लेषण कर रहे हैं जिसके तहत हमारे शहरों को Smart City बनाने का सपना तो दिखाया जाता है. लेकिन असल में ये सिर्फ जनता को लुभाने का एक Smart Idea है ताकि आप नेताओं को वोट देते रहें और नेता आराम से सत्ता सुख भोगते रहें.

पटना को वर्ष 2017 में Smart Cities की लिस्ट में शामिल किया गया था . इस लिस्ट में भारत के कुल 100 शहर शामिल हैं. जिन्हें 98 हज़ार करोड़ रुपये खर्च करके Smart Cities में बदल जाएगा. मेरे हाथ में इस वक्त पटना को Smart City बनाए जाने का Plan है. हमने आज इस Plan को बहुत ध्यान से पढ़ा और इसे आधार बनाकर रिसर्च किया .

इस Plan में पटना की सूरत बदलने के लिए बड़े बड़े वादे किए गए हैं . इसमें Sewerage Network को बेहतर बनाने की योजना का जिक्र है . जिसमें कहा गया है कि नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत इस योजना पर करीब 52 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं. और इस योजना को दिसंबर 2020 तक पूरा कर लिया जाएगा .

इसी Plan के मुताबिक Smart Cities मिशन के तहत...किसी भी शहर को 4 विषयों पर काम करना है. इसे S.W.O.T कहा जाता है. S का मतलब है STRENGTHS यानी ताकत..W का अर्थ है WEAKNESSES यानी कमज़ोरियां. O मतलब OPPORTUNITIES यानी मौके और T मतलब THREATS यानी खतरे. पटना के Smart City Plan में जिन खतरों का जिक्र किया गया है उनमें बाढ़ भी शामिल है. लेकिन दुनिया के वही शहर असल में विकसित और Smart हो पाते हैं जो इन खतरों से लड़ने की इच्छा शक्ति दिखाते है. लेकिन इस इच्छाशक्ति के पैमानों पर भारत के ज्यादातर शहर Fail हो जाते हैं .

पटना बिहार की राजधानी है और उसे Smart Cities मिशन के तहत 100 शहरों की लिस्ट में शामिल किया गया है . लेकिन बाढ़ और बारिश की वजह से एक राज्य की राजधानी में स्थिति ये हो गई कि सरकार को Helicopters की मदद से खाने-पीने की चीज़ों के Packets गिराने पड़े . पटना में बाढ़ जैसे हालात लगभग हर साल हो जाते हैं.

लेकिन कोई इसमें सुधार की कोशिश नहीं करता. पटना के Drainage सिस्टम का ज्यादातर हिस्सा वर्ष 1968 में तैयार किया गया था . और इस Drainage सिस्टम की क्षमता इतनी ज्यादा बारिश झेलने की नहीं है . वर्ष 2006 में तैयार किए गए Patna City Development Plan के मुताबिक Drainage की ये सुविधा भी कुछ ही इलाकों में है .

और इन इलाकों का Drainage सिस्टम भी... अक्सर कूड़ा करकट जमा हो जाने की वजह से जाम हो जाता है. हाल ही में बिहार सरकार द्वारा किए गए एक सर्वे के मुताबिक पटना की 13 प्रतिशत सड़कें ऐसी हैं...जहां पानी निकासी की कोई सुविधा नहीं है . Town Planners के मुताबिक पटना का Drainage सिस्टम सिर्फ...

शहर में प्रतिदिन जमा होने वाले पानी की निकासी के लिए बना है. और इसके पास इतनी क्षमता नहीं है कि ये बाढ़ और बारिश के पानी को बाहर निकाल सके . Patna Municipal Corporation के मुताबिक शहर में अगर 100 मिली मीटर बारिश हो तो इस पानी को 24 से 48 घंटों में निकाला जा सकता है .

लेकिन पिछले तीन दिनों में पटना में 340 मिली मीटर बारिश हो चुकी है. और यही वजह है आज दिन भर बारिश ना होने के बावजूद पटना की ज्यादातर सड़कें पानी में डूबी हुईं हैं .