Zee Jaankari: करवा चौथ का सामाजिक और सांस्कृतिक विश्लेषण

आज करवा चौथ का त्योहार मनाया जा रहा है, जो पति और पत्नी के पवित्र रिश्ते को समर्पित है. हिन्दू धर्म में मान्यता है कि व्यक्ति को अपने जीवन में 16 संस्कारों का पालन करना होता है. विवाह को जीवन का 13 वां संस्कार माना गया है. माना जाता है कि पति और पत्नी का रिश्ता सात जन्मों का होता है. 

 Zee Jaankari: करवा चौथ का सामाजिक और सांस्कृतिक विश्लेषण

और अब हम करवा चौथ का सामाजिक और सांस्कृतिक विश्लेषण करेंगे. आज करवा चौथ का त्योहार मनाया जा रहा है, जो पति और पत्नी के पवित्र रिश्ते को समर्पित है. हिन्दू धर्म में मान्यता है कि व्यक्ति को अपने जीवन में 16 संस्कारों का पालन करना होता है. विवाह को जीवन का 13 वां संस्कार माना गया है. माना जाता है कि पति और पत्नी का रिश्ता सात जन्मों का होता है. विवाह के समय पति अपनी पत्नी को सात वचन देता है. आज मौका है कि आप इन सात वचनों को ठीक से समझें.
पति पहला वचन देता है कि वो पत्नी को अपनी हर यात्रा और धर्मिक कार्य में साथ रखेगा.
दूसरा वचन होता है कि पति अपने मां-बाप की तरह अपने सास-ससुर का भी सम्मान करेगा .
पति तीसरा वचन देता है कि वो जीवनभर पत्नी की देखभाल करेगा .
पति चौथा वचन देता है कि वो परिवार की सभी जरुरतों का ध्यान रखेगा .
पांचवा वचन ये है कि पति  हर आर्थिक फैसले की जानकारी पत्नी को देगा .
छठा वचन ये है कि वो किसी भी हाल में, किसी के सामने पत्नी का अपमान नहीं करेगा .
सातवें वचन में पति कहता है कि वो रिश्तों को लेकर हमेशा ईमानदार रहेगा .

इन सात वचन का पालन कर पति और पत्नी अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं. करवा चौथ का त्योहार पति पत्नी के बीच के रिश्तों को मजबूती देने वाला पर्व है. मान्यता है कि द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने द्रोपदी को करवा चौथ के व्रत के बारे में जानकारी दी थी. परंपरा के मुताबिक रात को चंद्रमा को देखकर, पति के हाथ से पानी पीकर, पत्नी व्रत तोड़ती हैं.

करवा चौथ का व्रत निर्जला होता है .निर्जला का मतलब होता है कि व्रत के दौरान महिलाएं पानी भी नहीं पीतीं. वैसे ये कलयुग है. आज की परिस्थियां सतयुग या द्वापर युग जैसी नहीं हैं. जून में संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट Progress Of The World’s Women 2019–2020 आई थी . इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में तलाक का प्रतिशत दुनिया में सबसे कम है. लेकिन बीते दो दशकों यानि 20 वर्षों में भारत में तलाक के मामले दोगुने हो गए हैं. हमने देखा है कि फिल्मों का भी समाज और त्योहार पर गहरा असर होता है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण करवा चौथ है,

जिसे मूल रुप से उत्तर भारत का माना जाता है. माना जाता है कि पहले पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान में ही. पारंपरिक रुप से करवा चौथ का त्योहार मनाया जाता था, लेकिन अब इस त्योहार का विस्तार हो गया है. 90 के दशक की फिल्मों में करवा चौथ को प्रमुखता से जगह मिली . उस वक्त बड़े बैनरों की फिल्मों में करवा चौथ के त्योहार को दिखाया गया.

इन फिल्मों में बड़े अभिनेता और अभिनेत्री थे. फिल्में हिट भी रहीं . और धीरे धीरे करवा चौथ को देश के हर कोने में पहचान मिली. नतीजा ये रहा कि ऐसे क्षेत्रों में भी करवा चौथ मनाया जाने लगा, जहां की संस्कृति या परंपरा में ये शामिल नहीं था. फिल्में समाज में अद्भूत बदलाव लाती हैं .1975 में रिलीज हुई फिल्म जय संतोषी मां का इसका बड़ा उदाहऱण है.

इस फिल्म की वजह से देश में संतोषी माता के व्रत रखने वालों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गई थी. हो सकता है कि आपने भी वो दौर देखा हो. जब संतोषी माता के नाम शुक्रवार को व्रत रखा जाता था. अगर नहीं देखा है तो आप इसकी जानकारी ले सकते हैं. आपको पता चल जाएगा कि फिल्मों से समाज में कैसे क्रांतिकारी बदलाव आ जाते हैं. करवा चौथ के मामले में भी यही हुआ.

फिल्मों में करवा चौथ के त्योहार को भव्यता के साथ दिखाया गया. जिससे करवा चौथ के प्रति हर समुदाय और क्षेत्र की महिलाओं का रुझान बढ़ा . फिल्मों से प्रेरित होकर...और एक दूसरे को देखकर ऐसी महिलाओं ने भी करवा चौथ का त्योहार मनाना शुरु किया....जो करवा चौथ का त्योहार कभी नहीं मनाती थीं .

परिणाम ये है कि आज हम करवा चौथ के त्योहार को अखिल भारतीय स्तर का पर्व कह सकते हैं .करवा चौथ का एक आर्थिक पक्ष भी है. करवा चौथ की वजह से सौंदर्य प्रसाधन, गहनों और कपड़ों की ब्रिकी बढ़ जाती है. सरल शब्दों में कहे तो एक पारंपरिक त्योहार बाजारवाद की भेंट चढ़ गया. कंपनियों के लिए अब हर त्योहार अपनी ब्रिकी बढ़ाने का एक माध्यम बन गए हैं.

त्योहारों का व्यवसायिक इस्तेमाल हो रहा है. फिल्मों के माध्यम से आपको नए फैशन की जानकारी मिलती है. लोग Hero Heroin की तरह दिखना चाहते हैं. फिल्मों में जैसे त्योहार मनाए जाते हैं . वैसा ही वास्तिवक जीवन में त्योहार मनाने की कोशिश की जाती है. यानि फिल्म और सीरियल समाज को त्योहारों को नए तरीके मनाने के लिए मानसिक रुप से तैयार करते हैं. जिसका फायदा बाजार को मिलता है. कह सकते हैं कि फिल्मों और बाजार ने त्योहारों को  Marketing Event में बदल दिया है. बाजार ने त्योहारों को  Marketing Event में बदल दिया है. आज करवा चौथ का त्योहार मनाया जा रहा है.

आज का दिन पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को याद करने का दिन है. सुषमा स्वराज करवा चौथ का त्योहार बहुत हर्ष और उल्लास के मनाती थीं .आज के दिन सुषमा स्वराज पारंपरिक पहनावे में नजर आती थीं. आप कह सकते हैं कि सुषमा स्वराज करवा चौथ का प्रतिनिधि चेहरा थीं. इस वक्त आप उनकी पुरानी तस्वीरों को देख रहे हैं. जिन्हें हमने आपके लिए अपनी लाइब्रेरी से निकाला है. इन तस्वीरों को देखकर आपकी यादें भी ताजा हो गई होंगी. 27 अक्टूबर को दीवाली है. दीवाली के अवसर पर महिलाएं विशेष रुप से महिलाएं श्रृंगार करती हैं. कई तरह के Cosmetic Product का इस्तेमाल करती हैं.

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि त्वचा में निखार लाने के लिए आपने जो Cream खरीदी है, उसके साथ आपको खतरनाक बीमारियां मुफ्त मिल रही हैं. आप Fairness Cream या Lipstick खरीदते वक्त सेहत की चिंता शायद ही करते हों. लेकिन AIIMS में हुई एक स्टडी में पता चला है कि Cosmetics और Beauty Treatment आपको गोरा बनाने की जगह काला बना रहे हैं.

Lipstick हो या गोरेपन की क्रीम, Hair Dye हो या Herbal Shampoo, सबमें बीमारियां छिपी हुई हैं. AIIMS की ओपीडी में आने वाले 106 मरीजों पर एक स्टडी की गई. स्टडी के नतीजों ने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया. 106 में से 74 मरीज के चेहरे का रंग पहले से गहरा हो गया था. इनमें से कई लोग Fairness Cream, Skin Lightening Cream या Hair Dye लगा रहे थे. 50 प्रतिशत से ज्यादा मरीज ऐसे निकले जो किसी ना किसी Cosmetic Product की वजह से त्वचा की बीमारियों के शिकार हुए थे.

AIIMS के त्वचा रोग विभाग के Experts ने ये भी खुलासा किया है कि सबसे ज्यादा खतरा हर्बल यानी आयुर्वेद के नाम पर बिक रहे Products के साथ है. भारत में खूबसूरती बढ़ाने वाले Products का बाजार बहुत बड़ा है. एक अनुमान के मुताबिक भारत में Beauty और Personal Care Products का बाज़ार 90 हज़ार करोड़ रुपए का है.

और ये हर साल 16 से 18 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है. Euro-monitor International की स्टडी के मुताबिक Cosmetics और Personal Care की सेल में भारत 8वें नंबर पर आता है. 1975 में पहली बार भारत में गोरेपन की क्रीम आई थी...और अब सिर्फ Fairness Cream का कारोबार ही 4 हज़ार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.

ये बाज़ार इतना बड़ा इसीलिए है क्योंकि अंग्रेजों से आजादी पा चुका भारत अभी भी गोरेपन वाली सोच से आजादी नहीं पा सका है. एक Matrimonial साइट ने 2013 से 2016 के बीच 300 पुरुष और महिलाओं का सर्वे किया. इनमें से 71 प्रतिशत लोग अपने लिए गोरे जीवनसाथी की तलाश में थे. इस दूषित सामाजिक सोच का नतीजा है कि लोग गोरे होने के चक्कर में बीमार पड़कर अस्पताल पहुंच रहे हैं.

भारत में Cosmetics Products Drugs and Cosmetics Act 1940 और Bureau of Indian standards यानी BIS के दिशा-निर्देशों के दायरे में आते हैं. BIS के नियमों के मुताबिक Cosmetics Products बनाते वक्त लेबल पर वर्ष और महीना लिखना जरूरी है. बाहर और अंदर दोनो labels पर Ingredient का ज़िक्र भी जरुरी है...

यानी बताया जाना चाहिए आप जिस Product का इस्तेमाल कर रहे हैं, वो किन चीज़ों से बना है . इसके अलावा Products को इस्तेमाल करने का सही तरीका और उसमें किसी भी हानिकारक केमिकल के होने की सूचना भी label पर लिखी जानी चाहिए. लेकिन आप इस वक्त अपने आस-पास मौजूद किसी भी सौंदर्य प्रसाधन को उठाकर ध्यान से पढ़ लीजिए.

आपको खतरनाक केमिकल्स से होने वाले नुकसान की कोई जानकारी या चेतावनी नहीं मिलेगी . AIIMS के डॉक्टरों का दावा है कि जो केमिकल्स उन्हें जांच में मिले, उनके नाम Product पर नहीं लिखे गए थे. यानी बहुत मुमकिन है कि आपकी क्रीम, काजल या लिपस्टिक में lead या Mercury जैसे खतरनाक केमिकल मिले हों, लेकिन लेबल पर इसका जिक्र तक न हो .

सच तो ये है कि मिलावट भरे मसालों से लेकर मिलावटी दूध, मिठाई और Cosmetics तक... हमने आज तक ये ईमानदारी किसी में नहीं देखी... जो ये बताए कि ये सामान मिलावटी है. और आपकी सेहत के लिए खतरनाक है . इसीलिए याद रखिए आपकी सुरक्षा आपके हवाले कर  देने वाले सिस्टम में सावधान आपको ही रहना है.