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Zee Jaankari: सोशल मीडिया का दबाव अब लोगों की जान ले रहा है

अब हम सोशल मीडिया पर होने वाली Mob lynching का एक बहुत ज़रूरी विश्लेषण करेंगे. ये विश्लेषण इसलिए ज़रूरी है. क्योंकि भारत में करीब 32 करोड़ लोग.

Zee Jaankari: सोशल मीडिया का दबाव अब लोगों की जान ले रहा है

अब हम सोशल मीडिया पर होने वाली Mob lynching का एक बहुत ज़रूरी विश्लेषण करेंगे. ये विश्लेषण इसलिए ज़रूरी है..क्योंकि भारत में करीब 32 करोड़ लोग...सक्रिय रूप से सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं. इनमें युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है. सोशल मीडिया पर होने वाली Mob lynching में भीड़.. प्रत्यक्ष रूप से एक जगह जमा नहीं होती इसमें हथियारों का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता, लोग अपने हाथों से किसी की जान नहीं लेते . लेकिन Trolling और Comments के ज़रिए कुछ लोगों को इतना परेशान किया जा सकता है, कि वो आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाते हैं. दक्षिण कोरिया में एक ऐसा ही मामला सामने आया है .

जहां मशहूर Korean Pop star... Sulli (सुलि) ने सोशल मीडिया पर नकारात्मक Comments और Trolling से परेशान होकर आत्महत्या कर ली है . इस Pop Star की उम्र सिर्फ 25 वर्ष थी. हालांकि पुलिस इस Pop Star की मौत की जांच कर रही है. लेकिन माना जा रहा है कि Sulli मानसिक रूप से परेशान थी . Social Media पर कई लोग उन्हें लगातार निशाना बना रहे थे .

जिससे वो Anxiety और Panic Attacks का शिकार हो गईं. और शायद इसी वजह से उन्होंने अपनी जान दे दी. आज हम आपको इसी घटना को आधार बनाकर ये समझाने की कोशिश करेंगे कि सोशल मीडिया मानसिक हिंसा करने वाली ये भीड़ कितनी खतरनाक है . Sulli ने अपने करियर की शुरुआत 2009 में की थी..लेकिन 2014 आते-आते वो सोशल मीडिया पर होने वाली Trolling से इतना परेशान हो गईं..

कि उन्होंने अपना करियर छोड़ दिया .वर्ष 2017 में कोरिया के एक और मशहूर Pop Star...Jong-hyun (जोंग ह्यून )ने भी ऐसी ही परिस्तिथियों में आत्महत्या कर ली थी . विडंबना ये है कि Jong-hyun और Sulli बहुत अच्छे दोस्त थे . यानी सोशल मीडिया आपको जितनी जल्दी शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचा सकता है. उतनी ही जल्दी आपको Depression यानी अवसाद और Anxiety यानी घबराहट का शिकार भी बना सकता है.

और जब अवसाद और घबराहट हद से ज्यादा बढ़ जाते हैं तो कुछ लोग आत्महत्या तक कर लेते हैं. वर्ष 2018 में Comparitech.com नामक वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में भारत के बच्चे सबसे ज्यादा Cyberbullying का शिकार होते हैं. दूसरे नंबर पर ब्राज़ील और तीसरे नंबर पर अमेरिका है . CyberBullying उसे कहा जाता है जब कोई Internet की मदद से आपको परेशान करता है, या धमकाता है.

वर्ष 2018 में अमेरिका में की गई एक Study के मुताबिक 59 प्रतिशत Teenagers यानी ऐसे युवा जिनकी उम्र 13 से 19 वर्ष के बीच हैं...कभी ना कभी Cyberbullying का शिकार ज़रूर हुए हैं . इनमें 42 प्रतिशत मामले रंग, जाति और शरीर के आकार को लेकर की गई टिप्पणियों से जुड़े थे . जबकि 32 प्रतिशत मामलों में पीड़ित के खिलाफ अफवाहें उड़ाई गई थीं.

और 25 प्रतिशत मामले ऐसे थे..जिनमें पीड़ित को अश्लील तस्वीरें और मैसेज भेजे गए . Social Media पर होने वाली इस Mob Lynching के शिकार सिर्फ युवा ही नहीं..बल्कि हर उम्र के लोग होते हैं . Online गुंडागर्दी करने वालों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप एक छात्र हैं, गृहणी हैं, नौकरीपेशा हैं, सेलिब्रिटी हैं , नेता हैं या फिर कोई पत्रकार.

सोशल मीडिया पर कोई भी आपको शिकार बना सकता है, प्रताड़ित कर सकता है, या बदनाम कर सकता है. सोशल मीडिया पर आपसे जुड़ी किसी भी जानकारी का इस्तेमाल आपके खिलाफ किया जा सकता है और आपको इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है. पिछले हफ्ते जापान की पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया जो जापान की एक महिला Pop Star का पीछा कर रहा था और उसे परेशान कर रहा था.

इस आरोपी व्यक्ति ने भी Pop Star तक पहुंचने के लिए Internet की मदद ली थी . इसके लिए इसने जो तरीका अपनाया वो जानकर आप हैरान रह जाएंगे . आरोपी ने महिला Pop Star की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर सर्च किया . इनमें एक तस्वीर ऐसी थी जिसमें Pop Star की आंखों में एक मेट्रो स्टेशन का Reflection यानी प्रतिबिंब दिखाई दे रहा था.

इसके बाद इस व्यक्ति ने इसे Zoom करके Google Street View नामक App की मदद से उस मेट्रो स्टेशन को ढूंढा निकाला . इसके बाद उसने वहां से रोज़ मेट्रो पकड़कर घर जाने वाली इस Pop Star का पीछा किया. और एक दिन उसके घर पहुंचकर उस पर हमला कर दिया. सोशल मीडिया पर सिर्फ Bullying और Trolling ही नहीं की जा रही.

.बल्कि आपकी एक Post पर आने वाले Likes और Comments आपको मानसिक रूप से बीमार भी बना सकते हैं. ये बीमारी किसी को आत्महत्या के लिए भी मजबूर कर सकती है. सोशल मीडिया पर किसी दूसरे की Post देखने पर अक्सर ऐसा ही लगता है जैसे उसके जीवन में सिर्फ आनंद ही आनंद है....वो व्यक्ति अपने जीवन को पूरी तरह से जी रहा है . लगातार घूम फिर रहा है.,

अच्छा खाना खा रहा है....Parties कर रहा है . और जीवन में उसे किसी चीज़ की कमी नहीं है . सोशल मीडिया Filters वाली दुनिया है..और वहां ये Filters जिंदगी के उन रंगों को भी छिपा लेते हैं जो सच्चाई से परे होते हैं . यानी सोशल मीडिया ऐसी जगह है...जहां आप जो हैं..वो दुनिया को नहीं दिखाते हैं और जो आप नहीं उसका प्रचार प्रसार करते हैं.

Facebook और Instargram जैसे Platforms पर मिलने वाले Likes अब लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहे हैं. क्योंकि लोग इनकी संख्या को अपनी लोकप्रियता का पैमाना मान लेते हैं .यही वजह है कि अब Facebook और Instagram कुछ Users के लिए Likes की संख्या छिपाकर रखने की तकनीक का ट्रायल कर रहे हैं.

Instagram जल्द ही एक ऐसा Feature लाने वाला है, जिसकी मदद से आप किसी व्यक्ति विशेष के Comments को छिपा सकते हैं . यानी उस व्यक्ति के अलावा कोई दूसरा User उस Comment को नहीं पढ़ पाएगा . इसी वर्ष Dr. Bridget Dibb और उनकी टीम ने Social Media Users पर एक रिसर्च किया.

इस रिसर्च में सामने आया कि सोशल मीडिया पर अपनी तुलना दूसरों से करने पर...आपको कई तरह की शारीरिक परेशानियां भी हो सकती है. इनमें अनिद्रा, वज़न में बदलाव, और मांसपेशियों में तनाव जैसी समस्याएं शामिल हैं. इसके अलावा आप Depression और Anxiety का भी शिकार हो सकते हैं.Social Media पर होने वाली Bullying को लेकर UNICEF ने भारत समेत 30 देशों में एक स्टडी की थी.

इस स्टडी में सामने आया कि 13 से 24 वर्ष के तीन में से एक युवा कभी ना कभी Cyber Bulying का शिकार हुए हैं. जबकि 5 में से एक युवा ने इस वजह से कभी ना कभी अपना स्कूल से छुट्टी ली है .इसी सर्वे में 32 प्रतिशत लोगों ने माना कि Online Bullying रोकने के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए . जबकि 31 प्रतिशत लोगों ने इसके लिए खुद युवाओं को ही जिम्मेदार माना है.

और 29 प्रतिशत लोग मानते हैं कि इसके लिए Internet कंपनियां जिम्मेदार हैं .चिंता की बात ये है कि पूरी दुनिया में बड़ी संख्या में लोग FOMO का शिकार हो रहे हैं, FOMO का मतलब है Fear Of Missing Out यानी ऐसी स्थिति जब किसी व्यक्ति को ये डर सताने लगता है कि Mobile Phone पास ना रहने पर, वो बाहर की दुनिया में चल रही गतिविधियों के बारे में नहीं जान पाएगा.

और उसे ऐसा सोचने से ही घबराहट होने लगती है. Time Magazine की एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 68 प्रतिशत लोग सोते वक्त भी अपने डिजिटल उपकरण अपने साथ रखते हैं. जबकि 20 प्रतिशत लोग हर 10 मिनट में अपने मोबाइल फोन्स को चेक करते हैं .Pew Research के मुताबिक 44 प्रतिशत लोग अपना मोबाइल फोन बिलकुल अपने तकिये के पास रखकर ही सोते हैं.

Public Library of Science के मुताबिक लोग जितना ज़्यादा फेसबुक इस्तेमाल करते हैं..अपनी असल जिंदगी में वो उतने ही परेशान और निराश रहते हैं. इसी तरह अगर आपको अचानक ही ऐसे लगने लगता है कि जैसे आपके मोबाइल फोन की घंटी बज रही है या आपको रिंगटोन सुनाई देने लगती है ..

तो हो सकता है कि आप Phantom-phone syndrome.. या Ring-xiety के शिकार हो गए हों...ऑस्ट्रेलिया में NomoPhobia यानी मोबाइल फोन की लत का असर जानने के लिए 30 हज़ार लोगों पर एक स्टडी की गई. और इस स्टडी के दौरान 10 में 9 लोगों ने माना कि फोन की battery खत्म होने पर उन्हें बेचैनी होने लगती है.

इसलिए आज आपको ये भी जानना चाहिए कि आप सोशल मीडिया की लत...और सोशल मीडिया पर होने वाली Bullying से कैसे बच सकते हैं. पहले आप Online Mob Lynching से बचने के उपायों को जान लीजिए . सबसे ज़रूरी बात ये है कि आप अपने परिवार के सदस्यों पर नज़र रखें, अगर आपके परिवार के किसी सदस्य का Mood बार बार बदलता है..और वो चिड़चिड़ा हो गया है तो हो सकता है कि वो Online Bullying का शिकार हो . परिवार के उस सदस्य से बात कीजिए, Social Media के ज्यादा इस्तेमाल पर उसे डांटिए मत..

.बल्कि उसकी परेशानी समझने की कोशिश कीजिए . आप Cyber Bullying से बचने के लिए Social Media Guidlines की मदद भी ले सकते हैं . यानी जिस Platform का आप इस्तेमाल कर रहे हैं...सबसे पहले वहीं शिकायत दर्ज कराइए . इसके अलावा आप किसी भी शहर की Cyber Crime Cell को भी इसकी जानकारी दे सकते हैं.

पुलिस आपके खिलाफ हुए Online अपराध की जांच करेगी और आरोपी को पकड़ लेगी . और सबसे ज़रूरी बात ये है कि Social Media का इस्तेमाल दुनिया से जुड़े रहने के लिए कीजिए. लेकिन इसे ही अपनी दुनिया मत मान लीजिए . Mobile Phones, डिजिटल उपकरण और इंटरनेट हमें आज पूरी दुनिया से जोड़ते हैं..

हमारी जिंदगी को आसान बनाते हैं, लेकिन इन सभी चीज़ों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल एक तरह की बीमारी है, जिससे बचने के लिए हमें Car free Day की ही तरह मोबाइल free Day मनाने पर विचार करना चाहिए. सोशल मीडिया आपको एक Virtual यानी आभासी समाज से जोड़ता है . ये समाज देखने में बड़ा लोकतांत्रिक लगता है.

जहां सबको अपनी बात कहने का हक है . लेकिन असल में ये मानसिक शोषण का अड्डा भी बन गया है. इसलिए हम कह रहे हैं कि आपको सिर्फ ज़रूरत के हिसाब से ही Social Media का इस्तेमाल करना चाहिए, और खुद को मोबाइल फोन Breaks देने चाहिए .

आप डिजिटल Detox को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर खुद को और अपने परिवार को खुशी दे सकते हैं..आप चाहें तो असली दुनिया और खुद के बीच खड़ी इंटरनेट की नकली दीवारों को गिरा कर अपनी जिंदगी को Reboot करके Reset कर सकते हैं .