ZEE जानकारी: सोनिया-पवार को शाह की चुनौती कबूल?

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुप्रिया सुले ने आदित्य ठाकरे को गले लगाकर.और उद्धव ठाकरे का हाथ थामकर उन्हें ये भरोसा दिलाया कि इस मुश्किल घड़ी में हम साथ साथ हैं.उस दिन सुप्रिया सुले.संकटमोचक की भूमिका में थीं. 

ZEE जानकारी: सोनिया-पवार को शाह की चुनौती कबूल?

एक कहावत है कि सुबह का भूला अगर शाम को घर लौट आए..तो उसे भूला नहीं कहते लेकिन आज के दौर में उसे राजनेता ज़रूर कहते हैं. NCP का साथ छोड़कर..बीजेपी के साथ गए अजित पवार की आज घर वापसी हो गई और वो अपने परिवार में लौट आए. कम से कम कैमरों की नज़र में तो पवार परिवार..एक बार फिर से एक हो गया है. महाराष्ट्र की राजनीति में आज इस तस्वीर के कई मायने है. सुप्रिया सुले और अजित पवार ने एक दूसरे को कैमरे के सामने ऐसे गले लगाया जैसे वो एक ज़माने के बाद एक दूसरे से मिले हो. वैसे अजित पवार की घर वापसी की इससे बढ़िया तस्वीर नहीं हो सकती थी.

कहते हैं कि राजनीति में सत्ता और रिश्ते एक ही डोर से बंधे होते हैं और जब ये डोर किसी को सत्ता तक पहुंचा देती है तो अंत में सब All Is well हो जाता है. जिस दिन अजित पवार पार्टी छोड़कर बीजेपी के साथ गए थे उस दिन उनकी चचेरी बहन सुप्रिया सुले का रिश्तों से भरोसा उठ गया था . उस दिन उन्होंने अपने WhatsApp Status पर भी रिश्तों के दर्द को बयां किया था . उस दिन सुप्रिया सुले इतनी भावुक थीं..कि उनके मुंह से शब्द भी नहीं निकल रहे थे

 

लेकिन क्या घर वापसी के बाद 60 साल के अजित पवार का कद पार्टी में पहले जैसा रह पाएगा?. क्या 50 वर्ष की सुप्रिया सुले के साथ.अजित पवार का गले मिलना..सारे गिले शिकवे दूर कर देगा ? ये सवाल हम इसलिए पूछ रहे हैं क्योंकि आज की तस्वीरों में रिश्तों के बंधन के साथ साथ..राजनीति के कुछ महत्वपूर्ण सवाल भी छिपे हैं.

आज सपने सुप्रिया सुले और अजित पवार की गले मिलने वाली तस्वीरें तो देखी. लेकिन उस तस्वीर पर किसी ने गौर नहीं किया जिसमें अजित पवार सिर्फ एक विधायक की तरह लाइन में लगकर विधानसभा पहुंचे . और वहां सुप्रिया सुले NCP के सबसे बड़े नेता के तौर पर विधायकों का स्वागत कर रही थीं

लेकिन राजनीति में जैसा दिखाई देता है..कई बार वैसा होता नहीं है. क्योंकि अगर आज की तस्वीर ये बता रही है कि अजित पावर की सम्मान के साथ घर वापसी हो गई है..तो शनिवार की एक तस्वीर ये बताती है कि राजनीति में जितनी तेज़ी से पुराने रिश्ते टूटते हैं...उससे ज्यादा तेज़ी से नए रिश्ते बन जाते हैं. शनिवार को जब अजित पवार ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

उसी दिन शरद पवार ने उद्धव ठाकरे के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की . इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुप्रिया सुले ने आदित्य ठाकरे को गले लगाकर..और उद्धव ठाकरे का हाथ थामकर उन्हें ये भरोसा दिलाया कि इस मुश्किल घड़ी में हम साथ साथ हैं.उस दिन सुप्रिया सुले..संकटमोचक की भूमिका में थीं. और उन्होंने ये भूमिका बखूबी निभाई. लेकिन इस सुप्रिया सुले को इस भूमिका तक पहुंचाने का असली श्रेय़..शरद पवार को दिया जा रहा है.