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Zee Jaankari: देश की सबसे बड़ी राष्ट्रीय समस्या का नाम है- अतिक्रमण

आज हम सबसे पहले देश की एक बड़ी राष्ट्रीय समस्या का विश्लेषण करेंगे. जिसका नाम है अतिक्रमण.

Zee Jaankari: देश की सबसे बड़ी राष्ट्रीय समस्या का नाम है- अतिक्रमण

आज हम सबसे पहले देश की एक बड़ी राष्ट्रीय समस्या का विश्लेषण करेंगे. जिसका नाम है अतिक्रमण. कल हमने आपको बताया था कि सड़कों पर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों के लिए देश भर में नया कानून लागू कर दिया गया है. ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों को भारी चालान देना पड़ेगा. हम इस नई व्यवस्था का समर्थन करते हैं. और उम्मीद करते हैं कि इसे पूरे देश में सख्ती से लागू किया जाएगा. आज हम इस बात का DNA टेस्ट करेंगे कि कैसे आपने देश की आज़ाद सड़कों को अतिक्रमण का गुलाम बना दिया है . हमारे देश में सड़कों पर वाहनों के लिए चलने की जगह नहीं है..पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ नहीं है..क्योंकि वहां अतिक्रमण का कब्ज़ा है. सड़कों पर बड़े बड़े गड्ढे हैं.

पुल पुराने और जर्जर हो चुके हैं. लेकिन सिस्टम, प्रशासन और सरकार का चालान कोई नहीं काटता. देश के लोग मारे जाते हैं. अर्थव्यस्था को नुकसान होता है. वक्त की बर्बादी होती है. कुल मिलाकर सड़कों पर व्यवस्था नाम की कोई चीज़ नहीं है. आज हम इन सब समस्याओं के लिए जिम्मेदार लोगों को आईना दिखाएंगे . लेकिन सबसे पहले बात अतिक्रमण की.

शहर कोई भी हो, अतिक्रमण वाली समस्या से हर कोई परेशान है. आपके आसपास ऐसी कोई ना कोई सड़क ज़रूर होगी जिस पर अतिक्रमण हुआ होगा. कोई ना कोई ऐसा फुटपाथ ज़रूर होगा. जिस पर किसी ने अवैध कब्ज़ा कर लिया होगा. और आप उसे देखकर किसी तरह अपना गुस्सा पी जाते होंगे. सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली में अतिक्रमण और Parking की समस्या को लेकर नाराज़गी जताई है.

दिल्ली में अतिक्रमण, प्रदूषण और पार्किंग को लेकर दायर एक पुरानी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी किया है. कोर्ट ने दिल्ली में Parking की समस्या और इसे लेकर होने वाले लड़ाई झगड़ों के संबंध में कहा है कि...The Golden Rule is “Love thy neighbour” यानी सबसे अच्छा नियम है कि आप अपने पड़ोसी के साथ प्यार से रहें..

.लेकिन Parking को लेकर होने वाले झगड़ों ने.. इस सामाजिक ताने बाने को नष्ट कर दिया है. इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण और Parking की इस सांसारिक समस्या के संबंध में एक विस्तृत आदेश पास किया है. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी करने से पहले कहा कि सरकारें और Authorities लोगों को सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मुहैया कराने में पूरी तरह नाकाम रही हैं.

कोर्ट ने ये भी कहा कि देश में सिर्फ 2 प्रतिशत लोगों के पास अपने वाहन हैं. लेकिन ये 2 प्रतिशत लोग.. परिवहन से जुड़े सभी संसाधनों और Infrastructure पर कब्ज़ा कर लेना चाहते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की लाजपत नगर मार्केट का जिक्र करते हुए कहा है कि ये इलाका पाकिस्तान से आए शरणार्थियों ने बसाया था. इन्हें रहने के लिए छोटी छोटी जगहें दी गई थी.

.लेकिन वक्त के साथ साथ यहां के Single Story घर Double और triple storeys में बदल गए हैं. लाजपत नगर मार्केट दिल्ली के सबसे मशहूर और भीड़-भाड़ वाले बाज़ारों में से एक हैं और यहां Parking तलाश करना..लगभग नामुमकिन है. कोर्ट ने माना है कि पिछले एक-दो वर्षों में इस इलाके में Metro के आ जाने से और ट्रैफिक की दिशा बदलने से..

.हालात थोड़े सुधरे हैं . लेकिन समस्या इतनी गंभीर है कि बाहर से आने वाले लोग अक्सर.. घरों के बाहर गाड़ियां Park कर देते हैं . जिससे यहां रहने वाले लोगों को दिक्कत होती है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने Parking के संबंध में दिल्ली सरकार द्वारा ड्राफ्ट किए गए Delhi Maintenance and Management of Parking Places, Rules-2019 की तारीफ की है.

कोर्ट ने कहा है कि इसके दो प्रावधान बहुत अहम है. पहला ये है कि इसमें फुटपाथ पर Parking करने की सख्त मनाही है. किसी भी कीमत पर इसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता और इसमें किसी प्रकार की कोई छूट नहीं दी जा सकती . सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए होते हैं. लेकिन कई घरों के मालिक इनका अतिक्रमण कर लेते हैं, वो इस पर गार्डन या फिर security guards के लिए Cabin बना देते हैं.

कोर्ट ने कहा है कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाए . फुटपाथ से ऐसे अतिक्रमण फौरन हटा दिए जाएं . और अगर घर का मालिक दोबारा अतिक्रमण करता है तो उसके घर को मिलने वाली पानी, बिजली और सीवेज की सेवाओं को रोक दिया जाए.

दिल्ली सरकार के नए नियम का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू ये है कि रिहाइशी इलाकों में एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस वाहनों के लिए एक अलग Lane बनाई जाएगी . इस Lane का इस्तेमाल घरों के मालिक भी कर पाएंगे. इसके दोनों तरफ पीले रंग के Fluorescent paint से रेखाएं खींची जाएंगी और इसका एक इंच हिस्सा भी..

.पार्किंग के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने New Delhi Municipal Corporation के अलावा North, South और East Delhi Municipal Corporations को भी निर्देश जारी किए हैं. इन निर्देशों का पालन Delhi Cantonment Board को भी करना होगा. इनके मुताबिक दिल्ली के सभी नगर निगम...रास्तों को अतिक्रमण से मुक्त कराएंगे . साथ ही ये भी सुनिश्चित करना होगा कि फुटपाथ का इस्तेमाल सिर्फ राहगीरों द्वारा किया जाए . अतिक्रमण करने वालों को 15 दिन का नोटिस दिया जाएगा और ऐसा ना करने पर प्रशासन अतिक्रमण को हटाएगा .

अतिक्रमण हटाने की लागत को फुटपाथ पर कब्ज़ा करने वाले व्यक्ति से ही वसूला जाएगा . इसके अलावा Authorities चाहें तो इन लोगों को नगर निगम द्वारा दी जाने वाली सेवाओं पर भी रोक लगा सकती हैं. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि दिल्ली सरकार नई पार्किंग पॉलिसी को 30 सितंबर से पहले Notify करे. दिल्ली सरकार को ये निर्देश दिया गया है कि वो किसी भी निर्माण की इजाजत देने से पहले..

.इस बात का मूल्यांकन कर लें कि वहां अगले 25 वर्षों तक Parking की ज़रूरतें क्या हैं. हमें लगता है कि सुप्रीम कोर्ट का ये आदेश..सडकों की स्वाधीनता के संदर्भ में एक संविधान की तरह है . और भविष्य में शहरों का निर्माण करते वक्त इसकी शपथ दिलाई जानी चाहिए. हम सुप्रीम कोर्ट के इन आदेशों की तारीफ करते हैं. लेकिन सवाल ये है कि क्या इन निर्देशों का उसी सख्ती से पालन किया जाएगा..जिस सख्ती से नए ट्रैफिक नियमों का पालन आम लोगों से कराया जा रहा है . कल गुरुग्राम पुलिस ने एक Scooty सवार का चालान काटा . इस व्यक्ति ने हेलमैट नहीं पहन रखा था .

और उसके कागज़ भी पूरे नहीं थे. आरोपों के मुताबिक इस वाहन चालक के पास लाइसेंस भी नहीं था . जिसके बाद ...गुरुग्राम पुलिस ने इस मामले में 23 हज़ार रुपये का चालान काट दिया. जिस Scooty का चालान हुआ है वो 10 वर्ष पुरानी है. यानी जुर्माने की राशि Scooty की Resale Value से भी ज्यादा है . अब सवाल ये है कि क्या उन लोगों के खिलाफ भी ऐसा सख्त कानून बनाया जाएगा .

जो सड़कों पर होने वाले अतिक्रमण के लिए जिम्मेदार हैं . जैसे Parking के ठेकेदार. अवैध निर्माण और अतिक्रमण की इजाजत देने वाले अधिकारी, रिश्वत लेकर अतिक्रमण को प्रोत्साहन देने वाले पुलिस कर्मी, स्थानीय प्रशासन और सरकार. ? क्योंकि जब तक अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती..

.हमारे देश की सड़कें ऐसे ही दम तोड़ती रहेंगी. जब तक हम अतिक्रमण वाली इस समस्या का इलाज खुद नहीं करेंगे. तब तक बात नहीं बनेगी. और आज हम DNA में इस समस्या की Live शिकायत करेंगे. लेकिन उससे पहले इस अतिक्रमण के लिए ज़िम्मेदार लोगों के बारे में जानना जरूरी है.